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Blog: आपका ब्लॉग

Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
--रंग-मंच है जिन्दगी, अभिनय करते लोग।नाटक के इस खेल में, है संयोग-वियोग।।--विद्यालय में पढ़ रहे, सभी तरह के छात्र।विद्या के होते नहीं, अधिकारी सब पात्र।।--आपाधापी हर जगह, सभी जगह सरपञ्च।।रंग-मंच के क्षेत्र में, भी है खूब प्रपञ्च।।--रंग-मंच भी बन गया, जीवन का जंजाल।भोली चिड़... Read more
clicks 21 View   Vote 0 Like   1:22am 27 Mar 2020 #रंग-मंच है जिन्दगी
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
एक व्यंग्य : तालाब--मेढक---- मछलियाँ गाँव में तालाब । तालाब में मेढकऔर मछलियाँ ।और मगरमच्छ भी । गाँव क्या ? "मेरा गाँव मेरा देश ’ही समझ लीजिए।मछलियों ने मेढकों को वोट दिया और ’अलाना’ पार्टी बहुमत के पास पहुँचते पहुँचते रह गई । गोया क़िस्मत की देखो ख़ूबी ,टूटी कहाँ कमंददो-चार... Read more
clicks 1 View   Vote 0 Like   6:20am 17 Mar 2020 #
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
ग़ज़ल : लगे दाग़ दामन पे--लगे दाग़ दामन पे , जाओगी कैसे ?बहाने भी क्या क्या ,बनाओगी कैसे ?चिराग़-ए-मुहब्बत बुझा तो रही होमगर याद मेरी मिटाओगी कैसे ?शराइत हज़ारों यहाँ ज़िन्दगी केभला तुम अकेले निभाओगी कैसे ?नहीं जो करोगी किसी पर भरोसातो अपनो को अपना बनाओगी कैसे ?रह-ए-इश्क़ मैं सैकड़ों ... Read more
clicks 1 View   Vote 0 Like   6:59am 14 Mar 2020 #
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
होली पर एक ठे भोजपुरी गीत : होली पर....कईसे मनाईब होली ? हो राजा !कईसे मनाईब होली..ऽऽऽऽऽऽआवे केऽ कह गईला अजहूँ नऽ अईला’एस्मेसवे’ भेजला ,नऽ पइसे पठऊलापूछा न कईसे चलाइलऽ खरचाअपने तऽ जा के,परदेसे रम गईला कईसे सजाई रंगोली? हो राजा !कईसे सजाई रंगोली,,ऽऽऽऽऽमईया के कम से कम लुग्गा ... Read more
clicks 1 View   Vote 0 Like   5:26am 6 Mar 2020 #
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
ए चांद ये सुना हैतुम जिहादी हो गए होचौदहवीं के चांद थे तुमअब ईद के  ही हो गए हो !!तुम  तो थे  प्रीतम  कीरचना का  सुंदर मुखड़ासुना है मुफलिसी कीरोटी भी हो गए हो !चौदहवीं के चांद थे तुमक्यों  ईदके ही हो गए होनीले से नभ पे तुम तोतारों में जी रहे थेहरहरा कर के अब तुमदुश... Read more
clicks 3 View   Vote 0 Like   6:47pm 22 Feb 2020 #
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
सुनोO' Henry की कहानी'The last leaf' तो  पढ़ी ही होगी तुमने !मैं Jhonsy सीअब भी प्रतीक्षारत हूंतुम्हारे भीतर के usचित्रकार  Brehman की ...अब जब किमैं अपने भीतरफ़ैल चुके निराशा केनिमोनिया से मर रही हूंशैनेः शैने..सुनो brehmanक्या कूचीउठाओगे तुम ?मेरे लिएएक पत्तीरचाओगे तुम ??... Read more
clicks 4 View   Vote 0 Like   5:08pm 19 Feb 2020 #
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
बला सा रूप तेरा, मेरी नज़रों में समाना, बिन बताए फिर तेरा मुझे  मेरे दिल में  उतरना।इन सब से तेरा  अनजान  होना ,               कमबख्त मुझे तुझ से एक तरफा प्यार का होनाचांद सा चेहरा तेरा उस पर जुल्फों का आना,तेरा उन्हें पकड़ना बाधना, फिर खोलना मेरा यूं तेरे ... Read more
clicks 3 View   Vote 0 Like   10:19am 15 Feb 2020 #एक तरफ़ा मोहब्बत
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
चन्द माहिया:1:दीदार न हो जब तकयूँ ही रहे चढ़ताउतरे न नशा तब तक:2:ये इश्क़ सदाकत हैखेल नहीं , साहिब !इक तर्ज़-ए-इबादत है:3:बस एक झलक पानामा’नी होता हैइक उम्र गुज़र जाना:4:अपनी पहचान नहींढूँढ रहा बाहरभीतर का ध्यान नहीं:5:जब तक मैं हूँ ,तुम होकैसे कह दूँ मैंतुम मुझ में ही गुम हो-आनन्द.प... Read more
clicks 4 View   Vote 0 Like   7:35am 24 Jan 2020 #
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
