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KAVYASUDHA ( काव्य सुधा )

गोरखपुर की साहित्यिक संस्था सृजन संवाद के द्वारा आयोजित कहानी प्रतियोगिता में मेरी कहानी "शोक"द्वितीय स्थान पर चयनित हुई है और मुझे उपविजेता घोषित किया गया है।आप भी पढ़ें इस कहानी को निम्नांकित लिंक पर : https://www.facebook.com/srijansamwad/posts/1409985769062022#story #कहानी #सृजन #srijan #शोक #neeraj #नीरज ...
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  April 11, 2017, 8:45 pm
मैं शीघ्र ही उनकी बातों से उब गया था .  जब मेरी चाय ख़तम हो गयी तो मैंने उठते हुए विदा लेने का उपक्रम किया , जिस पर मिर्जा साहब गुनगुनाने ...... तुम्हारे जाऊं जाऊं ने मेरा दम निकाला है . लेकिन मैं इससे ज्यादा उनको नहीं झेल सकता था और मुझे यह समझ आ गया था कि आगे भी ये महाशय ऐसी ही क...
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  December 11, 2016, 6:13 pm
सूर्य की उपासना का पर्व है छठ प्रकृति की आराधना का पर्व है छठ कठोर तप , तन और मन की शुचिता  सबसे प्रेम और भाव की शुद्धता लोक आस्था का महान उत्कर्ष श्रद्धा और भावना का पर्व है छठ उगते,  डूबते दोनों को नमन करें मातृ शक्ति को कृतज्ञता अर्पण करें राजा और रंक अं...
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Tag :प्रकाशित
  November 7, 2016, 12:23 pm
विगत दस सालों में जब जब दुर्गापूजा आता है सोशल प्लैटफ़ार्मस पर एक ट्रेंड चलता है । एक समुदाय स्वयं को महिषासुर से जोड़ कर देवी दुर्गा को निर्बाध गालियां निकालता है और कमाल की बात यह है कि यह तब होता है जब कहते हैं कि इस देश में अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता का गला घोटा जा रहा ह...
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  October 10, 2016, 11:10 am
सहिष्णुता के सबसे बड़े पैरोकार डाल देते हैं नमक अपने विरोधियों की लाशों पर ....... चमक उठती हैं उनकी आँखे जब जंगल के भीतर रेत दी जाती है गर्दनें लेवी की खातिर .... और जो असहिष्णु हैं अपने काम को देते हैं सरंजाम बीच चौराहे पर ताकि सनद रहे..... छल प्रपंच और सुविधा के अनुसार रचे ...
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Tag :सामाजिक समस्या
  August 24, 2016, 8:38 pm
(ककसाड के जुलाई अंक में प्रकाशित) ----------------------------------------देख कर साँप,आदमी बोला,बाप रे बाप !अब तो शहर में भीआ गए साँप।साँप सकपकाया,फिर अड़ाऔर तन कर हो गया खड़ा।फन फैलाकरली आदमी की माप।आदमी अंदर तकगया काँप ।आँखेँ मिलाकर बोला साँप :मैं शहर में नहीं आयाजंगल मे आ गयें हैं आप ।आप जहां ...
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Tag :प्रकाशित
  August 10, 2016, 9:30 am
नदी को लगता हैकितना आसान हैसमंदर होनाअपनी गहराइयों के साथझूलते रहना मौजों परन शैलों से टकरानान शूलों से गुजरनान पर्वतों की कठोर छातियों को चीरकररास्ता बनानापर नदी नहीं जानती हैसमंदर की बेचैनी कोउसकी तड़प और उसकी प्यास कोकितना मुश्किल होता हैखारेपन के साथ एक पल भी ज...
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  June 8, 2016, 7:37 pm
राजा ने कहा :जनता को विकास चाहिएआओ खेलेंविकास-विकासपर सरकार ! कुछ दिनों के बादजनता मांगेगीविकास का प्रमाण ...तो फिर खेलेंगेधर्म–धर्म / मजहब-मजहबजनता मजहब की भूखी हैपर सरकार! कुछ दिनों के बादजनता मांगेगीमंदिर/मस्जिद.........तो फिर खेलेंगेदेश-देशजनता देश-भक्ति की भूखी हैपर ...
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Tag :विविध कविता
  April 3, 2016, 10:26 am
मुझको सबसे प्रिय हमेशाइसमे नहीं कोई अंदेशाइसकी शक्ति को लगे न ठेसका सखी साजन ? ना सखी देशतन  छूये मेरे नरम नरमकभी ठंढा और कभी गरमगाये हरदम बासंती  धुनका सखी साजन? ना सखी फागुनसाथ मेरे ये चलता जाएनया नया में बहुत सतायेसंग इसके जीवन सुभीताका सखी साजन ? ना सखी जूताकैसे ...
