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चाँद पुखराज का : View Blog Posts
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चाँद पुखराज का

ऐसा नहीं कि उन से मोहब्बत नहीं रही जज़्बात में वो पहले-सी शिद्दत नहीं रही सर में वो इंतज़ार का सौदा नहीं रहा दिल पर वो धड़कनों की हुक़ूमत नहीं रही कमज़ोरी-ए-निगाह ने संजीदा कर दिया जलवों से छेड़-छाड़ की आदत नहीं रही अल्लाह जाने मौत कहाँ मर गई 'ख़ुमार'अब मुझको ज...
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Tag :ख़ुमार बाराबंकवी
  October 12, 2014, 12:09 pm
दिल में अब यूँ तेरे भूले हुये ग़म आते हैंजैसे बिछड़े हुये काबे में सनम आते हैंइक इक कर के हुये जाते हैं तारे रौशनमेरी मन्ज़िल की तरफ़ तेरे क़दम आते हैंरक़्स-ए-मय तेज़ करो, साज़ की लय तेज़ करोसू-ए-मैख़ाना सफ़ीरान-ए-हरम  आते हैंऔर कुछ देर न गुज़रे शब-ए-फ़ुर्क़त से कहोदि...
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Tag :फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
  May 8, 2014, 7:41 pm
 बड़े शहर की भूलभुलैया सड़कें गोल चक्कर घूमकर बारहा  एक ही मोड़ पर खुल रही थीं.एक ही रास्ता  मानो  उनके नक्शें में दर्ज़ था.एक ही इमारत के इर्द-गिर्द वे लगा रही थीं  फेरा.  पीठ घुमा लो या चेहरा  ओट कर लो... पुल उतरते ही अतीत में सोयी कोई   दोपहर मुंह बाए ...
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Tag :क़िस्से
  April 5, 2014, 9:18 pm
वही पलकों का झपकना वही जादू तेरेसारे अंदाज़ चुरा लाई है ख़ुशबू तेरे।तुझसे मैं जिस्म चुराता था मगर इल्म न थामेरे साये से लिपट जाएँगे बाज़ू तेरे ।तेरी आँखों में पिघलती रही सूरत मेरी।मेरी तस्वीर पे गिरते रहे आँसू तेरे।और कुछ देर अगर तेज़ हवा चलती रहीमेरी बाँहों में...
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Tag :
  February 8, 2014, 10:18 am

चिड़िया  के पंख समूचे दिन काँपते हैंहवाएं बिखेरती हैं शाख़ों से फूलदुःख जमा है मन मेंठंड जैसे सीने मेंभाप,गरारा पान पत्र का सेंकविफलतमाम उपायदेहखोजती है  धूपधूप गुमशुदा  कोहरे मेंधूप सानहीं  कोई नाम , कोई चेहराधूप से लोगरस्ते ,चौराहों से नदारदरस्ते , चौराहों प...
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Tag :
  January 15, 2014, 8:26 pm
सुनते ..सहेजते जगजीत  सिंह की आवाज़ में अली सरदार जाफ़री की ख़ूबसूरत नज़्म ... जो कई दिन से ज़ेहन में रची-बसी है ... मेरे दरवाज़े से अब चाँद को रुख़्सत कर दोसाथ आया है तुम्हारे जो तुम्हारे घर सेअपने माथे से हटा दो यह चमकता हुआ ताजफेंक दो जिस्म से किरनों का सुनहरी ज़ेवरतुम ही ...
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Tag :जगजीत सिंह
  December 7, 2013, 4:02 pm
पत्तियों  कीओटसेनीबू केवृक्षमें एक-आधबचाहुआ  पकाफलझांकरहाहै.  हडबडाईमंझलेकदकीलड़कीसमेटरहीहैमुंडेरसे   सूखतेकपड़े .राहचलतापथिकदोघड़ीआसरापानेकीमंशासे  दबे पाँव दाख़िल हो रहा है बगल  केसहनमें.ये विदाहोती मानसूनी फुहारे  हैं  ...
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Tag :
  September 30, 2013, 1:03 pm
जो अब तक मेरे ही पते पर पड़ा रह गया ,  बीते मार्च  लिखा ये  डायरी का एक पन्ना  है और  दोस्त के ख़त का जवाब भी   ...हमारी पहली बातचीत के वक़्त तुम्हारे गिर्द अलाव जल रहे थे ,गर्म रजाइयों का दौर और थोड़ी थोड़ी बारिश थी . अब जबकि मौसम में गर्मियों की आहट है , बीथिय...
