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Blog: आपका ब्लॉग

Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
एक ग़ज़ल : भले ज़िन्दगी से हज़ारों ---भले ज़िन्दगी से  हज़ारों शिकायतजो कुछ मिला है उसी की इनायतये हस्ती न होती ,तो होते  कहाँ सबफ़राइज़ , शराइत ,ये रस्म-ओ-रिवायतकहाँ तक मैं समझूँ ,कहाँ तक मैं मानूये वाइज़ की बातें  वो हर्फ़-ए-हिदायतन पंडित ,न मुल्ला ,न राजा ,न गुरबारह-ए-मर्ग में ना क... Read more
clicks 4 View   Vote 0 Like   5:09am 11 Nov 2019 #
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
हे हरसिंगारओ शेफालीअरी ओ प्राजक्ता !सुना हैतू सीधे स्वर्ग सेउतर आई थीकहते हैसत्यभामा की जलनदेवलोक सेपृथ्वी लोक परतुझे खींच लाई थीतू ही बताहै ये चन्द्र का प्रेमया सूर्य से विरक्तिकि बरस मेंफ़कत एक माससिर्फ रात कोदेह तेरीहरसिंगार के फूलों सेभरभराई थी !... Read more
clicks 14 View   Vote 0 Like   7:16pm 5 Nov 2019 #
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
एक ग़ज़ल : दुश्मनी कब तक-----दुश्मनी कब तक निभाओगे कहाँ तक  ?आग में खुद को जलाओगे  कहाँ  तक  ?है किसे फ़ुरसत  तुम्हारा ग़म सुने जोरंज-ओ-ग़म अपना सुनाओगे कहाँ तक ?नफ़रतों की आग से तुम खेलते होपैरहन अपना बचाओगे  कहाँ  तक ?रोशनी से रोशनी का सिलसिला हैइन चरागों को बुझाओगे कहाँ... Read more
clicks 2 View   Vote 0 Like   6:38am 3 Nov 2019 #
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
तुम ही कहो न क्या मैं ख्वाहिश कोदेर तक याद में तेरी ....जागने की ...इजाज़त दूं ?तुम ही कहो नक्या मैं यादों कोखुदा के सजदे सानाम  और दर्ज़ाइबादत दूं ?तुम ही कहो नक्यों इन  हवाओं नेतुझसे लिपटने की बदमाशियां की और शरारत क्यूं ?तुम ही कहो नक्या ग़ज़ल मैं हूं ?इक नज़्म सी म... Read more
clicks 38 View   Vote 0 Like   6:26pm 2 Nov 2019 #
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
दीपावली पर विशेष-------एक गीत : आओ कुछ दीप हम जलाएँ---एक अमा और हम मिटाएँआओ कुछ दीप हम जलाएँखुशियाँ उल्लास साथ लेकरयुग युग से आ रही दिवालीकितना है मिट सका अँधेराकितनी दीपावली  मना  लीअन्तस में हो घना अँधेरा ,आशा की किरण हम जगाएँ,आओ कुछ दीप हम जलाएँनफ़रत की हवा बह रही हैऔर इध... Read more
clicks 7 View   Vote 0 Like   6:37am 26 Oct 2019 #
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
कुड़िये कर कुड़माई,बहना चाहे हैं,प्यारी सी भौजाई।धो आ मुख को पहले,बीच तलैया में,फिर जो मन में कहले।।गोरी चल लुधियाना,मौज मनाएँगे,होटल में खा खाना।नखरे भारी मेरे,रे बिक जाएँगे,कपड़े लत्ते तेरे।।ले जाऊँ अमृतसर,सैर कराऊँगा,बग्गी में बैठा कर।तुम तो छेड़ो कुड़ियाँ,पंछी बिणजार... Read more
clicks 1 View   Vote 0 Like   2:41am 20 Oct 2019 #माहिया
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
कौन समय को रख सकता है, अपनी मुट्ठी में कर बंद।समय-धार नित बहती रहती, कभी न ये पड़ती है मंद।।साथ समय के चलना सीखें, मिला सभी से अपना हाथ।ढल जातें जो समय देख के, देता समय उन्हीं का साथ।।काल-चक्र बलवान बड़ा है, उस पर टिकी हुई ये सृष्टि।नियत समय पर फसलें उगती, और बादलों से भी वृष्ट... Read more
clicks 2 View   Vote 0 Like   2:36am 20 Oct 2019 #आल्हा छंद
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
[ विजय दशमी के पर्व पर विशेष----एक व्यंग्य ----रावण का पुतला ---- आज रावण वध है । 40 फुट का पुतला जलाया जायेगा । विगत वर्ष 30 फुट का पुतला जलाया गया था। इस साल रावण का कद बढ़ गया । पिछ्ले साल से इस साल लूट-पाट ,अत्याचार ,अपहरण ,हत्या की घटनायें बढ़ गई तो ’रावण’ का  कद भी बढ गया।रावण बल... Read more
clicks 4 View   Vote 0 Like   5:43am 6 Oct 2019 #
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
