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Blogger: सुज्ञ
"पहले स्वयं सुधरो, फिर दुनिया को सुधारना"एवं "क्या करें दुनिया ही ऐसी है"। वस्तुतः यह दोनो कथन विरोधाभासी है। या यह कहें कि ये दोनो कथन मायावी बहाने मात्र है। स्वयं से सुधार इसलिए नहीं हो सकता कि दुनिया में अनाचार फैला है, स्वयं के सदाचारी बनने से कार्य सिद्ध नहीं होते और... Read more
clicks 182 View   Vote 0 Like   6:47pm 5 Sep 2013 #जीवन मूल्य
Blogger: सुज्ञ
एक राजा था। एक बार वह सैर करने के लिए अपने शहर से बाहर गया। लौटते समय कठिन दोपहर हो गई तो वह किसान के खेत में विश्राम करने के लिए ठहर गया। किसान की बूढ़ी मां खेत में मौजूद थी। राजा को प्यास लगी तो उसने बुढ़िया से कहा, "बुढ़ियामाई, प्यास लगी है, थोड़ा-सा पानी दे।"बुढ़िया ने सो... Read more
clicks 140 View   Vote 0 Like   12:06pm 24 Aug 2013 #बोध-कथा
Blogger: सुज्ञ
प्रायः लोग कहते है सदाचरण और जीवन मूल्य श्रेयस्कर है किंतु इस मार्ग पर चलना बड़ा कठिन है। नैतिकता धारण करना दुष्कर कार्य है जबकि सच्चाई यह है कि सदाचरण जीवात्मा का मूलभूत स्वभाव है। बस, सुविधा और स्वार्थ पूर्ति के मानस के कारण ही विकार अपनी जगह बना लेते है। यदि उदाहरण ... Read more
clicks 195 View   Vote 0 Like   11:28am 7 Aug 2013 #दुर्लभ
Blogger: सुज्ञ
यदि आज के दौर में उनकी प्रासंगिता त्वरित लाभकारी दृष्टिगोचर नहीं होती, तो फिर क्या आज उनकी कोई सार्थकता नहीं रह गयी है. क्या हमें इन मूल्यों का समूल रूप से परित्याग करके समय की आवश्यकता के अनुरूप सुविधाभोगी जीवन मूल्य अपना लेने चाहिए? आज सेवा, त्याग, उपकार, निष्ठा, नैत... Read more
clicks 168 View   Vote 0 Like   9:40am 5 Aug 2013 #कर्तव्यनिष्ठा
Blogger: सुज्ञ
प्रत्येक धर्म के मूल में करूणा, प्रेम, अनुकम्पा, निःस्वार्थ व्यवहार, जीवन का आदर, सह-अस्तित्व जैसे जीवन के आवश्यक मूल्य निहित हैं। दया, परोपकार, सहिष्णुता वास्तव में हमारे ही अस्तित्व को सुनिश्चित बनाए रखने के लिए हैं। चूंकि जीने की इच्छा प्राणीमात्र की सबसे बड़ी और सर... Read more
clicks 143 View   Vote 0 Like   2:31pm 3 Aug 2013 #दर्शन
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मिथिला नरेश नमि दाह-ज्वर से पीड़ित थे। उन्हें भारी कष्ट था। भांति-भांति के उपचार किये जा रहे थे। रानियॉँ अपने हाथों से बावना चंदन घिस-घिस कर लेप तैयार कर रही थीं।जब मन किसी पीड़ा से संतप्त होता है तो व्यक्ति को कुछ भी नहीं सुहाता। एक दिन रानियां चंदन घिस रही थीं। इससे उ... Read more
clicks 159 View   Vote 0 Like   6:38am 29 Jul 2013 #एकत्व-भाव
Blogger: सुज्ञ
दो भाई धन कमाने के लिए परदेस जा रहे थे। रास्ते में उन्होंने देखा कि एक बूढ़ा दौड़ा चला आ रहा है। उसने पास आते ही कहा, "तुम लोग इस रास्ते आगे मत जाओ, इस मार्ग में मायावी भयानक पिशाच बैठा है। तुम्हें खा जाएगा। "कहते हुए विपरित दिशा में लौट चला। उन भाइयों ने सोचा कि बेचारा बूढ... Read more
clicks 206 View   Vote 0 Like   8:41am 25 Jul 2013 #बोध-कथा
Blogger: सुज्ञ
कूडा-वाहनएक दिन एक व्यक्ति टैक्सी से एअरपोर्ट जा रहा था।  टैक्सी वाला कुछ गुनगुनाते हुए बड़े मनोयोग से गाड़ी चला रहा था कि सहसा एक दूसरी कार, पार्किंग से निकल कर तेजी से रोड पर आ गयी। टैक्सी वाले ने तेजी से ब्रेक लगाया, गाड़ी स्किड करने लगी और मात्र एक -आध इंच भर से,  सा... Read more
clicks 133 View   Vote 0 Like   10:45am 17 Jul 2013 #बोध-कथा
