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Blog: आधारभूत ब्रह्माण्ड

Blogger: अज़ीज़ राय
माध्यमिक शालाओं की कक्षा में हम सभी ने प्रिज्म के बारे में पढ़ा है। और आज भी उसके बारे में बहुत कुछ जानते हैं। प्रिज्म के बारे में हम जो कुछ जानते हैं। वो यह है कि प्रिज्म पांच फलकों से निर्मित वह संरचना है, जिसमें दो फलक समान्तर और तीन फलक त्रिभुजाकार आकृति में गठित होत... Read more
clicks 445 View   Vote 0 Like   7:08am 17 Jul 2013 #
Blogger: अज़ीज़ राय
यह घटना किसी व्यक्ति विशेष की नहीं है। अपितु १० में से ८ उन हर उत्सुक विद्यार्थियों की है। जो हमेशा हर चर्चित विषय पर यह सोचते हैं कि क्या सामने वाला व्यक्ति सही कह रहा है ! सामने वाले व्यक्ति की सोचने की प्रणाली कैसी है ! वह शब्दों को किस तरह से स्वीकारता है ! क्या वाकई सा... Read more
clicks 206 View   Vote 0 Like   9:49am 16 Jul 2013 #
Blogger: अज़ीज़ राय
कुछ वर्षों पूर्व हमें ज्ञात हुआ है कि ब्रह्माण्ड किसी विशिष्ट आरंभिक शर्तों के साथ अस्तित्व में नहीं आया। और साथ ही सर "स्टीफन विलियम हाकिंग" के द्वारा इस बात की जानकारी दी गई कि आज का ब्रह्माण्ड पूर्व की कई संभावित अवस्थाओं के अध्यारोपण का परिणाम है। इसके बाबजूद कुछ ... Read more
clicks 183 View   Vote 0 Like   6:23pm 30 Jun 2013 #
Blogger: अज़ीज़ राय
माध्यमिक शालाओं में और विशेषकर विज्ञान संकाय के विद्यार्थियों को जब कभी प्रायिकता संबंधी अध्याय पढ़ाने की आवश्यकता होती है। तब शिक्षकों द्वारा प्रायिकता को समझाने के लिए "सम्भावना" का प्रयोग किया जाता है। शुरूआती दौर तक "सम्भावना" को ही प्रायिकता मानना उचित था। परन... Read more
clicks 254 View   Vote 0 Like   4:15am 30 Jun 2013 #परिभाषित विज्ञान
Blogger: अज़ीज़ राय
प्राकृतिक नियमों का अध्ययन करने से ज्ञात होता है कि ये नियम भौतिकता के रूपों का आपसी व्यवहार है। और वहीं व्यावहारिक नियम एक निश्चित सीमा तक व्यवस्था कायम करने की युक्ति है। प्राकृतिक नियम, ये वे नियम हैं जो टेस्ट टिउब बेबी, कृत्रिम खून, अविष्कार और कृत्रिम पौधे जैसी व... Read more
clicks 206 View   Vote 0 Like   5:07am 7 Jun 2013 #
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हम उन सभी चीजों को देख सकते हैं। जिन्हें देखा जा सकता है। चाहे उनका आकार अतिसूक्ष्म ही क्यों ना हो। चाहे बात गुरुत्वीय या परमाण्विक धरातल के स्तर की ही क्यों ना हो। परन्तु इन चीजों को अलग-अलग युक्तियों द्वारा ही देख सकते हैं। लेकिन उन रचनाओं को नहीं देखा जा सकता। जिसके ... Read more
clicks 140 View   Vote 0 Like   6:57am 6 Jun 2013 #
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हालाँकि, गणित और मैथ्स को एक ही माना जाता है। परन्तु सभ्यताओं में इनकी उत्पत्ति और सभ्यताओं के विकास में इनके अर्थ, भिन्न-भिन्न हुआ करते थे। जहाँ एक तरफ गणित का व्यवहारिक उपयोग आर्यों के भारत आने के साथ ही प्रारंभ हुआ। वहीं दूसरी तरफ पश्चिमी सभ्यताओं में मैथ्स को आत्म-... Read more
