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ज़िक्र-ए-ख़याल

भिखारी के भेष मैं सोनू निगमसोनू निगम एक ईमानदार और सरल हृदय वाला व्यक्तित्व है. वह जहां दूसरों के दर्द को समझते हैं वहीं, लोगों की मदद करने में भी पीछे नहीं रहते हैं. यही नहीं, युवाओं के लिए सोनू निगम एक स्टाइल आईकॉन भी हैं और अपने फैंस को हमेशा अपने न्यू लुक और हेयरस्टा...
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  August 16, 2016, 3:11 pm
संगीतकार खैयाम के साथ गायक सोनू निगमनाम- सोनू निगमजन्मतिथि- 30 जुलाई 1973पिता- अगम कुमार निगममाता- शोभा निगमबहनें- मीनल और निकितापत्नी का नाम- मधुरिमाबेटा- निवान निगमसोनू निगम का जन्म 30 जुलाई 1973 को भारत में हरियाणा के फरीदाबाद में एक कायस्थ परिवार में हुआ. वह ह...
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  August 16, 2016, 2:05 pm
.....डिम्पल सिरोही.....सोनू निगम एक उम्दा पर्सनेलिटी तो हैं ही साथ ही वह बॉलीवुड की एक मशहूर आवाज भी हैं, लेकिन जिंदगी में कामयाबी और आलोचनाएं भी साथ-साथ चलती हैं. सिंगर सोनू निगम के साथ भी ऐसा ही है. उनका विवादों से उस समय नाता जुड़ा जब 2015 में उन्होंने राधे मां के मिनी स्कर्ट मे...
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  August 16, 2016, 2:02 pm
भारत के सबसे समृद्ध राज्यों  पंजाब हरियाणा, दिल्ली और गुजरात में लिंगानुपात सबसे कम है। २००१ की जनगणना के अनुसार एक हजार लडक़ों पर लड़कियों की संख्या पंजाब में ७९८, हरियाणा में ८१९ और गुजरात में ८८३ है। कुछ राज्यों ने इस घटती प्रवृत्ति को गंभीरता से लिया और इसके लिए इ...
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  March 15, 2016, 3:37 pm
वो सांवली सी लड़की........ मिलती है आसमां की उड़ान में सदा उसे कहो उतर जरा जमीं से पांव लगाए कभी।वो चुपचाप सी लड़की.........बोलती है, मगर एहसास को लफ्जों में पिरोकरगाती है चमकती आंखों से, अनसुना सा गीत कोईदेखूं चेहरा अगर  पर्दा-ए-खामोशी गिराए कभी।वो परेशान सी लड़की...........लपेटे आती...
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Tag :बस यूं ही......
  August 14, 2015, 6:29 pm
मुझे मालूम नहीं था कि यह नो पर्किंग जोन है, बस कार पार्क की और उतरकर चल दी। कुछ देर बाद लौटी, तो एक पुलिस वाला कार पर कुहनी गढ़ाए शायद मेरे ही आने का इंतजार कर रहा था। मैं उसे देखकर थोड़ा सहमी, लेकिन सामान्य होकर गाड़ी के करीब पहुंची। मैडम जी गाड्डी आप ही की है के.....? , पुलिसवाल...
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Tag :बस यूँ ही...
  May 23, 2015, 6:35 pm
न आह न आहटन हलचल, न सांस, न जुंबिशकितना जिद्दी है बदन उसकासख्त हथौड़े से पैनी कैंची सेखोली जा रही हैं उसके जिस्म की परतें।बड़ी बेतरतीब सी दुनिया, उसके सीने से बाहर निकली है।किसी रोशनदान से झांकतेधूप के टुकड़े की आंख में कुछ नमी सी है।बस इक हवा है जो कभी बेजान होठों से टकर...
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Tag :बस यूं ही......
  May 9, 2015, 6:24 pm
कितने किस्से, कितने वाकये , कितने हादसे मेरे जीने की खुशी  मेंशिरकत करने आएं हैं। कुछ सिर झुकाए हैं कुछ सिर उठाएं हैं कुछ कातिल हैंकुछ कत्ल करने आएं हैंछोड़ चली थी इत्तेफाक के शहर मेंकुछ ख्वाहिशें ये  इत्तेफाक हैं कि मेरेसाथ सफर करने आएं हैं। - डिम्पल सि...
