POPULAR ENGLISH+ SIGNUP LOGIN

Blog: अग्निगर्भा अमृता

Blogger: anujaa
वसंत आता है तो बुन्देलखण्ड याद आता है। जून की भीगती सूखती गर्मी और दिसम्बर जनवरी के धुंधले झरते दिनों के बाद रंग बिरंगा हो उठता है बुन्देलखण्ड अपने पूरे सौन्दर्य के उत्ताप के साथ। ऐसे ही नहीं चन्देलों बुन्देलों ने बनाया होगा इसे अपना आशियाना...! पलाश के नीरस पेड़ों पर का... Read more
clicks 0 View   Vote 0 Like   12:20pm 16 May 2019 #
Blogger: anujaa
ओ नदी.....बेचैन आत्‍मा सी भागती कहां जा रही हो....ये तीव्र आकुलताऔर ये पथरीला रास्‍ता....तुम्‍हारे रेशमी दुपट्टे में लगे हैंं घाव कितने....पांव आहत हृदय भीगा भग्‍न....किस ठौर ठहरेगी, रूकेगी....पांचाली तुम्‍हारी बेचैन आत्‍मा....कब सूखेंगें...वैदेहीतुम्‍हारे पथराये नयनों के अश्र... Read more
clicks 112 View   Vote 0 Like   1:12pm 13 Oct 2016 #
Blogger: anujaa
समय की वॉल पर आईना....देखने का वक्त है यह....चेतावनियों और चुनौतियों का समय है....जब क़ीमती है तुम्हािरी बस एक चाल....तब ख़ामोश बैठने....परंपराओं के समय के साथ जानेयाउनको बदलने के लिए ख़ुद को बदलने के समयचुप बैठने से नहीं चलने वाला काम....चुप्पी को तोड़नेझकझोरने के वक्तल...सही को च... Read more
clicks 104 View   Vote 0 Like   4:45pm 10 Apr 2016 #
Blogger: anujaa
सुलगती दोपहरों में....सोने की चमक....के साथ...नीले धुले आसमान की छाती पर खिल उठा मौसम.....अमलताश.....अमलताश....लो, फिर आ गया वसंत.....अनुजा10.05.14... Read more
clicks 105 View   Vote 0 Like   7:01am 17 Feb 2016 #
Blogger: anujaa
पिता मेरेमैं अब तक नहीं समझ पाता हूँक्यों टूट जाते हैं तारे अचानकआकाश गंगा को चमकता हुआ छोड़ करक्यों टूटता है वही ताराजिसके इर्द-गिर्द हम बुन लेते हैं कितनी ही कहानियाँ और स्वप्नउसे हम बरसों ध्रुव तारा समझते रहते हैंझुलसता रहता है सूर्य किसी दूर के देश मेंरात की चाद... Read more
clicks 127 View   Vote 0 Like   6:26am 20 Apr 2015 #
Blogger: anujaa
अकेले आना----------------पहले ही पेड़ के नीचे छोड़ देना झोलीदूसरे के नीचे कमंडल रख देनाआगे भी बहुत पेड़ हैं, सामान भी बहुतकुछ छोड़ देना, कुछ छूट जाएगाजाने से पहले कहा फकीर ने--जो गया अकेला होकर---।छोड़ देना पेड़ भी वहीं रास्‍ते परपहुंचने तक रखना रास्‍तों कोऔर साथ लिए हुए मत आना कोई रास्‍... Read more
clicks 127 View   Vote 0 Like   5:11am 17 Apr 2015 #
Blogger: anujaa
सितारे हों बुलन्दी पर अक्सर यूं भी होता है लगी हो आग जब तब भी शरारे बात करते हैं।।हो उनकी बात का मौसम कि उनकी आंख का जादू हमारा क्या अगर हंसकर इशारे बात करते हैं ।।उफ़क की लाल आंखें हों कि शब का सांवला आंचलकोर्इ हो वक्‍़त लेकिन ये नज़ारे बात करते हैं।।हो मौजों की रवा... Read more
clicks 141 View   Vote 0 Like   4:44pm 8 Apr 2015 #
Blogger: anujaa
बरसों के बाद मिली वो एक स्‍त्री....उससे मिलने के बाद...(1)उसने चुना था....घर......पति....बच्‍चे.....औरएक हरियाली दुनिया....औरछोड़ी थी उसनेइस संसार के लिए.....अपनी सबसे खूबसूरत ख्‍वाहिश.....औरअपने सबसे मीठे और सुरीले गले का साथ.....।(2)एक स्‍त्री रम गयी हैजि़न्‍दगी के उस सुहाने सफ़र में.....जो उस... Read more
clicks 127 View   Vote 0 Like   6:47am 7 Apr 2015 #
Blogger: anujaa