आदमी का कोई अब भरोसा नहींवह कहाँ तक गिरेगा ये सोचा नहीं’रामनामी’ भले ओढ़ कर घूमताकौन कहता है देगा वो धोखा नहींप्यार की रोशनी से वो महरूम हैखोलता अपना दर या दरीचा नहींउनके वादें है कुछ और उस्लूब कुछयह सियासी शगल है अनोखा नहींया तो सर दे झुका या तो सर ले कटाउनका फ़रमान शाह... Read more
clicks 7 View   Vote 0 Like   1:17pm 11 Jan 2020 #
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
एक ग़ज़ल : नहीं जानता हूँ कौन हूँ--नहीं जानता कौन हूँ ,मैं कहाँ हूँउन्हें ढूँढता मैं यहाँ से वहाँ हूँतुम्हारी ही तख़्लीक़ का आइना बनअदम से हूँ निकला वो नाम-ओ-निशाँ हूँबहुत कुछ था कहना ,नहीं कह सका थाउसी बेज़ुबानी का तर्ज़-ए-बयाँ हूँतुम्हीं ने बनाया , तुम्हीं ने मिटायाजो कुछ भी ह... Read more
clicks 40 View   Vote 0 Like   12:07pm 5 Jan 2020 #
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
एक ग़ज़ल : झूठ इतना इस तरह ---झूठ इतना इस तरह  बोला  गयासच के सर इलजाम सब थोपा गयाझूठ वाले जश्न में डूबे  रहे -और सच के नाम पर रोया गयावह तुम्हारी साज़िशें थी या वफ़ाराज़ यह अबतक नहीं खोला गयाआइना क्यों देख कर घबरा गएआप ही का अक्स था जो छा गयाकैसे कह दूँ तुम नहीं शामिल रहेजब फ़ज़... Read more
clicks 47 View   Vote 0 Like   12:57pm 21 Dec 2019 #
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
नादां है बहुत कोई समझाये दिल को चाहता उड़ना आसमाँ में है पड़ी पांव ज़ंजीर कट चुके हैं पंख फिर भी उड़ने की आस.. नादां है बहुत कोई समझाये दिल को डगमगा रही नौका बीच भंवर फिर भी लहरों से जुझने को तैयार परवाह नहीं डूबने की मर मिटने को तैयार नहीं मानता दिल यह समझाने से भी जब तक ह... Read more
clicks 9 View   Vote 0 Like   3:55am 20 Nov 2019 #
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
मुझे याद आओगेकभी तो भूल पाऊँगा तुमको, मुश्क़िल तो है|लेकिन, मंज़िल अब वहीं है||पहले तुम्हारी एक झलक को, कायल रहता था|लेकिन अगर तुम अब मिले, तों भूलना मुश्किल होगा||@ऋषभ शुक्लाहिन्दी कविता मंच... Read more
clicks 16 View   Vote 0 Like   9:19pm 19 Nov 2019 #kavita
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
एक ग़ज़ल : भले ज़िन्दगी से हज़ारों ---भले ज़िन्दगी से  हज़ारों शिकायतजो कुछ मिला है उसी की इनायतये हस्ती न होती ,तो होते  कहाँ सबफ़राइज़ , शराइत ,ये रस्म-ओ-रिवायतकहाँ तक मैं समझूँ ,कहाँ तक मैं मानूये वाइज़ की बातें  वो हर्फ़-ए-हिदायतन पंडित ,न मुल्ला ,न राजा ,न गुरबारह-ए-मर्ग में ना क... Read more
clicks 8 View   Vote 0 Like   5:09am 11 Nov 2019 #
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
हे हरसिंगारओ शेफालीअरी ओ प्राजक्ता !सुना हैतू सीधे स्वर्ग सेउतर आई थीकहते हैसत्यभामा की जलनदेवलोक सेपृथ्वी लोक परतुझे खींच लाई थीतू ही बताहै ये चन्द्र का प्रेमया सूर्य से विरक्तिकि बरस मेंफ़कत एक माससिर्फ रात कोदेह तेरीहरसिंगार के फूलों सेभरभराई थी !... Read more
clicks 35 View   Vote 0 Like   7:16pm 5 Nov 2019 #
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
एक ग़ज़ल : दुश्मनी कब तक-----दुश्मनी कब तक निभाओगे कहाँ तक  ?आग में खुद को जलाओगे  कहाँ  तक  ?है किसे फ़ुरसत  तुम्हारा ग़म सुने जोरंज-ओ-ग़म अपना सुनाओगे कहाँ तक ?नफ़रतों की आग से तुम खेलते होपैरहन अपना बचाओगे  कहाँ  तक ?रोशनी से रोशनी का सिलसिला हैइन चरागों को बुझाओगे कहाँ... Read more
clicks 16 View   Vote 0 Like   6:38am 3 Nov 2019 #
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
तुम ही कहो न क्या मैं ख्वाहिश कोदेर तक याद में तेरी ....जागने की ...इजाज़त दूं ?तुम ही कहो नक्या मैं यादों कोखुदा के सजदे सानाम  और दर्ज़ाइबादत दूं ?तुम ही कहो नक्यों इन  हवाओं नेतुझसे लिपटने की बदमाशियां की और शरारत क्यूं ?तुम ही कहो नक्या ग़ज़ल मैं हूं ?इक नज़्म सी म... Read more