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Tag :ख़त
  August 4, 2013, 8:17 pm
दुःख की मौन  गुहारों पर द्वार-द्वार बारते  ज्ञान का दीप,बटोरते  पीड़ा की गठरियाँ , तथागत   एक दिवस वैशाली के निकट आम्रवन में आ ठहरे . अनेक व्यवस्थित भवन,प्रासाद,कूटागार,उपवन और पुष्कर्नियों से जगमगाता वैशाली नगर ,  उन दिनों धन-धान्य पूर्ण  लिच्छिवी गणतंत्र था  . नगर सज्...
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Tag :आम्रपाली
  May 11, 2013, 11:27 am
जब पीला पत्ता झरता हैहरा पत्ता हँसता नहींवह सिर्फ़ थोड़ा-सा काँप उठता हैउस फ़ौजी की तरहजो देख रहा हैगोली खाकर गिरते अपने पड़ोसी को।सर्दी की बर्फ़ीली छुअन सेजब फूलने लगती हैं उसकी नसेंध्यान आता है उसेनियति का रंग है पीलाऔर वह हो जाता है सुन्न।और पीला पत्ता सड़ता है व...
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Tag :के . सच्चिदानंद
  April 16, 2013, 10:12 am
 गुमसुम  दोपहर चैत्र की   बुहार लाई है  उस्ताद ग़ुलाम मुस्तफ़ा खाँ  की आवाज़  ...याद  दिलाती कि  वसंत  ढले   कई  दिन  बीते , फागुन बुझे कई  रोज़  .... वो जो हम में तुम में करार  था तुम्हें याद हो के न याद होवही यानी वादा निबाह का तुम्हें याद हो के न याद होवो नये गिले वो शिकायतें ...
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Tag :मोमिन
  March 31, 2013, 2:20 pm
कौन तरह से तुम खेलत होरी .  स्वर - बसवी  मुखर्जी चित्र -गूगल साभार...
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Tag :होरी .
  March 24, 2013, 9:36 am
ग़ज़ल सुनते ,सहेजते ... स्वर - उस्ताद ग़ुलाम मुस्तफ़ा खाँ बहुत बेचैन है दिल तुम जहाँ भी हो चले आओसितारों की सजी महफ़िल न उठ जाए चले आओतुम्हारी बेरुख़ी ने  यूँ  हमारा दिल बहुत तोड़ाउसी दिल ने  तुम्हे आवाज़ दी है तुम चले आओउदासी की हदें अब छू रहे है याद के नगमेंकहीं हम बन क...
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Tag :ग़ुलाम मुस्तफ़ा खाँ
  March 15, 2013, 10:49 pm
सुनते,सहेजते ... दादरा ... स्वर- रसूलन बाई कंकर लगन की कछु डर नाहीं...चित्र-गूगल ...
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Tag :दादरा
  March 9, 2013, 11:40 am
अगवानी शहर के ऊपर  नीले साफ़  आसमान का शामियाना , मन में बिना पंख उड़ने की चाह , फ़िज़ा   में घुले रफ़ाक़त के किस्से और हवा में उड़ती  गुड़ पकने की सोंधी गंध कर रही है मुखबिरी  कि खुश्क ,ठिठुरते मौसम का मिज़ाज  बदलने  कोई निरंतर बढ़ा आ रहा  है  हमारी जानिब .खिड़की से  दे...
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Tag :अहा ज़़िंदगी
  February 12, 2013, 5:06 pm
एक कविता जो ठहर गयी पास ...एक धुन जो पिछली कई शामों से लगातार आस-पास  बज  रही है  .      नदी-तट ,साँझ और मेरा प्रश्न" आह देखो,नदी का तट बहुत सुन्दर है -                                        बहुत सुन्दर "( किन्तु यह तो नहीं है  उत्तरउस प्रश्न काजो मैंने किया थाजो कुरेदे जा रहा है प्रतिक्षणमन की ...
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Tag :प्रयागनारायण त्रिपाठी
  January 28, 2013, 8:29 pm
पिछले दिनों पढ़ी गई बहुत सी अच्छी कविताओं में   "मृत्युंजय प्रभाकर"  जी की ये कविता साथ रह गयी . इसे यहाँ सहेज रही हूँ कि   मन चाहने पर दोबारा देखा - पढ़ा जा सके ...तितली तितली हो जाना चाहूँगा मैं किसी सुबहजब लगेगा कि बाहर धूप निकल आई हैतितली होना सिर्फ तितली होना नहीं है...
