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Blog: पनघट (PANGHAT)

Blogger:  दिवाकर पाण्‍डेय
सफर में हैं हम दोनों,मंजिल तेरी भी है,मेरी भी। जरा आहिस्‍ता चल,जिंदगी तेरी भी है,मेरी भी।मंजिल जहां है वहीं रहेगी,फिर यह हड़बड़ी क्‍यों है।बड़ी नाजुक है सांसों की डोर,वह तेरी भी है,मेरी भी।ये बाइक,ये कारें,ऑटो,ये रिक्‍शा,जरिया हैं पहुंचने के।तू अहम का वहम मत पाल,सड़क ते... Read more
clicks 111 View   Vote 0 Like   8:01pm 25 Sep 2017 #
Blogger:  दिवाकर पाण्‍डेय
बहुत कुछ टूट रहा है खंड-खंड विघटित हो रहा है। अब अंतर्मात्मा आत्महित पर ही जागती है।पिफर सो जाती है शीतकालीन निद्रा में। बदल जाती हैं, आदर्शों, मयार्दाओं और उच्चम मानदंडोंकी परिभाषाएं। बिंदी, झुमका, मेहंदी, पायल कर रहे रुदनयह कैसा रक्षाबंधन?‘पिंक’ की ‘न’ पर न्योछावर ढ... Read more
clicks 143 View   Vote 0 Like   5:58pm 7 Aug 2017 #
Blogger:  दिवाकर पाण्‍डेय
सरिता के जून माह के दूसरे अंक में मेरी एक कविता का प्रकाशन हुआ। अच्छा लगा। ... Read more
clicks 246 View   Vote 0 Like   8:43pm 16 Jul 2014 #
Blogger:  दिवाकर पाण्‍डेय
जिंदगी के एक मोड़ पे मिल गए यूं आपसे, दिल हमारा सजाने लगा मीठे-मीठे से ख्वाब से।हाय ये शर्मो-हया, सादगी, ये शोखियांआंखों में तुम्हारी सनम हैं हजारों मस्तियां।जिस पल देखूं मैं तुम्हें दिखते हो तुम चांद से। आपकी आंखों की मय से मौसम शराबी हो गया,कली फूल बन गई फिजा का रंग... Read more
clicks 170 View   Vote 0 Like   9:29pm 4 Oct 2013 #
Blogger:  दिवाकर पाण्‍डेय
उस शाख पे गुले दिल खिलाऊं कैसे? रूठा है वो माली, मैं मनाऊं कैसे?बूंद होती है हर प्यासे की किस्मत में मगर, उस दिले दरिया से कोई बूंद चुराऊं कैसे?कर सके जो रोशन शब-ए-गम मेरा,वो चरागे मोहब्बत मैं जलाऊं कैसे?होता नहीं नसीब यहां उंगली का सहारादामने यार का सहारा मैं पाऊं कैसे... Read more
clicks 207 View   Vote 0 Like   9:05pm 4 Oct 2013 #
Blogger:  दिवाकर पाण्‍डेय
तेरे लवों की तबस्सुम पर नाम लिखा है मेरा,मैंने आंखों में अपनी चेहरा छुपा रखा है तेरा। मेरे वजूद को जनाब इस कदर न ठुकराइए, बिखर जाएगा ये मोहब्बत का घरौंदा मेरा।   तूने मेरे नाम पर कभी ली न हो अंगड़ाई, जज्बात के इस मोड़ पर आईना झूठा है तेरा। पियूं तो पियूं कैसे इन ... Read more
clicks 202 View   Vote 0 Like   8:39pm 4 Oct 2013 #
Blogger:  दिवाकर पाण्‍डेय
मैं क्‍या करूं कि मेरे दिल पे आ गई है,पगली सी एक बदली सेहरा पे छा गई है।छलके है उनकी आंखों से मय के हजार प्‍याले मेरा कोई कुसूर नहीं, साकी पिला गई है।अब अपने दामन को छुड़ाइये न हमसे,मेरी हसरतों के चराग आंधी जला गई है।                                        &n... Read more
clicks 198 View   Vote 0 Like   7:50pm 31 Aug 2013 #
Blogger:  दिवाकर पाण्‍डेय
एक शाम जब मैं उदास थामैं रो रहा थालेकिन तब मेरे आश्‍चर्य की कोई सीमा न रहीजब मैंने देखा, मेरे आंसू मुझ पर ही हंस रहे हैं।मैं रो रहा था और आंसू हंस रहे थे।कैसी विंडबना है ये जो जिसके लिए रोता हैवही उस पर हंसता है।मैं यही झुठलाने के लिएरो रहा था।परंतु असफल रहा।मैं न... Read more
