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ENDEAVOUR, एक प्रयास

घर के आस-पड़ोस में कई प्राणी देखने को मिल जाते हैं। कुछ जो सुबह सुबह अपनी ज़िन्दगी को दो-चार भली बुरी बातें बोलते हुए अपने काम को निकल जाते हैं। परिवार के पेट पालने की जद्दोजहद में दिनभर आने वाले कल की चिंता में अपने खून के साथ अपना आज जलाते हुए शाम को थक-हार कर घर वापस आ...
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Aashu
Tag :Hindi
  January 20, 2016, 4:18 pm
वो पड़ा था,औंधे मुंह,लहरों के बीच,रेत पर,मासूम सा, निर्दोष।सांसें बंद थीं,नब्ज़ रुकी हुई।जाना पहचाना सा लग रहा था,इंसानियत सा,दम तोड़ चुका।...
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Aashu
Tag :Poem
  September 3, 2015, 9:37 pm
कुछ महीने पहले की बात है। ट्विटर के बाज़ार पर दो भारतीय फिल्मों का किस्सा गर्म था। मराठी फिल्म कोर्ट और हिंदी फिल्म मसान। कोर्ट पहले ही रिलीज़ हो गयी थी मगर देखने का मौका नहीं मिला हालांकि चाहत देखने की काफी थी। मसान ने कान फिल्म महोत्सव में अच्छा धमाका किया था। इंतज़...
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Aashu
Tag :Movie
  July 28, 2015, 1:33 am
जीवन एक यात्रा है। निरंतर चलती हुई। अंतिम सांस के साथ आने वाली मौत पर ही रुकने वाली। छोटे से इस जीवन में कई मुकाम आते हैं। रेलगाडी के सफर में आने वाले स्टेशनों की तरह। गाडी रुकती है, कुछ लोग चढते हैं कुछ उतर जाते हैं। गाडी फिर आगे बढ जाती है। नए लोगों का साथ मिलता है पुरान...
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Aashu
Tag :Personal
  July 4, 2015, 11:00 pm
कुछ दिनों पहले परीक्षाओं को लेकर पढाई में काफी व्यस्त था। दिन भर हॉस्टल के कमरे में किताबों के बीच पड़ा रहता था। बाहरी दुनिया से भौतिक तालमेल टूट चुका था। इंटरनेट के माध्यम से ही मन बहलाने का काम चलता था। बाहर जाना, घूमना-फिरना इन सब के लिए न तो समय था और न ही समय निकाल ...
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Aashu
Tag :Raj Kapoor
  June 7, 2015, 4:23 pm
कुछ दिनों से इधर घर से बाहर हूँ। हालांकि परदेस में ये अपने परिवार का घर ही है मगर फिर भी बात अपने आशियें की कुछ और होती है। दिनचर्या में बदलाव आ जाता है और रूटीन की गतिविधियाँ थोड़ी अनियमित हो जाती हैं। कल काफी दिन के बाद NDTV इंडिया पर रविश की रिपोर्ट देखने का मौका मिला। रव...
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Aashu
Tag :Politics
  June 2, 2015, 6:15 pm
इधर कई दिनों के बाद हिंदी में कुछ पढ़ने को मिला। टेक्नोलॉजी के इस युग में सब कुछ सॉफ्ट होता चला जा रहा है। उपन्यासों को कांख के अंदर दबा कर चलने वाले भी अब सोफ्टकॉपी रखते हैं टेबलेट में। अंग्रेजी की कई किताब पहले से सॉफ्ट फॉर्म में मिलती थी। हिंदी पढ़ने वालों के लिए ज्य...
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Aashu
Tag :Literary
  May 31, 2015, 6:16 pm
परीक्षा के दिनों में ब्लॉग पर सक्रिय हो जाने की बीमारी मेरी पुरानी है। MBBS के दिनों में अक्सर परीक्षा के समय ज्यादा पोस्ट लिखा करता था। ऐसे समय पर जब दिमाग ज्यादा चलता है तो शायद रचनात्मकता भी अपने आप ही बढ़ जाती है। या हो सकता है कि दिन भर किताबों में व्यस्त रहने और कमर...
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Aashu
Tag :Hindi
  April 26, 2015, 7:28 am
कुछ दिनों से BBC पर प्रसारित एक डाक्यूमेंट्री ने अपने देश में खासा ही बवाल खड़ा कर रखा है। दिल्ली के निर्मम बलात्कार काण्ड की सच्चाई बयां करती इस डाक्यूमेंट्री को कोर्ट ने भारत में प्रसारित होने से रोक लगा दी है। इंसानी फितरत होती है, जो नहीं करने बोला जाये वैसा ही करन...
