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Blog: कविता मंच

Blogger: kuldeep thakur
आज फिर से तुम बुझा दीपक जलाओ । है कंहा वह आग जो मुझको जलाए,है कंहा वह ज्वाल पास मेरे आए, रागिनी, तुम आज दीपक राग गाओ;आज फिर से तुम बुझा दीपक जलाओ । तुम नई आभा नहीं मुझमें भरोगी,नव विभा में स्नान तुम भी तो करोगी, आज तुम मुझको जगाकर जगमगाओ;आज फिर से तुम बुझा दीपक जलाओ । मैं तपोमय... Read more
clicks 0 View   Vote 0 Like   10:38am 25 Oct 2019 #
Blogger: kuldeep thakur
तेवरी को विवादास्पद बनाने की मुहिम+रमेशराज................................................................................ग़ज़ल-फोबिया के शिकार कुछ अतिज्ञानी हिन्दी के ग़ज़लकार तेवरी को लम्बे समय से ग़ज़ल की नकल सिद्ध करने में जी-जान से जुटे हैं। तेवरी ग़ज़ल है अथवा नहीं, यह सवाल कुछ समय के लिये आइए छोड़ दें और बहस को नया म... Read more
clicks 1 View   Vote 0 Like   1:20pm 25 Sep 2019 #
Blogger: kuldeep thakur
मैं जीना चाहूं बचपन अपना,पर कैसे उसको फिर जी पाऊं!मैं उड़ना चाहूं ऊंचे आकाश,पर कैसे उड़ान मैं भर पाऊं!मैं चाहूं दिल से हंसना,पर जख्म न दिल के छिपा पाऊं।मैं चाहूं सबको खुश रखना,पर खुद को खुश न रख पाऊं।न जाने कैसी प्यास है जीवन में,कोशिश करके भी न बुझा पाऊं।इस चक्रव्यूह से ... Read more
clicks 9 View   Vote 0 Like   5:48am 21 Sep 2019 #
Blogger: kuldeep thakur
तेवरी में गीतात्मकता +योगेन्द्र शर्मा --------------------------------------------------------------------------------------------------------                ग़ज़ल के जन्म के समय, लगभग सभी प्रचलित विधाएं, कथ्य पर ही आधारित थीं। ग़ज़ल का कथ्य था, हिरन जैसे नेत्रों वाली ;मृगनयनी से प्रेमपूर्ण वार्तालाप। भजन का कथ्... Read more
clicks 5 View   Vote 0 Like   8:53am 10 Sep 2019 #
Blogger: kuldeep thakur
कविता में ‘तेवरी प्रयोग’ साहित्य के लिए एक सुखद अनुभव*विश्वप्रताप भारती-----------------------------------------------------------------------------------                                श्री रमेशराज छंदबद्ध कविता के सशक्त हस्ताक्षर हैं। ‘तेवरी लेखन’ एवं ‘विचार को ... Read more
clicks 3 View   Vote 0 Like   8:49am 10 Sep 2019 #
Blogger: kuldeep thakur
तेवरी के तेवर को दर्शाती पत्रिका ‘तेवरीपक्ष’                                   -भगवानदास जोपट---------------------------------------------------------------------------------------                हिन्दी कविता के क्षेत्र में कविता की अनेक विधाओं के मध्य तेवरी विधा का केंद्रीय स्थान है... Read more
clicks 4 View   Vote 0 Like   8:47am 10 Sep 2019 #
Blogger: kuldeep thakur
तेवरीकार रमेशराज, राजर्षि जनक की भूमिका में  *योगेन्द्र शर्मा ----------------------------------------------------------------------------------        कविवर निराला का कथन है-“कविता बहुजीवन की छवि है।“ तेवरी भी माँ सीता की तरह, भूमि से ही जन्मी है, और रमेशराज, राजर्षि जनक की भूमिका में हैं। तेवरीकार, रमेशराज... Read more
