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Blog: KAVYASUDHA ( काव्य सुधा )

Blogger: NEERAJ KUMAR
प्रसिद्ध पत्रिका पाखी के you tube चैनल पर सुने मेरी कुछ कवितायें#pakhi #you_tube #neeraj_neer #poem #hindi ... Read more
clicks 5 View   Vote 0 Like   7:04am 30 Jun 2019 #
Blogger: NEERAJ KUMAR
प्रस्तुत है मेरी एक कविता  लहूलुहान मानवताअगर कविता पसंद आए तो इसे लाइक करें एवं अन्य ऐसी कवितायें सुनने के लिए मेरे चैनल को subscribe करें। धन्यवाद । ... Read more
clicks 4 View   Vote 0 Like   12:26pm 11 Jun 2019 #
Blogger: NEERAJ KUMAR
वह  चालीस के आस पास की रही होगी।  रंग सांवला पर आकर्षक गठा हुआ शरीर। मांसल शरीर सहज ही किसी को आकर्षित कर सकता था। सहज रूप से मुँहफट “रमेशर वाली”  का असली नाम तो किसी को पता नहीं था पर उसके पति का नाम रमेशर होने के कारण जब से गाँव में ब्याह कर आई थी सबके के लिए रमेशर वाल... Read more
clicks 47 View   Vote 0 Like   10:44am 12 May 2018 #
Blogger: NEERAJ KUMAR
भारत एक अफवाहों से पीड़ित देश है. कोई भी बात पल भर में वायरल हो सकती है. कई बार मार्क ज़ुकेरबर्ग का सन्देश इतने आत्मविश्वास के साथ शेयर किया जात है मानो उन्हें शेयर करने वाले ने प्रत्यक्ष प्रमाण किया है. ऐसा करने वाले अधिकतर पढ़े लिखे लोग होते हैं या कम से कम जो मुझे भेजते है... Read more
clicks 78 View   Vote 0 Like   4:52pm 18 Apr 2018 #
Blogger: NEERAJ KUMAR
 "युद्धरत आम आदमी"के मार्च २०१८ अंक में प्रकाशित नीरज नीर की कवितायें ... Read more
clicks 57 View   Vote 0 Like   3:01pm 3 Apr 2018 #
Blogger: NEERAJ KUMAR
साहित्य अमृत के मार्च २०१८ अंक में मेरा एक गीत #गीत #geet #बसंत #basant #neeraj_neer ... Read more
clicks 54 View   Vote 0 Like   3:09pm 17 Mar 2018 #प्रकाशित
Blogger: NEERAJ KUMAR
(you tube पर इसे सुनने के लिए यहाँ क्लिक करें)    होली मन में उमँग भरन लागेझूम रही अमवाँ की डाली,  झूमे बाँस बसेड़ीजब से फाल्गुन आया महीना, मौसम हुआ नशेड़ीमस्ती में मनवां झूमन लागेचल रही है हवा बासंती, इधर उधर बौरायेमटक मटक के चले गुजरिया, दिल में आग लगाएयौवन फाल्गुन में बहक... Read more
clicks 53 View   Vote 0 Like   4:05am 2 Mar 2018 #
Blogger: NEERAJ KUMAR
कभी कभी मैं डर जाता हूँसोचकर ...कितनी डरावनी रही होगीअनारकली की मौतमृत्यु के कुछ सबसे खतरनाक तरीकों में हैदीवार में चुनवा देना ....लिफ्ट में फँसे आदमी सेकितनी गुना भयानक रही होगीअनारकली की बेचैनीघनघोर अँधेरे में अपनी ही छोड़ी हुई साँसेघोट रही होंगीउसका गलाहर हलचल पर दि... Read more
clicks 58 View   Vote 0 Like   3:34pm 25 Feb 2018 #
Blogger: NEERAJ KUMAR
"जंगले में पागल हाथी और ढोल"संग्रह से एक कविता :----------------------कुछ तो नया कीजिये अबके नए साल मेंसूर्य वही चाँद वहीधूप  वही छांव वहीवही गली वही डगरगांव वही, वही शहरघृणा वही, रार वहीदिलों में दीवार वहीमंदिर और मस्जिद केजारी हैं तकरार वहीप्रेम होना चाहिए आपस में हर हाल मेंकुछ त... Read more
clicks 69 View   Vote 0 Like   3:10pm 25 Jan 2018 #
