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कविता मंच

एक साधू किसी नदी के पनघट पर गया और पानी पीकर पत्थर पर सिर रखकर सो गया....!!!पनघट पर पनिहारिन आती-जाती रहती हैं!!!पनिहारिने आईं तो एक ने कहा- "आहा! साधु हो गया, फिर भी तकिए का मोह नहीं गया...पत्थर का ही सही, लेकिन रखा तो है।"पनिहारिन की बात साधू ने सुन ली...उसने तुरंत पत्थर फेंक दि...
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  August 22, 2018, 3:03 pm
शहरशहर ..... ही शहरहै,फैला हुआ,जहाँ तलक जाती नजर है शहर ..... ही शहरहै|फैली हुई कंक्रीट और का बड़ा अम्बार,वक्त की कमी से बिखरते रिश्ते,बढ़ती हुयी दूरी का कहर है,शहर ..... ही शहरहै|पैरो से कुचला हुआ,है अपनापन,बस खुद से खुद के साथ,विराना सफर है,शहर ...... ही शहरहै|मेरे दिल को ना भाया यह शह...
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Tag :Hindi
  May 12, 2018, 11:40 am
                      वो जो अक्सर फजर से उगा करते हैसुना है बहुत दिल से धुआं करते है।जलता है इश्क या खुद ही जल जाते हैकलमे में खूब चेहरे पढा करते है।फजल की बात पर खामोशी थमा देते हैबेवजह ही क्यों खुद को खुदा करते है?आयतें रोज ही लिखते है मदीने के लिएऔर अक्सर मगरिब ...
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  May 11, 2018, 1:26 pm
राजेश त्रिपाठी          वक्त कुछ इस कदर हम बिताते रहे ।दर्द  दिल  में  छिपा मुसकराते रहे ।।     जिसपे भरोसा किया उसने हमको छला।     परोपकार करके हमें क्या मिला।।     पंख हम बन गये जिनके परवाज के।     आज बदले हैं रंग उनके अंदाज के।। मुंह...
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  May 1, 2018, 8:11 pm
पाँच लिंकों का आनन्द: 911... मेले- लोहड़ी-खिचड़ी की शुभकामनायें...
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  March 17, 2018, 11:02 am
मंद मंद आंसू,आंखो में प्यास,सरकारी चिट्टीसूखा बदन,माथे से लगाए अपने खेत की मिट्टीदिल में उम्मीद,सीने में दर्द,भूखा और प्यासाकल दिखा इक किसान मुझे ओढ़े निराशाबंगला था साहब का,साहब भी आलीशान थाबैठा था बाहर भूखा इसी देश का किसान थावो आया था आशा लिए,संग लिए बेटी छोटीएक पन...
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  March 16, 2018, 3:17 pm
कविता मंच का बहुत बहुत आभार आपने मुझे अपने ब्लॉग पक आमंत्रित किया ।।दो पंक्तियो मे मेरा परिचयशिव शंकर का डमरू बाजे ताण्डव करे भयंकर ।उन शिव की मै पूजा करता मेरा नाम भयंकर ।।...
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  March 15, 2018, 4:06 pm
सोचता हूँ गढ़ दूँ मैं भी अपनी मिट्टी की मूर्ति, ताकि होती रहे मेरे अहंकारी-सुख की क्षतिपूर्ति। मिट्टी-पानी का अनुपात अभी तय नहीं हो पाया है, कभी मिट्टी कम तो कभी पर्याप्त पानी न मिल पाया है। जिस दिन मिट्टी-पानी का अनुपात तय हो जायेगा, एक सुगढ़ निष...
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Tag :रवीन्द्र सिंह यादव
  March 13, 2018, 7:30 pm
दर्द  दिल  में  छिपा मुसकराते रहेराजेश त्रिपाठीवक्त कुछ इस कदर हम बिताते रहे ।दर्द  दिल  में  छिपा मुसकराते रहे ।।     जिसपे भरोसा किया उसने हमको छला।     परोपकार करके हमें क्या मिला।।        पंख हम बन गये जिनके परवाज के।       आज बदले हैं ...
