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ग़ज़ल गंगा

  प्यार की हर बात से महरूम हो गए आज हमदर्द की खुशबु भी देखो आ रही है फूल सेदर्द का तोहफामिला हमको दोस्ती के नाम परदोस्तों के बीच में हम जी रहे थे भूल सेबँट  गयी सारी जमी फिर बँट गया ये आसमानअब खुदा बँटने  लगा है इस तरह की तूल सेसेक्स की रंगीनियों के आज के इस दौर ...
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  July 10, 2013, 5:19 pm
मेरे जिस टुकड़े को  दो पल की दूरी बहुत सताती थीजीवन के चौथेपन में अब ,बह सात समन्दर पार हुआ रिश्तें नातें -प्यार की बातें , इनकी परबाह कौन करेंसब कुछ पैसा ले डूबा ,अब जाने क्या व्यवहार हुआ दिल में दर्द नहीं उठता है भूख गरीबी की बातों सेधर्म देखिये कर्म देखिये सब कुछ तो ब्...
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  May 29, 2013, 2:38 pm
दीवारें ही दीवारें नहीं दीखते अब घर यारों बड़े शहरों के हालात कैसे आज बदले है. उलझन आज दिल में है ,कैसी आज मुश्किल है समय बदला, जगह बदली क्यों रिश्तें आज बदले हैं जिसे देखो ,बही क्यों आज मायूसी में रहता है दुश्मन ,दोस्त रंग अपना, समय पर आज बदले हैं जब जीवन के सफ़र ...
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  April 15, 2013, 3:58 pm
मन से मन भी मिल जाये , तन से तन मिला लो अबप्रियतम ने प्रिया से आज मन की बात खोली है मौसमआज रंगों का  और छायी अब खुमारी है चलों सब एक रंग में हो कि आयी आज होली है ले के हाथ हाथों में, दिल से दिल मिला लो आज यारों कब मिले मौका  अब  छोड़ों ना कि होली है. क्या जीजा ...
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  March 25, 2013, 5:32 pm
सोचकर हैरान हैं  हम , क्या हमें अब हो गया हैचैन अब दिल को नहीं है ,नींद क्यों  आती नहीं है बादियों में भी गये  हम ,शायद आ जाये सुकून याद उनकी अब हमारे दिल से क्यों  जाती नहीं हैहाल क्या है आज अपना ,कुछ खबर हमको नहीं है  देखकर मेरी ये हालत  , तरस क्यों खाती नहीं है ...
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  March 25, 2013, 2:29 pm
मिली दौलत ,मिली शोहरत,मिला है मान उसको क्यों मौका जानकर अपनी जो बात बदल जाता है .किसी का दर्द पाने की तमन्ना जब कभी उपजे जीने का नजरिया फिर उसका बदल जाता है  ..चेहरे की हकीकत को समझ जाओ तो अच्छा हैतन्हाई के आलम में ये अक्सर बदल जाता है ...किसको दोस्त माने हम और किसक...
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  March 8, 2013, 4:47 pm
जिनका प्यार पाने में हमको ज़माने लगे बह  अब नजरें मिला के   मुस्कराने लगेराज दिल का कभी जो छिपाते थे हमसे बातें  दिल की हमें बह बताने  लगे अपना बनाने को  सोचा  था जिनको बह अपना हमें अब   बनाने लगे जिनको देखे बिना आँखे रहती थी प्यासीबह अब नजरों से हमको ...
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  February 12, 2013, 1:16 pm
कल  तलक लगता था हमको शहर ये जाना हुआइक  शख्श अब दीखता नहीं तो शहर ये बीरान है बीती उम्र कुछ इस तरह कि खुद से हम न मिल सके जिंदगी का ये सफ़र क्यों इस कदर अंजान हैगर कहोगें दिन  को दिन तो लोग जानेगें गुनाह  अब आज के इस दौर में दिखते  नहीं इन्सान है इक दर्द का एहस...
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  January 31, 2013, 3:39 pm
  तेरी दुनियां में कुछ बंदें, करते काम क्यों गंदेंकिसी के पास कुछ भी ना, भूखे पेट सो जाये जो सीधे सादे रहतें हैं मुश्किल में क्यों रहतें हैतेरी बातोँ को तू जाने, समझ अपनी ना कुछ आयेमेरे मालिक मेरे मौला ये क्या दुनिया बनाई हैकिसी के पास खाने को  मगर बह खा नहीं पाये त...
ग़ज़ल गंगा...
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  December 19, 2012, 10:22 am
हुआ इलाज भी मुश्किल ,नहीं मिलती दबा असलीदुआओं का असर होता दुआ से काम लेता हूँमुझे फुर्सत नहीं यारों कि माथा टेकुं दर दर पेअगर कोई डगमगाता है उसे मैं थाम लेता हूँखुदा का नाम लेने में क्यों मुझसे देर हो जातीखुदा का नाम से पहले मैं उनका नाम लेता हूँमुझे इच्छा नहीं यारों की...
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  November 12, 2012, 1:10 pm
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