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ललित वाणी

आज फिर से, एक नया सा, स्वप्न सजाना है अभी,आज फिर से, इक नई दुनिया बनानी है अभी |कह दिया है, जिंदगी से, राह न मेरी देखना ,खुद ही जाके, औरों पे, खुद को लुटाना है अभी |साख पे, बैठे परिंदे, हिल रहे हैं खौफ से,घोंसला उनका सजा कर, डर भगाना है अभी |लग गई है, आग अब, दुनिया में देखो हर तरफ,बाँट क...
ललित वाणी...
Tag :ग़ज़ल
  September 27, 2013, 9:28 pm
तुम अक्सर पूछा करते हो ,कविता कैसे बन जाती हैलो ,मै तुमको बतलाता हूँ, कविता ऐसे बन जाती हैरातों को नींद न जब आती ,जगता रहता,भरता करवटजब सपन अधूरे रह जाते , होती है मन में अकुलाहटकुछ अंतर्मन की पीडायें ,कुछ दुनियादारी के झंझटतब उभर उभर कर भाव सभी ,शब्दों में ढलने लगते झटहोती...
ललित वाणी...
Tag :
  September 20, 2013, 5:20 am
आज से शुरू करेंगे जीनाउसी पुराने ढग से हमन किसी की फ़िक्रन किसी से बिछड़ने का डरवही हमारी साथी किताबेवही पुरानी दोस्ती हमारीजिसने दिया हमें जग मेंइतना यश और मानउन्ही दोस्तों के संग बितायेगेपास कर लेंगे फिरदुनिया के सारे इम्तिहानक्योकि दुनिया चाहे छोड़ देपर ये सच्...
ललित वाणी...
Tag :कविता
  September 19, 2013, 9:34 am
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