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Blog: चाँद सितारे फूल और जुगनू

Blogger: sehba jafri
 क्षमा क्षमा क्षमा प्रियवरआत्मीय, वंदनीय क्षमा ! हर दुर्बलता वश हुए पाप पर हर झूठ, हर द्वंद, हर कलाप पर हर युद्ध, हर वध, हर प्रपंच छल पर हर दीनता, हर विवश हल पर क्षमा करना हे आत्मीय मुझको कि जन्म मानव का मिला है दानव कर्म भी करने होंगे पाप और पुण्य से आगे म... Read more
clicks 4 View   Vote 0 Like   9:21am 23 Aug 2020 #
Blogger: sehba jafri
           हाँ! वह "औरत " है ज़मीन पर रब के तमाम एहसानों में से एक बेशक़ीमती एहसान।  ज़मीन की ज़ीनत , ज़िन्दगी की तल्ख  फ़िज़ाओं में  राहत-बख़्श झौंका! दर्द की दवा, थके हुए ज़हन का आराम ; रेगिस्तान सी प्यास में ज़िन्दगी की ठंडी फ़ुहार।  जो न हो तो कायनात की पूरी धड़कन रुक ज... Read more
clicks 11 View   Vote 0 Like   9:17am 4 Mar 2020 #
Blogger: sehba jafri
दिलएकदरियादश्तकिनारे                                                         - सेहबा  जाफ़री"आह! वहकोईसुरमईशामकीसाईत रहीहोगी। दिनवही, जिन्हेज़मीनपरदिसंबरकेशुरुआतीदिनकहाजाताहै. फ़रिश्तेगोश्तकेजिसनाज़ुकगुलाबीअज़ाँ कोठोक-पीटकर तैयारक... Read more
clicks 157 View   Vote 0 Like   6:34am 14 Feb 2015 #
Blogger: sehba jafri
शुरू उस रब के नाम से जो बहुत मेहरबान और रहमवाला है ऐ मेरे मौला ! ऐ सब ऐबों से पाक परवर दिगार ! इंसानियत की पेशानी  पर "इक़रा " (पढ़ ) का  बोसा देने वाले , आज दिल जिस बेबसी में तेरे पास आया है , क्या वह दिल तूने नहीं बनाया ! इंसानियत को अम्नो-अमां के ज़रिये अपनी ख़ुशनूदी हासिल... Read more
clicks 256 View   Vote 0 Like   7:29am 17 Dec 2014 #
Blogger: sehba jafri
मेरे लाडले,              खुश हो न तुम ,                         अल्लाह मियाँ की जन्नत में तो सुना है, सब खुश ही रहते हैं। अम्मा को शायद कभी कभी याद करते होगे, (ऐसा मुझे लगता है , क्योंकि कभी कभी  बेवजह तुम्हारी नन्न्हीं आँखें भरी हुई दिखती हैं) मगरअम्मा क... Read more
clicks 255 View   Vote 0 Like   7:42pm 16 Nov 2014 #
Blogger: sehba jafri
कभी नरमी, कभी सख्ती , कभी उजलत, कभी देर वक़्त ऐ दोस्त ! बहरहाल गुज़र  जाता है लम्हा -लम्हा नज़र आता है कभी एक साल कभी लम्हों की तरह साल गुज़र जाता है                                                                -नए साल की नयी आमद मुबारक ... Read more
clicks 215 View   Vote 0 Like   2:02pm 1 Jan 2014 #
Blogger: sehba jafri
होने लगा था मुझे गुब्बारों  से प्यार रोकने लगी थी मैं सड़क से गुज़रते चर्ख़ी वाले को झाँकने लगी थी मै ख़्वाबों के झरोखों में  जब तुम्हारी धड़कनेमेरी धड़कनो में शामिल हो धड़कने लगीं थींफिर से सीखने शुरू कर दिए थे मैंने बच्चों के खेलफिर से बनाने लगी ... Read more
clicks 318 View   Vote 0 Like   5:20am 14 Nov 2013 #
Blogger: sehba jafri