Blogger: NEERAJ KUMAR
"जंगल में पागल हाथी और ढोल'को पढ़कर वरिष्ठ कवि श्री राजेश्वर वशिष्ठ कहते हैं -------- ------- ------ . नीरज नीर बहुत संभावनाशील,चैतन्य कवि हैं जो समाज की नब्ज को भरपूर विवेक और ईमानदारी से अपनी कविताओं में टटोलते हैं। हिंदी कविता के परिदृश्य में यह एक चमकदार नक्षत्र का प्रतीक्षित उद... Read more
clicks 61 View   Vote 0 Like   2:04pm 3 Jan 2018 #
Blogger: NEERAJ KUMAR
"जंगल में पागल हाथी और ढोल"के बारे में क्या कहते हैं आज के साहित्यकार :#jungle_ mein_ pagal_ hathi_ aur_dhol-----हरेप्रकाश उपाध्याय ::::बहुत कम कवि हैं जो जीवन की आपाधापी से बचकर अपने अलावा दूसरे लोगों के जीवन के बारें कुछ सोच रहे हैं या उनके जीवन से जुड़कर उनके भीतर कोई संवेदना पैदा हो रही है। बाज़ार... Read more
clicks 58 View   Vote 0 Like   5:45am 28 Dec 2017 #
Blogger: NEERAJ KUMAR
नीरज नीर की कविताएं आम आदमी के जीवन प्रसंगों से जुड़ी हैं। इसमें लोगों का धड़कता हुआ जीवन है, उऩके रोज के सुःख-दुःख हैं, प्रेम है और बहुत सारे सवाल हैं। आइये उनका सामना करें।नीरज नीर का यह संकलन मात्र 120/- रु. में उपलब्ध है।डाक ख़र्च फ्री। रज़िस्टर्ड डाक से किताब भेजी जाएगी... Read more
clicks 53 View   Vote 0 Like   8:24am 26 Dec 2017 #
Blogger: NEERAJ KUMAR
मैंने कुछ दिनों पूर्व दिवाली के अवसर पर लिखा था कुछ लोग हर बात में नकारात्मकता ढूंढ लेते हैं या नकारात्मकता पैदा कर देते हैं.मेरे पिता जी के एक मित्र थे, उनका नाम था जगेश्वर पंडित.. एक व्यस्त नेशनल हाईवे पर उनका एक ढाबा था जो उन दिनों बहुत अच्छा चलता था. पिताजी से उनकी गाढ़... Read more
clicks 73 View   Vote 0 Like   9:36am 26 Oct 2017 #
Blogger: NEERAJ KUMAR
दीप जलाओ दीप जलाओआज दिवाली रेखुशी-खुशी सब हँसते आओआज दिवाली रे....  बचपन में पढ़ी कविता की ये पंक्तियाँ आज भी मस्तिष्क के किसी कोने में बैठी है. दिवाली दीये और प्रकाश का पर्व है और प्रकाश आनंद का प्रतीक है. दीपावली का त्यौहार वातावरण को खुशियों से भर देता है. भारत के ज्याद... Read more
clicks 69 View   Vote 0 Like   2:26am 16 Oct 2017 #
clicks 68 View   Vote 0 Like   5:05am 6 Aug 2017 #प्रकाशित
Blogger: NEERAJ KUMAR
गोरखपुर की साहित्यिक संस्था सृजन संवाद के द्वारा आयोजित कहानी प्रतियोगिता में मेरी कहानी "शोक"द्वितीय स्थान पर चयनित हुई है और मुझे उपविजेता घोषित किया गया है।आप भी पढ़ें इस कहानी को निम्नांकित लिंक पर : https://www.facebook.com/srijansamwad/posts/1409985769062022#story #कहानी #सृजन #srijan #शोक #neeraj #नीरज ... Read more
clicks 73 View   Vote 0 Like   3:15pm 11 Apr 2017 #
Blogger: NEERAJ KUMAR
मैं शीघ्र ही उनकी बातों से उब गया था .  जब मेरी चाय ख़तम हो गयी तो मैंने उठते हुए विदा लेने का उपक्रम किया , जिस पर मिर्जा साहब गुनगुनाने ...... तुम्हारे जाऊं जाऊं ने मेरा दम निकाला है . लेकिन मैं इससे ज्यादा उनको नहीं झेल सकता था और मुझे यह समझ आ गया था कि आगे भी ये महाशय ऐसी ही क... Read more
clicks 99 View   Vote 0 Like   12:43pm 11 Dec 2016 #
