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Blog: हथौड़ा

Blogger: Anshu Mali Rastogi
जिम्मेदारशिक्षा के प्रति कितने सजग हैं इसका पता सीबीएसई के दो पर्चों- 10वीं के गणित और 12वीं के अर्थशास्त्र- के लीक होने से ही चलता है। उनकी नाक के नीचे बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ का खेल चलता रहा, उन्हें खबर तक नहीं हुई। खबर लगी भी तो तब जब बच्चे परीक्षा देकर अपने रिजल्... Read more
clicks 136 View   Vote 0 Like   4:30am 9 Apr 2018 #
Blogger: Anshu Mali Rastogi
एकसभ्य समाज में हिंसा की कोई जगह नहीं होती। न ही हिंसा के दम पर किसी भी मुद्दे को सुलझाया जा सकता है। असहमति या नाराजगी का यह मतलब कतई नहीं हो जाता कि आप उक्त मुद्दे के खिलाफ आगजनी या अराजकता पर उतर आएं। मुद्दे हमेशा ही बातचीत से सुलझे हैं, लाठी-डंडों से नहीं।अभी हाल सुप्... Read more
clicks 93 View   Vote 0 Like   6:36am 7 Apr 2018 #
Blogger: Anshu Mali Rastogi
सोशलमीडिया तरह-तरह की खबरों-सूचनाओं का भंडार है। यहां यह यकीन कर पाना जरा मुश्किल है कि कौन-सी खबर सही और कौन-सी फर्जी (फेक) है। फिर भी, सही और फर्जी (फेक) खबरों के कारोबार का हम किसी न किसी स्तर पर हिस्सा बने रहते हैं।एक-दूसरे को खबरों के आदान-प्रदान में हम इतना भी धैर्य नही... Read more
clicks 162 View   Vote 0 Like   3:59am 6 Apr 2018 #
Blogger: Anshu Mali Rastogi
फेसबुकपर रहने के अपने फायदे-नुकसान हैं। पर, फेसबुक पर न रहने के भी अपने फायदे-नुकसान हैं। तकरीबन दो साल फेसबुक से दूरी बनाकर यह मैंने करीब से महसूस किया है। बताता हूं...।दो साल में मैंने फेसबुक पर अपने दो खाते बनाए और बाद में उन्हें थोड़े-थोड़े अंतराल में हमेशा के लिए हटा द... Read more
clicks 181 View   Vote 0 Like   11:46am 31 Dec 2017 #
Blogger: Anshu Mali Rastogi
क्यासमाज खुद से हार चुका है? क्या समाज के सुधरने की उम्मीद खत्म हो चुकी है? अक्सर ऐसे प्रश्न हमारे सामने मुंह खोले खड़े रहते हैं। इन प्रश्नों के उत्तर या तो हमारे पास होते नहीं या फिर हम खुद को इनसे बचाने की कोशिश में लगे रहते हैं। लेकिन कब तक? कभी न कभी तो हमें इनसे रू-ब-रू ह... Read more
clicks 194 View   Vote 0 Like   5:57am 23 Dec 2017 #
Blogger: Anshu Mali Rastogi
इसेसमय के साथ समझौता कह लीजिए या कुछ और मगर अब हमें गलत दिशा में चलना भाने-सा लगा है। हम अपनी चाल के शहंशाह बने रहना चाहते हैं। विडंबना यह है कि हमें हमारी गलत चाल के लिए अगर कोई टोकता भी है तो उसे हम तुरंत अपना विरोधी घोषित कर डालते हैं। एक पल को ठण्डे दिमाग से सोचने की जह... Read more
clicks 186 View   Vote 0 Like   4:40am 22 Dec 2017 #
Blogger: Anshu Mali Rastogi
हररोज हम कितनी तरह के संकल्प लेते हैं, इस बारे में शायद ठीक से हमें भी नहीं पता होगा! किसी मुद्दे पर जब सब संकल्प ले रहे होते हैं तो फॉर्मिल्टी निभाने के लिए हम भी लाइन में लग जाते हैं। अखबारों में लगभग हर रोज छपने वाली तस्वीरों में भीड़ नजर आती है जो संकल्प की मुद्रा में हा... Read more
clicks 140 View   Vote 0 Like   4:35am 22 Dec 2017 #
Blogger: Anshu Mali Rastogi
सोशल मीडियाके खेल निराले हैं। यहां कब कौन-सा मुद्दा गेंद की तरह हवा में उछलकर वायरल हो जाए कोई नहीं जानता। वायरल होते ही उस मुद्दे को सोशल मीडिया पर तब तक भुनाया जाता है जब तक उसकी आत्मा सड़-गल नहीं जाती। कमाल ये है कि सोशल मीडिया पर कोई मसला लंबा नहीं चलता। जिस तेज उफान क... Read more
clicks 191 View   Vote 0 Like   4:14am 9 Nov 2017 #
Blogger: Anshu Mali Rastogi
