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Blog: मदन मोहन सक्सेना की ग़ज़लें

Blogger: Saxena Madan Mohan
आँख  से  अब  नहीं दिख रहा है जहाँ ,आज क्या हो रहा है मेरे संग यहाँ  माँ का रोना नहीं अब मैं सुन पा रहा ,कान मेरे ये दोनों क्यों बहरें हुए.उम्र भर जिसको अपना मैं कहता रहा ,दूर जानो को बह मुझसे बहता रहा.आग होती है क्या आज मालूम चला,जल रहा हूँ मै... Read more
clicks 170 View   Vote 0 Like   4:48am 22 Jul 2013
Blogger: Saxena Madan Mohan
मेरे हमनसी मेरे हमसफ़र ,तुझे खोजती है मेरी नजर तुम्हें हो ख़बर की न हो ख़बर ,मुझे सिर्फ तेरी तलाश है मेरे साथ तेरा प्यार है ,तो जिंदगी में बहार है मेरी जिंदगी तेरे दम से है ,इस बात का एहसाश है तेरे इश्क का है ये असर ,मुझे सुबह शाम की ना  ख़बर मेरे दिल में तू रहती सदा , तू ना द... Read more
clicks 153 View   Vote 0 Like   7:04am 19 Jul 2013
Blogger: Saxena Madan Mohan
दुनिया  बालों की हम पर जब से इनायत हो गयीउस रोज से अपनी जख्म खाने की आदत हो गयीशोहरत  की बुलंदी में ,न खुद से हम हुए वाकिफ़ गुमनामी में अपनेपन की हिफाज़त हो गयीमर्ज ऐ  इश्क को सबने ,गुनाह जाना ज़माने में अपनी नज़रों में मुहब्बत क्... Read more
clicks 138 View   Vote 0 Like   11:08am 18 Jul 2013
Blogger: Saxena Madan Mohan
सोचकर हैरान हैं  हम , क्या हमें अब हो गया है चैन अब दिल को नहीं है ,नींद क्यों  आती नहीं है बादियों में भी गये  हम ,शायद आ जाये सुकून याद उनकी अब हमारे दिल से क्यों  जाती नहीं हैहाल क्या है आज अपना ,कुछ खबर हमको नहीं है  देखकर मेरी ये हालत  , तरस क्यों खाती नहीं ह... Read more
clicks 157 View   Vote 0 Like   4:07pm 15 Jul 2013
Blogger: Saxena Madan Mohan
मिली दौलत ,मिली शोहरत,मिला है मान उसको क्यों मौका जानकर अपनी जो बात बदल जाता है .किसी का दर्द पाने की तमन्ना जब कभी उपजे जीने का नजरिया फिर उसका बदल जाता है  ..चेहरे की हकीकत को समझ जाओ तो अच्छा हैतन्हाई के आलम में ये अक्सर बदल जाता है ...किसको दोस्त माने हम और किसक... Read more
clicks 146 View   Vote 0 Like   4:56am 14 Jul 2013
Blogger: Saxena Madan Mohan
नरक की अंतिम जमीं तक गिर चुके है आज जोनापने को कह रहे , हमसे बहदूरियां आकाश की ..इस कदर भटकें हैं युबा आज की इस दौर में खोजने से मिलती नहीं अबगोलियां सल्फ़ास कीआज हम महफूज है क्यों दुश्मनों के बीच मेंदोस्ती आतीनहीं है रास अब बहुत ज्यादा पास कीबँट  गयी सारी जमी ,फिर ब... Read more
clicks 156 View   Vote 0 Like   2:47pm 13 Jul 2013
Blogger: Saxena Madan Mohan
ख्बाब था मेहनत के बल पर , हम बदल डालेंगे किस्मत ख्बाब केवल ख्बाब बनकर, अब हमारे रह गए हैं कामचोरी, धूर्तता, चमचागिरी का अब चलन है बेअरथ से लगने लगे है ,युग पुरुष जो कह गए हैं दूसरोंका किस तरह नुकसान हो सब सोचते हैत्याग ,करुना, प्रेम ,क्यों इस जहाँ से बह गए हैं अब करा करता है शो... Read more
clicks 161 View   Vote 0 Like   11:19am 12 Jul 2013
Blogger: Saxena Madan Mohan
आगमन नए दौर का आप जिसको कह रहेवो सेक्स की रंगीनियों की पैर में जंजीर हैसुन चुके है बहुत किस्से वीरता पुरुषार्थ केहर रोज फिर किसी द्रौपदी का खिंच रहा क्यों चीर हैखून से खेली है होली आज के इस दौर मेंकह रहे सब आज ये नहीं मिल रहा अब नीर हैमौत के साये में जीती चार पल की जिन्द... Read more