clicks 2 View   Vote 0 Like   8:43am 10 Sep 2019 #
Blogger: kuldeep thakur
ग़ज़ल एक प्रणय गीत+रमेशराज---------------------------------------ग़ज़ल का अतीत एक प्रणय-गीत, महबूबा से प्रेमपूर्ण बातचीत’ के रूप में अपनी उपस्थित दर्ज कराते हुए साहित्य-संसार में सबके सम्मुख आया। ज्यादा भटकने की जरूरत नहीं है, ‘मद्दाह’ का शब्दकोष देख लीजिए, उ.प्र. हिन्दी संस्थान की प्रामाणि... Read more
clicks 3 View   Vote 0 Like   8:42am 10 Sep 2019 #
Blogger: kuldeep thakur
 रमेशराज की तेवरियाँ ----------------------------------------------------------रमेशराज की तेवरी....1 .............................................हर कोई आहत मिलता है दर्दों में जड़वत मिलता |कुंठा जलन घुटन सिसकन का अब खुशियों को खत मिलता |नवयुवकों के अहंकार में एक महाभारत मिलता |अभिवादन को खड़ीं तल्खियाँ पीड़ा का स्वागत मिलता |सबके स... Read more
clicks 54 View   Vote 0 Like   3:15pm 25 Sep 2018 #
Blogger: kuldeep thakur
एक साधू किसी नदी के पनघट पर गया और पानी पीकर पत्थर पर सिर रखकर सो गया....!!!पनघट पर पनिहारिन आती-जाती रहती हैं!!!पनिहारिने आईं तो एक ने कहा- "आहा! साधु हो गया, फिर भी तकिए का मोह नहीं गया...पत्थर का ही सही, लेकिन रखा तो है।"पनिहारिन की बात साधू ने सुन ली...उसने तुरंत पत्थर फेंक दि... Read more
clicks 50 View   Vote 0 Like   9:33am 22 Aug 2018 #
Blogger: kuldeep thakur
शहरशहर ..... ही शहरहै,फैला हुआ,जहाँ तलक जाती नजर है शहर ..... ही शहरहै|फैली हुई कंक्रीट और का बड़ा अम्बार,वक्त की कमी से बिखरते रिश्ते,बढ़ती हुयी दूरी का कहर है,शहर ..... ही शहरहै|पैरो से कुचला हुआ,है अपनापन,बस खुद से खुद के साथ,विराना सफर है,शहर ...... ही शहरहै|मेरे दिल को ना भाया यह शह... Read more
clicks 76 View   Vote 0 Like   6:10am 12 May 2018 #Hindi
Blogger: kuldeep thakur
                      वो जो अक्सर फजर से उगा करते हैसुना है बहुत दिल से धुआं करते है।जलता है इश्क या खुद ही जल जाते हैकलमे में खूब चेहरे पढा करते है।फजल की बात पर खामोशी थमा देते हैबेवजह ही क्यों खुद को खुदा करते है?आयतें रोज ही लिखते है मदीने के लिएऔर अक्सर मगरिब ... Read more
clicks 65 View   Vote 0 Like   7:56am 11 May 2018 #
Blogger: kuldeep thakur
राजेश त्रिपाठी          वक्त कुछ इस कदर हम बिताते रहे ।दर्द  दिल  में  छिपा मुसकराते रहे ।।     जिसपे भरोसा किया उसने हमको छला।     परोपकार करके हमें क्या मिला।।     पंख हम बन गये जिनके परवाज के।     आज बदले हैं रंग उनके अंदाज के।। मुंह... Read more
clicks 83 View   Vote 0 Like   2:41pm 1 May 2018 #
Blogger: kuldeep thakur
पाँच लिंकों का आनन्द: 911... मेले- लोहड़ी-खिचड़ी की शुभकामनायें... Read more
clicks 87 View   Vote 0 Like   5:32am 17 Mar 2018 #
Blogger: kuldeep thakur