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  March 7, 2018, 11:17 am
हमारी पौराणिक कथाऐं कहती हैं होली की कथा निष्ठुर ,एक थे भक्त प्रह्लाद पिता  जिनका हिरण्यकशिपु  असुर। थी उनकी बुआ होलिका थी ममतामयी माता कयाधु ,दैत्य कुल में जन्मे  चिरंजीवी प्रह्लाद साधु। ईश्वर भक्ति से हो जाय विचलित प्रह्लाद पिता ने किये नाना प...
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Tag :होली की कथा
  March 2, 2018, 11:12 am
Monday, November 1, 2010मैं बदन बेचती हूँ--मैं बदन बेचती हूँ--उस औरत के तन काकतरा-कतरा फुट बहा है तभी तो चीख-चीख कहती हाँ मै बदन बेचती हूँ अपनी तपिश बुझाने को नही पेट की भूख मिटाने को नही मै बेचती हूँ बदन ,हां बेचती हूँ मै भूख से बिलखते रोते -कलपते दो नन्हे बच्चो के लिए मैं अ...
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  February 5, 2018, 10:48 pm
चली वासन्ती मलयनभ्रमरों का ये अनुगूंजन हैनवकलियों का यौवनदेता निश्छल आमन्त्रण हैकामदेव का रति सेचला प्रणय अनुराग हैबावली बन फिर रहीतितली बैठी पराग है।वासन्ती रंग रँगी वसुधाफिजां में छाई बहार है।फूलों का ओढ़ चादरप्रेमरस भरा श्रृंगार है।रस से भीगी है रसा जोबनी हर क...
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  January 27, 2018, 5:41 am
मधुमास के प्रथम दिवस मेंहै प्रियम का ये अभिनन्दन प्रियेपूर्णचन्द्र की क्षीण कला सीअम्बर को छूती चपला सीलहराई यूँ कनक लता सीधरा अम्बर का है ये मिलन प्रिये।अंतर की मधुमयी विकलताअधरों में छलकी थिरकन सांसों के मनमोहक सुर मेंपलकों का निश्चल आमन्त्रण प्रिये।याद कर रही ...
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Tag :पंकज भूषण पाठक "प्रियम"
  January 22, 2018, 3:04 pm
जब अजनबी थे हमतुमने मुझे जानना चाहामैंने भी हंसकरअपने बारे में तुम्हें बतायाहम दोस्त बनेजब तुमने दोस्ती का हाथ बढ़ायाफिर तुमने मुझे प्रेमिका कहाजब मैंने प्रेम में अपना सर्वस्व समर्पण कर दियातो सबसे पहलेतुमने ही मुझेबनाया ‘वेश्या’! ...
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  January 20, 2018, 4:00 am
शहर में कोई हिन्दू मरामैं इसके खिलाफ हूंकोई मुस्लिमदंगों का शिकार हुआमैं उसके खिलाफ हूंकिसी सिक्ख के धर्म का अपमान हुआमैं उसके भी खिलाफ हूंकिसी ईसाई को अपने ही देश मेंविदेशी कह कर मारा जाएमैं इसके भी खिलाफ हूंमैं लडूंगीहर धर्म हर सम्प्रदायमें होने वाली हर ज्यादती ...
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  January 19, 2018, 4:00 am
सुजान न लेवहिं नाम यह तलाक न उमदह नाम।घ्रणित काम यह अति बुरा नहिं असलौं का काम।नहिं असलौं का काम नारि जो अपनी छोड़ै।करैं श्‍वान का काम हाथ दुसरी से जोडै़।।कहैं रहमान बसें खग मिलकर जो मूर्ख अज्ञान।कहु लज्‍जा है की न‍हीं दंपति लडै़ सुजान।। ...
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  January 18, 2018, 4:00 am
माँ, मैं शून्य था।तुम्हारी कोख में आने से पहलेशून्य आकार था। एकदम शून्यआपने जीवन दिया मुझे...अंश बना तुम्हारा...अनेक उपकार हैं तुम्हारेमैं आहवान करता हूँ माँ तुम्हारा!..............................................लिखी रेत पे कवितालिखा नाम तुम्हारालिखा क़लमा...परवाज़ रूह हो गयीजुगनू की रोशनी में......
