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अनामिका की सदायें ...

रश्मि प्रभा जी के आह्वान पर इस रचना को रचा गया------और गणतंत्र दिवस पर उनके ब्लॉग परिचर्चा पर इसे शोभा पाने का अवसर मिला---लीजिये आपके विचारों हेतु प्रस्तुत है ---हाँ मैं नारी हूँ--जिस   पैदाइश   पर   मुंह  बिसूरा   गया फिर   कंजक   बना   बेशक   पूजा   गया लिख  दिए  कुछ  शब्द मेरी सले...
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  January 28, 2013, 11:14 am
इजहार, इकरार की कोई कसावट बुन ही नहीं सका तुम्हारे लिए ये मन !बेगानेपन का एहसास फांसले तक्सीम किये रहा तमाम उम्र .भोंडेपन, घुन्नेपन,हीनता से ग्रसित अहम्  और तिस पर मगरुरता से लिसलिसाता पौरुष तुम्हारे अधिकार से सदैव दूर करने में सहायक रहे दायरों,रिवाजों में बंधा ...
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  January 7, 2013, 3:37 pm
चुभती बेचैनी है सीने में,नमी सूखी है नैनों में,अपनों की चादर छिटकी हैअनाथ ये ' तन्हा ' बिखरी है.कुछ दिन बीते, मुझे छोड़ गए खींच के साया अपने-पन का काट नेह-तरु की डाली को  जलती यादों में छोड़ गए.कभी हाथ पकड़ चलाते थे दुनियां के ऊबड़-खाबड़ रस्तों पर आज उनके साथ को आँका कर...
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  December 3, 2012, 3:46 pm
अपनी तमाम उम्र से दो सावन निचोड़ दिएथे तुमने,  और बंजर पड़ी धरती से कंटीले झाड हटा मैं भी  खुशियों के अंकुर बो रंग-बिरंगे फूलों की लह-लहाती फसल पा झूम रही थी।कितने खुशगवार दिन थे दर्द की सारी परतें बे-बुनियाद हो अपना ठिकाना भटक गयी थीं !आज भी नजरें तलाश रही हैं प्रेम ...
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  November 6, 2012, 1:05 pm
गहन प्रेम ही तो किया था प्रियक्या इसमें भी तुम्हारी शंकाएं सिर उठाती हैं ?यह  केवल आसक्ति नहीं थी प्रिय !इसमें दोषी शायद मेरे कृत्य ही हैं कहीं न कहीं.अपेक्षाओं से भरी बदली लिए उमड़-घुमड़, बस  बरस गयी तुम पर बिना जाने कि ये गहन प्रेम तुम्हें  भी मुझसे है या नहीं ... एक प...
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  October 29, 2012, 12:52 pm
नेवैद्य में  धनी  ने  धन था  चढ़ाया निधनी ने श्रद्धा से ही काम चलाया आज  करोड़ों  के  अभीक   हैं पण्डे   करें सोने-चांदी की नीलामी के धंधे !चाह है ये धन, धन-हीनों को मिल जाए बाँट  का  नीतिपूर्ण  पर मिले न उपाय सरकारी  हाथ  में  बन्दर-बाँट  हो जाये कानून  के  प्रहरी  भी  गटक ...
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  October 19, 2012, 3:39 pm
आज लोगों  में आग नहीं  है कलम  में  भी  धार  नहीं  है डर   ने   चादर   फैलायी   है या स्वार्थ में दुनियां भर्मायी  है ?कान  के  बहरे  घूम  रहे  हैंखुली  आँख  के  ऊंघ  रहे हैं फटे   में  टाँग  अड़ाएं  कैसे  या अपनी बारी तक मूक बने हैं ?देश तो नहीं  बिका ना अब तक दंगों का तांडव हुआ न...
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  October 15, 2012, 12:23 pm
आह   कोई   ऐसा    भाव   नहीं    जो   दुख   मेरा   सहलाए दुविधा   बाँट   मेरे   मन   की   जो   सुकून  थोड़ा   दे   जाए.वर्णों    की   माला   के   आंखर  शब्दों   में   ना  ढलने  पायें मन - संताप  जो  हर  लें  मेरा,  पीड़ा  कुछ  तो कम हो जाए.चार   लाल  हैं   एक   मात  के,  जिन्हें पेट  काट  कभी पाला रो...