गौरी लंकेश...!‘असहमति’ के एक और स्वर को ‘निर्ममता’ से कुचल दिया गया। सत्ता के खिलाफ जाने और लिखने का ‘हश्र’ गौरी लंकेश को अपनी जान देकर चुकाना पड़ा। यों तो हम एक बहुत बड़े लोकतांत्रिक मुल्क हैं- ऐसा कहते हम कभी थकते नहीं- मगर पत्रकार या लेखक की आवाजें जब सत्ताओं के कानों ... Read more
clicks 114 View   Vote 0 Like   4:11am 20 Sep 2017 #
Blogger: Anshu Mali Rastogi
इसेविडंबना नहीं दोगलापन ही कहा जाएगा कि हम हिंदी की चिंता के लिए 'हिंदी दिवस'को चुनते हैं। पूरे साल इस बात से हमें कोई मतलब नहीं रहता कि हिंदी में क्या खास हो रहा है? हिंदी का विस्तार कितना और कहां तक हुआ? किस दिशा में हिंदी जा रही है? कहां तक हिंदी को लेकर जाना है? आदि।स्पष... Read more
clicks 123 View   Vote 0 Like   4:36am 14 Sep 2017 #
Blogger: Anshu Mali Rastogi
समाजको हम किस ओर लिए जा रहे हैं यह हमें भी नहीं मालूम। बस चले जा रहे हैं। एक होड़ या कहूं एक जिद-सी है हमारे भीतर एक-दूसरे को ‘मात’ दे आगे निकल जाने की। आगे निकल जाने की यह घुड़-दौड़ हमसे कितना कुछ छीनती जा रही है, शायद हमें इसका अहसास भी नहीं। अगर अहसास हो तो भी हम उसे ‘महसू... Read more
clicks 128 View   Vote 0 Like   4:12am 12 Sep 2017 #
Blogger: Anshu Mali Rastogi
चोटियांकाटी जा रही हैं। कौन काट रहा है? क्यों काट रहा है? किस उद्देश्य के लिए काट रहा है? इन प्रश्नों के जवाब किसी के पास नहीं। फिर भी, खबरें निरंतर चोटियां काटे जाने की आ रही हैं।समाज में जितने मुंह, उतनी बातें हैं। चोटी काटने को कोई कोरी अफवाह करार दे रहा है। तो कोई टोने-... Read more
clicks 214 View   Vote 0 Like   4:45am 10 Aug 2017 #
Blogger: Anshu Mali Rastogi
उस रोजएक और आतंकी हमला हुआफिर कुछ जानेंअपनी जानों से हाथ धो बैठींखबर पाते ही सोशल मीडियाके भद्र (वीर) लोग अपने-अपने फेसबुक-टि्वटर के पेजों-पोस्टों परतरह-तरह की लानतें भेजने में जुट गएकिसी ने सरकार को गलियायाकिसी का खून आतंकवादियों की नापाक हरकत पर खौलानेता लोग एक-एक क... Read more
clicks 127 View   Vote 0 Like   1:59am 24 Jul 2017 #
Blogger: Anshu Mali Rastogi
आभासी दुनियामें व्यंग्य पर ‘दंगल’ जारी है। फेसबुक अखाड़ा है। व्यंग्य का हर तगड़ा और दियासलाई पहलवान अखाड़े में उतर आया है एक-दूसरे से ‘मुचैटा’ लेने को। दोनों तरफ के पहलवान अपने-अपने दांव चलते रहते हैं। मंशा केवल एक ही है, सामने वाले को चारों-खाने चित्त करना। तरह-तरह क... Read more
clicks 188 View   Vote 0 Like   2:19am 22 May 2017 #
Blogger: Anshu Mali Rastogi
इसपर यकीन करने के लिए कि ‘भारत कम खुशहाल देश है’ दिमाग पर अतिरिक्त लोड डालने की जरूरत नहीं। हालिया सर्वे ने इस बात की साफ पुष्टि कर दी है। जिक्र तो हालांकि हर किताब और ग्रंथ में यही मिलता है कि भारत या भारत के लोगों से खुशहाल इस दुनिया में कोई मुल्क नहीं है। किंतु 21वीं सद... Read more
clicks 217 View   Vote 0 Like   4:35am 30 Mar 2017 #
Blogger: Anshu Mali Rastogi
विरोधअब ‘जमीन’ पर कम, ‘सोशल मीडिया’ पर अधिक नजर आता है। एक तरह से- विरोध के नाम पर- यहां आपस में ‘ज़बानी दंगल’ छिड़ा ही रहता है। विरोध के बीच विचारधाराएं कोई जगह नहीं रखतीं। या यों कहिए कि सोशल मीडिया किसी प्रकार की विचारधारा को नहीं मानता। यहां विरोध के तरीके इतने अजीब... Read more
clicks 218 View   Vote 0 Like   4:22am 24 Jan 2017 #
Blogger: Anshu Mali Rastogi
जबलोगों के पास करने को कुछ खास नहीं होता, तब वे विरोध-प्रदर्शन करते हैं। खूब, खूब, खूब विरोध करते हैं। सड़क से लेकर संसद तक विरोध की नदियां बहा देते हैं। विरोध की उस नदी में न जाने कितने चले आते हैं, अपने-अपने हाथ-पैर-मुंह धोने। हालांकि कईयों को यह तक पता नहीं होता कि विरोध ... Read more