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  March 25, 2016, 12:57 pm
यूं तो वजह नहीं है कुछ खासपर सुगना है बहुत उदासपत्नी के कान में औरगेंहू के पौधों पर बाली नहीं हैहोठों पर पपड़ी पड़ी हैलाली नहीं हैरूठती तो हैपर जिद करे ऐसी घरवाली नहीं हैपर सुगना का भी तो फर्ज़ हैलेकिन क्या करे, उस पर तो कर्ज हैउसे अपनी चिंता नहीं हैपर जानवर को क्या खिलाएग...
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  March 17, 2016, 10:28 pm
चंचल नयना स्मित मुख ललाम कपोल कचनार सखी रेकुंतल गुलमोहर की छाँव ,  मृदु अधर रतनार सखी रे ..जब विहँसे अवदात कौमुदीमुकुलित कुमुदों के आँगन मेंतुम मुझसे मिलने आना प्रियउज्ज्वल तारों के प्रांगण मेंमैं वहाँ मिलूंगा लेकर बाहों का गलहार सखी रे पीली साड़ी चूनर धानीसमीरण सुव...
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Tag :श्रृंगार रस
  February 2, 2016, 8:18 am
लड़कियाँ होती अगरगुड़हल के फूलों की तरहऔर तोड़ ली जातीबिन खिलेअधखिलेखिल जाती फिर भीसमय के साथ पर लड़कियाँ तो होती हैंगुलाब .......----------नीरज कुमार नीर /Neeraj Kumar Neer(गुड़हल की एक विशेषता है कि उसे अगर खिलने के समय के पूर्व भी तोड़ लिया जाए तो भी अपने खिलने के नियत समय पर गुड़हल खिल ही जाता ...
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  February 1, 2016, 8:25 pm
इश्क़ में नुकसान भी नफा ही लगेबेवफाई  वो  करें  वफा  ही लगेपास कितने दिल के रहता है वो मेरेफिर भी जाने क्यूँ जुदा जुदा ही लगेअच्छे जब उन्हें रकीब लगने लगेबात मेरी तब से तो खता ही लगेजी रहा हूँ क्योंकि मौत आई नहींबाद तेरे जीस्त   बेमजा ही लगेरहता है खुश उसकी मैं सुन...
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  February 1, 2016, 8:14 pm
2212   2212    2212    22दर्पण जमी हो धूल...... तो शृंगार कैसे होभूखा है जब तक आदमी तो प्यार कैसे होमहगाई छूना चाहती जब आसमां साहबनिर्धन के घर अब तीज औ त्योहार कैसे होमतलब नहीं जब आदमी को देश से हरगिजतो राम जाने .......देश का उद्धार कैसे होसब चाहते बनना शहर में जब जाके बाबूतुम्ही कह...
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  February 1, 2016, 8:01 pm
2122/ 2122/ 2122/ 22 शाम लिख ले सुबह लिख ले ज़िंदगानी लिख लेनाम अपने हुस्न के मेरी जवानी लिख ले ।कब्ल तुहमत   बेवफ़ाई   की लगाने   से सुननाम मेरा  है वफा की   तर्जुमानी   लिख ले ।जो बनाना  चाहता है  खुशनुमा  दुनया को अपने होंठो पे मसर्रत की कहानी  लिख ले ।मंहगाई बढ़ रही है  ...
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  January 24, 2016, 6:28 pm
एक साल खत्म हुआनया साल आ रहा हैसमय कितनी जल्दी बीत जाता हैदेखते देखते बीत गएकितने बरसगहरे उच्छ्वास के साथ मन ने कहासमय सुन रहा था मुझेउसने मुस्कुरा कर कहाबीत तो तुम रहे हो मेरे बच्चेमैं तो वहीं का वहीं हूँअनंत काल सेआगे भी वहीं रहूँगातुम्हारे पुनः पुनः पुनरागमन के द...
KAVYASUDHA ( काव्य सुधा )...
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  January 15, 2016, 10:08 pm
मैं एक काफिर हूँहां! तुम्हारे लिए मैं एक काफिर हूँ,यद्यपि कि मैं मानता नहीं किसी कोसिवा एक ईश्वर केमैने कभी सर नहीं झुकायाकिसी बुत के सामनेमैं नहीं मानता बराबर किसी कोउस ईश्वर केमैंने कभी झूठ नहीं बोलाहिंसा नहीं कीचौबीसों घंटे ईश्वर की अराधना करता हूँमानव तो मानवकर...
