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Blog: लाजवंती की टेढ़ी लकीरें

Blogger: shweta rani khatri
उन दोनों को ट्रेन में खिड़की वाली सीट पर बैठना हमेशा से पसंद था. उल्टी दिशा में भागते खेत-पेड़ जब चलती रेलगाड़ी के पेट में समाते जाते तो तेज हवा में आँखे मिचमिचाते बाहर देखते लाजवंती और वीर किसी और ही दुनिया में चले जाते थे. बादलों में आकार बन जाते, आस-पास के लोग और आवाजें ... Read more
clicks 158 View   Vote 0 Like   11:52am 30 Jun 2013 #
Blogger: shweta rani khatri
( ये लेख थोड़ी एडिटिंग के साथ जनसत्ता 19 जून 2013  के सम्पादकीय में प्रकाशित है.लिंक- http://www.jansatta.com/index.php/component/content/article/47260-2013-06-19-04-42-55)जेंडर स्टडीज़ की क्लास का पहला दिन था. जैसा कि होता आया है लड़के गिने- चुने ही थे. सबसे पूछा गया कि आपने ये कोर्स क्यों लिया? लड़कियां बढ़- चढ़ कर जवाब दे रही... Read more
clicks 303 View   Vote 0 Like   10:50am 16 Jun 2013 #role of men in feminist movement
Blogger: shweta rani khatri
दोनों का मानना है कि उनकी मम्मियां पेड़ हैं. काहे कि स्कूल में पढ़ाया गया है कि हरे पेड़ अपना खाना खुद बनाते हैं और बाक़ी लोग उन्हीं से अपना खाना लेते हैं. रोटियाँ बेलते हुए मम्मी के हाथ की हरी- हरी नसें देख कर तो शक़ की कोई गुंजाइश ही नहीं रही. अपने- अपने पापाओं को दुनिया क... Read more
clicks 202 View   Vote 0 Like   11:11am 1 Jun 2013 #Gender binary
Blogger: shweta rani khatri
हाल ही में हॉलीवुड सुपरस्टार एंजलीना जॅाली के एक इक़रारनामे ने हलचल मचा दी. इसमें इन्होंने कैंसर के खतरे से बचने के लिए डबल मैसटैक्टमी (सर्जरी द्वारा दोनों स्तन निकलवा दिया जाना) करवाना स्वीकार किया. लेकिन उसके तुरंत बाद ही उनके मिरियड जेनेटिक्स नामक फार्मा कंपनी से ... Read more
clicks 180 View   Vote 0 Like   5:27am 22 May 2013 #patent
Blogger: shweta rani khatri
उन्हें सारी चीज़ों के भाव रटे होंगे. वो दूधवाले के नागों का, कामवाली की छुट्टियों का, किराने की दूकान के उधारों का मुंहज़बानी हिसाब रखेंगी. फल- सब्ज़ी वालों से मोल- तोल करके सबसे सस्ता सौदा खरीद कर लायेंगी. पर बजट की घोषणा होगी तो आप अखबार झपट लेंगे- ‘ये पॉलिटिक्स है मम्म... Read more
clicks 168 View   Vote 0 Like   9:08am 12 May 2013 #
Blogger: shweta rani khatri
खेल खेल में क्या से क्या हो जाता है... लड़के नेशनल यूनिफॉर्म में मैदान में उतरते हैं और लड़कियां हाथ में झालरें लेकर आधे- अधूरे कपड़ों में चीयरगर्ल्स बनती हैं. वो देश का गौरव बढ़ाते हैं ये ग्लैमर बढ़ाती हैं. क्रिकेट की खबरों से पटे पड़े अखबारों से महिला क्रिकेट की खबरें न... Read more
clicks 182 View   Vote 0 Like   12:18pm 5 May 2013 #gender and sports
Blogger: shweta rani khatri
तारीख कुछ ठीक- ठीक याद नहीं, पर माहौल खूब याद है. रोज़ की तरह उस दिन भी मैं अपने नियत स्टेशन से नियत समय पर मेट्रो में चढ़ी. पर कुछ बदला- बदला लग रहा था. लड़के मुझे सीट ऑफर नहीं कर रहे थे (मैं इसकी उम्मीद भी नहीं करती, रोज़ की भागदौड़ में ‘शिवलरस' हो पाना न तो संभव है और न ... Read more
clicks 226 View   Vote 0 Like   9:27am 28 Apr 2013 #Delhi Metro
Blogger: shweta rani khatri
“लाजवंती करीब तेरह- एक साल की रही होगी. एक रात हड़बड़ा कर उठ गई. कपड़ों पे खून के दाग देखकर सर चकरा गया. उसका स्रोत जानकर हालत और खराब हो गई. पक्का कोई खतरनाक बीमारी हो गई है... शायद.... कैंसर.... सुबह सारा माज़रा देख कर घर की औरतों में कनखियों- इशारों में बातें हुईं. उसे घेर कर एक अ... Read more
clicks 167 View   Vote 0 Like   7:52pm 21 Apr 2013 #Menstruation
Blogger: shweta rani khatri
पाले- धूप बारिश में, बेटे की ख्वाहिश में, बसों- ऑटो की हड़ताल में, डॉक्टरों- दाइयों के अकाल में उसके जैसी हजारों पैदा होती हैं. वो भी हो गयी. फिर बड़ी लगन से सब उसे ‘लाजवंती’ बनाने में जुट गए. पर वो तो चुगतई की टेढ़ी लकीर बन चुकी है, जो किसी तरह सीधी नहीं होती. दिमाग की सुन्न है,... Read more
clicks 202 View   Vote 0 Like   12:36pm 21 Apr 2013 #Contemporary blog
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