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  May 7, 2015, 4:13 pm
Dedicated to All the Beautiful Womens of the World.....कितनी ही गज़लें उलझी हैं तेरे मुलायम बालों पर, अटके हैं कितने ही सानी, मिसरे तेरे गालों पर। सुरमई रातों, में टपके थे, लफ्ज़ कभी तेरे लब से, जुगनूं के मानिंद फिरें हैं, हरसू मेरे खयालों पर।  याद भी करना भूल गए तुम, याद भी आना भूल गए,जंग कहीं, लग जाए न ...
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  February 25, 2015, 3:34 pm
यूं ही नहीं आता फलक पर सुनहरा चांद, कोई है जो रोपता हैरोशनी का बीज क्षितिज के उस पार,कोई है जो सींचता है,हर रोज नियम के साथ,बुनता है रेशा-रेशाकिरणों का कोई बांध,तबउभरता है अर्श परबनके आधा सा टुकड़ा चांद,कोई है जो सिखाता हैअंगुली पकड़कर चलना इसे,कोई है जो गोद में लेकर दिख...
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Tag :बस यूं ही......
  December 21, 2014, 2:26 pm
एक सुरीला कलाम सुनाती है खामोशी,सन्नाटों में जब गुनगुनाती है खामोशी।लफ्ज नाकाम रहे कहने में जिसे मुद्दतों,वो बात कह के चली जाती है मुझसे खामोशी।सांझा करने लगी हूं राज-ए-दिल इसी से अब,।गुफ्तगू करने लगी है मुझसे खामोशी।हो गई हूं और भी करीब अपने ,मुझको मेरी पहचान सिखाने ...
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Tag :बस यूं ही......
  December 21, 2014, 2:13 pm
 पुरूष दिवस पर बधांईयां न मिलने की टीसजैसे ही सर्दियां शुरू होती हैं तो पड़ोसी मिश्रा जी अक्सर सुबह के वक्त लॉन में आकर धूप में पड़ी कुर्सियों पर बैठकर ही अखबार पढ़ते हैं। इस दौरान कई बार वह चाय की फरमाईश भी कर देते हैं। दरअसल, वह अपनी पत्नी के साथ रहते हैं,  उनके एक बेटे ...
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  December 21, 2014, 1:59 pm
वो कामयाब क्या हुए, इतरा रहे हैं यूंजैसे कि उनके पांव के नीचे जमीं नहीं।परवाने जल के मर गए, शमा न बुझ सकीबदले हजार दौर, मगर रोशनी रही।हमने दिए जलाए थे इक इश्तियाक सेजल जाएगा शहर ही ये सोचा न था कभी।फुरसत के लम्हे मांग के मसरूफियत से तुम,आओ कि बेकरारी की आदत नहीं रही।इजहार...
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Tag :ग़ज़ल
  July 26, 2014, 6:27 pm
रह गई किस चीज की मुझमें कमी कुछ तो कहोकिस तरह होगी मुकम्मल जिंदगी कुछ तो कहोआज तो जलता हुआ था धूप में मौसम मगर,फिर हवा में आ गई कैसी नमी, कुछ तो कहोआसमां सुनसान है क्यों, गुम खड़े हैं क्यों दरख्त,शहर क्यों उजड़ा हुआ है, तीरगी कुछ तो कहोघंटियों की क्यों सदा आती नहीं मंदिर से अ...
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Tag :ग़ज़ल
  July 14, 2014, 5:17 pm
  मेरे मन में कल ख्याल आया कि मैं जब पहली बार मेरठ आई थी, तो सोचा था यहां बहुत सी ख्वाहिशों, सपनों और कल्पनाओं को पंख लगाने हैं। लेकिन मुझे ये शहर कभी रास नहीं आया। हो सकता है इसे मैं पसंद नहीं या मुझे यहां रहने का ढंग नहीं आता। हर बार इस शहर से दूर हो जाने की योजना बनती है, म...
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Tag :बस यूँ ही...
  July 6, 2014, 1:58 pm
20.4.2014 को मुंबई एब्सोल्यूट इंडिया में प्रकाशित...
