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Reflections

Whatever source may have guided you here, I am sorry to inform you that this is a dead blog. If you were a regular reader or visited this page anytime before, then I would like to thank you for your support. For all those who commented on my posts, I thank you and I got to learn quite a few things from you.The older posts are available in the archive on the right. Feel free to glance/read/use it in any way you may find them useful.Goodbye for now!...
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Tag :
  June 10, 2013, 12:10 am
रातों के घंटों में बंटने से एक ज़माना पहलेजब चाँद का तकिया लगाकरआसमान की काली चादर परतारों का बिस्तर सजता था,तब दादी,कहानियों के कुछ फूल चुनकरमेरे पास रख जाती थींकुछ राजा-रानी औरराक्षस की जान खुद में समेटे तोतेबहुत देर तककमरे की हवाओं में तैरते रहते थेहर रोज एक नयी सी...
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Tag :Zen
  June 3, 2013, 10:28 pm
I am trying to innovate on existing forms of poetry with this post. This is an innovation inspired by the haiku tradition. The presentation of this poem is designed as follows:The expression is in the form of very short phrases leaving the interpretation open to the reader to some extentIt begins with two related but seemingly different questionEach stanza answers the two questions, in order of their appearance, in a concise way till the point both the questions seem to mergeA final conclusion is in the form of a word picturePlease give your feedback and you are also welcome to try your hand at this new game format in comments.जीना...लिखना...क्यों?अपरिच...
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Tag :life
  May 13, 2013, 6:16 pm
सुना था कभी कि इंसान मिट्टी से बना हैइसीलिए शायद इसे मिट्टी से इतना लगाव हैकि आसमां के फैलाव की बजायये मिट्टी की लकीरों में अपनी पहचान ढूँढता हैऔर रहता है तैयार मिट्टी में मिलाने कोउन सबको जो इसकी मिट्टी के दायरे के उस पार रहते हैंसचमुच इंसान मिट्टी का ही बना होगावर्न...
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Tag :humanism
  May 3, 2013, 2:21 pm
मैं अक्सर कुछ कम बोलता हूँ,इसलिए मेरे बोल अक्सर मुझ तक ही रह जाते हैंकिसी बंद मुट्ठी में क़ैद कुछ राज़ों की तरह...अगर तुम कभी ये मुट्ठी खोलती तो तुम्हे मालूम पड़ताकि किसी तितली की तरह कैसे ये बोलतुम्हारे आस पास मंडरा सकते थेऔर शायद,तुम्हारे सुर्ख होंठों से एक कतरा चुर...
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Tag :unspoken words
  April 21, 2013, 11:01 am

अभी ज़रा देर पहले ही तो खामोश बैठा थालगता था दुनिया की सारी चीखें भीइसे सोच से जगा नहीं पाएंगी,चाहे कितनी भी आंधियां आयें या जाएँइसकी नीली आँखों में कहीं खो कर रह जाएँगी,फिर एकाएक किसी को पुकार कर टूट सा गयाऔर बहने लगी धारें चमकती हुयी आँखों से,ये आसमां भी आजकल बहुत 'मूड...
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Tag :Winter rains
  February 22, 2013, 10:17 pm
एक ठहरे हुए पल में रुक नहीं पाती है जो,और बेचैन सी ढूंढती रहती है मायनेकभी पुरानी डायरी के पन्नों में,और कभी कैलेंडर कि अगली तारीखों मेंये शायरी भी जिंदगी जैसा ही रोग है,जो कभी मुकम्मल तो नहीं होतीपर पूरी ज़रूर होती रहती है......
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Tag :life
  February 9, 2013, 2:47 pm
इन सर्द रातों में कुछ परिंदे,शहरों में,दर बदर भटकते फिरते हैंकांच की भट्ठियों में जलती आग,उन्हें गर्मी नहीं देतीढलता सूरज घरौंदों से,उन्हें पुकारने की बजाय,अँधेरी रात का खौफ़ दिलों में भर जाता हैछोड़ कर अपने गाँव चले आये थे जो,कभी दाने की तलाश में,या अपने घरों को गुम हो...
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Tag :homeless
  January 11, 2013, 1:30 am
जब वक्त की खरोंचों ने,जिंदगी के पीतल से,कहीं कहीं परसोने की परत को उतार दिया,और दुनिया के सच को उभार दिया,तब मन में सवाल आया किआखिर सच पर ये पानी चढाना क्यूँ ज़रुरी था?क्या दुनिया के बाजार में,हकीक़त को कोई खरीददार नहीं मिलता?या उम्मीद थी ये किसोने को देख शर्म से पीतल सोन...