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एक लड़की अपनी माँ के पास आकर अपनी परेशानियों का रोना रो रही थी।वो परीक्षा में फेल हो गई थी। सहेली से झगड़ा हो गया। मनपसंद ड्रेस प्रैस कर रही थी वो जल गई। रोते हुए बोली, "मम्मी, देखो ना, मेरी जिन्दगी के साथ सब कुछ उलटा - पुल्टा हो रहा है।" माँ ने मुस्कराते हुए कहा, यह उदासी और रोन... Read more
clicks 148 View   Vote 0 Like   12:24pm 13 Jul 2013 #बोध-कथा
Blogger: सुज्ञ
क्रोध मन का एक अस्वस्थ आवेग है। जीवन में अप्रिय प्रसंग, वंचनाएं, भूलें, असावधानियां, मन-वचन-काया की त्रृटियों से, जाने अनजाने में विभिन्न दुष्करण  होते रहते है। मनोकामनाएं असीम होती है, कुछेक की पूर्ति हो जाती है और अधिकांश शेष रहती है। पूर्ति न हो पाने और संतोषवृति के... Read more
clicks 184 View   Vote 0 Like   5:32am 4 Jul 2013 #क्रोध
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एक संन्यासी एक राजा के पास पहुंचा। राजा ने उसका खूब आदर-सत्कार किया। संन्यासी कुछ दिन वहीं रूक गया। राजा ने उससे कई विषयों पर चर्चा की और अपनी जिज्ञासा सामने रखी। संन्यासी ने विस्तार से उनका उत्तर दिया। जाते समय संन्यासी ने राजा से अपने लिए उपहार मांगा। राजा ने एक पल स... Read more
clicks 179 View   Vote 0 Like   4:09am 3 Jul 2013 #अहंकार
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बहुत समय पहले की बात है, एक वृद्ध सन्यासी हिमालय की पहाड़ियों में कहीं रहता था। वह बड़ा ज्ञानी था और उसकी बुद्धिमत्ता की ख्याति दूर -दूर तक फैली थी। एक दिन एक महिला उसके पास पहुंची और अपना दुखड़ा रोने लगी,  "बाबा, मेरा पति मुझसे बहुत प्रेम करता था, लेकिन वह जबसे युद्ध से ल... Read more
clicks 137 View   Vote 0 Like   7:58am 1 Jul 2013 #बोध-कथा
Blogger: सुज्ञ
एक कंजूस सेठ थे। धर्म सभा में आखरी पंक्ति में बैठते थे। कोई उनकी ओर ध्यान भी नहीं देता था। एक दिन अचानक उन्होंने भारी दान की घोषणा कर दी। सब लोगों ने उन्हें आगे की पंक्ति में ले जाकर बैठाया, आदर सत्कार किया।धनसंचय यदि लक्ष्य है,यश मिलना अति दूर।यश - कामी को चाहिए,  त्याग... Read more
clicks 142 View   Vote 0 Like   1:32pm 28 Jun 2013 #त्याग
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यह एक भ्रामक धारणा है कि भड़ास या क्रोध निस्तारण से तनाव मुक्ति मिलती है। उलट, क्रोध तो तनाव के अन्तहीन चक्र को जन्म देता है। क्योंकि भड़ास निकालने, आवेश अभिव्यक्त करने या क्रोध को मुक्त करने से प्रतिक्रियात्मक द्वेष ही पैदा होता है और द्वेष से तो वैर की परम्परा का ही सर्... Read more
clicks 169 View   Vote 0 Like   11:41am 26 Jun 2013 #आत्मनियंत्रण
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एक राजा को पागलपन की हद तक आम खाने का शौक था। इस शौक की अतिशय आसक्ति के कारण उन्हे, पाचन विकार की दुर्लभ व्याधि हो गई। वैद्य ने राजा को यह कहते हुए, आम खाने की सख्त मनाई कर दी कि "आम आपके जीवन के लिए विष समान है।" राजा का मनोवांछित आम, उसकी जिन्दगी का शत्रु बन गया।एक बार राजा औ... Read more
clicks 155 View   Vote 0 Like   11:43am 20 Jun 2013 #अनुशासन
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बात प्रसिद्ध भक्त कवि नरसिंह मेहता के जीवन की है। भक्त नरसिंह मेहता निर्धन थे, भक्त अकसर होते ही निर्धन है। बस उन्हें निर्धनता का किंचित भी मलाल नहीं होता। नरसिंह मेहता भी अकिंचन थे। लेकिन विरोधाभास यह कि उनमें दानशीलता का भी गुण था। वे किसी याचक को कभी निराश नहीं करत... Read more