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  October 2, 2012, 12:47 pm
जन्म से ही अकेलेपन से बचता इंसान  रिश्तो में पड़ता है.बंधनों में जकड़ता है.कुछ रिश्ते धरोहर से मिलते  कुछ को  अपनी ख़ुशी के लिएखुद बनाता है कुछ दोस्त  बनाता हैउम्मीदें  बढाता हैकि वो अपनत्व पा सके अकेलेपन से पीछा छुड़ा सके.लेकिन जब उम्मीदें टूटती हैं शिकायतों का व...
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  September 17, 2012, 9:26 am
प्यार के बदले प्यार मिले ये जरुरी नहींएक दूसरे की चाहत मिल जाए ये कम तो नहीं.मिल न पायें इक दूजे से मजबूरियों के चलते तो कोई बात नहीं..ख्यालों में किसी के रहना भी कुछ कम तो नहीं.मुमकिन है विचार मिलें, न  मिलें ...दर्द एक दूसरे का समझ से परे हो नहीं.नम हो जाएँ जो आँखेकिसी ...
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  September 4, 2012, 3:19 pm
मैं जीवन और मृत्यु के संयोग में हूँ.अपने जीवन की साँसों के कोमल धागों में बंधा अवश्य हूँ, लेकिन विश्वास की काल्पनिक भित्ति परअपने जीवन को थाम रखा है.किसी की दुत्कारों में हूँया दुलार में.किसी के रोष में हूँया स्नेह में.प्रतीक्षा में हूँअथवा नैराश्य में.राग में हूँया...
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  July 18, 2012, 10:10 am
जब नासूर तुम्हारे भरने लगें जब दिल की जलन ठंडी होने लगेजब अश्क आँखों से सूख चलेंजब विकार  राहें भटकने लगें.जब अविश्वास पर विश्वास आने लगेजब रिश्तों की गर्माहट याद आने लगेजब दोस्ती की चाह फिर से जगेजब प्यार की हूक दिल में उठे तब पलट के एक बार देखना मुझेमैं वहीँ हूँ जहा...
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  July 11, 2012, 10:46 am
टूटी-फूटी अस्तव्यस्त सी अपनी नींद की चादर से शरीर को छुड़ा,अपने मस्तिष्क के कुछखोये और जगे,कुछ जीवित और मृत प्रायः कुलबुलाते कीड़ों का भार वहन करता सा मैं ...खुद को सूत्रधार की कठपुतली महसूस करता हुआ, उसकी ठोकरों की पीड़ा सहने को विवश भावनाओं के अंगारों पर झुलसता, छ...
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  June 21, 2012, 3:54 pm
मैं  प्रतिभा सक्सेना जी के  ब्लॉग लालित्यम्  की  नियमित पाठक हूँ.  प्रतिभा जी के  इस ब्लॉग पर आजकल  पांचाली कथा की श्रृंखला प्रस्तुत की जा रही है. इसी श्रंखला के तथ्यों  और घटनाओं से प्रेरित होकर भीष्म पितामह से सम्बंधित जो विचार मेरे मन में उपजे ..उनको यहाँ प्रस्तुत...
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  June 9, 2012, 10:52 am
तुम्हारे घर की चौखटें तोबहुत संकीर्ण थी...चुगली भी करती थीएक दूसरे की...फिर तुम कैसेअपने मन कीकर लेते थे...?शायद तुम्हारी चाहते घर की  चौखटोंसे ज्यादा बुलंद थी तब.आज ....लेकिन आजहालात जुदा हैं..चौखटें तो वहीँ हैं मगर चाहतों की चौखटों में दीमक लग गयी है...इसीलिएमजबूरियों न...
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  May 30, 2012, 7:19 pm
आज १८  मई पर ये चंद शब्द मेरे पापा की ११ वीं बरसी पर .....एक बेटी की बातें अपने पापा से ......पापा देखो ना आज मैं कितनी सायानी हो गयी हूँ.आँखों में  नमी नहीं आने देतीसदा मुस्कुराती हूँ.सबके चेहरों पे हंसी लाती हूँ.आपने ही सिखाई थी न ये सीख  ....संतुष्टि के धन को संजोनाशिकायत न करन...
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  May 18, 2012, 9:06 am
प्रियजनों का प्रिय बनने के लिएमैंने न जाने कितने ही दांव खेलेअपनी  चाहतों की अकुलाहट को सहलाने के लिए कितनों को ही अस्त-व्यस्त कर दिया....!और निरंकुश मन की न होने पर ...संघर्षों से घबराकर मौत मैं तुझे  मांगती रही ...!!सोचती थीदुखों से भागकर तुमसे आलिंगन कर लुंगी...तुम तो त...