लक्ष्मीरंगम - Laxmirangam: कृपया टिप्पणियाँ ब्लॉग पर करें. G+ की टिप्पणियाँ...: कृपया टिप्पणियाँ ब्लॉग पर करें.  हिंदी पर राजनीतिआज हमारे देश भारत में किसी भी मुद्दे पर राजनीति संभव है। चाहे वह क्षेत्र हो , भाषा हो, सवर्ण या दलित संबंधी हो, सेना हो या कोई व्यक्ति विशेष ही क्यों ... Read more
clicks 5 View   Vote 0 Like   4:52am 1 Oct 2019 #
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
चिड़िया: कहो ना, कौनसे सुर में गाऊँ ?: कहो ना, कौनसे सुर में गाऊँ ? जिससे पहुँचे भाव हृदय तक, मैं वह गीत कहाँ से लाऊँ ? इस जग के ताने-बाने में अपना नाता बुना ना जाए ना जाने...... Read more
clicks 31 View   Vote 0 Like   5:00pm 29 Sep 2019 #
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
मैं जीना चाहूं बचपन अपना,पर कैसे उसको फिर जी पाऊं!मैं उड़ना चाहूं ऊंचे आकाश,पर कैसे उड़ान मैं भर पाऊं!मैं चाहूं दिल से हंसना,पर जख्म न दिल के छिपा पाऊं।मैं चाहूं सबको खुश रखना,पर खुद को खुश न रख पाऊं।न जाने कैसी प्यास है जीवन में,कोशिश करके भी न बुझा पाऊं।इस चक्रव्यूह से ... Read more
clicks 9 View   Vote 0 Like   5:47am 21 Sep 2019 #
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
एक ग़ज़लजान-ए-जानाँ  से  क्या  माँगू ?दर्द-ए-दिल की दवा माँगूहुस्न उनका क़यामत हैदाइमी की  दुआ  माँगूक़ैद हूँ जुर्म-ए-उल्फ़त मेंउम्र भर की सज़ा  माँगूज़िन्दगी भर नहीं  उतरेइश्क़ का वह नशा माँगूसादगी  से  मुझे  लूटावो ही तर्ज-ए-अदा माँगूआप की बस इनायत होआप से और क्... Read more
clicks 6 View   Vote 0 Like   7:35am 20 Sep 2019 #
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
लक्ष्मीरंगम - Laxmirangam: ऐसे सिखाएँ हिंदी: कृपया टिप्पणियाँ ब्लॉग पर करें. G+ की टिप्पणियाँ अस्वीकार्य कर दी गई हैं. ऐसे सिखाएँ हिंदी मैं, मेरे हिंदी की शिक्षिका के सा...कृपया टिप्पणियाँ ब्लॉग पर करें. G+ की टिप्पणियाँ अस्वीकार्य कर दी गई हैं.https://laxmirangam.blogspot.com/2019/09/blog-post.htmlऐसेसिखाए... Read more
clicks 28 View   Vote 0 Like   5:48pm 13 Sep 2019 #
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
एक ग़ज़ल मैं अपना ग़म सुनाता हूँ ,वो सुन कर मुस्कराते हैंवो मेरी दास्तान-ए-ग़म को ही नाक़िस बताते हैंबड़े मासूम नादाँ हैं  ,खुदा कुछ अक़्ल दे उनकोकिसी ने कह दिया "लव यू" ,उसी पर जाँ लुटाते हैंख़ुशी अपनी जताते हैं ,हमें किन किन अदाओं सेहमारी ही ग़ज़ल खुद की बता, हमको सुनाते हैंतुम्... Read more
clicks 10 View   Vote 0 Like   6:19am 13 Sep 2019 #
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
14-सितम्बर , हिंदी दिवस के अवसर पर विशेष-----]एक व्यंग्य : हिंदी पखवारा और मुख्य अतिथि "अरे भाई मिश्रा जी ! कहाँ भागे जा रहे हो ? " ---आफिस की सीढ़ियों पर मिश्रा जी टकरा गए’भई पाठक ! तुम में यही बुरी आदत है है । प्रथमग्रासे मच्छिका पात:। तुम्हें मालूम नहीं कि आज से ’हिन्दी पखवारा"शुर... Read more
clicks 29 View   Vote 0 Like   5:39am 10 Sep 2019 #
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
तुमने देखा तो होगा मेरा घर मैं मेरे घर में अपनों के बीच अपनेपन से रहती हूँ ..‘मेरे ’  घर में तीन बेडरूम एक हॉल और किचन के अलावा एक स्टोररूम और पूजा का एक कोना है ..और हाँअपनी हैसियत के हिसाब से सजा रखा है मैंने  घर अपना ..हर रोज़ बाई आती हैमेरे  घर&n... Read more
clicks 24 View   Vote 0 Like   11:54am 5 Sep 2019 #
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
“मत लिखो !”‬-चार्ल्ज़ बुकोवस्की ने कहा था,तब तक किजब तक लिखने कीहवस नहीं होती -यही कहा था उन्होंने !!और भी बहुत कुछ !कहा था किहोते है करोड़ों लेखकमुझ से जो ख़यालों मेंस्वमैथुन करते हैऔर बन जाते हैसवघोषित लेखक !मगर चार्ल्ज़,मैं क्या करूँ ?जब लार सेटपकने लगते है ये शब्द,क़ल... Read more
