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कविता .."राष्ट्रीय स्वरों की अनुभूति " Poems By Aditya Kumar

घोर तिमिर है,कठिन डगर है,आगे का कुछ नहीं सूझता,पीछे हट जाने का डर है।मन में इच्छाएं बलशालीशोणित में भी वेग प्रबल है,रोज लड़ रहा हूँ जीवनसेटूट रहा अब क्यों संबल है।  मैंने अपनी राह चुनी हैदुर्गम, कठिन कंटकों वाली ,जो ऐसी मंजिल तक पहुंचेजो लगे मुझे कुछ गौरवशाली।  धूल धू...
कविता .."राष्ट्रीय स्वरों की अन...
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  August 22, 2013, 11:40 am
  burn me in the fire of suffering, at that level,           where the ego dies,              Pride Cries,         no malice and pain,        should not be remain.          almighty! Cut all bond of fascination,          should be dear one all the creation,                  remnants of jealousy,     ...
कविता .."राष्ट्रीय स्वरों की अन...
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  August 21, 2013, 12:27 pm
मुझे जलाओ पीडानल में, उस सीमा तक,जिस पर अहंकार मरता है,अभिमान आहें भरता है,बाकि न कुछ द्वेष रहे,और नहीं कुछ शेष रहे।हे देव ! काट दो बंधन सारे ,एक नहीं सब होवें प्यारे ,न इर्ष्या का अवशेष रहे,और नहीं कुछ शेष रहे।चिंता छोड़ करें सब चिंतनसुखमय हो जाए हर जीवनउन्नति देश करेऔर नह...
कविता .."राष्ट्रीय स्वरों की अन...
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  August 20, 2013, 7:06 pm
बार बार हमसे क्यों आकर उलझ उलझ करउलझ चुके कितने ही मुद्दे सुलझ सुलझ करऐसे मुद्दे सुलझाने में वक्त करें क्यों जायाअब तक सुलझा कर, बतला दो क्या पायाउनको अपना स्वागत सत्कार समझ ना आयाकिश्तवाड़ में हमें ईद त्यौहार समझ न आयाइतना सब कुछ हो जाने पर भारत चाहेगा मेल ?शायद भारत ...
कविता .."राष्ट्रीय स्वरों की अन...
Tag :hindustaan
  August 15, 2013, 1:49 am
पर्वत राज हिमालय जिसका मस्तक है जिसके आगे बड़े बड़े नतमस्तक है सिन्धु नदी की तट रेखा पर बसा हुआ गंगा की पावन धारा से सिंचित है जिसको तुम सोने की चिड़िया कहते थेछोटे बड़े जहाँ आदर से रहते थे  जहाँ सभी धर्मो को सम्मान मिला जहाँ कभी न श्याम श्वेत का भेद  हुआ जिसको राम लल...
कविता .."राष्ट्रीय स्वरों की अन...
Tag :Aditya kumar
  August 5, 2013, 11:15 am
मेरे मन का तुम आकर्षण होइस ह्रदय का तुम स्पंदन होतुम कुमकुम हो तुम चन्दन होतुम ताजमहल से सुन्दर होबस तुम ही मेरी प्रियतम होदुनिया में तुम सुन्दरतम होतुम ही हो मेरा प्रेम रागतुम ही हो मेरी प्रेम आगमै भ्रमर बना तुम हो परागतुम मन मंदिर का हो चिरागबस तुम ही मेरी प्रियतम ह...
कविता .."राष्ट्रीय स्वरों की अन...
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  August 2, 2013, 1:18 pm
India's women are being exploitedMalnutrition displayed gross spread. Politicians are blaming each other The life of Indian's is being bother Still, Ruler is building the nationHuman being is struggling in IndiaIndia is grappling with the scamWhat will be the fate of India?Politicians speech looks spamStill, Ruler is building the nation.Panchjanya now lost somewhereToday’s leader nations don't careSpeech have become adept at warAnd only traveling with luxurious Car.Still, Ruler is building the nation.Economical disaster has occurredInflation is up, Oh! I see What happen! Everyone is dazzledFalling the value of rupee,Still, Ruler is building the nation.All the Nominated ruler of future They...
कविता .."राष्ट्रीय स्वरों की अन...
Tag :English Poems By Aditya Kumar
  July 28, 2013, 5:54 pm
होरहामातृशक्तिकाशोषणचहुँदिशफैलाघोर  कुपोषणएकदूजेपरदोषारोपण  व्यथितहैजनगण मन केप्राण                     होरहाहैभारतनिर्माण । मचाहैभारतमेंसंग्रामघटितहैघोटालेअविरामक्याहोगाभारतकाअंजामजहाँहोकेवलव्यंग्यबाण      ...
कविता .."राष्ट्रीय स्वरों की अन...
Tag :Kavya sangrah
  June 13, 2013, 12:52 pm
सियासीनकाबमें,  वोजोचेहराछिपारहेहैदूरदर्शनपेजोहररोजहीसपनेदिखारहेहैअबरोककरविकासअगलेसत्रमेंकरेंगेसाफ़साफ़खोलकरकेयेसबकोबतारहेहैघीतेलचीनीआटासबकुछहुआमहंगारोजगारवालीबातपरठेंगादिखारहेहै   इनकमबढ़ीनहींहै, व्यापारहैसबठंडाऔकरकीदरबढ़ाकरडंडादिखा...