clicks 144 View   Vote 0 Like   3:03pm 11 Jul 2013
Blogger: Saxena Madan Mohan
सजाए  मौत का तोहफा  हमने पा लिया  जिनसे ना जाने क्यों बो अब हमसे कफ़न उधार दिलाने  की बात करते हैं हुए दुनिया से  बेगाने हम जिनके इक इशारे पर ना जाने क्यों बो अब हमसे ज़माने की बात करते हैं दर्दे दिल मिला उनसे बो हमको प्यार... Read more
clicks 124 View   Vote 0 Like   5:21am 11 Jul 2013
Blogger: Saxena Madan Mohan
प्यार की हर बात से महरूम हो गए आज हमदर्द की खुशबु भी देखो आ रही है प्यार सेदर्द का तोहफामिला हमको दोस्ती के नाम परदोस्तों के बीच में हम जी रहे थे भूल सेबँट  गयी सारी जमी फिर बँट गया ये आसमानअब खुदा बँटने  लगा है इस तरह की तूल सेसेक्स की रंगीनियों के आज के इस दौर मेंस... Read more
clicks 169 View   Vote 0 Like   6:47am 10 Jul 2013
Blogger: Saxena Madan Mohan
गर कोई हमसे कहे की रूप कैसा है खुदा काहम यकीकन ये कहेंगेजिस तरह से यार है....संग गुजरे कुछ लम्हों की हो नहीं सकती है कीमतगर तनहा होकर जीए तो बर्ष सौ  बेकार हैं सोचते है जब कभी हमक्या मिला क्या खो गयादिल जिगर सांसे है अपनीपर न कुछ अधिकार हैयाद कर सूरत सलोनी खुश हुआ करते ह... Read more
clicks 163 View   Vote 0 Like   10:57am 9 Jul 2013
Blogger: Saxena Madan Mohan
मेरे मालिक मेरे मौला ये क्या दुनिया बनाई हैकिसी के पास खाने को  मगर बह खा नहीं पाये तेरी दुनियां में कुछ बंदें, करते काम क्यों गंदेंकिसी के पास कुछ भी ना, भूखे पेट सो जाये जो सीधे सादे रहतें हैं मुश्किल में क्यों रहतें हैतेरी बातोँ को तू जाने, समझ अपनी ना कुछ आयेतुझे... Read more
clicks 154 View   Vote 0 Like   10:55am 8 Jul 2013
Blogger: Saxena Madan Mohan
दीवारें ही दीवारें नहीं दीखते अब घर यारों बड़े शहरों के हालात कैसे आज बदले है. उलझन आज दिल में है कैसी आज मुश्किल है समय बदला, जगह बदली क्यों रिश्तें आज बदले हैं जिसे देखो बही क्यों आज मायूसी में रहता है दुश्मन दोस्त रंग अपना, समय पर आज बदले हैं जीवन के सफ़र में जो पाया है सह... Read more
clicks 147 View   Vote 0 Like   7:59am 7 Jul 2013
Blogger: Saxena Madan Mohan
जिसे चाहा उसे छीना , जो पाया है सहेजा है  उम्र बीती है लेने में ,मगर फिर शून्यता क्यों हैं सभी पाने को आतुर हैं , नहीं कोई चाहता देनादेने में ख़ुशी जो है, कोई बिरला  सीखता क्यों है  कहने को तो , आँखों से नजर आता सभी को है अक्सर प्यार में ,मन से मुझे फिर दीखता क्यों है&nbs... Read more
clicks 177 View   Vote 0 Like   10:17am 3 Apr 2013
Blogger: Saxena Madan Mohan
क्या सच्चा है क्या है झूठा अंतर करना नामुमकिन है.हमने खुद को पाया है बस खुदगर्जी के घेरे में ..एक जमी बक्शीथी कुदरत ने हमको यारो लेकिनहमने सब कुछ बाट दिया मेरे में और तेरे मेंआज नजर आती मायूसी मानबता के चहेरे परअपराधी को सरण मिली है आज पुलिस के डेरे मेंबीरो की क़ुरबानी का ... Read more
clicks 202 View   Vote 0 Like   11:42am 2 Apr 2013
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