clicks 184 View   Vote 0 Like   5:54pm 31 May 2013 #परिभाषित विज्ञान
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"यदि कोई वस्तु स्थिर है तो वह स्थिर ही रहेगी और यदि वह गतिमान है तो स्थिर वेग से गतिशील ही रहेगी। जब तक उस पर कोई नेट वाह्य बल न लगाया जाय।" इसे ही गति का प्रथम नियम अथवा जड़त्व का नियम कहते हैं। आइये हम इस नियम के विपरीत कल्पना करते हैं। जैसा कि हम सभी जानते है कि किसी भी तथ... Read more
clicks 277 View   Vote 0 Like   5:27am 4 May 2013 #
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लोगों से अक्सर सुनने में आता है कि "नियम, तोड़ने (टूटने) के लिए ही बनाए (बनते) जाते हैं।" हाँ, यह तथ्य बिल्कुल सही है कि अधीनस्थ नियमों के स्थान पर ही दूसरे नियम बनाए अथवा लागू हो सकते हैं। परन्तु दोनों तथ्यों के अर्थ में फ़र्क है। वो इसलिए कि जो लोग इस बात को जानते हैं कि अधी... Read more
clicks 153 View   Vote 0 Like   3:44am 4 May 2013 #
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अरबों तारों का एक विशाल निकाय मंदाकिनी (Galaxy) कहलाता है। ब्रह्माण्ड में १०० अरब मंदाकिनियाँ हैं, और प्रत्येक मंदाकिनियों में १०० अरब तारे हैं। यानि कि ब्रह्माण्ड में तारों की कुल संख्या लगभग १० की घाट २२ है। मंदाकिनियों का ९८% भाग तारों से तथा शेष २% भाग गैसों और धूल के कण... Read more
clicks 170 View   Vote 0 Like   11:32am 1 May 2013 #
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तर्क-वितर्क द्वारा प्रकृति को निर्धारित नहीं किया जा सकता। परन्तु जब आप कहते हैं कि निर्देशित संरचना गोल है। तब गोल संरचना की शर्त के मुताबिक उस संरचना का एक केंद्र तथा उसकी परिधि २∏r (परिधि ज्ञात करने का सूत्र) सूत्र से ज्ञात होनी चाहिए। फिर चाहे उस संरचना का आयतन अथवा... Read more
clicks 177 View   Vote 0 Like   6:58am 25 Apr 2013 #
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अनंत का उपयोग सदियों से होता आया है। फिर भी हमारे द्वारा उसको अपरिभाषित कह देना कितना उचित है। आइये.. विज्ञान के भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में अनंत को परिभाषित करतें हैं।भौतिकी में : इसमें शामिल होने के लिए ऐसा कुछ भी शेष नहीं रह जाता। जिसका अस्तित्व हो।खगोल विज्ञान में : ग... Read more
clicks 132 View   Vote 0 Like   6:43am 25 Apr 2013 #
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साधारणतः मनुष्य की समझने की क्षमता उदाहरण तक सीमित है। कहने का तात्पर्य वह प्रत्येक घटना, गुण अथवा अस्तित्व जिसे मनुष्य समझना चाहता है, को एक अन्य समकक्षीय घटना, गुण अथवा अस्तित्व द्वारा उदाहरण रूप में समझता है। परन्तु वे घटनाएँ, गुण और अस्तित्व के अंश जिनकी उपस्थिति... Read more
clicks 149 View   Vote 0 Like   1:55pm 20 Apr 2013 #
