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Blog: अपनी जमीन

Blogger: Pankaj Mishra
मेरे पास , बंगला है , गाड़ी है , बैंक बैलेंस है ,भाई है , बहन है , बाप है , माँ हैतुम्हारे पास क्या है ?मेरे पास ..हा हा हा ....हा हा हा ...भूख है , प्यास है ,हताशा है , संत्रास हैदो ठो चिथड़ा है , एक ठो चाटी है ,चार हाथ की एक पुरानी लाठी है ,दो ठो छेदही थाली है ,बतीस साल बूढ़ी घरवाली है ,एक टूटहा ल... Read more
clicks 124 View   Vote 0 Like   7:28am 17 May 2015 #
Blogger: Pankaj Mishra
मेरे सलाम पे वो  नमस्कार बोले है मिलें बैठे कभी तो यार यार बोले है तहजीबओतमद्दुन की चाशनी में घोलकर बड़े ख़ुलूस से वो दिल के गुबार बोले है शबेविसाल मुझपे बड़ी खामोश गुज़री है शबे फ़िराक में फिर इन्तेज़ार बोले है ये उसकी अदा है या सितम की इन्तेहाजुर्म वो करे औ मुझको खबरदार बो... Read more
clicks 163 View   Vote 0 Like   2:46pm 24 Jul 2013 #
Blogger: Pankaj Mishra
उस दिन जब  , सूखने को होंगी नदियाँ उस दिन जब , ढहने को होंगे पहाड़ उस दिन जब  , जंगल होने को होंगे  उजाड़उस दिन जब , धरती के बाँझ होने  की खबर आने को होगी  मैं  फिर आऊंगा , ऐन् उस वक्त  तुम्हारे पास , थोड़ी मिट्टी , थोडा पानी , थोड़ी धूप हथेली पर लिए बस ... Read more
clicks 147 View   Vote 0 Like   6:37pm 27 May 2013 #
Blogger: Pankaj Mishra
मेरी आँखों की पुतलियों का रंग काला है मुझे नही मालूम था उसने बताया मुझे मैंने भी देखा उसकी पुतलियाँ भूरी है मैंने बतायाउसे भी नहीं मालूम थाआंख की पुतली यह रूपक इस्तेमाल करने सेअब मैं ,थोडा डरने लगा हूँ ......... Read more
clicks 177 View   Vote 0 Like   6:30pm 27 May 2013 #
Blogger: Pankaj Mishra
प्यार जो , हो गया वो , खो गया जो किया ....रह गया .....जो , हो जाता है खो जाता है जो , किया जाता है रह जाता हैं ... Read more
clicks 161 View   Vote 0 Like   5:39am 17 May 2013 #
Blogger: Pankaj Mishra
क्या होती है  ?किस जमीन पर हौले से पाँव धरती है कहाँ से ,अक्स पाती है कहाँ पेनक्श छोड़ जाती है ....सद्यः जात का रुदनसंगीत ध्यान सेसुनो सरगम से बाहरकोई सुर , चुन सको तो चुनो ,चुनो ...न  ,बूढ़ी ,टिमटिमाती ,बुझती मरणासन्न ,आँखों में जीवन का,सपनापढ़ सको तो पढ़ो ... Read more
clicks 134 View   Vote 0 Like   6:04am 22 Feb 2013 #
Blogger: Pankaj Mishra
बच्चे उगेजैसे उगते है, पौधे जंगल मेंबच्चे बढेजैसे बढते हैं, देवदार जंगल मेंबच्चे हँसेजैसे हँसते है, फूल जंगल मेंबच्चे सहेंजैसे सहती है दूब जंगल मेंबच्चे जलेंजैसे जलते हैं पलाश, जंगल मेंबच्चे खिलेजैसे खिलती है हरियाली, जंगल मेंबच्चे खुलेजैसे खुलता हैं आकाश जंगल में... Read more
clicks 145 View   Vote 0 Like   7:05pm 3 Sep 2012 #
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