clicks 233 View   Vote 0 Like   5:16am 15 Dec 2016 #
Blogger: Anshu Mali Rastogi
विश्वके बड़े क्रांतिकारी कम्यूनिस्ट नेता फिदेल कास्त्रो नहीं रहे। 90 साल की लंबी पार खेलकर अंततः उन्होंने दुनिया को ‘अलविदा’ बोल दिया। कास्त्रो के न रहने पर क्यूबा और उसके नागरिकों के गम का अंदाजा लगा पाना मुश्किल है। क्यूबा के वो पूर्व राष्ट्रपति ही नहीं बल्कि एक प... Read more
clicks 224 View   Vote 0 Like   4:11am 27 Nov 2016 #
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फिलहाल, पानी के मसले ने हमें पानी-पानी कर रखा है। आकाश से लेकर पताल तक पानी के लिए 'हाहाकार'मचा है। आलम यह है कि एक दिन पानी मिलने के बाद अगले दिन मिलेगा या नहीं; कुछ नहीं पता। लंबी-लंबी लाइनों में लोग पानी के लिए यों इंतजार करते दिखते हैं मानो कोई राशन की दुकान हो। अभी तक पा... Read more
clicks 195 View   Vote 0 Like   2:09am 12 May 2016 #
Blogger: Anshu Mali Rastogi
कभी-कभीमुझे अपना ही शहर 'अनजाना'-सा लगता है। मेरा शहर अब पहले जैसा 'छोटा'नहीं रहा। बढ़ गया है। निरंतर बढ़ता ही चला जा रहा है। एक ही शहर के लोग पुराने शहर को छोड़कर नए शहर में बसने को उतावले हुए बैठे हैं। अपने ही लोगों से इतनी दूर जाकर बस जाना चाहते हैं, जहां पहुंच पाना हर किस... Read more
clicks 215 View   Vote 0 Like   2:24am 23 Apr 2016 #
Blogger: Anshu Mali Rastogi
प्यारे कन्हैया,फिलहाल, अंतरिम जमानत पर जेल की सलाखों से बाहर आने की तुम्हें बधाई। हालांकि बधाई देने के लायक तो नहीं तुम फिर भी इसलिए दे रहा हूं, शायद तुम्हारे दिमाग पर पड़ा 'अतिवाद'का जाला हट जाए।इसमें कोई शक नहीं कि तुम अब भगत सिंह से कहीं बड़े क्रांतिकारी बनकर उभरे हो... Read more
clicks 256 View   Vote 0 Like   12:57am 4 Mar 2016 #
Blogger: Anshu Mali Rastogi
क्या ऐसानहीं लगता आपको कि बदलते समय के साथ हम और भी असंवेदनशील और आराजक हो गए हैं? हमारे भीतर से- गैरों की जाने दीजिए- अपनी ही आलोचना को सुनने का 'साहस'नहीं बचा अब। हर ऐरी-गैरी बातों-मुद्दों पर आपस में यों भिड़ जाते हैं मानो लड़ना ही हमारी नियति हो!दूसरे को अपने अनुरूप बनान... Read more
clicks 238 View   Vote 0 Like   4:15am 3 Mar 2016 #
Blogger: Anshu Mali Rastogi
यों भीहमारे बीच से हास्य और हंसी-मजाक निरंतर कम होता जा रहा है, ऐसे में एक कलाकार को एक बाबा की कथित मिमिक्री करने के आरोप में धर लेना, कोई हैरत का विषय नहीं। मिमिक्री या मजाक को ही अगर व्यक्तिगत मान-हानि मान लिया जाएगा फिर तो लोगों का आपस में हंसना-मुस्कुराना तक मुसीबत क... Read more
clicks 255 View   Vote 0 Like   1:26am 24 Jan 2016 #
Blogger: Anshu Mali Rastogi
काफी देरसे मैं उन्हें देख रहा था। वे अत्यंत चिंतित मुद्रा में थे। कभी दाएं टहल लगाते, तो कभी बाएं। कभी दोनों हाथ सिर पर रखकर मन ही मन बुदबुदाते- 'हाय! अब क्या होगा। ये बहुत गलत हुआ।'उनके इस अजीबो-गरीब करतब-व्यवहार को देखकर मुझसे रहा न गया तो आखिरकार मैंने पूछ ही लिया- 'भाई स... Read more
clicks 311 View   Vote 0 Like   2:52pm 10 Jan 2016 #
Blogger: Anshu Mali Rastogi
आजादी के मायने अब थोड़ा बदल गए हैं। आजादी देश पर मर-मिटने की नहीं, आजादी किस्म-किस्म के प्रॉडेक्ट पर 'डिक्साउंट'पाने की है। आजादी बाजार के साथ, बाजार के लिए खड़े होने की है। कंपनियां आजादी वाले दिन दिल में देश के प्रति कुछ कर गुजरने का उत्साह नहीं जगातीं बल्कि उनके प्रॉड... Read more
clicks 200 View   Vote 0 Like   1:34am 15 Aug 2015 #
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