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Blog: अस्तित्व

Blogger: अमिता नीरव
वो दोनों बस इससे पहले एक ही बार मिले थे। और उस वक्त दोनों ने ही एक-दूसरे को ज्यादा तवज्ज़ो नहीं दी थी। इस बार भी दोनों मिले तो लेकिन गर्माहट-सी नहीं थी। शायद दोनों को पिछली मुलाक़ात याद भी नहीं आई। वो दुराव भी याद नहीं था। इस बार मिले तब भी दोनों ही तरफ हल्की-हल्की झेंप थी...... Read more
clicks 191 View   Vote 0 Like   3:32am 11 Jun 2013 #दर्शन
Blogger: अमिता नीरव
बॉक्स की न्यूज थी... हमेशा की तरह फ़र्ज अदायगी को महिमामंडित किया गया था। वीसी शुक्ल के युवा पीएसओ ने ये कहकर आखिरी गोली खुद को मार ली कि बस हम अब आपकी रक्षा नहीं कर सकते हैं। टीवी और अख़बार लगे हुए हैं, उसके आखिरी शब्दों की जुगाली में। ख़बर तो जाहिर है बहुत बड़ी थी, इतनी बड... Read more
clicks 183 View   Vote 0 Like   4:58am 3 Jun 2013 #
Blogger: अमिता नीरव
कोई-कोई बचपना भी अजीब होता है... बहुत, बहुत अजीब। ये न बचपना कहलाता है और न ही परिपक्वता... जाने इसे किस कैटेगरी में रखेंगे... मई दिवस के मौके पर ये बचपना लगातार ज़हन पर दस्तक दे रहा है। इसे तब बचपना कहा जा सकता था, लेकिन आज क्या कहा जाए, ये सवाल भी परेशान कर रहा है। जाने ये चेतना ... Read more
clicks 224 View   Vote 0 Like   4:56am 1 May 2013 #बचपन
Blogger: अमिता नीरव
जानने का क्रम तो हर वक्त चलता ही रहता है, लेकिन हर बार का जानना समझ तक कब पहुँचेगा ये कहा नहीं जा सकता है। अब अंतर्राष्ट्रीय संबंध पढ़ने के दौरान जाना था कि चाहे दो देश युद्धरत हों, लेकिन उनके राजनयिक संबंध फिर भी बने रहते हैं। मतलब दो देशों के बीच युद्ध चल रहा है, लेकिन रा... Read more
clicks 213 View   Vote 0 Like   5:11pm 13 Mar 2013 #विचार
Blogger: अमिता नीरव
‘‘यदि ईश्वर ने ही औरतों के लिए यह जीवन रचा है तो फिर कहना होगा कि आपका ईश्वर सामंतवादी पुरुष है...’’ -जब ये कहा था उसने तो कई लोगों ने उसे घूरकर देखा था... माँ ने भी। जाहिर है ये ईश्वर की सर्वशक्तिमान सत्ता की कथित नीतियों पर ‘अन्याय’ का आरोप था। और ईश्वर पर आरोप कतई-कतई सह्य ... Read more
clicks 201 View   Vote 0 Like   5:43pm 6 Mar 2013 #महिला दिवस
Blogger: अमिता नीरव
फिर एक सालऔर एक मलालबढ़ती जाती हैफेहरिस्तउम्र की तरह...............क्या छूटा हैकरने, सीखने,जानने, जीने सेकैसे कम होंगे ये मलाल..............................फिर जन्म लेना चाहूँगीइन्हीं मलालों के साथताकि दूर कर सकूँशिकायतें जोखुद से हैं........................लेकिन जब तक ये नहीं होतातब तकफिर एक सालऔर एक मलाल... Read more
clicks 212 View   Vote 0 Like   4:06am 1 Mar 2013 #
Blogger: अमिता नीरव
एक शाम पहले ही टपकने लगती हैबूँदें...'साथ'रहने की, खुद के करीब बैठजाने की...मॉल में घूमने की, 'बीहड़'में भटकजाने की...थोड़ा-सा पढ़ने और बहुत कुछ को 'बना'लेने की...कुछ 'अच्छा'सुनने और फिर उसमेंडूब जाने की...इकट्ठा होती रहती हैं ख्वाहिशें...ख्वाहिशें... ख्वाहिशें...शाम होते-होते बहुत ... Read more
clicks 169 View   Vote 0 Like   5:02am 12 Feb 2013 #
Blogger: अमिता नीरव
बहुत देर से दरवाजा थपथपाने की आहट हो रही थी, लेकिन लिहाफ की नर्म गुनगुनाहट से मोह हो गया और उस थपथपाहट को लगातार टालती रही, बहुत देर तक उसे अनसुना किया, लेकिन फिर रहा नहीं गया। उठकर दरवाजा खोला तो उत्तर से आने वाली बर्फीली हवा-सी वो सीधे उतर आई और धूप भरे आँगन में फैल गई। प... Read more
clicks 215 View   Vote 0 Like   9:41am 20 Jan 2013 #
Blogger: अमिता नीरव
यूँ वो एक शांत-सी सुबह थी, चाहे इसकी रात उतनी शांत नहीं थी। गहरी नींद के बीच सोच की कोई सुई चुभी थी या फिर नींद दो-फाड़ हुई और घट्टी चलना शुरू हो गई थी, कुछ पता नहीं था। बस यूँ ही कोई अशांति थी, जो नींद को लगातार ठेल रही थी। फिर भी... रात हमेशा ही नींद की सहेली हुआ करती है, इसलिए न... Read more
clicks 192 View   Vote 0 Like   5:17pm 26 Jul 2012 #अनुभव
Blogger: अमिता नीरव