"अब सिर  पर दीवाली खड़ी है, काम, बच्चे , कपडे, रिश्तेदार भगवान् सभी को निभाना मनाना है, और उप्पर से इनकी किट किट।"  भगवान् जाने मैं  कैसे निभा गयी  इनसे।  दीप्ती  बड़ बड़  करती कमरे से आँगन  तक आयी और तुलसी चौरा झाड़ने लगी।  "चली जाओ अपनी माँ के घर , किसने निबाहन... Read more
clicks 322 View   Vote 0 Like   8:44am 1 Nov 2013 #
Blogger: sehba jafri
                नींद मे डूबे हुए से        ऊँघते अनमने जंगल।झाड ऊँचे और नीचे,चुप खड़े हैं आँख मीचे,घास चुप है, कास चुप हैमूक शाल, पलाश चुप है।बन सके तो धँसो इनमें,धँस न पाती हवा जिनमें,सतपुड़ा के घने जंगलऊँघते अनमने जंगल।          &n... Read more
clicks 231 View   Vote 0 Like   10:40am 3 Oct 2013 #
Blogger: sehba jafri
 मै  बस्स नींद में बहली मै बस्स  ख्व़ाब में चली मै पारिजात की डाल पर कांपती कली स्नेह के दुश्मन काँटों संग पली और प्रेम!तुम मुझे नहीं मिले प्रेम तुम कृष्ण ही रहे ……तुम्हे कल्नाओं में जीती सचमुच  में आंसू पीतीजीवन डगर पर एकाकी बढ़ती रहीऔर प्रे... Read more
clicks 269 View   Vote 0 Like   10:18am 28 Aug 2013 #
Blogger: sehba jafri
दिल की बंजर ज़मीन परफिर से उग रही है ख़्वाबों की गाजरघास यूं ही लहलहाएगी एक पूरा मौसमऔर फिर  तैयार होगा अगली ठण्ड के अलाव का सामानख़्वाबों का इससे बेहतर इस्तेमालऔर क्या होगा                               - सहबा जाफ़री ... Read more
clicks 251 View   Vote 0 Like   9:59am 17 Aug 2013 #
Blogger: sehba jafri
आज़ादी औरत की....सहबा जाफ़रीShare on facebookShare on twitterMore Sharing ServicesFILEआज़ादी की कीमत उन चिड़ियों से पूछो जिनके पंखों को कतरा है, आ'म रिवाज़ों ने आज़ादी की कीमत, उन लफ़्ज़ों से पूछो जो ज़ब्तशुदा साबित हैं सब आवाज़ों मेंआज़ादी की क़ीमत, उन ज़हनों से पूछो जिनको कुचला मसला है, महज़ गुलाम... Read more
clicks 196 View   Vote 0 Like   11:25am 14 Aug 2013 #
Blogger: sehba jafri
सियासी गुफ़्तगू  यूँ  मत मनाओ ईद रहने दो बेनूरो रंगों बू यूं मत मनाओ ईद रहने दो न चाहत है, न राहत है, न साईत भी है चन्दा की ऐसे  बेसुकूं  यूं मत मनाओ ईद रहने दोइबादत चाँद रातों की, वह भी सब्र के एवज़ है आबिद बेवुज़ू  पर , यूं मत मनाओ ईद रहने दोगले मिलते थे गल... Read more
clicks 194 View   Vote 0 Like   4:11am 10 Aug 2013 #
Blogger: sehba jafri
मुझे शिकवा नहीं कि तुमने मेरा बुत तराशा है मुझे दुःख भी नहीं तुमने मुझे क़ैदी  बनाया हैमुझे तुम सर झुकाते होतो मेरी आँख रोती है मुझे खुशबू लगाते हो मुझे तक्लीफ़ होती है की तुमने मुझको क़ैद करके  फ़िरकों का ताला गढ़ लिया है अपने पालनहार  को ख़ुद... Read more
clicks 202 View   Vote 0 Like   5:03am 31 Jul 2013 #
Blogger: sehba jafri
किस्मत ने जो ज़ख़्म दिए हैं उनसे रूप सजाया है दुनिया से जो कुछ भी पाया  दुनिया को लौटाया है इस आँचल को कहाँ मयस्सर चाँद सितारे फूल और जुगनूमिट्टी से ही ख्वाब गढ़ें हैं, और दिल को बहलाया है,... Read more
clicks 199 View   Vote 0 Like   4:11am 25 Jul 2013 #
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