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FaceBook और  Whatsup के ज़माने में और U CHEAT.......U SHUT UP----UUUUUU SHUT UP के दौर में एक ’क्लासिकल’ युगल  शिकायती :   गीत कैसे कह दूँ कि अब तुम बदल सी गईवरना क्या  मैं समझता नहीं  बात क्या !एक पल का मिलन ,उम्र भर का सपनरंग भरने का  करने  लगा  था जतनकोई धूनी रमा , छोड़ कर चल गयालकड़ियाँ कुछ है...
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  April 22, 2017, 6:43 pm
चन्द माहिया : क़िस्त 37:1:सद ख़्वाब ,ख़यालों मेंजब तक  है परदाउलझा हूँ सवालों में ;2:शिकवा  न शिकायत हैमैं ही ग़लत ठहराये कैसी रवायत है:3:तुम ने ही बनाया है ख़ाक से जब मुझ को फिर ऎब क्यूँ आया है ?:4:सच है इनकार नहीं’तूर’ पे आए ,वोलेकिन दीदार नहीं :5;कहता है कहने दोबात ज़हादत कीज़...
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  April 20, 2017, 5:29 pm
उर्दू बह्र पर एक बातचीत :क़िस्त 30 [ बह्र-ए-हज़ज [ सालिम बह्र-1]Discliamer clause -वही जो क़िस्त 1 में है फिछली क़िस्त में हमने बहर मुतक़ारिब और बहर मुतदारिक की सालिम , मुज़ाहिफ़ और इसकी  ’मुज़ाअफ़’  पर चर्चा कर चुके है । हालाँ कि उसके बाद भी  चर्चा की और भी गुंजाइश थी मगर ज़रूरी नहीं थी।ये दोन...
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  April 17, 2017, 4:24 pm
चन्द माहिया : क़िस्त 36:1:दुनिया को दिखाना क्या !दिल से नहीं मिलनाफिर हाथ मिलाना क्या !:2:कुछ तुम को ख़बर भी हैमेरे भी दिल मेंइक ज़ौक़-ए-नज़र भी है:3:गुरबत में हो जब दिलदर्द अलग अपनाकहना भी है मुश्किल:4;जितनी  भी हो अनबनतुम पे भरोसा हैरूठो न कभी , जानम !:5:मेरी भी तो सुन लेतेमैं जो ग़लत ह...
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  April 8, 2017, 11:45 am
चन्द माहिया : क़िस्त 35:1:सजदे में पड़े हैं हमलेकिन जाने क्यूँ दिल है दरहम बरहम;2;जब से है तुम्हें देखादिल ने कब मानीकोई लक्ष्मन  रेखा:3:क्या बात हुई ऐसीतेरे दिल में अबचाहत न रही वैसी:4:समझो न कि पानी है क़तरा आँसू काख़ुद एक कहानी है:5:वो शाम सुहानी हैजिसमें है शामिलकुछ याद पु...
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  March 28, 2017, 7:55 pm
मंच के सभी सदस्यों /मित्रों को इस अकिंचन का होली की बहुत बहुत शुभकामनायें ---इस गीत के साथलगा दो प्रीति का चन्दन मुझे इस बार होली में महक जाए ये कोरा तन-बदन इस बार होली में ये बन्धन प्यार का है जो कभी तोड़े से ना टूटेभले ही प्राण छूटे पर न रंगत प्यार की  छूटेअकेले मन नही...
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  March 12, 2017, 12:40 pm
                                                   "बिखरीं पड़ीं हैं"   "बिखरीं पड़ीं हैं"संवेदनाओं के शब्द भारित नेत्र में टिकतें नहीं हैंआसमां के स्वप्न रंजित धूल में बिखरें पड़ें हैं,विश्वास की पराकाष्ठा हो चली निराशा  दिखतें मुझको नहीं ...
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Tag :कड़ियाँ
  March 7, 2017, 11:36 pm
उर्दू बह्र पर एक बातचीत : क़िस्त 26 [बह्र-ए-मुतदारिक-1]Discliamer clause -वही जो क़िस्त 1 में है बह्र-ए-मुतदारिक का बुनियादी रुक्न है -’फ़ा इलुन’ [ 2 12 ] =सबब-ए-ख़फ़ीफ़ [2 ]+वतद-ए-मज़्मुआ [1 2]बहर-ए-मुतदारिक की सालिम बह्रें1-बह्र-ए-मुतदारिक मुरब्ब: सालिम  [212 -212] फ़ाइलुन---फ़ाइलुन   [मिसरा में दो बार यानी  ...