clicks 32 View   Vote 0 Like   11:50am 10 Aug 2019 #
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
लड़कियाँ अनाज के आटे सी होती है ..गाँव की लड़की बाजरा मक्का या जवारहोती है शहरी लड़कियाँ मैदे या गेहूँ सा ग़ुबार होती है ...बेली ही जाती है सब रोटी पराँठा लिट्टी क़ुल्चे सी और खाई जाती है बस भूख (!) मिटाने के लिए ..... Read more
clicks 66 View   Vote 0 Like   3:16pm 3 Aug 2019 #
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
तुम्हें खोजते हुएपहुँच जाना मेरा हर बार उस क्षितिज पेजहाँ कदाचितआदम हौवा पहली दफ़े  मिले थे ...अथक  प्रयास करना मेरा हम दोनों के अस्तित्व के jigsaw puzzle से ख़यालों के और रूह के  टुकड़े जो कदाचित एक दूसरे में फ़िट बैठने के लिए बने थे मगर ये तुम्हारे... Read more
clicks 10 View   Vote 0 Like   1:42pm 3 Aug 2019 #
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
एक ग़ज़ल : साज़िश थी अमीरों की--साज़िश थी अमीरों की ,फाईल में दबी होगीदो-चार मरें होंगे  ,’कार ’ उनकी  चढ़ी  होगी’साहब’ की हवेली है ,सरकार भी ताबे’ मेंइक बार गई ’कम्मो’ लौटी न कभी  होगीआँखों का मरा पानी , तू भी तो मरा होगाआँगन में तेरे जिस दिन ’तुलसी’ जो जली होगीपैसों की गवा... Read more
clicks 18 View   Vote 0 Like   5:16am 29 Jul 2019 #
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
एक ग़ज़लसलामत पाँव है जिनके वो कन्धों पर टिके हैंजो चल सकते थे अपने दम ,अपाहिज से दिखे हैकि जिनके कद से भी ऊँचे "कट-आउट’ हैं नगर मेंजो भीतर झाँक कर देखा बहुत नीचे गिरे हैंबुलन्दी आप की माना कि सर चढ़  बोलती  हैमगर ये क्या कि हम सब  आप को बौने  दिखे हैंये "टुकड़े गैंग"वाल... Read more
clicks 63 View   Vote 0 Like   6:01am 6 Jul 2019 #
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
चन्द माहिया : क़िस्त 60:1:हूरों की जीनत मेंडूबा है ज़ाहिदकुछ ख़्वाब-ए-जन्नत में:2:घिर घिर आए बदराबादल बरसा भीभींगा न मेरा अँचरा:3:ग़ैरों की बातों कोमान लिया तूनेसच,झूठी बातों को:4:इतना ही फ़साना हैफ़ानी दुनिया मेजाना और आना है:5:तुम कहती, हम सुनतेबीत गए वो दिनजब साथ सपन बुनते-आनन्द.प... Read more
clicks 73 View   Vote 0 Like   5:16am 28 Jun 2019 #
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
कल जो मैं सोयाबंद कमरा देख बहुत रोया ।आंखें ना खुलती थी गर्मी भी कुछ भिगोती थी ।हवा की थी आस लगती थी बहुत प्यास ।ना आवाज़ ना शोरथी शांति चहुँ ओर ।हाथ कहीं बंधे से थेपैर भी खुलते न थे ।थी बहुत निराशामिली ना कोई आशा। एक कतरा अमृत काकुछ जीवन सा दे गयाआंखें तो खुली नहीं... Read more
clicks 88 View   Vote 0 Like   3:32pm 25 Jun 2019 #
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
एक ग़ज़ल : हुस्न हर उम्र में  जवां देखा---हुस्न हर उम्र में जवाँ देखाइश्क़ हर मोड़ पे अयाँ  देखाएक चेहरा जो दिल में उतरा हैवो ही दिखता रहा जहाँ देखाइश्क़ तो शै नहीं तिजारत कीआप ने क्यों नफ़ा ज़ियाँ  देखा ?और क्या देखना रहा बाक़ीतेरी आँखों में दो जहाँ देखाबज़्म में थे सभी ,मगर कि... Read more
clicks 63 View   Vote 0 Like   5:08am 21 Jun 2019 #
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
चन्द माहिया : क़िस्त 59:1:सब क़स्में खाते हैंकौन निभाता हैकहने की बाते हैं:2:क्या हुस्न निखारा हैजब से डूबा मनउबरा न दुबारा है:3:इतना न सता माहियाक्या थी ख़ता मेरीसच,कुछ तो बता माहिया:4:बेदाग़ चुनरिया मेंदाग़ लगा बैठेआकर इस दुनिया में:5:धरती रह रह तरसीबदली आई तोआ कर भी नहीं बरसी-आन... Read more
clicks 34 View   Vote 0 Like   6:34am 15 Jun 2019 #
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