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  April 22, 2014, 3:23 pm
शहर में भीड़ है, शहर में बहुत शोर है। शहर की सड़कों को खूबसूरत बनाने की बात कही जा रही है, किसी चौराहे से सुनाई पड़ती है किसी पार्टी के उम्मीदवार की आवाज। बदहवास लोग शाम के अंधेरे में उसकी एक झलक पाने को बढ़े चले जा रहे हैं। दूर गांवों से आते हुए घंटो उसी जाम चौराहे पर र...
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  April 5, 2014, 2:23 pm
 आपने यह तस्वीर ध्यान से देखी होगी और सोचा होगा कि वास्तव में यह एक खूबसूरत पैरट यानी तोते की तस्वीर है। जनाब, फिर से देखिए यह किसी रियल तोते की फोटो नहीं है, बल्कि तोते की शक्ल ओ सूरत में रंगी एक फैशन मॉडल है। और यह कलाकारी है इटली के रहने वाले पैंतीस वर्षीय  बॉडी पेंट...
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  April 5, 2014, 12:23 pm
दिल किसी दर्जी सा दिन को टांकता जाता है, जिंदगी हर घड़ी को इम्तहान करती है।मेरे सपनों को जमा करके उछाल न दे कोई, यही बात  मुझे मौत से ज्यादा परेशान करती है। कब तलक बांध के रखें, खयालों की जुल्फ को, कमबख्त, आसमानों तक उड़ान भरती है।...
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  April 2, 2014, 1:20 pm
एलिजाबेथ अलेक्जेंडरा मैरी जी हां, यही है इनका पूरा नाम, ब्रिटेन की महारानी आज लोग इन्हें एलिजाबेथ द्वितीय के नाम से जानते हैं। 21 अप्रैल 1926  को जन्मी एलिजाबेथ  प्रिंस एल्बर्ट ड्यूक की पहली संतान थीं। उनके जन्म के समय यह कोई नहीं जानता था कि वह एक दिन एक साम्राज्य पर अप...
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  March 30, 2014, 5:25 pm
मीलों की यात्रा से नहीं खोजी जा सकती है दुनियाऔर यह भी  जरूरी नहीं  कि बहुत लंबी हो यह, मगरएक आध्यात्मिक यात्रा से एक इंच की यात्रा से जो होती है बहुत कठिन, सुखद और खुशहालजिससे अपने पैरों के बल पर हम जमीन पर पहुंचते हैंऔर रखते हैं अपना पहला कदमअपने ही घर में घूम ल...
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  March 10, 2014, 1:57 pm
 जब मैं सफर में होती हूं, तन स्थिर होता है लेकिन मन को मिल जाते हैं विषय अनंत। मिल जाती है धूमिल पृथ्वी पर कहीं थोड़ी हरियाली, और ज्Þारा सा खुश होने को थोड़ी खुशियां।मिलते हैं बहुत चेहरे पहचानने को,खामोश रहकर भी जो कह जाते हैं कई कहानियां।मिलते हैं कतार में पीछे क...
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Tag :बस यूं ही......
  March 9, 2014, 3:58 pm
On 8th March  Women's Dayआते जाते जो घटता है हर और सहा, किसी काम को जिसने कभी न नहीं कहा।बेहतर दिन की आशा में हर रोज निराशा सहती है स्त्री है वह आराम नहीं है पसंद उसे न ही तुमकों तन्हा रहने देती है स्त्री है वह, जो गुजारती है दिन मुस्कुराते हुए मगर सोती है सिसकती रातें लेकर, स...
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Tag :बस यूं ही......
  March 6, 2014, 2:22 pm
 अभी अभी  कुछ शब्दों को जोड़ा,  कुछ पंक्तियां बन गई जरा गौर फरमाईए ....... अपनी  हिम्मत का राज  मै बताता हूं, जब संभलता हूं तो अपनी पीठ थपथपाता हूं। दर्द में भी मुस्कुराता हूं  बेहिसाब, इस तरह जलने वालों को मैं जलाता हूं। गले मिलकर भी गला दबा देते हैं लोग, हा...
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  March 5, 2014, 5:46 pm
 3 मार्च 20014 को  मुंबई एब्सोल्यूट इंडिया में प्रकाशित...
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  March 4, 2014, 3:38 pm
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