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  March 7, 2017, 12:55 pm
 उर्दू बह्र पर एक बातचीत : क़िस्त 25 [ मुतक़ारिब की मुज़ाहिफ़ बह्र -3]Discliamer clause -वही जो क़िस्त 1 में है ]पिछली क़िस्त में हम मुतक़ारिब की इन बहूर पर चर्चा कर चुके हैं1- बहर-ए-मुतक़ारिब मुरब्ब: सालिम    [122---122] 2- बहर-ए-मुतक़ारिब मुसद्दस सालिम  [122---122---122]3-बहर-ए-मुतक़ारिब  मुसम्मन  सालिम [122---122--...
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  March 4, 2017, 1:20 pm
 उर्दू बह्र पर एक  बातचीत :क़िस्त 24 [ मुतक़ारिब की मुज़ाहिफ़ बह्र-2 ] पिछली क़िस्त में हम बहर-ए-मुतक़ारिब मुसम्मन और मुसद्दस सालिम और उसकी मुज़ाइफ़ रुक्न पर चर्चा कर चुके हैं ।अब इस बहर की मुज़ाहिफ़ शकल की चर्चा करेंगे।Discliamer clause -वही जो क़िस्त 1 में है ]आप ने हिन्दी फ़िल्म ’आरज़ू” का यह ...
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  February 27, 2017, 1:21 pm
जीवन में सबको नहीं, मिल पाता है प्यारबिन माँगे मिल जाय जो, वो होता उपहारकरना दग़ा-फरेब मत, कभी किसी के साथसम्बन्धों पर है खड़ी, दुनिया की दीवार...
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Tag :प्यार
  February 19, 2017, 6:32 am
जीवन में सबको नहीं, मिल पाता है प्यारबिन माँगे मिल जाय जो, वो होता उपहारकरना दग़ा-फरेब मत, कभी किसी के साथसम्बन्धों पर है खड़ी, दुनिया की दीवार...
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Tag :मुक्तक
  February 19, 2017, 6:32 am
जहाँ पर फूल हों खिलते, वही उद्यान होता है किसी के तोड़ना दिल को, बहुत आसान होता है सभी को बाँटती खुशियाँ, कली जब मुस्कराती है सभी को रूप पर उसके, बहुत अभिमान होता है ...
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Tag :मुक्तक
  February 18, 2017, 6:47 am
मुक्तकप्यार की गन्ध का कुछ मजा लीजिए।साज खुशियों के अब तो बजा लीजिए।जिन्दगी को जियो रोज उन्मुक्त हो,अपने उजड़े चमन को सजा लीजिए।। ...
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  February 17, 2017, 5:48 am
    वैलेन्टाईन डे :उर्फ़  प्याज-पकौड़ी चाय जाड़े की गुनगुनी धूप। धूप सेंकता मै।।रेडियो पर बजता गाना .....दो सितारों का ज़मीं पर है मिलन आज की रात मुस्कराता है उमीदो का चमन  आज की रात --गाने के सुर में अपना सुर मिलाया ही थारंग लाइ है मेरे दिल की लगन की आज की रात सारी दु...
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  February 9, 2017, 12:46 pm
एक गीत : जाने क्यों ऐसा लगता है....जाने क्यों ऐसा लगता हैकटी कटी सी रहती हो तुम -सोच सोच कर मन डरता है जाने क्यों ऐसा लगता है कितना भोलापन था तेरी आँखों में जब मैं था खोताबात बात में पूछा करती -"ये क्या होता? वो क्या होता?"ना जाने क्या बात हो गई,अब न रही पहली सी गरमी कहाँ गय...
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  February 3, 2017, 4:43 pm
Laxmirangam: एक रात की व्यथा कथा: एक रात की व्य था - कथा बहुत मुश्किल से स्नेहा ने अपना तबादला हैदराबाद करवा या था चंडीगढ़ से. पति प्रीतम पहले से ही हैदराबाद में नियुक्त......
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  February 3, 2017, 12:59 pm
उर्दू बह्र पर  बातचीत : क़िस्त 23 [ बह्र-ए-मुतकारिब -1]Discliamer clause -वही जो क़िस्त 1 में है ]नोट : चूँकि किसी बह्र पर पूरी  चर्चा , किसी एक क़िस्त में समेटना संभव नहीं है अत: पाठकों की सुविधा के लिए हर बह्र के आगे 1---2---3---4 लिखते चलेंगे ।  क़िस्त अपनी रौ में राह-ए-रवा रहेगी ].......---पिछली क़िस्त मे...