clicks 201 View   Vote 0 Like   7:37pm 31 Aug 2013 #
Blogger:  दिवाकर पाण्‍डेय
मैं कहता हूं किआखिर क्‍योंहम नदी के किनारोंकी तरह रहते हैंकिनारों के बीचबहता पानी बनोक्‍योंकि, रवानीउसी में होती हैजिंदगानीउसी में होती है।... Read more
clicks 182 View   Vote 0 Like   7:13pm 31 Aug 2013 #
Blogger:  दिवाकर पाण्‍डेय
बारिश के इस मौसम में हर किसी का मन-मयूर नाच उठता है। प्रकृति के इस आनंद उत्‍सव में हरियाली की चादर भी है और फुहारों की छुअन भी। ऐसे में किसी गीत का जन्‍म होना स्‍वाभाविक है...आज घिर आई है बदरिया इश्‍क की मेरी छत पर बरसी हैं लडि़यां पैगाम-ए-महबूब की मेरी छत पर। बाद-ए-सबा ने झू... Read more
clicks 219 View   Vote 0 Like   7:07am 22 Aug 2013 #
Blogger:  दिवाकर पाण्‍डेय
प्‍याज ने ऐसा मारा पंचकि हम हो गए टंचटमाटर भी खड़ा गुर्रा रहा हैमोहन के मौन पर थर्रा रहा है। लाल-पीला होकरअब लाल हो गया हैहर सब्‍जी के दाम में धमाल हो गया है। रुपया रोज गिर रहा राजनीति की तरहहुई इसकी हालत रिकी बहल की सताई परणीति की तरह सोने के दाम भी खरे हो गए हैंमुझ गरीब ... Read more
clicks 228 View   Vote 0 Like   9:09pm 17 Aug 2013 #
Blogger:  दिवाकर पाण्‍डेय
कहानी 'एक टुकड़ा धूप का' का अंतिम भाग... Read more
clicks 195 View   Vote 0 Like   7:49am 10 Aug 2013 #
Blogger:  दिवाकर पाण्‍डेय
कहानी 'एक टुकड़ा धूप का'का अंतिम भाग... Read more
clicks 196 View   Vote 0 Like   7:49am 10 Aug 2013 #
Blogger:  दिवाकर पाण्‍डेय
मेरी यह कहानी 'एक टुकड़ा धूप का' इसी ब्‍लॉग पर टेक्‍स्‍ट के रूप में प्रकाशित है लेकिन यह एक समाचार पत्र में प्रकाशित हुई थी। मैं प्रकाशित कहानी को पोस्‍ट कर रहा हूं। ... Read more
clicks 201 View   Vote 0 Like   7:44am 10 Aug 2013 #
Blogger:  दिवाकर पाण्‍डेय
तेरी यादें, तेरा बंधनज्यों तुलसीदल और चंदन।तू ही शिव है, तू ही सुंदरतू ही सत्य और शिव का संगम।बता इसके सिवाय मैं तेरीक्या आराधना करूं?सांस आती है, सांस जाती हैउलझनें तमाम सिल जाती हैं।तब तेरी अलकें, पलकें, बाहें जुल्फेंएक मखमली चादर तन जाती है।बता इसके सिवाय मैं तेरीक... Read more
clicks 207 View   Vote 0 Like   10:41am 19 Jan 2012 #
Blogger:  दिवाकर पाण्‍डेय
दिवाकर पाण्डेय नजाने क्यों, आज बिस्तर से उठने का मन नहीं कर रहा था। लेकिन तभी कहीं से एक गोरैया ने आकर भोर का गीत सुनाना शुरू कर दिया। सामने खिड़की की जाली से एक धूप का टुकड़ा मेरे सिरहाने आकर मुझसे अठखेलियां करने लगा, ऐसा लगा जैसे जिंदगी ने दस्तक दी हो। मैं नहा-धोकर नाश... Read more
clicks 205 View   Vote 0 Like   11:21am 4 Dec 2011 #
Blogger:  दिवाकर पाण्‍डेय
हरिशंकर परिसाई ने जब साहित्य में निंदा रस की परिभाषा कुछ जुदा तरीके से गढ़ी तो उनके इस आविष्कार पर हर कोई मुदित हुआ। निंदा करने वाला भी और सुनने वाला भी। श्रीलाल शुक्ल ने एक और राग का आविष्कार किया- राग दरबारी। मैं कोई आविष्कार तो नहीं कर रहा हूं (औकात ही नहीं) लेकिन एक आ... Read more
clicks 237 View   Vote 0 Like   8:07pm 18 Aug 2011 #
