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Blog: JAAGRITY

Blogger: Mohammad Ravi
                       वर्तमान समय में आरक्षण ऐसा विषय है जिसकी चर्चा होने पर कोई यह नहीं कह सकता कि वह तटस्थ है। प्रत्येक व्यक्ति या तो आरक्षण के समर्थन में होगा या विरोध में। इसके प्रति वो उदासीन नहीं हो सकता। यह ऐसा विषय है जो समय-समय पर भारतीय राजनीति और ज... Read more
clicks 201 View   Vote 0 Like   4:24pm 15 Aug 2013 #
Blogger: Mohammad Ravi
                       वर्तमान भारतीय बिकाऊ मीडिया व तथाकथित बुद्धिजीवी देश में चल रहे दलित ,निम्न व पिछड़ी जातियों के राजनीतिक व सामजिक आन्दोलनों की अक्सर यह कहकर निंदा करते हैं कि ये कृत्य भारतीय समाज को बाँटने  तथा समाज में फैली एकता और समरसता को समाप्... Read more
clicks 168 View   Vote 0 Like   10:53am 9 Aug 2013 #
Blogger: Mohammad Ravi
                       यह देश भारत किसी के बाप की जागीर नहीं है। इस देश पर उस हर एक व्यक्ति का समान अधिकार है जिसको भारतीय संविधान के प्रावधानों के तहत भारत की नागरिकता प्रदान की गयी है। अतः साम्प्रदायिक तत्वों द्वारा यह कहकर समाज में किसी खास सम्प्रदाय के प्र... Read more
clicks 161 View   Vote 0 Like   8:09am 7 Aug 2013 #
Blogger: Mohammad Ravi
                        सामंतवादी-पूंजीवादी शोषणकारी वर्ग समाज में व्याप्त आदर्शों व मनोवृत्तियों का उपयोग अपने स्वार्थों तथा वर्गीय हितों की पूर्ति के लिए करता है ।सामान्यतया मानवीय स्वभाव यह होता है कि वह हिंसा का तो विरोध करता है लेकिन 'बदला'या 'प्रतिश... Read more
clicks 154 View   Vote 0 Like   7:46pm 4 Aug 2013 #
Blogger: Mohammad Ravi
                        वर्तमान शोषणकारी समाज की वास्तविकता को नकार उसकी झूठी शान में कसीदे वही लोग पढते हैं जो समाज के प्रभुत्वशाली व शोषक वर्गों से सम्बन्धित होते हैं। वे ही स्वार्थों की पूर्ति के लिये कमजोर वर्गों का शोषण करते हैं तथा अपनी स्थिति को बनाय... Read more
clicks 158 View   Vote 0 Like   8:55pm 3 Aug 2013 #
Blogger: Mohammad Ravi
                       अधिकतर भारतीय लोगों की गुलाम मानसिकता के कारण उनकी सोच निकृष्ट कोटि की हो चुकी है। वे अपने अधिकार की प्राप्ति के लिये संघर्ष करने की बजाय खैरात मिलने को अपनी उपलब्धी मानते हैं। वे शोषक सामंती पूँजीवादी वर्गों से अपने हक को छीनने की बजा... Read more
clicks 153 View   Vote 0 Like   10:20am 30 Jul 2013 #
Blogger: Mohammad Ravi
यह लेख अमर शहीद भगत सिंह द्वारा भारतीय समाज में अनुसूचित जातियों के शोषण और दमन तथा उनके उत्थान हेतु 1923 में लिखे गए लेख "अछूत समस्या"में उठाये गए प्रश्नों और सुझावों पर विचार करने तथा वर्तमान स्थिति व अनुसूचित जातियों की स्थिति में हुए परिवर्तनों पर विमर्श करने हेतु ल... Read more
clicks 172 View   Vote 0 Like   5:06pm 27 Jul 2013 #
Blogger: Mohammad Ravi
CASTES IN INDIA:Their Mechanism, Genesis and Developmentby B. R. AmbedkarPaper presented at an Anthropology Seminartaught by Dr. A. A. GoldenweizerColumbia University9th May 1916Text first printed in: Indian Antiquary Vol. XLI (May 1917)[1] Many of us, I dare say, have witnessed local, national or international expositions of material objects that make up the sum total of human civilization. But few can entertain the idea of there being such a thing as an exposition of human institutions. Exhibition of human institutions is a strange idea; some might call it the wildest of ideas. But as students of Ethnology I hope you will not be hard on this innovation, for it is not so, and to y... Read more
clicks 157 View   Vote 0 Like   2:29pm 26 Jul 2013 #
Blogger: Mohammad Ravi
                        यह खोखला समाज उन लोगों को बहुत सज्जन और   सदाचारी मान लेता जो यौन सम्बन्धों में खोखली नैतिकता  का ढोंग और धर्म का इस्तेमाल करते हैं................. भले ही वो लोग भ्रष्टाचार और शोषण में डूबे हुए हों ।।... Read more
clicks 161 View   Vote 0 Like   1:58pm 26 Jul 2013 #
Blogger: Mohammad Ravi
                                                                         "स्याहियों के तरफदार लोग रहते हैं                                                     ये हर तरफ जो चमकदार लोग रहते हैं,                        ... Read more
clicks 135 View   Vote 0 Like   1:47pm 26 Jul 2013 #
Blogger: Mohammad Ravi
                        भारतीय समाज में जो समुदाय जितना अधिक शोषित-दमित व उपेक्षित है, समाज में उस समुदाय के प्रति सामान्य सार्वजनिक घृणा की भावना भी उतनी ही अधिक व्याप्त है। जिसके कारण वह शोषित समुदाय अपनी स्थिति सुधारने में सफल नहीं हो पाता। यह स्वंय के प्... Read more