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Aashu
Tag :Literary
  March 15, 2015, 3:52 am
कुछ साल पहले डायरी लिखने की शुरुआत की थी। पहले हर रात लिखा करता था। फिर कुछ अंतराल आने लगे। अंत में सब बंद हो गया। शुरुआत क्यों हुई थी और अंत क्यों हुआ इसके बारे में कभी गहरे विश्लेषण की जरुरत है। बस लिखा करता था। लिखने का शौख था शायद इसलिए या शायद कुछ ऐसी बातें होती थी जो ...
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Aashu
Tag :Hindi
  February 24, 2015, 4:28 pm
पिछले हफ्ते आई फिल्म PK अपने साथ कई विवाद लेकर आई। धर्म के प्रति इंसान के अन्धविश्वास को बड़ी ही सहजता से दर्शाती यह फिल्म अकारण ही हिन्दू धर्मावलम्बियों के निशाने पर आ गयी है। इसको लेकर सोशल मीडिया में बहस और फिल्मकार और फिल्म से जुड़े अन्य कलाकारों के प्रति कई प्रकार ...
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Aashu
Tag :Movie
  December 27, 2014, 9:01 pm
बुजुर्गों से हमेशा सुबह उठने के फायदे सुनता रहा हूँ। पीढ़ी-दर-पीढ़ी सुबह जल्दी उठने की प्रथा जैसे ख़त्म ही होती जा रही है। पापा हमेशा सुबह उठते हैं, आज भी। हम सारे भाई-बहन मॉर्निंग स्कूल के दिनों को छोड़कर कभी सुबह जल्दी उठ नहीं पाये। जैसे जैसे बड़े होते गए, रूटीन और भी ब...
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Aashu
Tag :Personal
  August 6, 2014, 8:44 am
जीने की चाह से भरीवो टिमटिमाती सी आँखें। मुझसे पूछती हैं,'तू घबराया सा क्यूँ है?'मैं चुप खड़ा हूँ। उसे देख रहा, एकटक।महसूस कर रहा हूँ उसके ज़िंदा रहने की चाहत को.महसूस करता हूँ उस निर्दयी मौत की आहट को। झांकता हूँ उसकी आँखों में,देखता हूँ उनमें,मुझसे उम्मीदें ...
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Aashu
Tag :Hindi
  May 7, 2014, 1:24 am
ऐसे पेशे में रहना जहां जीवित रहने के लिए (और मरीज़ों को रखने के लिए भी) पढ़ाई करने की जरुरत हमेशा बनी रहती है वहाँ अपने आप को किताबी-कीड़ा कहने में कोई परहेज़ नहीं होना चाहिए। हालांकि मुझे इस सम्बोधन से हमेशा ऐतराज़ रहा है और ऐसे किसी भी व्यक्ति की संगत मुझे कभी रास न...
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Aashu
Tag :Hindi
  April 7, 2014, 11:12 pm
तकरीबन चार साल बीत गए हैं। इसी ब्लॉग में एक पोस्टलिखा था फ़िल्म इश्क़िया के बारे में और फ़िल्म देखने के बाद याद आये अपने कॉलेज के शुरूआती दिनों के बारे में। फ़िल्म में खुल कर देशी पुरबिया गालियों के प्रयोग से लेकर सूती साड़ी में लिपटी विद्या बालन का गज़ब का सेक्सी दिख...
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Aashu
Tag :Movie
  January 29, 2014, 1:02 am
शाम के लगभग पौने सात-सात बजे होंगे। दिन भर किसी सेमिनार से थका-हारा हॉस्टल के अपने कमरे में घुसा ही था। मोबाइल को चार्ज में लगा कर पलटा ही था कि उसी मोबाइल की रिंग बज उठी। पापा का फ़ोन था। शाम के उस समय में उनका फ़ोन आना थोड़ा अटपटा लगा था। फ़ोन उठाया और पापा के हेल्लो बो...
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Aashu
Tag :Personal
  January 11, 2014, 4:23 pm
उफ्फ़! फिर वही कन्फेशन। एक पूरा साल बीत गया। कभी अंदाजा ही नहीं लगा। इतने दिन बीत गए इधर आये हुए। ऐसा कुछ भी नहीं कि 13 अंक से कोई नफरत हो या वैसा कुछ अंधविश्वास कि 2013 में कुछ काम ही न करूँ। वक़्त के लहरों में न जाने कब पूरा एक साल बह निकला, इसका अहसास ही कभी नहीं हो सका। पि...