आदमी ने उसे घर दिया...रहने के लिए...रसोई दी....खाना पकाने के लिए... गुसलखाना दिया नहाने के लिए.... छत दी... केशों को सुखाने के लिए... सोने का कमरा दिया बिस्‍तर दिया बच्‍चे दिए.... बिना उससे पूछे..जि़न्‍दगी दी... जीने के लिए.... सब कुछ बिना उससे पूछे.... बिना यह जाने किवह क्‍या चा‍‍हती है... कैस... Read more
clicks 140 View   Vote 0 Like   5:40am 6 Apr 2015 #
Blogger: anujaa
जुदाई का हर निर्णय संपूर्ण और अंतिम होना चाहिए, पीछे छोड़े हुए सब स्‍मृतिचिन्‍हों को मिटा देना चाहिए, और पुलों को नष्‍ट कर देना चाहिए, किसी भ्‍ाी तरह की वापसी को असंभव बनाने के लिए।हर पीड़ायुक्‍त निर्णय को क्रियान्वित करने के लिए हमें उसे दैनिक जीवन का स्‍वाभाविक अंग ... Read more
clicks 132 View   Vote 0 Like   5:14pm 5 Apr 2015 #
Blogger: anujaa
अर्चना, नन्दिनी, जया और उन जैसी तमाम स‍ाथियों के लिए....जिनके जज्‍़बे और साहस को सलाम करता है अासमान...तुम्‍हारे ही लिए मेरी साथी....उफ... !लड़कियों ने छू लिया अासमान....अब क्‍या होगा.... !!!!!!उफ...ये क्‍या किया तूने ऐ लड़की...बना ली अपनी छोटी सी दुनिया...वैसे हीजैसे तू चाहती थी....।उफ....ये ... Read more
clicks 127 View   Vote 0 Like   8:53am 8 Mar 2015 #मेरी कविताएं....
Blogger: anujaa
http://www2c.cdc.gov/podcasts/BestPractices.asp... Read more
clicks 147 View   Vote 0 Like   2:09pm 30 Jan 2015 #
Blogger: anujaa
गर्म माथे पर रखा हुआ हाथ वोसर्द कब हो गया कुछ पता न चला...सब भिगोते रहे आंसुओं से ज़मींवो चला कब गया कुछ पता न चला...एक मुद्दत रहा सायबां की तरहकब हवा हो गया कुछ पता न चला...उसकी नाराज़गी को न समझा कोईक्‍यूं ख़फ़ा हो गया कुछ पता न चला....उम्र भर तो कोई भी उसे न मिलासब मिले जब उसे क... Read more
clicks 161 View   Vote 0 Like   1:23pm 4 Oct 2014 #
Blogger: anujaa
अब कहो... वो चरित्रहीन थी... चरित्रको जोड़ दो देह से... बहुत आसान हैऔरत को जोड़ देना चरित्र से... औरचरित्र को देह से.... अनुजा28.08.1998 भोर : 5: 00 ... Read more
clicks 162 View   Vote 0 Like   1:14pm 10 Mar 2014 #
Blogger: anujaa
सदियों का सफ़र तय करकेधरती अब भी हैअपने उसी बिन्‍दु पर....जहांताप शाप रस के लिएताकना पड़ता हैउसेआसमान का मुहं....अनुजा03.05.1998... Read more
clicks 160 View   Vote 0 Like   1:04pm 10 Mar 2014 #
Blogger: anujaa
जब पूरी दुनिया को बांटे जा रहे थेचांद ... सूरज... सितारे... पहाड़... नदियां... समुद्र... दरख्‍़त... आकाश... रंग... झरने... तब भी ढूंढ रही थी आधी दुनिया अपने अंधेरे उजाले.... अनुजा 03.05.1998... Read more
clicks 152 View   Vote 0 Like   12:51pm 10 Mar 2014 #
Blogger: anujaa
औरतें जायदाद नहीं होतीं...कि जितना चाहो उतना फैलें और जब चाहो सिमट जाएं.... कि उनके रखने, न रखने देने या लेने उठने-गिरने बनने-बिगड़ने सहेजने या बांटने जाने या रहने पर उनकी मर्जी का कोई वश न हो..... औरतें कमाई नहीं जातीं.... कि जैसे चाहो उड़ा लो.... औरतें युद्ध नहीं होत... Read more
clicks 178 View   Vote 0 Like   2:06pm 6 Mar 2014 #
Blogger: anujaa
कितना अच्‍छा होता है एक दूसरे को जाने बगैरपास-पास होना और उस संगीत को सुनना जो धमनियों में बजता है उन रंगों में नहा जाना जो बहुत गहरे चढ़ते-उतरते हैं।शब्‍दों की खोज शुरू होते ही हम एक-दूसरे को खोने लगते हैं ,और उपके पकड़ में आते ही एक-दूसरे के हाथों से मछली की तरह फ... Read more
clicks 167 View   Vote 0 Like   8:17am 21 Feb 2014 #
Blogger: anujaa