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Tag :society
  November 30, 2012, 4:17 am
1. कितने भी करीने से सजा लो ज़हन की दुनिया,    उसकी आँखों की फ़कत दो बूंदें सब उलझा देती हैं...    (#Delhi Rains)2. किस किस को अपनी बर्बादियों का ज़िम्मा दूँ,    कुछ माहौल खराब थे कहीं    कुछ मैं भी बुरा हूँ ....3. फुर्सत है होती तब उलझ जाता हूँ अपनी जिंदगी में मैं    पर जब ज...
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Tag :Rains
  September 18, 2012, 9:22 pm
एक अलसाई सी शाम कोयादों के एक चिराग पर उंगलियां जो घुमायीं तोतो एक बीते ज़माने का जिन्न निकल आयाऔर पूछ बैठा कि क्या हुक्म है मेरे आका?"कहो तो ले जाऊं एक ऐसी दुनिया में जहाँ फिक्र का नाम न होऔर रातों को हँसते खेलते सुबहों से मिलने के सिवा कुछ काम न होजहाँ घंटे पलों में और ब...
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Tag :memories
  July 16, 2012, 1:04 am
Almost two amazing years at XL are about to end. Saw the Learning Center in the evening today and was reminded of a pic of the same in the admissions brochure. This poem is dedicated to the awesome place called XLRI.मैं तुम्हे कभी बस तस्वीरों से जानता थादेखता था तुमको और तुम्हारे रंगों पर आश्चर्य करता थाकि क्या हकीकत तस्वीरों के सपनों जैसी हो सकती है?फिर एक दिन तुम हकीकत बन गएऔर तुमसे मिलकर जाना कि ...
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Tag :XL BM 2010-12
  February 22, 2012, 8:04 pm
बाहें फैलाए मिलने वाले सूरज के जैसे,मेरे दिन रोशन कर जाया करते थेअब ढलती शाम के ओझल होते दिन के जैसेथोडा सा अँधेरा इस कमरे में भर जाते होदौड से हांफती इस जिंदगी में साँसों के जैसेमेरे सीने में भर जाया करते थेअब टूटते जिस्म की आखिरी श्वासों के जैसेथोडा सा मुझे अकेला कर ज...
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Tag :love
  December 3, 2011, 12:02 am
चाँद बनने की तमन्ना भी रखते हैं और धब्बों से परहेज़ भी करते हैं आसमान छूने की ख्वाहिश भी रखते हैंऔर आँखों में सूरज का खौफ़ भी करते हैंकुछ अजीब ही हैं तेरे शहर के लोग, ए यारशोर को इज़हार समझते हैं और,ख़ामोशी नज़रअंदाज़ करते हैं......
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Tag :life
  October 2, 2011, 3:52 am
Written for the climax of a short film on college life.ओस की एक बूँद एक रात अनजाने में एक पत्ते से मिल गयी और जिसको पड़ाव समझा था वो शेह ज़िन्दगी सी बन गयी अब तो ये भी होश नहीं की उस मोड़ के बाद ज़िन्दगी किधर गयी एक गीत , एक हंसी और कुछ धुआं बनकर शायद हवाओं में बिखर गयी ए दोस्त तेरे साथ , और ...
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Tag :memories
  May 7, 2011, 12:21 am
कुछ अधूरा सा, कुछ अपना सातेरा सपना कल रात, इन आँखों में सिमट गयारात की तरह ही ये मन भी अँधेरे में थाएक जुगनू की तरह वो मुझमें चमक गयाअब भला इस खूबसूरत मुलाक़ात को मैं ख्वाब कैसे कहूँ?जब एक अनकहे पल में तू मेरी हकीकत बन गया …...
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Tag :
  April 24, 2011, 10:32 pm
बहुत दूर आ चुका है अब इंसानहैरत है होती अब कि मंज़िल कहाँ थीचाँद पर कदम जमाये तो एक अर्सा गुज़र गयाख्याल भी नहीं अब कि ज़मीन कहाँ थीअपने हालातों को मजबूरियों का नाम दे दियायाद नहीं आता है अब कि चाहत क्या थीमुल्क और मज़हब का नुमा इन्दा बना है हर शख्सइन लोगों की भीड़ में इ...
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Tag :Hindi poetry
  April 8, 2011, 9:22 am
एक दिन यूँ ही भावनाओं में बहकर मैंउसको वहां से अपने साथ ले आयासोचा था बस जाएगा वो भी साथ हमारेजैसे कितने ही रिवाजों ने है घर बनायापर देखकर इस दुनिया की दुनियादारीवो कुछ इस तरह से तिलमिलायाकी मैं भगवान् को मंदिर में छोड़ आयापहले पहल तो हर किसी ने उसे अपनायाउसकी बातें स...
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Tag :god
  February 2, 2011, 1:41 am
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