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Blog: Reflections

Blogger: Abhijit Shukla
Whatever source may have guided you here, I am sorry to inform you that this is a dead blog. If you were a regular reader or visited this page anytime before, then I would like to thank you for your support. For all those who commented on my posts, I thank you and I got to learn quite a few things from you.The older posts are available in the archive on the right. Feel free to glance/read/use it in any way you may find them useful.Goodbye for now!... Read more
clicks 178 View   Vote 0 Like   6:40pm 9 Jun 2013 #
Blogger: Abhijit Shukla
रातों के घंटों में बंटने से एक ज़माना पहलेजब चाँद का तकिया लगाकरआसमान की काली चादर परतारों का बिस्तर सजता था,तब दादी,कहानियों के कुछ फूल चुनकरमेरे पास रख जाती थींकुछ राजा-रानी औरराक्षस की जान खुद में समेटे तोतेबहुत देर तककमरे की हवाओं में तैरते रहते थेहर रोज एक नयी सी... Read more
clicks 189 View   Vote 0 Like   4:58pm 3 Jun 2013 #Zen
Blogger: Abhijit Shukla
I am trying to innovate on existing forms of poetry with this post. This is an innovation inspired by the haiku tradition. The presentation of this poem is designed as follows:The expression is in the form of very short phrases leaving the interpretation open to the reader to some extentIt begins with two related but seemingly different questionEach stanza answers the two questions, in order of their appearance, in a concise way till the point both the questions seem to mergeA final conclusion is in the form of a word picturePlease give your feedback and you are also welcome to try your hand at this new game format in comments.जीना...लिखना...क्यों?अपरिच... Read more
clicks 196 View   Vote 0 Like   12:46pm 13 May 2013 #life
Blogger: Abhijit Shukla
सुना था कभी कि इंसान मिट्टी से बना हैइसीलिए शायद इसे मिट्टी से इतना लगाव हैकि आसमां के फैलाव की बजायये मिट्टी की लकीरों में अपनी पहचान ढूँढता हैऔर रहता है तैयार मिट्टी में मिलाने कोउन सबको जो इसकी मिट्टी के दायरे के उस पार रहते हैंसचमुच इंसान मिट्टी का ही बना होगावर्न... Read more
clicks 180 View   Vote 0 Like   8:51am 3 May 2013 #humanism
Blogger: Abhijit Shukla
मैं अक्सर कुछ कम बोलता हूँ,इसलिए मेरे बोल अक्सर मुझ तक ही रह जाते हैंकिसी बंद मुट्ठी में क़ैद कुछ राज़ों की तरह...अगर तुम कभी ये मुट्ठी खोलती तो तुम्हे मालूम पड़ताकि किसी तितली की तरह कैसे ये बोलतुम्हारे आस पास मंडरा सकते थेऔर शायद,तुम्हारे सुर्ख होंठों से एक कतरा चुर... Read more
clicks 189 View   Vote 0 Like   5:31am 21 Apr 2013 #unspoken words
Blogger: Abhijit Shukla
अभी ज़रा देर पहले ही तो खामोश बैठा थालगता था दुनिया की सारी चीखें भीइसे सोच से जगा नहीं पाएंगी,चाहे कितनी भी आंधियां आयें या जाएँइसकी नीली आँखों में कहीं खो कर रह जाएँगी,फिर एकाएक किसी को पुकार कर टूट सा गयाऔर बहने लगी धारें चमकती हुयी आँखों से,ये आसमां भी आजकल बहुत 'मूड... Read more
clicks 180 View   Vote 0 Like   4:47pm 22 Feb 2013 #Winter rains
Blogger: Abhijit Shukla
एक ठहरे हुए पल में रुक नहीं पाती है जो,और बेचैन सी ढूंढती रहती है मायनेकभी पुरानी डायरी के पन्नों में,और कभी कैलेंडर कि अगली तारीखों मेंये शायरी भी जिंदगी जैसा ही रोग है,जो कभी मुकम्मल तो नहीं होतीपर पूरी ज़रूर होती रहती है...... Read more
clicks 172 View   Vote 0 Like   9:17am 9 Feb 2013 #life
Blogger: Abhijit Shukla
इन सर्द रातों में कुछ परिंदे,शहरों में,दर बदर भटकते फिरते हैंकांच की भट्ठियों में जलती आग,उन्हें गर्मी नहीं देतीढलता सूरज घरौंदों से,उन्हें पुकारने की बजाय,अँधेरी रात का खौफ़ दिलों में भर जाता हैछोड़ कर अपने गाँव चले आये थे जो,कभी दाने की तलाश में,या अपने घरों को गुम हो... Read more
clicks 158 View   Vote 0 Like   8:00pm 10 Jan 2013 #homeless
Blogger: Abhijit Shukla