clicks 135 View   Vote 0 Like   5:58pm 23 Jul 2013 #
Blogger: Mohammad Ravi
                        The foundation of irreligious criticism is: Man makes religion, religion does not make man. Religion is, indeed, the self-consciousness and self-esteem of man who has either not yet won through to himself, or has already lost himself again. But man is no abstract being squatting outside the world. Man is the world of man – state, society. This state and this society produce religion, which is an inverted consciousness of the world, because they are an inverted world. Religion is the general theory of this world, its encyclopaedic compendium, its logic in popular form, its spiritual point d’honneur, i... Read more
clicks 149 View   Vote 0 Like   10:55am 23 Jul 2013 #
Blogger: Mohammad Ravi
                      Religion is one of the forms of spiritual oppression which everywhere weighs down heavily upon the masses of the people, over burdened by their perpetual work for others, by want and isolation. Impotence of the exploited classes in their struggle against the exploiters just as inevitably gives rise to the belief in a better life after death as impotence of the savage in his battle with nature gives rise to belief in gods, devils, miracles, and the like. Those who toil and live in want all their lives are taught by religion to be submissive and patient while here on earth, and to take comfort in the hope of a he... Read more
clicks 153 View   Vote 0 Like   10:48am 23 Jul 2013 #
Blogger: Mohammad Ravi
                        यदि कोई भारतीय विचारक,नेता या तथाकथित समाजसुधारक समानता, स्वतंत्रता और शोषितों के उत्थान की बात करता है लेकिन जाति व्यवस्था के उन्मूलन की चर्चा भी नहीं करते , तो वे लोग केवल ढोंग करके शोषितों के आक्रोश को खत्म करने करने का कार्य करते ह... Read more
clicks 178 View   Vote 0 Like   9:51am 23 Jul 2013 #
Blogger: Mohammad Ravi
                       वर्तमान पूँजीवादी समाज में सबकुछ बिकता है.... शिक्षा, स्वास्थ्य, जीवन की मूलभूत आवश्यकतायें, नैसर्गिक मानवीय भावनाएं, रिश्ते, सम्मान,,,,,लोगों की मानसिकता में पूँजीवाद गहराई तक जङें जमा चुका है, इसी कारण वे स्वार्थों की पूर्ति हेतु किसी भी ... Read more
clicks 159 View   Vote 0 Like   6:43pm 22 Jul 2013 #
Blogger: Mohammad Ravi
                       अधिकतर लोग खुद को आधुनिक (modern) मानते हैं लेकिन उनके लिये आधुनिकता का मतलब होता है केवल नये फैशन के कपड़े पहनना, नयी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करना और लोगों के सामने प्रगतिशील विचारों तथा बौध्दिकता का ढोंग करना , जबकि वे लोग व्यवहार में घोर रू... Read more
clicks 169 View   Vote 0 Like   6:40pm 22 Jul 2013 #
Blogger: Mohammad Ravi
                        जो लोग भ्रष्टाचार खत्म करने की बात करते हैं किन्तु भारतीय समाज व्यवस्था में क्रांतिकारी परिवर्तन करने और असमानता व शोषणकारी व्यवस्था को समाप्त करने के प्रश्न पर चुप्पी साध लेते हैं ,वे लोग सामंतवादियों पूंजीवादियों के तलवे चाटने व... Read more
clicks 139 View   Vote 0 Like   6:37pm 22 Jul 2013 #
Blogger: Mohammad Ravi
                       आज सारी भारतीय राजनीतिक पार्टियों की आर्थिक नीतियां पूँजीवाद से संचालित हो रही हैं... निजीकरण,मुक्त व्यापार ,मुनाफाखोरी ... इनकी आर्थिक नीतियों के मुख्य लक्षण हैं.. जो पार्टियां सत्ता में हैं या जो पार्टियां सत्ता प्राप्त करने के लिये ला... Read more
clicks 128 View   Vote 0 Like   6:34pm 22 Jul 2013 #
Blogger: Mohammad Ravi
                      सर्वहारा वर्ग को शोषण का अंत करने के लिये धर्म, वर्तमान सामाजिक व्यवस्था और वर्तमान राजनीतिक व आर्थिक व्यवस्था को एक साथ रखकर कार्य करना होगा। वास्तव में उपरोक्त चारों आपस में एक-दूसरे से अन्तर्सम्बन्धित हैं तथा इन्हें अलग नहीं किया ज... Read more
clicks 182 View   Vote 0 Like   6:32pm 22 Jul 2013 #
Blogger: Mohammad Ravi
                       जैसे-जैसे चुनावी मौसम आ रहा है देश में साम्प्रदायिकता और धार्मिक उन्माद फैलाने की सुनियोजित साजिश रची जा रही है... ताकि जनता का धर्म के नाम पर ध्रुवीकरण हो सके ... जिससे कुछ पार्टियां किसी खास खास धर्मों की रखवाली का स्वयं घोषित ठेका ले... Read more
clicks 186 View   Vote 0 Like   6:28pm 22 Jul 2013 #
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