कविता .."राष्ट्रीय स्वरों की अन...
Tag :scams
  May 24, 2013, 12:57 pm
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कविता .."राष्ट्रीय स्वरों की अन...
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  August 19, 2011, 4:28 pm
देख देख ब्रिज होली जग बड़ा दंग है ,झूमे नांचे ब्रिज बसी बजत मृदंग है ।होली खेल पछताती राधा कान्हा संग है,सारा रंग छूट गया तेरा कैसा रंग है।तन रंगा मन रंगा मेरा अंग अंग रंगा,हिय में उतर गया राधा बड़ी तंग है।घाट हुआ रंगमय, यमुना में उमंग है,यमुना भई पुलकित उठती तरंग है ॥शब्...
कविता .."राष्ट्रीय स्वरों की अन...
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  March 19, 2011, 12:33 pm
हर पांच बरस के बादयदि बारिश होंगीजो भीगेगा निश्चित उसको खारिश होगी।पर रखना यह ध्यान दावा भी बाँटेंगे मत दाता का तलवा तक भी चाटेंगेकुछ रोज दया की मूरतबनकर बरसेंगे और पांच बरस तक फिर मतदाता तरसेंगेऐसे प्रत्याशी पर जितने भी मत पड़ते हैपांच बरस तक मत पेटी मै ही सड़ते है च...
कविता .."राष्ट्रीय स्वरों की अन...
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  October 24, 2010, 3:51 pm
जब गूंजे स्वर एक साथबोलो जय बाबा अमरनाथ,शोले भड़के हिम के ह्रदय मेंहुआ अम्लाछादित घाट घाट ।क्या भूल गए वह जन सागरजो उमड़ पड़ा था सड़कों पर ,काश्मीर जब बंद हुआ था ,हिन्दू शक्ति के दम पर।जिस सर्दी में बहता पानीभी जम कर हिमखंड हुआऐसी भीषण सर्दी में भीथा लोहू लावा बना दिया,और ...
कविता .."राष्ट्रीय स्वरों की अन...
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  September 21, 2010, 9:22 am
चलीसखियोंकेसंगराधिकारानी ,मटकी लेकर भरने को पानी,मधुबन में अतिशय हरियाली ,कूकती कोयल झूमती डाली ,पनघट से मटकी भर कर के ,लौट के घर को , जा वो रहीं थी ।सखियों के संग मिल कर के कोईगीत सुहाना गा वो रहीं थी ।दूसरी ओर.....यशोधरा नंदन कृष्ण कन्हैया ,चरा रहे ग्वाल सखा संग गैया ।देख क...
कविता .."राष्ट्रीय स्वरों की अन...
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  September 2, 2010, 6:25 pm

प्रेम है नहीं जाल कोई ये तो कच्ची डोर है ,जिसका मैं एक छोर हूँ , उसका तू एक छोर है ,प्रेम है स्वयमेव पूजा अर्चना आराधना हैवासना से मुक्त है जो प्रेम तो वह साधना हैस्वयं सदृश ईश के प्रेम निर आकर है ,मात्र एक अनुभूति है फिर भी ये साकार है ,नभ से ऊंचा गहरा सागर सम ,ही होता है प्या...
कविता .."राष्ट्रीय स्वरों की अन...
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  August 20, 2010, 10:27 am
तुम्ही आरती तुम ही पूजा ,तुम्ही अर्चना तुम आराधन ,तुम ही मेरा इष्ट देव हो ,तुम ही धरती तुम्ही गगनतुम ही जल हो तुम्ही वायुतुम्ही प्राण हो तुम स्नायुतुम ही मेरा तन मन धन होऔर तुम्ही मेरा जीवन हो ,तुम ही वर्षा तुम ही तृष्णातुम ठंडक हो तुम्ही उष्णा,तुम ही मेरा प्रेम सरोवर ,और ...
कविता .."राष्ट्रीय स्वरों की अन...
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  August 19, 2010, 10:45 am
दिन के उजाले रातों केवीराने लगने लगते हैं ,जब खंजर तेरी यादों केदिल में चुभने लगते हैं ।जब हम मन ही मन घुट जाते हैंसारे आंसू पी जाते हैं,जब पैमाने खली हो कर ,एक ओर हो जाते हैं ,जब मधु शाला के दरवाजों मेंभी सांकल चढ़ जाती है ,तब धरती से सूरज की दूरीथोड़ी बढ जाती है ।रातों को ते...
कविता .."राष्ट्रीय स्वरों की अन...
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  August 4, 2010, 11:15 am
मुझे कलम और तलवार चलानी आती है ,जो तोपों से टक्कर ले दीवार बनानी आती है ,गर्दन जो निज सत्रु के सम्मुख जुख जाया करती है ,ऐसी ही गर्दन आसानी से कट जाया करती है ।आगे अमरीकन ताकत के मिमिआना छोड़ो ,आतंक वाद से खाकर मुह की खिसिआना छोड़ो ,बार बार विस्फोटो को दिवाली समझो ,जले हुए खे...
कविता .."राष्ट्रीय स्वरों की अन...
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  June 26, 2010, 1:37 pm
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