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Tag :मृत्युंजय प्रभाकर
  January 14, 2013, 6:18 pm
पारिजात जिस घड़ी  निःशब्द   झरते हैं  धरती की गोद में गोपियां  पैर की झांझर उतार कर दबे पाँव लौटती हैं  रास से . रात की तारों जड़ी ओढ़नी सिमटती देख कहीं कोई योगी  ध्यानस्थ होता है  और सूर्य यात्रा पूर्व करता है  गंगा स्नान .  ठीक उसी पहर मेरे गिर्द गूँजते हैं   "राग सोहन...
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Tag :अहा ज़़िंदगी
  December 13, 2012, 2:08 pm
सघन वर्षा वन  के अन्दर जैसे चुपके से उतरता है धूप का एक नन्हा टुकड़ा  और  ख़ामोशी से उसके  चप्पे-चप्पे पर  फेरने लगता है अपनी   इन्द्रधनुषी कूची  .  रेंगकर  जगाता है उनींदी पगडंडियों को और सुनहले  वर्क सा आच्छादित हो जाता है उसमें सोये ताल-तलैय्यों,जीव-जंतुओं ,फूलों , शैव...
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Tag :डायरी
  November 9, 2012, 7:05 pm
पढ़ते - सुनते मुनीर नियाज़ी  / ग़ुलाम अली ...चमन में रंग-ए-बहार उतरा तो मैंने देखा| नज़र से दिल का ग़ुबार उतरा तो मैंने देखामैं नीम शब आस्मां की वुसअत   को देखता था, ज़मीं पे  वो हुस्न ज़ार उतरा तो मैंने देखा|ख़ुमार-ए - मय में वो चेहरा कुछ और लग रहा था, दम -ए-सहर जब ख़ुमार उतरा त...
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Tag :मुनीर नियाज़ी
  September 11, 2012, 4:49 pm
घोषित सूखाअघोषित बाढ़शीत ताप,बरखादरकिनारकल होने न होने से बेपरवाहपूरी शिद्दतसमूचा  हौसला  लिए चोंच को  नन्ही  सुई कियेअथक,अविराम पत्तों की ईंटकाठ  की नींव   परधुन -धुन गुन-गुनघास का गारातिनकों की साँकलदेख-परख कांट-छांट  जमाते हैंकम मज़बूतबहुत कम टिकाऊ पंछी  मजूर अ...
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Tag :मेरे फ़ितूर
  August 22, 2012, 10:55 am
  अधछलके मेघआँगन से   उड़ गएबाट  तकत  नैनडयोढ़ी पर जड़ गएनभरीता    पंछियों   सेतितलियों  सेपात    कुंज  सूना   कोयलों सेजुगनुओं सेरात                                                                  पुष्प परभंवरे का  गुंजनसो गयाराह से धूमिल हुएलौटते पदचिन्हक्वाँरे ...     ***  चित्र-गूगल ...
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Tag :मेरे फ़ितूर
  July 28, 2012, 6:40 pm
वो   ह़र बार अपने ही किसी छूटे  हिस्से के लिए उदास होती रही  ...माँ की कोख में सोयी थी  जब गूँजते  थे गिर्द वे  रूमानी नग्में   या शायद माँ ही गुनगुनाती   थीं अपने एकांत में कहीं दूर जब दिन  ढल  जाये""  और उसके  मन में  गूँथ देती  थीं  किसी   डूबती साँझ की लालिमा  जो बाद  में ...
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Tag :याद
  July 18, 2012, 8:52 pm
सावन के सुहाने मौसम में एक रूप की रानी याद आई वो बाग़ का मंज़र याद आया झूलों की कहानी याद आई मदहोश फ़ज़ा मस्ताना  समां  बादल का वो झुकना खेतों पर यूं मस्त हवा लहराने लगी चुनरी कोई धानी याद आई कोयल की मल्हारें मतवाली मोरों के तराने  मस्ताने रिमझिम का वो आलम क्या कहिये वो ...
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Tag :अहमद हुसैन मोहम्मद हुसैन
  July 9, 2012, 12:04 pm
आम पकने   के दिनों  मन बेचैन रहता है . खोजी आँखें  बागान में रेंगती ....दुखती हैं .अँधेरे-उजाले... पेड़ से आम गिरने की आवाज़ कानों को   भरती रहती  है . आम कोयल की कूक से गिर पड़ते हैं , हवा की छुअन  से , आँधी आने से , उनकी ओर निहारने भर से और कभी-कभी  घिरती ख़ामोशियों की  महीन आहट से ...
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पारूल
Tag :डायरी
  June 20, 2012, 11:17 am
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