KAVYASUDHA ( काव्य सुधा )...
Tag :विविध कविता
  January 6, 2016, 7:57 pm
मैं एक काफिर हूँहां! तुम्हारे लिए मैं एक काफिर हूँ,यद्यपि कि मैं मानता नहीं किसी कोसिवा एक ईश्वर केमैने कभी सर नहीं झुकायाकिसी बुत के सामनेमैं नहीं मानता बराबर किसी कोउस ईश्वर केमैंने कभी झूठ नहीं बोलाहिंसा नहीं कीचौबीसों घंटे ईश्वर की अराधना करता हूँमानव तो मानवकर...
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Tag :विविध कविता
  January 6, 2016, 7:57 pm
वो हमसफर तो है पर हमनवा नहीं हैवो धूप छांव है ताजा हवा नहीं है.... । वो फूल सा दिखाई देता है मगर ...पास उसके दर्द की कोई दवा नहीं है ।.... neeraj kumar neer नीरज कुमार नीर ...
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  January 5, 2016, 8:47 pm
मैं परिंदा हूँ ..... ... मिरा ईमान न पूछोक्या हूँ, हिन्दू या कि मुस्सलमान न पूछो। चर्च, मंदर, मस्जिदें ....सब एक बराबररहता किसमे है मिरा भगवान न पूछो. मजहबी उन्माद में जो मर गया वो थाएक जिंदा आदमी , पहचान न पूछो ।पीठ में घोपा हुआ है नफरती खंजररोता क्यों है अपना हिंदुस्तान न पूछो ।...
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  December 27, 2015, 10:18 pm
क्या आपका बच्चा पढ़ता नहीं है ...... ?????निराश न हों .................उसे बलात्कारी बनाइये ,खूंखार बलात्कारी ...........स्त्री के योनि में सरिया घुसा करफाड़ देने वाला बलात्कारी ..............स्तनों को काट लेने वाला बलात्कारी ........बलात्कार की घटना के बाद..............हजारों की संख्या में दीये और कैंडल जले ,ऐसा ब...
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Tag :सामाजिक समस्या
  December 19, 2015, 6:49 pm
दिसंबर की ठंढसमा जाती है नसों के भीतर... और बहती है लहू के साथ साथ...... पूरे शरीर को भर लेती हैअपने आगोश में .....जम जाते हैं वक्त के साये भीबेहिस हो जाती है हर शयहरसू गूँजती हैठंडी हवा की साँय साँय .... ऐसे में तुम याद आती होबारहा .......आ जाओ न तुमलेकर अपने आगोश मेंअधरों से छूकरभर दो &n...
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Tag :श्रृंगार रस
  December 12, 2015, 2:56 pm
जंगलों और पर्वतों केगीत गाना चाहता हूँ ।गाछ, लता, हरियाये , पातमहुआ, सखुआ, नीम, पलाशये है मेरी धड़कनों मेंतुम्हें सुनाना चाहता हूँ।  जंगलों और पर्वतों केगीत गाना चाहता हूँताल-तलैया घाट गहरेकिन्तु खुशियों पर पहरेडाकू बैठे गली मुहल्लेतुम्हें बताना चाहता हूँ।जंगलों औ...
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  December 8, 2015, 7:25 pm
जंगलों और पर्वतों केगीत गाना चाहता हूँ ।गाछ, लता, हरियाये , पातमहुआ, सखुआ, नीम, पलाशये है मेरी धड़कनों मेंतुम्हें सुनाना चाहता हूँ। जंगलों और पर्वतों केगीत गाना चाहता हूँताल-तलैया घाट गहरेकिन्तु खुशियों पर पहरेडाकू बैठे गली मुहल्लेतुम्हें बताना चाहता हूँ।जंगलों और प...
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  December 8, 2015, 7:25 pm
मैं जिंदगी बांटता  हूँपर इसके तलबगार मुर्दे नहीं हो सकतेलहलहाते हरियायेहँसते खिलखिलाते पौधेजिनमे फल की उम्मीद हैजल उन्हीं में डालूँगासूख चुके /सड़ चुके  पौधों मेंजल व्यर्थ ही जाएगामैं ढूँढता हू आनंद और ऊर्जा की खोज में रतस्वाभिमानीस्थायी जड़ता से ऊबेपरिवर्तन क...
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Tag :विविध कविता
  December 2, 2015, 7:20 pm
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