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  January 17, 2018, 4:00 am
ख्वाहिश मुझे जीने की ज़ियादा भी नहीं हैवैसे अभी मरने का इरादा भी नहीं हैहर चेहरा किसी नक्श के मानिन्द उभर जाएये दिल का वरक़ इतना तो सादा भी नहीं हैवह शख़्स मेरा साथ न दे पाऐगा जिसकादिल साफ नहीं ज़ेहन कुशादा भी नहीं हैजलता है चेरागों में लहू उनकी रगों काजिस्मों पे कोई ज...
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  January 16, 2018, 4:00 am
वो  हमको   ऐसा  बिसराये,  सावन   मेंआंख में आंसू भर—भर आये, सावन मेंबिजली  चमके  बादल  गरजे,  डर जाउंरिमझिम मन में प्यास जगाये,सावन मेंखिलते  फूल  महकती कलियां, न भायेंपुरवा   बैरन  आग  लगाये ,सावन   मेंइतना  हरजाई  निकलेगा,  सनम मेराइश्क&nbs...
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Tag :सुदेश यादव जख्मी
  January 15, 2018, 12:00 pm
अगर ख़ुदा न करे सच ये ख़्वाब हो जाए तेरी सहर हो मेरा आफ़ताब हो जाए हुज़ूर! आरिज़ो-ओ-रुख़सार क्या तमाम बदन मेरी सुनो तो मुजस्सिम गुलाब हो जाए उठा के फेंक दो खिड़की से साग़र-ओ-मीना ये तिशनगी जो तुम्हें दस्तयाब हो जाए वो बात कितनी भली है जो आप करते हैं सुनो तो सीने की धड़कन रब...
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  January 14, 2018, 4:00 am
अगर कुछ दाँव पर रख दें, सफ़र आसान होगा क्यामगर जो दाँव पर रखेंगे वो ईमान होगा क्याकमी कोई भी वो ज़िन्दगी में रंग भरती हैअगर सब कुछ ही मिल जाए तो फिर अरमान होगा क्यामगर ये बात दुनिया की समझ में क्यों नहीं आतीअगर गुल ही नहीं होंगे तो फिर गुलदान होगा क्याबगोला-सा कोई उठता है...
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  January 13, 2018, 4:00 am
अगर औरत बिना संसार होता।वफ़ा का ज़िक्र फिर बेकार होता।ये किस्से हीर लैला के न मिलते।हर एक आशिक़ यहाँ बेजार होता।क़लम ख़ामोश रहता शायरों का बिना रुजगार के फ़नकार होता।नहीं फिर जिक्र होठों पर किसी के नयन जुल्फ-ओ-लब-ओ-रुख़्सार होता।न करता कोई बातें ग़म ख़ुशी की किसी को ...
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  January 12, 2018, 4:00 am
अगर उदास है वो तो कोई मजबूरी हैकोई वज़ह है अगर दो दिलों में दूरी है।आज जी भर के चाँदनी को अपनी देखेंगेहमारे पास अभी एक रात पूरी है।आप जाँये तो मुस्करा के यहाँ से जाँयेइस ग़ज़ल में ये शेर भी बहुत ज़रूरी है।आप दे लाख दलीलें, हजा़र तहरीरेंसही है वो जिसे समाज की मंज़ूरी है।...
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  January 11, 2018, 4:00 am
                          अगर आदमी ख़ुद से हारा न होता ,                          ख़ुदा को किसी ने पुकारा न होता !                          कहां आसमां पर ख़ुदा बैठ जाता ,&n...
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  January 10, 2018, 4:00 am
अंधेरा मिटता नहीं है मिटाना पड़ता हैबुझे चराग़ को फिर से जलाना पड़ता है।ये और बात है घबरा रहा है दिल वर्नाग़मों का बोझ तो सब को उठाना पड़ता है।कभी कभी तो इन अश्कों की आबरू के लिएन चाहते हुए भी मुस्कुराना पड़ता है।अब अपनी बात को कहना बहुत ही मुश्किल हैहर एक बात को कितना ...
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Tag :
  January 9, 2018, 4:00 am
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