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जब ‘नानक’ काबा की तरफपैर करके सोये+रमेशराज--------------------------------------------------------------------अपने-अपने धर्म और अलग-अलग ईश्वरों दैव-शक्तियों को लेकर भेद उन्हें ही जान पड़ता है, जो वास्तविकता से परे, अपने अधूरे ज्ञान के बेूते फूले नहीं समाते हैं। सच्चे संत के लिये मंदिर, मस्जिद, चर्च, गुरुद्वारा ...
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  April 15, 2017, 1:39 pm
भाईचारे का प्रतीक पर्व: लोहड़ी+रमेशराज----------------------------------------------------------------------‘लोहड़ी’, ‘तिल’ तथा ‘रोड़ी’ शब्दों के मेल से बना है, जो शुरू में ‘तिलोड़ी’ के रूप में प्रचलन में आया और आगे चलकर यह ‘लोहड़ी’ के नाम से रूढ़ हो गया। ‘लोहड़ी’ पंजाबियों का प्रमुख त्योहार है जो पौष माह की विदाई और मा...
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  April 15, 2017, 1:37 pm
कश्मीरी पण्डितों की रक्षा में कुर्बान हुए गुरु तेगबहादुर+रमेशराज--------------------------------------------------------------------सिखों के नौवें गुरु तेग बहादुर सरल-सौम्य और संत स्वभाव के थे। वे सामाजिक बुराइयों को दूर करने में सदैव तत्पर रहते थे। गुरुजी ने राजा भीमसिंह के सहयोग से आनंदपुर साहब की नींव रख...
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  April 15, 2017, 1:36 pm
गुरु तेगबहादुर की शहादत का साक्षी है शीशगंज गुरुद्वारा+रमेशराज-------------------------------------------------------------------    मुगल बादशाह औरंगजेब महत्वाकांक्षी, क्रूर और अत्याचारी बादशाह था। दिल्ली के तख्त पर आसीन होने के लिए उसने अपने पिता शाहजहाँ को तो जेल में डाला ही, अपने तीन सगे भाई भी कत्ल क...
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  April 15, 2017, 1:34 pm
गुरु रामदास की कृपा से बाँझ बनी तेजस्वी पुत्र की  माँ+रमेशराज-----------------------------------------------------------------गुरु रामदास जी अपने विचारो से दृढ़, अद्भुत संगठनकर्ता और पारखी महापुरुष थे। वह छूआछूत, भेदभाव ऊंच-नीच, जाति-पांत में विश्वास नहीं रखते थे। गुरु रामदास ने ही अमृतसर की स्थापना की थी ...
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  April 15, 2017, 1:24 pm
उस गुरु के प्रति ही श्रद्धानत होना चाहिए जो अंधकार से लड़ना सिखाता है+रमेशराज-----------------------------------------------------------------पर्व ‘गुरु पूर्णिमा’ ऐसे सच्चे गुरुओं के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने वाला दिन है, जिन्होंने धर्म के रथ पर सवार होकर श्री कृष्ण की तरह अर्जुन रूपी जनता से सामाजिक बुरा...
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  April 15, 2017, 1:21 pm
बिन काया के हो गये ‘नानक’ आखिरकार+रमेशराज---------------------------------------------------------------------साक्षात ईश्वर के समान, असीम अलौकिक शक्तियों के पुंज, जातिपांत-भेदभाव के विनाशक, मानवता के पावन संदेश को समस्त जगत में पुष्प-सुगंध की तरह फैलाने वाले गुरु नानक सिख-धर्म के संस्थापक ही नहीं, अद्भुत असरक...
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  April 15, 2017, 1:19 pm
गुरु अंगद देव +रमेशराज----------------------------------------------------------------------सिखों के दूसरे गुरु अंगददेव साहित्य-प्रेमी ही नहीं, ढोंग और आडम्बर के घोर विरोधी थे। अपने जन्म के नाम लहनासिंह के रूप में गुरुजी ने गुरुनानक की इतनी सेवा-सुश्रषा की कि नानकजी ने प्रसन्न होकर आपका नाम गुरु अंगद देव ही न...