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  May 9, 2012, 1:12 pm
बीते हुए लम्हों को इक बार लौटा दो,फिर से पूरी रातवो लफ्ज़ दोहरा दो..कि मुझसे बहुत प्यार करते हो..!!दिल की बातों को पढ़ लेना और...'जान'  कह...ढेरों प्यार कर कहना...कि मुझसे बहुत प्यार करते हो..!!वो  तुम्हारा हिज्र की रातों मेंफूट कर रोना और कहना..कि मुझसे बहुत प्यार करते हो..!!गुज...
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  May 1, 2012, 9:09 am
हे मेघदेव विचरण करते होनभ में आवारा मद-मस्त हो उष्णता में भर लेते हो जल, सिन्धु देव का अतृप्त हो.त्राहि त्राहि करता हर प्राणी देखा करता है व्यथित हो .भारी बेडोल सी काया ले, फिर उमड़-घुमड़ गरजा करते हो कभी बाढ़ रूप धर कुपित होजल-जल करते हो धरती को.उस किसान की जरा सोच करोहर...
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  April 25, 2012, 12:37 pm
13 अप्रेल को हम ख़ुशी के त्यौहार के रूप में मनाते हैं. इस दिन को लेकर हमारे देश में बहुत सी किवंद्तियाँ हैं. वैशाख सक्रांति होने के कारण धर्मग्रंथों के अनुसार, इस दिन स्नान दान का महत्त्व तो है ही, सूर्य के मेष राशि में प्रवेश करने के कारण इसे सौर वर्ष की शुरुआत भी मना जाता ...
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  April 12, 2012, 8:29 pm
दोस्तों दर्द-ए-दिल का पैमाना जब छलकता है तो जज्बातों की बरात कुछ यूँ शोर करती है...ज़रा गौर फरमाइयेगा ....प्यार के बदले में खरीदा उसनेऔर मुझे हासिल समझ लिया..पलकों पे चले आये है अश्क मुसाफिर बन कर..कि मेरे दिल  को उसने मेरा बदन  समझ लिया...!!अब एक नज़्म...मुझे यूं उदास रहने की आद...
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  April 8, 2012, 7:14 pm
कहते हैं ..प्यार वरदान है जीवन को जिसे मिल जाए वो स्वर्ग सा सुख पा लेता हैइसी मृत्यु लोक में  !लेकिन ......ये सच नहीं है,प्यार तो बहुत निर्मम है....जो न तो भय से बाँधा जा सकता है,न ही अधिकार से पाया जा सकता है !मैंने सुना था....प्यार चाहता है विश्वास का खुला आसमान ..और चाहता है निर...
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  March 4, 2012, 12:30 pm
मेरी तो तुम से लगन हैमेरी अराधना हो तुममैं अपनी अविराम प्रीति पर स्वयं से घायल,स्वयं से भूलीचली जा रही हूँ.मेरी तो चाहत हैकि मैं अपनी आशा की समाधी पर कामनाओं कीफुलवारी लगा लूँ .लेकिन मैं तुम्हारेभविष्य के पथ का शूल नहीं हूँ.मैं जानती हूँ कि..मुझसे छुटकारा पाने के प्रय...
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  January 6, 2012, 10:05 am
समझे   न   कोई  अपना,   सब   दीन   नज़र  से  देखें हों   क्षमताएं   असीम  चाहे   पर  दोष  अकूत  आरोपें.शमित किया जिसने भी अपनाया ,कटु स्वरों से गोंदासर्वस्व   दिया   अपना ,   पर    अंत   एकाकी    पाया.अभिमानी,  पौरुष  प्रखर  दिखाता,  सदा  रौंदता आया,हतभागी  के  भाग्य  को  हाय  पौरुष  ही ...
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  December 30, 2011, 8:50 am
वो गालों पे उँगलियों के निशान..वो मार खा करसूजे-सूजे होंठ,कंप-कपाता मन,डर के मारे...अश्रुओं से भीगा वो चेहरामुझे भूलता ही नहीं है. रूह की अन्तः वेदना मन के आँगन तक  कोगीला कर जाती हैं .असहाय दग्ध भावछटपटाहट की चरम सीमा तक पहुँच करअंतर्नाद करते हुए मुझे..तार - तार कर जाते ह...
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  December 21, 2011, 12:17 am
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