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Blog: उजाले उनकी यादों के

Blogger: kuldeep thakur
झोपड़े के द्वार पर बाप और बेटा दोनों एक बुझे हुए अलाव के सामने चुपचाप बैठे हुए हैं और अन्दर बेटे की जवान बीबी बुधिया प्रसव-वेदना में पछाड़ खा रही थी। रह-रहकरउसके मुँह से ऐसी दिल हिला देने वाली आवाज़ निकलती थी, कि दोनों कलेजा थाम लेते थे। जाड़ों की रात थी, प्रकृति सन्नाटे ... Read more
clicks 259 View   Vote 0 Like   8:00am 22 Sep 2013 #प्रेम चंद
Blogger: kuldeep thakur
जो तुम आ जाते एक बार ।कितनी करूणा कितने संदेशपथ में बिछ जाते बन परागगाता प्राणों का तार तारअनुराग भरा उन्माद रागआँसू लेते वे पथ पखारजो तुम आ जाते एक बार ।हंस उठते पल में आद्र नयनधुल जाता होठों से विषादछा जाता जीवन में बसंतलुट जाता चिर संचित विरागआँखें देतीं सर्वस्व व... Read more
clicks 262 View   Vote 0 Like   9:03am 21 Sep 2013 #महादेवी वर्मा
Blogger: kuldeep thakur
जय जन भारत जन- मन अभिमतजन गणतंत्र विधाताजय गणतंत्र विधातागौरव भाल हिमालय उज्जवलहृदय हार गंगा जलकटि विंध्याचल सिंधु चरण तलमहिमा शाश्वत गाताजय जन भारत ...हरे खेत लहरें नद-निर्झरजीवन शोभा उर्वरविश्व कर्मरत कोटि बाहुकरअगणित-पद-ध्रुव पथ परजय जन भारत ...प्रथम सभ्यता ज्ञात... Read more
clicks 258 View   Vote 0 Like   1:16am 19 Sep 2013 #सुमित्रानंदन पंत
Blogger: kuldeep thakur
मन समर्पित, तन समर्पितऔर यह जीवन समर्पितचाहता हूँ देश की धरती, तुझे कुछ और भी दूँमॉं तुम्हारा ऋण बहुत है, मैं अकिंचनकिंतु इतना कर रहा, फिर भी निवेदनथाल में लाऊँ सजाकर भाल में जब भीकर दया स्वीकार लेना यह समर्पणगान अर्पित, प्राण अर्पितरक्त का कण-कण समर्पितचाहता हूँ देश क... Read more
clicks 286 View   Vote 0 Like   11:30pm 17 Sep 2013 #राम अवतार त्यागी
Blogger: kuldeep thakur
सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है,देखना है जोर कितना बाजुए कातिल में है ।करता नहीं क्यों दुसरा कुछ बातचीत,देखता हूँ मैं जिसे वो चुप तेरी महफिल मैं है ।रहबर राहे मौहब्बत रह न जाना राह मेंलज्जत-ऐ-सेहरा नवर्दी दूरिये-मंजिल में है ।यों खड़ा मौकतल में कातिल कह रहा है बार... Read more
clicks 253 View   Vote 0 Like   11:30pm 17 Sep 2013 #रामप्रसाद बिसमिल
Blogger: kuldeep thakur
बार बार आती है मुझको मधुर याद बचपन तेरी |गया ले गया तू जीवन की सबसे मस्त खुशी मेरी ||चिंता रहित खेलना खाना वह फिरना निर्भय स्वछंद?कैसे भूला जा सकता है बचपन का अतुलित आनंद?उंच नीच का ज्ञान नही था , छुआ छूत किसने जानी?बनी हुई थी वहां झोपडी और चीथड़ों में रानी ||किए दूध के कुल्ले ... Read more
clicks 272 View   Vote 0 Like   11:30pm 16 Sep 2013 #सुभदरा कुम्हारी चौहान
Blogger: kuldeep thakur
था कली के रूप शैशव में, अहो सूखे सुमन हास्य करता था, खिलाती अंक में तुझको पवन खिल गया जब पूर्ण तू मंजुल, सुकोमल पुष्पवर लुब्ध मधु के हेतु मँडराने लगे आने भ्रमर स्निग्ध किरनें चाँद की, तुझको हंसाती थी सदा,रात तुझ पर वारती थी मोतियों की संपदा लोरियां गा कर मधुप निद्रा-विवश ... Read more