clicks 63 View   Vote 0 Like   6:26pm 2 Nov 2019 #
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
दीपावली पर विशेष-------एक गीत : आओ कुछ दीप हम जलाएँ---एक अमा और हम मिटाएँआओ कुछ दीप हम जलाएँखुशियाँ उल्लास साथ लेकरयुग युग से आ रही दिवालीकितना है मिट सका अँधेराकितनी दीपावली  मना  लीअन्तस में हो घना अँधेरा ,आशा की किरण हम जगाएँ,आओ कुछ दीप हम जलाएँनफ़रत की हवा बह रही हैऔर इध... Read more
clicks 29 View   Vote 0 Like   6:37am 26 Oct 2019 #
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
कुड़िये कर कुड़माई,बहना चाहे हैं,प्यारी सी भौजाई।धो आ मुख को पहले,बीच तलैया में,फिर जो मन में कहले।।गोरी चल लुधियाना,मौज मनाएँगे,होटल में खा खाना।नखरे भारी मेरे,रे बिक जाएँगे,कपड़े लत्ते तेरे।।ले जाऊँ अमृतसर,सैर कराऊँगा,बग्गी में बैठा कर।तुम तो छेड़ो कुड़ियाँ,पंछी बिणजार... Read more
clicks 24 View   Vote 0 Like   2:41am 20 Oct 2019 #माहिया
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
कौन समय को रख सकता है, अपनी मुट्ठी में कर बंद।समय-धार नित बहती रहती, कभी न ये पड़ती है मंद।।साथ समय के चलना सीखें, मिला सभी से अपना हाथ।ढल जातें जो समय देख के, देता समय उन्हीं का साथ।।काल-चक्र बलवान बड़ा है, उस पर टिकी हुई ये सृष्टि।नियत समय पर फसलें उगती, और बादलों से भी वृष्ट... Read more
clicks 17 View   Vote 0 Like   2:36am 20 Oct 2019 #आल्हा छंद
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
[ विजय दशमी के पर्व पर विशेष----एक व्यंग्य ----रावण का पुतला ---- आज रावण वध है । 40 फुट का पुतला जलाया जायेगा । विगत वर्ष 30 फुट का पुतला जलाया गया था। इस साल रावण का कद बढ़ गया । पिछ्ले साल से इस साल लूट-पाट ,अत्याचार ,अपहरण ,हत्या की घटनायें बढ़ गई तो ’रावण’ का  कद भी बढ गया।रावण बल... Read more
clicks 21 View   Vote 0 Like   5:43am 6 Oct 2019 #
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
लक्ष्मीरंगम - Laxmirangam: कृपया टिप्पणियाँ ब्लॉग पर करें. G+ की टिप्पणियाँ...: कृपया टिप्पणियाँ ब्लॉग पर करें.  हिंदी पर राजनीतिआज हमारे देश भारत में किसी भी मुद्दे पर राजनीति संभव है। चाहे वह क्षेत्र हो , भाषा हो, सवर्ण या दलित संबंधी हो, सेना हो या कोई व्यक्ति विशेष ही क्यों ... Read more
clicks 29 View   Vote 0 Like   4:52am 1 Oct 2019 #
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
चिड़िया: कहो ना, कौनसे सुर में गाऊँ ?: कहो ना, कौनसे सुर में गाऊँ ? जिससे पहुँचे भाव हृदय तक, मैं वह गीत कहाँ से लाऊँ ? इस जग के ताने-बाने में अपना नाता बुना ना जाए ना जाने...... Read more
clicks 61 View   Vote 0 Like   5:00pm 29 Sep 2019 #
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
मैं जीना चाहूं बचपन अपना,पर कैसे उसको फिर जी पाऊं!मैं उड़ना चाहूं ऊंचे आकाश,पर कैसे उड़ान मैं भर पाऊं!मैं चाहूं दिल से हंसना,पर जख्म न दिल के छिपा पाऊं।मैं चाहूं सबको खुश रखना,पर खुद को खुश न रख पाऊं।न जाने कैसी प्यास है जीवन में,कोशिश करके भी न बुझा पाऊं।इस चक्रव्यूह से ... Read more
clicks 29 View   Vote 0 Like   5:47am 21 Sep 2019 #
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
एक ग़ज़लजान-ए-जानाँ  से  क्या  माँगू ?दर्द-ए-दिल की दवा माँगूहुस्न उनका क़यामत हैदाइमी की  दुआ  माँगूक़ैद हूँ जुर्म-ए-उल्फ़त मेंउम्र भर की सज़ा  माँगूज़िन्दगी भर नहीं  उतरेइश्क़ का वह नशा माँगूसादगी  से  मुझे  लूटावो ही तर्ज-ए-अदा माँगूआप की बस इनायत होआप से और क्... Read more
clicks 23 View   Vote 0 Like   7:35am 20 Sep 2019 #
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