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Aashu
Tag :Hindi
  January 9, 2014, 11:29 pm
कमरे में अकेला,पलंग पर करवटें बदलता,घड़ी की टिक-टिक सुनता,कोसता उस आवाज़ कोजो याद दिला रही थी उसेबीते हुए वो दिन, वो पल,वो सब कुछ।वो चेहरा, वो मुस्कराहट,बड़ी सी मुस्कुराती आँखेंशरारत से लबालब,होठों के नीचे वो काला तिल,तिल पर टिपटिपाती उंगलियाँ,वो छोटी छोटी प्यारी उंगलि...
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Aashu
Tag :Literary
  November 5, 2012, 11:52 pm
शाम के साढ़े चार बजे थे। सुबह वार्ड की थकान को मिटाने वो आराम से अपने कमरे में सो रहा था। दुर्गा पूजा की छुट्टियाँ चल रही थी। वार्ड में ज्यादा पेशेंट थे नहीं। पिछले हफ्ते जिनका ओपरेशन हुआ था वही 3-4 बचे थे बस। एक को छोड़कर सब स्टेबल हो गए थे। एक की हालत थोड़ी गंभीर बनी हुई थ...
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Aashu
Tag :Doctor
  October 23, 2012, 8:53 pm
कमरे में वो अकेला बैठा हुआ था। न जाने कितनी देर से। बाहर धीरे धीरे अँधेरे ने घर कर लिया था और उसे इसका अंदाजा तक न लग सका। कानों में इयरफोन लगाए लैपटॉप के आगे बैठा गाने सुन रहा था, गुलाल फिल्म के। गीत के भयानक बोलों में खोया था या किसी और उलझन में, पता नहीं। बस समय का अंदाजा ...
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Aashu
Tag :Personal
  October 17, 2012, 7:42 pm
शाम के 5 बज चुके थे........वो बेचैन सा हो रहा था.......लैब में बैठे बैठे कोई काम न था.........बस मैडम के जाने का इंतज़ार.....मन ही मन गालियाँ दे रहा था......कब जाएगी ये खूसट और कब निकलूंगा मैं बाहर. बाहर जाने की यूँ कोई हड़बड़ी नहीं रहती थी, पर उस दिन बेचैन था. वो जो आई हुई थी. बाहर लाइब्ररी में ब...
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Aashu
Tag :
  February 21, 2012, 12:23 am
वो हँसता था, खिलखिलाता था,झूमता था, गाता था, गुनगुनाता था,दोस्ती थी, प्यार था,मस्ती थी, तकरार था.वो जिंदा था, क्यूंकि,वो ज़िन्दगी को जीता था.हँसता वो आज भी है, मगर,वो हँसी कही खो गयी.खिलखिलाना वो भूल गया है,झूमना, गाना, गुनगुनानाउसकी आदत नहीं रही.दोस्त हैं, प्यार है, मगर.वो प्य...
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Aashu
Tag :Literary
  February 4, 2012, 11:37 am
भगवान् भला करे उसका जो आज ड्यूटी पर आने से पहले उससे बात हुई और उसने दुआ दी कि आज कोई डेथ सर्टिफाई न करनी पड़े........पता नहीं इमरजेंसी ड्यूटी के ऐसे कितने और 8 घंटे मिलेंगे ज़िन्दगी में जिसमे एक भी मौत से पाला न पड़े.........अपनी 8 घंटे की ड्यूटी बजाकर इमरजेंसी से निकल ही रहा था कि ...
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Aashu
Tag :Literary
  December 13, 2010, 5:49 pm
चंद रोज़ बेगारी के,कुछ पल कामचोरी के,कई सफहों को कलम फिर गंदा कर गयी!वो जब कुछ नहीं करता तो कितना कुछ कर देता है या कितना कुछ कर देने की शक्ति रखता है. कमरे में अकेले किताबों के बीच बैठा हुआ. बड़ी मुश्किल से ध्यान वहीँ बगल में रखे अपने लैपटॉप पर से हटा पाता है. किताबों ...
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Aashu
Tag :Poem
  December 1, 2010, 7:31 pm
कमरे के कोने में बैठाशायद घंटों बीत गए थे,एक और शाम यूँही ढल गयी थीशायद बाहर अँधेरा हो आया था.कोई फर्क नहीं पड़ता,बाहर के अँधेरे से,अब डर नहीं लगता.आदत सी हो गयी है.आखिर मन में अँधेरा ही तो है.मन में अँधेरा?सचमुच?नहीं, अँधेरे की आदत नहीं लगीबस अब महसूस नहीं होता,यादों के उज...
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Aashu
Tag :My own work
  November 26, 2010, 8:15 pm
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