clicks 314 View   Vote 0 Like   11:00pm 16 Sep 2013 #महादेवी वर्मा
Blogger: kuldeep thakur
फूल-सी हो फूलवाली।किस सुमन की सांस तुमनेआज अनजाने चुरा ली!जब प्रभा की रेख दिनकर नेगगन के बीच खींची।तब तुम्हीं ने भर मधुरमुस्कान कलियां सरस सींची,किंतु दो दिन के सुमन से,कौन-सी यह प्रीति पाली?प्रिय तुम्हारे रूप मेंसुख के छिपे संकेत क्यों हैं?और चितवन में उलझते,प्रश्न स... Read more
clicks 264 View   Vote 0 Like   11:00pm 15 Sep 2013 #रामकुमार वर्मा
Blogger: kuldeep thakur
वह आता--दो टूक कलेजे के करता पछताता पथ पर आता।पेट पीठ दोनों मिलकर हैं एक,चल रहा लकुटिया टेक,मुट्ठी भर दाने को-- भूख मिटाने कोमुँह फटी पुरानी झोली का फैलाता--दो टूक कलेजे के करता पछताता पथ पर आता।साथ दो बच्चे भी हैं सदा हाथ फैलाये,बायें से वे मलते हुए पेट को चलते,और दाहिना द... Read more
Blogger: kuldeep thakur
जो बीत गई सो बात गई जीवन में एक सितारा थामाना वह बेहद प्यारा थावह डूब गया तो डूब गयाअम्बर के आनन को देखोकितने इसके तारे टूटेकितने इसके प्यारे छूटेजो छूट गए फिर कहाँ मिलेपर बोलो टूटे तारों परकब अम्बर शोक मनाता हैजो बीत गई सो बात गई जीवन में वह था एक कुसुमथे उसपर नित्य नि... Read more
clicks 306 View   Vote 0 Like   11:30pm 14 Sep 2013 #हरिवंशराय बच्चन
Blogger: kuldeep thakur
जीवन वाटिका का वसंत, विचारों का अंधड़, भूलों का पर्वत, और ठोकरों का समूह है यौवन। इसी अवस्था में मनुष्य त्यागी, सदाचारी, देश भक्त एवं समाज-भक्त भी बनतेहैं, तथा अपने ख़ून के जोश में वह काम कर दिखाते हैं, जिससे कि उनका नाम संसार के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में लिख दिया जाता ... Read more
clicks 227 View   Vote 0 Like   10:30pm 14 Sep 2013 #कहानी
Blogger: kuldeep thakur
निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल बिन निज भाषा-ज्ञान के, मिटत न हिय को सूल । अंग्रेजी पढ़ि के जदपि, सब गुन होत प्रवीन पै निज भाषा-ज्ञान बिन, रहत हीन के हीन । उन्नति पूरी है तबहिं जब घर उन्नति होय निज शरीर उन्नति किये, रहत मूढ़ सब कोय । निज भाषा उन्नति बिना, कबहुं न ह्यैहैं ... Read more
clicks 248 View   Vote 0 Like   7:00pm 13 Sep 2013 #भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
Blogger: kuldeep thakur
जीवन की अंधियारीरात हो उजारी!धरती पर धरो चरणतिमिर-तम हारी परम व्योमचारी!चरण धरो, दीपंकर,जाए कट तिमिर-पाश!दिशि-दिशि में चरण धूलिछाए बन कर-प्रकाश!आओ, नक्षत्र-पुरुष,गगन-वन-विहारी परम व्योमचारी!आओ तुम, दीपों को निरावरण करे निशा!चरणों में स्वर्ण-हास बिखरा दे दिशा-दिशा!पा कर ... Read more
clicks 240 View   Vote 0 Like   6:30pm 13 Sep 2013 #वंदना
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