दफ्तर से आते-जाते ताऊजी को रोज मालीपुरा पर मोगरे के फूल नजर आते रहते थे। अचानक ही उन्हें खयाल आया और उन्होंने इसे बा से कहा कि – ‘’क्यों नहीं ‘इसकी’ वेणी गूँथवा दी जाए... कितना मोगरा आ रहा है। कोई दिन ऐसा हो सकता है जिसमें दो-तीन घंटे मिल सकते हों...?’’ लालच तो बा को भी आया... आख... Read more
clicks 181 View   Vote 0 Like   5:06pm 5 Jul 2012 #अनुभव
Blogger: अमिता नीरव
आखिर आषाढ़ शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी से विधिवत व्रत शुरू हो गए। समाज की धर्मशाला में जया-पार्वती को बैठाया गया। मिट्टी के हाथी पर शिव-पार्वती गेहूँ के जवारों के बीच छत्र के नीचे एक बाजवट (चोकोर पाटा) पर विराजे...। एक शाम पहले उसके खाने पर खासा ध्यान दिया गया। आज अच्छे से पेट ... Read more
clicks 185 View   Vote 0 Like   10:41am 1 Jul 2012 #नॉस्टेल्जिया
Blogger: अमिता नीरव
जेठ उतर रहा था। कोलामन की हवाएँ चलना शुरू हो चुकी थी। माँ और बा (ताईजी) दोनों ही जान रही थीं कि ये बस बारिश का संदेश है। मानसून-वानसून क्या होता है, इससे दोनों को ही कोई लेना-देना नहीं था। बात ये थी कि बारिश से पहले की क्या और कैसी तैयारियाँ की जानी है। शाम ढ़ल रही थी, बहुत धी... Read more
clicks 177 View   Vote 0 Like   4:40am 30 Jun 2012 #परंपरा
Blogger: अमिता नीरव
उस सुबह, जबकि थोड़ी फुर्सत थी और मन खुला हुआ, यूँ ही पूछ लिया – क्या तुम्हारे बचपन में संघर्ष थे। संघर्ष... नहीं... किस तरह के...? मतलब स्कूल पहुँचने के लिए लंबा चलना पड़ा हो या फिर रोडवेज की बस से स्कूल जाना पड़ा हो या लालटेन की रोशनी में पढ़ना पड़ा हो! – मैंने स्पष्ट किया। हाँ, ... Read more
clicks 197 View   Vote 0 Like   4:40am 24 May 2012 #संस्मरण
clicks 182 View   Vote 0 Like   3:46pm 21 May 2012 #
Blogger: अमिता नीरव
एक संघर्ष चल रहा है या फिर ... ये चलता ही रहता है, लगातार हम सबके भीतर... मेरे-आपके। इसका कोई सिद्धांत नहीं, कोई असहमति नहीं, कोई समर्थक नहीं, कोई विरोधी नहीं। कोई दोस्त नहीं, कोई दुश्मन भी नहीं। मेरे औऱ मेरे होने के बीच या फिर मेरे चाहने और न कर पाने के बीच। अपने आदर्श और अपने य... Read more
clicks 154 View   Vote 0 Like   11:48am 13 May 2012 #विचार
Blogger: अमिता नीरव
तू समझती क्यों नहीं, पूरी दुनिया से लड़ता-भिड़ता रहता हूँ, बस तेरे ही सामने घुटनों के बल होता हूँ। - आखिरकार उसने बहुत हताशा में भर कर लड़की से कहा था। लड़की ने उसके सिर पर हाथ घुमा कर उसके बालों को बिखेर दिया और मुस्कुरा दी। वो जानती तो है, लेकिन मानती नहीं है। लड़की को उस... Read more
clicks 188 View   Vote 0 Like   9:44am 28 Apr 2012 #प्रेम-कहानी
Blogger: अमिता नीरव
साल भर में यही कुछ दिन हुआ करते हैं, जब वो खुद हो जाती है... वरना तो अंदर से बाहर की तरफ तनी रस्सी पर नट-करतब करते हुए ही दिन और जिंदगी गुजर रही होती है। कभी संतुलन बिगड़ जाता है, गिरती है, दर्द-तंज सहती है, असफल होती है और फिर उठकर करतब दिखाने लगती है। कभी-कभी सोचती है, क्या सबक... Read more
clicks 184 View   Vote 0 Like   1:18pm 25 Apr 2012 #अनुभव
Blogger: अमिता नीरव
साफ़-शफ्फ़ाफ़कोरे-करारे सफ़ों कीनोटबुक-सी है उम्रहर पन्ने परजिंदगी करती चलती हैहिसाबसुख-दुख, झूठ-सचसही-गलत, मान-अपमाननैतिक-अनैतिक, सफलता-असफलताऔर ना जाने किस-किसी चीज कालिखती जाती हैसफ़ों-पर-सफ़ेकरती जाती है खत्मउम्र को जैसेऔर भरी हुई नोटबुकअख़्तियार कर लेती हैएक ... Read more
clicks 189 View   Vote 0 Like   7:16am 14 Apr 2012 #
Blogger: अमिता नीरव
सुबह जल्दी उठ पाओ तो दिन कितना संभावनाओं भरा हो जाता है... कोई टुकड़ा अपने लिए भी बचाया जा सकता है, किसी में सपने भरे जा सकते हैं और किसी हिस्से को बस यूँ ही हवाओं में उड़ाया भी जा सकता है... उस सुबह का वो ऐसा ही खास समय था। अखबार आस-पास सरसरा रहे थे, लेकिन विचार शून्यता की ही-सी... Read more
clicks 204 View   Vote 0 Like   6:44am 8 Apr 2012 #जिंदगी
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