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  April 15, 2017, 1:17 pm
गुरु अमरदास के रुमाल का कमाल+रमेशराज-----------------------------------------------------------------केवल डेढ़ वर्ष तक गुरुपद को सम्हालने वाले गुरु अमरदास गोईंदवाल नगर और 84सीढि़यों वाली पवित्र बावली के निर्माणकर्ता तो रहे ही हैं, गुरुजी ने गुरु रामदास को नया नगर अमृतसर बसाने की भी प्रेरणा दी।गुरु अमरदास अ...
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  April 15, 2017, 1:11 pm
खालसा-सैन्य-गठन हुआ था बैसाखी के दिन+रमेशराज-----------------------------------------------------------------    जिस बैसाखी पर्व को सिख लोग नाचते-गाते, तलवारबाजी का कौशल दिखाते, ढोल बजाते बड़ी धूमधाम और उत्साह के साथ मनाते हैं, इसी बैसाखी के दिन बालपन से ही युद्ध में निपुण, गुरु परम्परा का अन्त करके ‘श्री ग...
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  April 15, 2017, 1:10 pm
अमर स्वाधीनता सैनानी डॉ. राजेन्द्र प्रसाद+रमेशराज -------------------------------------------------------------------राष्ट्रीय पार्टी कांग्रेस अब सीमेंट, यूरिया, आदर्श सोसायटी, 2जी स्पेक्ट्रम, कामन वेल्थ गेम घोटालों के लिये विख्यात हो चुकी  है। काली करतूतों जैसे तस्करी, घोटालों और देशद्रोह में लिप्त रहने ...
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  April 14, 2017, 12:31 pm
‘निराला’ का व्यवस्था से विद्रोह +रमेशराज -------------------------------------------------------------क्रान्तिकारी, फक्कड़ और निर्भीक महात्मा कबीर के बाद यदि कोई कवि उनके समतुल्य, व्यवस्था-विरोधी, साहसी और नैतिक मूल्यों को सर्वोपरि मानकर, उनकी स्थापनार्थ संघर्षरत रहा है तो वह नाम है-महाप्राण सूर्यकांत ...
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  April 14, 2017, 12:30 pm
नारी कब होगी अत्याचारों से मुक्त?+रमेशराज------------------------------------------------------------------------- धीरे-धीरे जिस पाश्चात्य अपसंस्कृति का शिकार हमारा समाज होता जा रहा है, उसके दुष्परिणाम स्त्री जाति पर अत्याचारों की बढ़ोत्तरी के रूप में सर्वत्र दृष्टिगोचर हो रहे हैं। शहर ही नहीं गाँव-गाँव तक आ...
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  April 14, 2017, 12:28 pm
गुरु गोरखनाथ+रमेशराज---------------------------------------------------------------------- भक्ति-आन्दोलन से पूर्व योगमार्ग द्वारा धार्मिक आन्दोलन के प्रणेता, अपने युग के सबसे बड़े धार्मिक नेता, महान गुरु गोरखनाथ का आविर्भाव विक्रम संवत की दसवीं शताब्दी में माना जाता है। भारतवर्ष में ऐसी कोई भाषा, उपभाषा या...
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  April 14, 2017, 12:26 pm
डॉ. अम्बेडकर ने ऐसे लड़ा प्रथम चुनाव+रमेशराज -------------------------------------------------------------------    डॉ. अम्बेडकर ‘हिन्दू कोड बिल’ को सन् 1952के सामान्य चुनाव होने से पहले ही संसद में पारित कराने को बेताब थे। जब उनकी इस इच्छा की पूर्ति में कांग्रेस अवरोध खड़े करने लगी तो 27सितम्बर 1951को उन्होंने अप...
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  April 14, 2017, 12:24 pm
समय-समय पर सत्ता से टकराते रहे हैं संत+रमेशराज--------------------------------------------------------------------बोफोर्स तोप, कॉमनवेल्थ गेम, 2जी स्पेक्ट्रम, आदर्श हाउसिंग जैसे एक नहीं अनेक घोटालों के पापकुण्ड में गोते लगाती कांग्रेस सरकार अब विदेशा बैंकों में जमा कालेधन के मुद्दे पर विपक्ष के ही वार नहीं झेल...
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  April 14, 2017, 11:37 am
एक परोपकारी साहूकार थे ‘ संत तुकाराम ’+रमेशराज----------------------------------------------------------------------      वे भाग्यशाली लोग होते हैं, जिनके पास धन-दौलत होती है। लेकिन ऐसा धन किसी काम का नहीं होता, जो परोपकारी कार्यो और जरूरतमंदों में न लगे। ऐसा धनी बनने से क्या फायदा कि वह धनकुबेर तो पुकारे ...