हमसफ़र होता कोई तो बांट लेते दूरियां राह चलते लोग क्‍या समझें मेरी मजबूरियां।। मुस्‍कुराते ख्‍़वाब चुनती ये नज़र किस तरह समझे मेरी कि़स्‍मत की नामंजूरियां।। हादसों की भीड़ है चलता हुआ ये कारवां जि़न्‍दगी का नाम है लाचारियां मजबूरियां।। फिर किसी ने आज छेड़ा जि़क्र-... Read more
clicks 200 View   Vote 0 Like   12:55pm 11 Feb 2014 #
Blogger: anujaa
छोड़ना मत तुम उम्‍मीद... एक दिनबादल का एक छोर पकड़कर वासन्‍ती फूलों की महक में लिपट... धरती गायेगी वसन्‍त का गीत.... सब दु:ख...सारे भय... सब आतंक... सारी असफलताएं ......सारा आक्रोशपिघलकर बह जाएगा सूरज के सोने के साथ....ओढ़ लेंगी सब दिशाएं गुलाबी बादलों की चूनर....मौसम गायेगारंग के गीत.... ... Read more
clicks 167 View   Vote 0 Like   1:58pm 4 Feb 2014 #
Blogger: anujaa
मेरी इस अस्मिता से सहम क्यों जाते हो तुम मानव होने के मेरे उद्घोष को पचा क्यों नहीं पाते तुमतुम्हें पता है किइसके बाद वस्तु नहीं रह जाउंगी मैंजिसे तुम इस्तेमाल करो और फेंक दोतुम्हें पता है कि तकिया भर नहीं रह जाउंगी मैंजिसकी छाती में मुहं छिपाकर रो लो तुम और फिर लतिया ... Read more
clicks 167 View   Vote 0 Like   5:17am 16 Jan 2014 #
Blogger: anujaa
मैं क्या हूं.....सूरज की एक किरनफूल की एक पंखुड़ीओस की एक बूंदहवा में उड़ता कोई आवारा पत्ताआंधी का एक झोंकाआग की एक लपटयाजीवन की एक धड़कनमुझे आज कुछ भी नहीं पता अपनाअपने आप से अनजान मैंअपनी ही तलाश में हूं इस सफर मेंमैं अग्निशिखा अमृताअब किसी अग्निपरीक्षा के लिए नहीं हू... Read more
clicks 173 View   Vote 0 Like   2:00pm 15 Jan 2014 #
Blogger: anujaa
न.....।बीते दिनों से लौटने को मत कहो..... उनकी यादों को संजो लो....समय ने बहुत सी सीपियां....सीपियों में मोतीतुम्‍हारे लिये छुपा रखे हैं....अपनी हथेलियों में.....उन्‍हें खोजो.....समेटने को  हथेलियां खोल दो.....।अनुजा.... 12.01.14... Read more
clicks 190 View   Vote 0 Like   2:09pm 12 Jan 2014 #
Blogger: anujaa
इतने विशाल साम्राज्‍य का स्‍वामी...इतने व्‍यापक समुदाय का राजाहासिलएक छोटी सीनसेनी....एक चिंगारीऔर तब्‍दील हो गया लपटों में .... ....छू लिया सारा आकाश....हम विदा नहीं देंगे....राख नहीं होने देंगे...जीना होगाहर चेतना में एक चुनौती की तरहघेर लेना होगा सारा आकाश....अनुजा30.10.13... Read more
clicks 146 View   Vote 0 Like   1:15pm 30 Oct 2013 #
Blogger: anujaa
कुछ बरस पहले......शायद 2005-06 की बात है.... उन दिनों मैं दिल्‍ली में थी, कथाकार विजय के साथ ऐसे ही चर्चा चल रही थी। चर्चा में कहीं राजेन्‍द्र यादव की चर्चा भी आयी...'सारा आकाश'से लेकर 'हासिल'तक की उनकी यात्रा, गाहे ब गाहे उनकी बेलाग टिप्‍पणियां, उनकी मान्‍यताएं, साहित्‍य की राजनीति ... Read more
clicks 190 View   Vote 0 Like   5:03am 29 Oct 2013 #
[ Prev Page ] [ Next Page ]


Members Login

Email ID:
Password:
        New User? SIGN UP
  Forget Password? Click here!
Share:
  • Latest
  • Week
  • Month
  • Year
  हमारीवाणी.कॉम पर ब्लॉग पंजीकृत करने की विधि बहुत सरल हैं। इसके लिए सबसे पहले प्रष्ट के सबसे ऊपर दाईं ओर लिखे ...
  हमारीवाणी पर ब्लॉग-पोस्ट के प्रकाशन के लिए 'क्लिक कोड' ब्लॉग पर लगाना आवश्यक है। इसके लिए पहले लोगिन करें, लोगिन के उपरांत खुलने वाले प...
और सन्देश...
कुल ब्लॉग्स (3916) कुल पोस्ट (192564)