clicks 190 View   Vote 0 Like   2:09pm 18 Jun 2013 #निष्ठा
Blogger: सुज्ञ
एक अमीर व्यक्ति था। उसने समुद्र में तफरी के लिए एक नाव बनवाई। छुट्टी के दिन वह नाव लेकर समुद्र की सैर के लिए निकल पडा। अभी मध्य समुद्र तक पहुँचा ही था कि अचानक जोरदार तुफान आया। उसकी नाव थपेडों से क्षतिग्रस्त हो, डूबने लगी, जीवन रक्षा के लिए वह लाईफ जेकेट पहन समुद्र में क... Read more
clicks 140 View   Vote 0 Like   11:17am 17 Jun 2013 #बोध-कथा
Blogger: सुज्ञ
किसी गाँव में एक बुढ़िया रात के अँधेरे में अपनी झोपडी के बहार कुछ खोज रही थी। तभी गाँव के ही एक व्यक्ति की नजर उस पर पड़ी , "अम्मा! इतनी रात में रोड लाइट के नीचे क्या ढूंढ रही हो ?", व्यक्ति ने पूछा। "कुछ नहीं! मेरी सूई गुम हो गयी है, बस वही खोज रही हूँ।", बुढ़िया ने उत्तर दिया।फि... Read more
clicks 154 View   Vote 0 Like   1:33pm 13 Jun 2013 #अन्तर्दृष्टि
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एक शेर अपनी शेरनी और दो शावकों के साथ वन मे रहता था। शिकार मारकर घर लेकर आता और सभी मिलकर उस शिकार को खाते। एक बार शेर को पूरा दिन कोई शिकार नही मिला, वह वापस अपनी गुफा के लिए शाम को लौट रहा था तो उसे रास्ते मे एक गीदड का छोटा सा बच्चा दिखा। इतने छोटे बच्चे को देखकर शेर को दय... Read more
clicks 209 View   Vote 0 Like   7:48pm 8 Jun 2013 #बोध-कथा
Blogger: सुज्ञ
जीवन के आखिरी क्षणों में एक साधु ने अपने शिष्यों को पास बुलाया। जब सब उनके पास आ गए, तब उन्होंने अपना पोपला मुंह पूरा खोल दिया और बोले-"देखो, मेरे मुंह में कितने दांत बच गए हैं?" शिष्य एक स्वर में बोल उठे -"महाराज आपका तो एक भी दांत शेष नहीं बचा।" साधु बोले-"देखो, मेरी जीभ तो बच... Read more
clicks 152 View   Vote 0 Like   10:09am 7 Jun 2013 #बोध-कथा
Blogger: सुज्ञ
क्षमा आत्मा का नैसर्गिक गुण है. यह आत्मा का स्वभाव है. जब हम विकारों से ग्रस्त हो जाते है तो स्वभाव से विभाव में चले जाते है. यह विभाव क्रोध, भय, द्वेष, एवं घृणा के विकार रूप में प्रकट होते है. जब इन विकारों को परास्त किया जाता है तो हमारी आत्मा में क्षमा का शांत झरना बहने लग... Read more
clicks 191 View   Vote 0 Like   8:13pm 2 Jun 2013 #जीवन मूल्य
Blogger: सुज्ञ
एक घर के मुखिया को यह अभिमान हो गया कि उसके बिना उसके परिवार का काम नहीं चल सकता। उसकी छोटी सी दुकान थी। उससे जो आय होती थी, उसी से उसके परिवार का गुजारा चलता था। चूंकि कमाने वाला वह अकेला ही था इसलिए उसे लगता था कि उसके बगैर कुछ नहीं हो सकता। वह लोगों के सामने डींग हांका क... Read more
clicks 143 View   Vote 0 Like   4:30pm 29 May 2013 #दर्प
Blogger: सुज्ञ
हत्या न करना, न सताना, दुख न देना अहिंसा का एक रूप है। यह अहिंसा की पूर्णता नहीं. उसका आचारात्मक पक्ष है। विचारात्मक अहिंसा इससे अधिक महत्वपूर्ण है। विचारों में उतर कर ही अहिंसा या हिंसा को सक्रिय होने का अवसर मिलता है. वैचारिक हिंसा अधिक भयावह है। उसके परिणाम अधिक घात... Read more
clicks 226 View   Vote 0 Like   1:08pm 28 May 2013 #क्षमा
Blogger: सुज्ञ
पिछले दिनों फेस-बुक पर एक बोध-कथा पढ़ने  में आई, आप भी रसास्वादन कीजिए…एक हीरा व्यापारी था जो हीरे का बहुत बड़ा विशेषज्ञ माना जाता था। किन्तु किसी गंभीर बीमारी के चलते अल्प आयु में ही उसकी मृत्यु हो गयी।  वह अपने पीछे पत्नी और एक बेटा छोड़ गया। जब बेटा बड़ा हुआ तो उसकी ... Read more
clicks 161 View   Vote 0 Like   11:02am 25 May 2013 #बोध-कथा
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