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  April 14, 2017, 11:35 am
क्या ईसा भारत आये थे? +रमेशराज ----------------------------------------------------------------------ईसा तीस वर्ष की आयु में एक महान धर्मापदेशक बनकर उभरे और उन्होंने अपनी जाति के मध्य जो धार्मिक दर्शन रखा, उसने जन-जन के बीच एक नयी वैचारिक क्रान्ति के बीच बोये। अपनी तीस वर्ष की उम्र से पूर्व के काल में वे कहां थे और ...
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  April 14, 2017, 11:32 am
जीवन के अंतिम दिनों में गौतम बुद्ध+रमेशराज-------------------------------------------------------------------सत्य और धर्म के वास्तविक स्वरूप को समझाने के लिये समाजिक अंधविश्वासों, मान्यताओं, रुढ़ियों, परम्पराओं का अनवरत विरोध करने वाले महात्मा बुद्ध अपने सुधारवादी, प्रगतिशील, कल्याणकारी दृष्टिकोण के कारण ...
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  April 14, 2017, 11:30 am
सावरकर ने अंडमान जेल में भी करायी क्रान्ति  +रमेशराज----------------------------------------------------------------------वीर विनायक सावरकर के मन में बचपन से ही क्रान्ति की हिलौरें उठने लगी थीं। वे अंग्रेजी हुकूमत को उखाड़ फैंकने के लिये सशस्त्र क्रान्ति के ऐसे पुरोधा बने, जिन्होंने भारत ही नहीं, विदेश में र...
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  April 13, 2017, 2:29 pm
माँ दुर्गा की नारी शक्ति  -रमेशराज----------------------------------------------------------------क्वार सुदी प्रतिपदा से नवमी तक पवित्र मन के साथ अत्यंत संयम से नवरात्र में रखे जाने वाले व्रत में माँ दुर्गा की पूजा-अर्चना की जाती है। प्रतिपदा के दिन प्रातः ही स्नानादि के उपरांत ‘दुर्गासप्तशती’ का पाठ निय...
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  March 30, 2017, 1:15 pm
रोटियों से भी लड़ी गयी आज़ादी की जंग+रमेशराज------------------------------------------------------------    कुछ कांग्रेस के पिट्टू इतिहासकार आज भी जोर-शोर से यह प्रचार करते हैं कि बिना खड्ग और बिना तलवार के स्वतंत्रता संग्राम में कूदने वाले कथित अहिंसा के पुजारियों के ‘आत्मसंयम, आत्मबल और स्वपीड़ा’ ...
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  March 28, 2017, 6:48 pm
काव्य में सत्य, शिव और सौंदर्य+रमेशराज---------------------------------------------------------------------- सत्य का संबंध लोकमंगल या मानवमंगल की कामनामात्र से ही नहीं, मानव मंगल के लिए काव्य में अपनाए गए उस वैचारिक एवं भावात्मक पक्ष से भी है, जिसमें आचार्य शुक्ल के अनुसार-‘‘उत्साह, क्रोध, करुणा, भय, घृणा आदि की ग...
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  March 6, 2017, 5:06 pm
काव्य में अलौकिकत्व+रमेशराज-----------------------------------------------------------काव्य का अलौकिकत्व सिद्ध करने के लिए रसाचार्यों ने रस को आनंद का पर्याय मानकर बड़े ही कल्पित तर्क प्रस्तुत किए। आदि रसाचार्य भरतमुनि ने जिन भावों, संचारी भावों, स्थायी भावों के संयोग से रसनिष्पत्ति का सूत्र गढ़ा था उ...
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  March 6, 2017, 5:03 pm
रसनिष्पत्ति आश्रय के संस्कारों से बंधकर होती है[ विचार, संस्कार और रस-4 ]+रमेशराज---------------------------------------------------- एक कवि द्वारा सृजित काव्य जिन परिस्थितियों में एक सामाजिक द्वारा आस्वाद्य होता है, उसके लिए उस सामाजिक का काव्य-सामग्री के प्रति रुचि लेना परामावश्यक है। सामाजिक की र...
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  March 6, 2017, 5:01 pm
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