मंद मंद आंसू,आंखो में प्यास,सरकारी चिट्टीसूखा बदन,माथे से लगाए अपने खेत की मिट्टीदिल में उम्मीद,सीने में दर्द,भूखा और प्यासाकल दिखा इक किसान मुझे ओढ़े निराशाबंगला था साहब का,साहब भी आलीशान थाबैठा था बाहर भूखा इसी देश का किसान थावो आया था आशा लिए,संग लिए बेटी छोटीएक पन... Read more
clicks 98 View   Vote 0 Like   9:47am 16 Mar 2018 #
Blogger: kuldeep thakur
कविता मंच का बहुत बहुत आभार आपने मुझे अपने ब्लॉग पक आमंत्रित किया ।।दो पंक्तियो मे मेरा परिचयशिव शंकर का डमरू बाजे ताण्डव करे भयंकर ।उन शिव की मै पूजा करता मेरा नाम भयंकर ।।... Read more
clicks 87 View   Vote 0 Like   10:36am 15 Mar 2018 #
Blogger: kuldeep thakur
सोचता हूँ गढ़ दूँ मैं भी अपनी मिट्टी की मूर्ति, ताकि होती रहे मेरे अहंकारी-सुख की क्षतिपूर्ति। मिट्टी-पानी का अनुपात अभी तय नहीं हो पाया है, कभी मिट्टी कम तो कभी पर्याप्त पानी न मिल पाया है। जिस दिन मिट्टी-पानी का अनुपात तय हो जायेगा, एक सुगढ़ निष... Read more
clicks 82 View   Vote 0 Like   2:00pm 13 Mar 2018 #रवीन्द्र सिंह यादव
Blogger: kuldeep thakur
दर्द  दिल  में  छिपा मुसकराते रहेराजेश त्रिपाठीवक्त कुछ इस कदर हम बिताते रहे ।दर्द  दिल  में  छिपा मुसकराते रहे ।।     जिसपे भरोसा किया उसने हमको छला।     परोपकार करके हमें क्या मिला।।        पंख हम बन गये जिनके परवाज के।       आज बदले हैं ... Read more
clicks 83 View   Vote 0 Like   5:47am 7 Mar 2018 #
Blogger: kuldeep thakur
हमारी पौराणिक कथाऐं कहती हैं होली की कथा निष्ठुर ,एक थे भक्त प्रह्लाद पिता  जिनका हिरण्यकशिपु  असुर। थी उनकी बुआ होलिका थी ममतामयी माता कयाधु ,दैत्य कुल में जन्मे  चिरंजीवी प्रह्लाद साधु। ईश्वर भक्ति से हो जाय विचलित प्रह्लाद पिता ने किये नाना प... Read more
clicks 97 View   Vote 0 Like   5:42am 2 Mar 2018 #होली की कथा
Blogger: kuldeep thakur
Monday, November 1, 2010मैं बदन बेचती हूँ--मैं बदन बेचती हूँ--उस औरत के तन काकतरा-कतरा फुट बहा है तभी तो चीख-चीख कहती हाँ मै बदन बेचती हूँ अपनी तपिश बुझाने को नही पेट की भूख मिटाने को नही मै बेचती हूँ बदन ,हां बेचती हूँ मै भूख से बिलखते रोते -कलपते दो नन्हे बच्चो के लिए मैं अ... Read more
clicks 165 View   Vote 0 Like   5:18pm 5 Feb 2018 #
Blogger: kuldeep thakur
चली वासन्ती मलयनभ्रमरों का ये अनुगूंजन हैनवकलियों का यौवनदेता निश्छल आमन्त्रण हैकामदेव का रति सेचला प्रणय अनुराग हैबावली बन फिर रहीतितली बैठी पराग है।वासन्ती रंग रँगी वसुधाफिजां में छाई बहार है।फूलों का ओढ़ चादरप्रेमरस भरा श्रृंगार है।रस से भीगी है रसा जोबनी हर क... Read more
clicks 80 View   Vote 0 Like   12:11am 27 Jan 2018 #
Blogger: kuldeep thakur
मधुमास के प्रथम दिवस मेंहै प्रियम का ये अभिनन्दन प्रियेपूर्णचन्द्र की क्षीण कला सीअम्बर को छूती चपला सीलहराई यूँ कनक लता सीधरा अम्बर का है ये मिलन प्रिये।अंतर की मधुमयी विकलताअधरों में छलकी थिरकन सांसों के मनमोहक सुर मेंपलकों का निश्चल आमन्त्रण प्रिये।याद कर रही ... Read more
clicks 81 View   Vote 0 Like   9:34am 22 Jan 2018 #पंकज भूषण पाठक "प्रियम"
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