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आधारभूत, ब्रह्माण्ड का वह विशिष्ट गुण है। जो ब्रह्माण्ड संबंधी चर्चाओं का कारण बनता है। आधारभूत अर्थात अपरिवर्तित.. यह गुण ब्रह्माण्ड का मूल-आधार है। वे गुण जो ब्रह्माण्ड के अस्तित्व के पर्याय हैं। जो अपरिवर्तित हैं। फलस्वरूप हम उनके बारे में चर्चा कर पाते हैं। इस ग... Read more
clicks 197 View   Vote 0 Like   7:50pm 10 Apr 2013 #
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जब दो रेलगाड़ियाँ एक ही दिशा में भिन्न-भिन्न वेग से गतिशील हों। तब आप देखेंगे कि कम वेग से गतिशील रेलगाड़ी अधिक वेग से गतिशील रेलगाड़ी के सापेक्ष पीछे-पीछे गतिशील न होकर, पीछे की ओर गतिशील होती हुई प्रतीत होती है। यह साधारण सापेक्षता का उदाहरण है। विज्ञान में प्रतीत ह... Read more
clicks 145 View   Vote 0 Like   8:24pm 9 Apr 2013 #
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ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति को लेकर भिन्न-भिन्न मान्यताएँ हैं। इन सभी मान्यताओं में भिन्नता का कारण ब्रह्माण्ड की सीमा है। ब्रह्माण्ड की सीमा लोगों की अवधारणाओं को पृथक करती है। सीमा अर्थात किसी अन्य ब्रह्माण्ड की परिकल्पना करना। ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति पर दिया गया सब... Read more
clicks 192 View   Vote 0 Like   8:15pm 9 Apr 2013 #
Blogger: अज़ीज़ राय
प्रत्येक अवयव, कण, पिंड, निकाय अथवा निर्देशित तंत्र किसी न किसी रूप में क्रियाएँ करते हैं। इन क्रियाओं को हम भौतिकता के रूपों (अवयव, कण, पिंड निकाय या निर्देशित तंत्र) के अस्तित्व की जरुरी शर्त मान सकते हैं। भौतिकता के रूपों के अस्तित्व के लिए जरुरी है कि वे सभी क्रिया... Read more
clicks 141 View   Vote 0 Like   8:05pm 9 Apr 2013 #
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प्रकाश को सरल रेखीय गति करने की प्रकृति के रूप में जाना जाता है। परन्तु वास्तविकता कुछ और ही है। प्रकाश को यह जानकारी तो रहती है कि वह सरल रेखीय गति कर रहा है। तथा निर्धारित स्थान को भी यही जानकारी रहती है कि प्रकाश उसके पास तक सरल रेखा में गति करते हुए आया है। परन्तु जब ... Read more
clicks 200 View   Vote 0 Like   9:55am 29 Mar 2013 #
Blogger: अज़ीज़ राय
विज्ञान चाहे कितनी भी उन्नति क्यों न करे, यह आशा रखना व्यर्थ है कि हम कभी-न-कभी अतीत में भी यात्रा कर पाएँगे। यदि ऐसा संभव होगा, तो हमें मजबूरन स्वीकार करना होगा कि सैद्धांतिक रूप से पूर्णतः असंगत परिस्थितियाँ भी संभव हैं।               - लेव लांदाऊ (नोबल पुरुस्का... Read more
clicks 149 View   Vote 0 Like   8:33pm 1 Mar 2013 #
Blogger: अज़ीज़ राय
वर्तमान में ज्ञात भौतिकता के रूप = अवयव, कण, पिंड, निकाय (बंद या खुला) और निर्देशित तंत्र (जड़त्वीय या अजड़त्वीय), भौतिकता के किसी भी रूप की समानता, आधारभूत ब्रह्माण्ड की संरचना के साथ नहीं की जा सकती। फिर चाहे भौतिकता के किसी भी रूप के गुण, उस संरचना से ही क्यों ना मिलते हो... Read more
clicks 158 View   Vote 0 Like   8:28pm 1 Mar 2013 #भौतिकता के रूप
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