जब वक्त की खरोंचों ने,जिंदगी के पीतल से,कहीं कहीं परसोने की परत को उतार दिया,और दुनिया के सच को उभार दिया,तब मन में सवाल आया किआखिर सच पर ये पानी चढाना क्यूँ ज़रुरी था?क्या दुनिया के बाजार में,हकीक़त को कोई खरीददार नहीं मिलता?या उम्मीद थी ये किसोने को देख शर्म से पीतल सोन... Read more
clicks 168 View   Vote 0 Like   10:47pm 29 Nov 2012 #society
Blogger: Abhijit Shukla
1. कितने भी करीने से सजा लो ज़हन की दुनिया,    उसकी आँखों की फ़कत दो बूंदें सब उलझा देती हैं...    (#Delhi Rains)2. किस किस को अपनी बर्बादियों का ज़िम्मा दूँ,    कुछ माहौल खराब थे कहीं    कुछ मैं भी बुरा हूँ ....3. फुर्सत है होती तब उलझ जाता हूँ अपनी जिंदगी में मैं    पर जब ज... Read more
clicks 190 View   Vote 0 Like   3:52pm 18 Sep 2012 #Rains
Blogger: Abhijit Shukla
एक अलसाई सी शाम कोयादों के एक चिराग पर उंगलियां जो घुमायीं तोतो एक बीते ज़माने का जिन्न निकल आयाऔर पूछ बैठा कि क्या हुक्म है मेरे आका?"कहो तो ले जाऊं एक ऐसी दुनिया में जहाँ फिक्र का नाम न होऔर रातों को हँसते खेलते सुबहों से मिलने के सिवा कुछ काम न होजहाँ घंटे पलों में और ब... Read more
clicks 192 View   Vote 0 Like   7:34pm 15 Jul 2012 #memories
Blogger: Abhijit Shukla
Almost two amazing years at XL are about to end. Saw the Learning Center in the evening today and was reminded of a pic of the same in the admissions brochure. This poem is dedicated to the awesome place called XLRI.मैं तुम्हे कभी बस तस्वीरों से जानता थादेखता था तुमको और तुम्हारे रंगों पर आश्चर्य करता थाकि क्या हकीकत तस्वीरों के सपनों जैसी हो सकती है?फिर एक दिन तुम हकीकत बन गएऔर तुमसे मिलकर जाना कि ... Read more
clicks 166 View   Vote 0 Like   2:34pm 22 Feb 2012 #XL BM 2010-12
Blogger: Abhijit Shukla
बाहें फैलाए मिलने वाले सूरज के जैसे,मेरे दिन रोशन कर जाया करते थेअब ढलती शाम के ओझल होते दिन के जैसेथोडा सा अँधेरा इस कमरे में भर जाते होदौड से हांफती इस जिंदगी में साँसों के जैसेमेरे सीने में भर जाया करते थेअब टूटते जिस्म की आखिरी श्वासों के जैसेथोडा सा मुझे अकेला कर ज... Read more
clicks 153 View   Vote 0 Like   6:32pm 2 Dec 2011 #love
Blogger: Abhijit Shukla
चाँद बनने की तमन्ना भी रखते हैं और धब्बों से परहेज़ भी करते हैं आसमान छूने की ख्वाहिश भी रखते हैंऔर आँखों में सूरज का खौफ़ भी करते हैंकुछ अजीब ही हैं तेरे शहर के लोग, ए यारशोर को इज़हार समझते हैं और,ख़ामोशी नज़रअंदाज़ करते हैं...... Read more
clicks 225 View   Vote 0 Like   10:22pm 1 Oct 2011 #life
Blogger: Abhijit Shukla
Written for the climax of a short film on college life.ओस की एक बूँद एक रात अनजाने में एक पत्ते से मिल गयी और जिसको पड़ाव समझा था वो शेह ज़िन्दगी सी बन गयी अब तो ये भी होश नहीं की उस मोड़ के बाद ज़िन्दगी किधर गयी एक गीत , एक हंसी और कुछ धुआं बनकर शायद हवाओं में बिखर गयी ए दोस्त तेरे साथ , और ... Read more
clicks 201 View   Vote 0 Like   6:51pm 6 May 2011 #memories
Blogger: Abhijit Shukla
कुछ अधूरा सा, कुछ अपना सातेरा सपना कल रात, इन आँखों में सिमट गयारात की तरह ही ये मन भी अँधेरे में थाएक जुगनू की तरह वो मुझमें चमक गयाअब भला इस खूबसूरत मुलाक़ात को मैं ख्वाब कैसे कहूँ?जब एक अनकहे पल में तू मेरी हकीकत बन गया …... Read more
clicks 147 View   Vote 0 Like   5:02pm 24 Apr 2011 #
Blogger: Abhijit Shukla
बहुत दूर आ चुका है अब इंसानहैरत है होती अब कि मंज़िल कहाँ थीचाँद पर कदम जमाये तो एक अर्सा गुज़र गयाख्याल भी नहीं अब कि ज़मीन कहाँ थीअपने हालातों को मजबूरियों का नाम दे दियायाद नहीं आता है अब कि चाहत क्या थीमुल्क और मज़हब का नुमा इन्दा बना है हर शख्सइन लोगों की भीड़ में इ... Read more
clicks 191 View   Vote 0 Like   3:52am 8 Apr 2011 #Hindi poetry
Blogger: Abhijit Shukla
एक दिन यूँ ही भावनाओं में बहकर मैंउसको वहां से अपने साथ ले आयासोचा था बस जाएगा वो भी साथ हमारेजैसे कितने ही रिवाजों ने है घर बनायापर देखकर इस दुनिया की दुनियादारीवो कुछ इस तरह से तिलमिलायाकी मैं भगवान् को मंदिर में छोड़ आयापहले पहल तो हर किसी ने उसे अपनायाउसकी बातें स... Read more
clicks 199 View   Vote 0 Like   8:11pm 1 Feb 2011 #god
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