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  January 26, 2017, 1:50 pm
उर्दू बह्र पर एक बातचीत : क़िस्त 22 [ बह्र][[Disclaimer Clause  : वही जो क़िस्त 1 में है]आप जानते हैं कि उर्दू शायरी में 19-बहूर [ बह्र की जमा] प्रचलित हैं जो निम्न हैसालिम बहर1बह्र-ए-मुतक़ारिब2बह्र-ए-मुतदारिक3बह्र-ए-हज़ज4बह्र-ए-रमल5बह्र-ए-रजज़6बह्र-ए-वाफ़िर7बह्र-ए-कामिलमुरक़्क़ब बहर 8बह्र-ए-तवील9बह...
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  January 23, 2017, 7:52 pm
एक ग़ज़ल : यकीं होगा नहीं तुम को....यकीं होगा नहीं तुमको  मिरे तर्ज़-ए-बयाँ  सेजबीं का एक ही रिश्ता तुम्हारे आस्ताँ  सेफ़ना हो जाऊँगा जब राह-ए-उल्फ़त में तुम्हारीज़माना तुम को पहचानेगा  मेरी दास्ताँ  सेमिली मंज़िल नहीं मुझको भटकता रह गया हूंबिछुड़ कर रह गया  हूँ  ज़िन्द...
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  January 22, 2017, 1:28 pm
                                  उर्दू बह्र पर एक बातचीत : क़िस्त 21 [ज़िहाफ़ात][[Disclaimer Clause  : वही जो क़िस्त 1 में है]..............पिछली कड़ियों में मैने ज़िहाफ़ात के बारे में कुछ चर्चा की थी जैसे सबब-ए-ख़फ़ीफ़ पर लगने वाले ज़िहाफ़ ,सबब-ए-सक़ील पर लगने वाले ज़िहाफ़ ,वतद-ए-मज्मुआ पर लगने वाल...
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  January 21, 2017, 9:51 pm
                                दो  मुक्तक :1:बात यूँ ही  निकल गई  होगीरुख़ की रंगत बदल गई होगीनाम मेरा जो सुन लिया  होगाचौंक कर वो सँभल गई होगी:2;कौन सा है जो ग़म दिल पे गुज़रा नहींबारहा टूट कर भी  हूँ   बिखरा   नहींअब किसे है ख़बर क्या है सूद-ओ-ज़ियाँइश्क़ क...
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  January 20, 2017, 3:34 pm
उर्दू बह्र पर एक बातचीत "क़िस्त 20 [मुरक़्क़ब ज़िहाफ़ात][[Disclaimer Clause  : वही जो क़िस्त 1 में है] ----पिछली कड़ी में हम 4-मुरक़्क़ब ज़िहाफ़्  ख़ब्ल्......शक्ल्.......ख़रब्.......सरम्...... पर् चर्चा कर चुके हैं । अब कुछ और मुरक़्क़ब  ज़िहाफ़ात की चर्चा करेंगे5-ज़िहाफ़ सतर : यह मिश्रित [मुरक़्क़ब] ज़िहाफ़ भी दो मुफ़र्द ज़...
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  January 18, 2017, 2:55 pm
उर्दू बह्र पर एक बातचीत "क़िस्त 19 [मुरक़्क़ब ज़िहाफ़ात][[Disclaimer Clause  : वही जो क़िस्त 1 में है]----- पिछली  क़िस्तों में ,अब तक हम ’मुफ़र्द ज़िहाफ़’ का ज़िक़्र कर चुके है यानी वो एकल ज़िहाफ़ जो सालिम रुक्न पर अकेले और एक बार ही लगता है। मुरक़्क़ब ज़िहाफ़ -दो या दो से अधिक ज़िहाफ़ - से मिल कर बनता है । कभी ...
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  January 11, 2017, 1:19 pm
एक ग़ज़ल : गो धूप तो हुई है.....गो धूप तो हुई है , पर ताब वो नहीं हैजो ख़्वाब हमने देखा ,यह ख़ाब वो नही हैमज़लूम है कि माना ख़ामोश रहता अकसरपर बे नवा नही है ,बे आब वो नही हैकुछ मग़रिबी हवाओं का पुर असर है शायदफ़सले नई नई हैं ,आदाब वो नहीं हैअपने लहू से सींचा है जाँनिसारी कर केआई बहार लेकिन...
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  January 6, 2017, 7:17 pm
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