Blogger:  दिवाकर पाण्‍डेय
वक्तकापहियाकितनावक्तगुजरगयाफागनहींगायाबरसातमेंकागजकीनावनहींबनाईछिपकरटॉफीनहींखाईबागमेंअमरूदनहींतोड़ेनीमकीछांवमेंगुलेलनहींबनाईनुक्कड़परछोटूकीइतनीचायपीमांकेहाथोंकीचीनीनहींमहसूसीकितनावक्तगुजरगयाकोईमेहमाननहींआयामुंडेरपरआकरकागानहींबोला...अबद... Read more
clicks 253 View   Vote 0 Like   8:50pm 29 Jun 2011 #
Blogger:  दिवाकर पाण्‍डेय
सुनो,मैंकुछकहनाचाहताहूंछोड़ो,शायदमैंकुछनहींकहपाऊंगामैंजानताहूं,कितुमसमझगईहोगी।... Read more
clicks 195 View   Vote 0 Like   8:30pm 29 Jun 2011 #
Blogger:  दिवाकर पाण्‍डेय
शेर-ओ-सुखनतुमचाहकरभीमुझेभुलानहींसकते,कुछभीतुम्हेंयादनहींअबमेरेसिवा। -१जिंदारहनेकीनिकलआएगीकोईसूरतअपनीआंखोंमेंकोईख्वाबसजाकरदेखो। -२हमभीजानतेहैंमोहब्बतमेंमिटजानेकाहुनरयूंहमनेएकरूठेहुएशख्सकोमनायाथाकभी। -३बदलडालेंगेहमहरएकचेहरेकीरंगतपत्थरभीपिघलत... Read more
clicks 224 View   Vote 0 Like   7:56pm 28 Jun 2011 #
Blogger:  दिवाकर पाण्‍डेय
तुम्हारीखामोशीमैंजानताहूंकितुमकुछकहनाचाहतीहोमगरतुमखामोशहीरहनातुमबोलोगीतोअधरोंकोजुम्बिशलेनीहोगीतुम्हारीहसींखामोशीकानूरचाँदचुरालेगामैंठगा-सारहजाऊंगातुम्हेंतोमैंमुस्कुराकरआइसक्रीमदेतेहुएदिसइजफॉरयूकहतेहुएचूमलूंगामगरचाँदकोनहींबहलापाऊंगाइसल... Read more
clicks 219 View   Vote 0 Like   7:39pm 28 Jun 2011 #
Blogger:  दिवाकर पाण्‍डेय
जिंदगीबता दे हम किधर जाएंजिंदगीबता दे हम किधर जाएंटूटी हर आस और दिल घबराएआंसू की धार आंखों से फूटेसाहिल भी छूटा सागर भी छूटेरिश्तों की रहगुजर पर अब हम हैं अकेलेलगता है यूं कि सांसों की डोर टूटेबड़ी दूर है मंजिल बंजर हुई हैं राहें।जिंदगी बता दे हम किधर जाएं।वक्त हम पे ... Read more
clicks 237 View   Vote 0 Like   7:29pm 28 Jun 2011 #
Blogger:  दिवाकर पाण्‍डेय
धरती और आसमांमैंने पढ़ा था किमां धरती औरपिता आसमां होता हैमैं खुश था कि पूरे आसमां पर मैं सितारों में टूटकर बिखर जाऊंगाउसके सीने मेंअपनी रोशनी भर दूंगा एक तमन्ना सूरज बनने की भी उठी थीक्योंकि मैं आसमां का ताप अपने सीने में भर लेना चाहता थामगर चाह आह बन बन गई आसमां को ग... Read more
clicks 223 View   Vote 0 Like   7:00pm 28 Jun 2011 #
Blogger:  दिवाकर पाण्‍डेय
मांकास्थानईश्वरसेऊपरहोताहै।वहजननीहै।इसलिएहमउसकेऋणीहैं।यहजीवनऔरहरसांसउसकीहै।मैंनेभीअपनेतरीकेसेमांकोपुष्पांजलिदेनेकीकोशिशकीहै.. कवितामांकोकुछनहींआतामेरेघरमेंगैसनहींथी,मांस्टोवपरखानापकातीथीउसकीधांय-धांयकरतीआवाजकोअनसुनाकरबड़ेचावसे, जतनसेरोटिय... Read more
clicks 206 View   Vote 0 Like   6:48pm 28 Jun 2011 #
Blogger:  दिवाकर पाण्‍डेय
आजकल बात चांद पर घर बनाने और मंगल पर परचम लहराने की हो रही है। स्थानों के बीच दूरी कम हो रही है लेकिन इस सबके इंसा की इंसा से दूरी बढ़ी है। इसी को उकेरा है इस गजलमेंअब हम उस मकाम पर आ गए हैंहमारी शक्ल से आईने शर्मा गए हैं।जब तक बजे गीत मेरे, मैं सुनता रहाउसने छेड़ी तान तो हम ... Read more
clicks 238 View   Vote 0 Like   6:44pm 28 Jun 2011 #
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