Blogger: NEERAJ KUMAR
सूर्य की उपासना का पर्व है छठ प्रकृति की आराधना का पर्व है छठ कठोर तप , तन और मन की शुचिता  सबसे प्रेम और भाव की शुद्धता लोक आस्था का महान उत्कर्ष श्रद्धा और भावना का पर्व है छठ उगते,  डूबते दोनों को नमन करें मातृ शक्ति को कृतज्ञता अर्पण करें राजा और रंक अं... Read more
clicks 72 View   Vote 0 Like   6:53am 7 Nov 2016 #प्रकाशित
Blogger: NEERAJ KUMAR
विगत दस सालों में जब जब दुर्गापूजा आता है सोशल प्लैटफ़ार्मस पर एक ट्रेंड चलता है । एक समुदाय स्वयं को महिषासुर से जोड़ कर देवी दुर्गा को निर्बाध गालियां निकालता है और कमाल की बात यह है कि यह तब होता है जब कहते हैं कि इस देश में अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता का गला घोटा जा रहा ह... Read more
clicks 113 View   Vote 0 Like   5:40am 10 Oct 2016 #
Blogger: NEERAJ KUMAR
सहिष्णुता के सबसे बड़े पैरोकार डाल देते हैं नमक अपने विरोधियों की लाशों पर ....... चमक उठती हैं उनकी आँखे जब जंगल के भीतर रेत दी जाती है गर्दनें लेवी की खातिर .... और जो असहिष्णु हैं अपने काम को देते हैं सरंजाम बीच चौराहे पर ताकि सनद रहे..... छल प्रपंच और सुविधा के अनुसार रचे ... Read more
clicks 109 View   Vote 0 Like   3:08pm 24 Aug 2016 #सामाजिक समस्या
Blogger: NEERAJ KUMAR
(ककसाड के जुलाई अंक में प्रकाशित) ----------------------------------------देख कर साँप,आदमी बोला,बाप रे बाप !अब तो शहर में भीआ गए साँप।साँप सकपकाया,फिर अड़ाऔर तन कर हो गया खड़ा।फन फैलाकरली आदमी की माप।आदमी अंदर तकगया काँप ।आँखेँ मिलाकर बोला साँप :मैं शहर में नहीं आयाजंगल मे आ गयें हैं आप ।आप जहां ... Read more
clicks 116 View   Vote 0 Like   4:00am 10 Aug 2016 #प्रकाशित
Blogger: NEERAJ KUMAR
नदी को लगता हैकितना आसान हैसमंदर होनाअपनी गहराइयों के साथझूलते रहना मौजों परन शैलों से टकरानान शूलों से गुजरनान पर्वतों की कठोर छातियों को चीरकररास्ता बनानापर नदी नहीं जानती हैसमंदर की बेचैनी कोउसकी तड़प और उसकी प्यास कोकितना मुश्किल होता हैखारेपन के साथ एक पल भी ज... Read more
clicks 103 View   Vote 0 Like   2:07pm 8 Jun 2016 #
Blogger: NEERAJ KUMAR
राजा ने कहा :जनता को विकास चाहिएआओ खेलेंविकास-विकासपर सरकार ! कुछ दिनों के बादजनता मांगेगीविकास का प्रमाण ...तो फिर खेलेंगेधर्म–धर्म / मजहब-मजहबजनता मजहब की भूखी हैपर सरकार! कुछ दिनों के बादजनता मांगेगीमंदिर/मस्जिद.........तो फिर खेलेंगेदेश-देशजनता देश-भक्ति की भूखी हैपर ... Read more
clicks 104 View   Vote 0 Like   4:56am 3 Apr 2016 #विविध कविता
Blogger: NEERAJ KUMAR
मुझको सबसे प्रिय हमेशाइसमे नहीं कोई अंदेशाइसकी शक्ति को लगे न ठेसका सखी साजन ? ना सखी देशतन  छूये मेरे नरम नरमकभी ठंढा और कभी गरमगाये हरदम बासंती  धुनका सखी साजन? ना सखी फागुनसाथ मेरे ये चलता जाएनया नया में बहुत सतायेसंग इसके जीवन सुभीताका सखी साजन ? ना सखी जूताकैसे ... Read more
clicks 115 View   Vote 0 Like   7:27am 25 Mar 2016 #
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