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Blog: काव्यरचना

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यमुना धर त्रिपाठी की कविता किसानों को समर्पित ... Read more
clicks 47 View   Vote 0 Like   1:28am 2 May 2020 #General
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बलजीत सिंह के ग़ज़ल ... Read more
clicks 90 View   Vote 0 Like   4:33pm 25 Apr 2020 #General
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हृदय आज उठा मचल देख गगन पनघट पर चन्द्र की गागर हिलोर तारे मनहुं हुए जलज नव दल, नव पुष्प कमल नव प्रभात किरण नवल गूंज उठा खगकुल चहल महक उठा विश्व महल ओस की ज्यों बूंद सजी सुमन के जा माथ लगी भ्रमर करे गूंज गीत पूरा ब्लॉग www kavyarachana.blogspot.com अर्चना मिश्रा... Read more
clicks 113 View   Vote 0 Like   4:29pm 25 Apr 2020 #Poem
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ग़ज़ल ... Read more
clicks 125 View   Vote 0 Like   4:05pm 23 Apr 2020 #Poem
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चाहतों की चाहतें, चाहत ही बनकर रह गयी।उनको पाने की तमन्ना ख्वाहिशें ही रह गयी॥कुछ तो उनमें बात थी जो, दिल तड़प कर रह गया।उनकी अदाएँ देखकर, दिल मचल के रह गया॥भावनाओं में थी मासूमियत की कुछ ऐसी लहर।अ़क्लमन्दी की सारी क़यासें उनमें बहकर रह गयी॥परम्पराओं में कुछ इस तरह जकड़ा ... Read more
clicks 203 View   Vote 0 Like   4:18pm 9 Dec 2013 #
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      हूँ  विशिष्टतम !      गुण  निज  आकुंचन,      सतत  परिवर्तित  एकाग्र-चिँतन ।      प्रार्थी  प्रेम  की      वृक्ष  मनोहारी, आकर्षी      रुप-विजन छाँह  सघन ।     बैठ  तू  इस  ठाँव     आ  क्षणिक  विश्राम  कर     ... Read more
clicks 200 View   Vote 0 Like   7:49pm 7 Dec 2013 #
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मन में अंधेरातन में अंधेराप्यार में अंधेरातकरार में अंधेराविश्वास में अंधेराअंधविश्वास में अंधेराअंदर भी अंधेराबाहर भी अंधेरा            क्या कोई उपाय नहीं है ? है आओ पायें ज्ञान कोखोये हुए विश्वास को समेटें उन बिखरते रिश्तों कोजिन्हें बनाये बरसों ... Read more
clicks 204 View   Vote 0 Like   7:36pm 7 Dec 2013 #
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"काव्यरचना"का प्रथम प्रिंट संस्करण (with ISBN)प्रकाशित होने जा रहा है……एक रचनाकार अपनी पाँच रचनाएं प्रेषित कर सकता है...... रचना भेजने की अन्तिम तिथि: १५ दिसम्बर २०१३email- kavyarachana21@gmail.com... Read more
clicks 166 View   Vote 0 Like   12:27am 15 Nov 2013 #
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बाद बहुत संघर्षों के।सज पाई बगिया में क्यारी।माली की इच्छा फूल हो नर।पर कली खिल गई नारी।माली-मालिन का खून सूख गया।दोनों की मति गई मारी।दोनों दृण हुए धीरे धीरे।और फरमान कर दिया जारी।होगा तो नर फूल ही होगा।फूल न खिलने देंगे नारी।आखिर हिम्मत आई माली में।मालिन भी हिम्म... Read more
clicks 215 View   Vote 0 Like   10:19am 14 Nov 2013 #
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माँ !मैं बहुत खुश हूँयहाँ तुम्हारे अंदर...सुखी, सुरक्षित, निर्भीकऔर स्वतन्त्र भी. ले सकती हूँ अपनी मर्जी की साँसेंयहाँ मेरे लिए कोई बंदिश भी नहीं हैफैला सकती हूँ पंखेंउड़ सकती हूँ निर्बाध.दूर-दूर तक नहीं है यहाँ  घृणित मानसिकता की घूरती आँखेंआदमजात की खालों मेंपश... Read more
clicks 172 View   Vote 0 Like   9:24pm 12 Nov 2013 #
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कब तक मनाऊँ मैं, वो अक्सर रूठ जाते हैं|गर्दिश में अक्सर.... हर सहारे छूट जाते हैं|1न मनाने का सलीका है,न रिझाने का तरीका है|मनाते ही मनाते वो........ अक्सर  रूठ जाते है|2संजोकर दिल में रखता हूँ,नजर को खूब पढ़त... Read more
clicks 184 View   Vote 0 Like   9:17pm 12 Nov 2013 #
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प्रातः काल उठते ही कर ले, नियत प्रभु का ध्यान ।दुःख दर्द हर लेंगे सारे, देंगे प्राणों को त्राण ।वो हैं दयानिधान ॥करूणापती करूणा के सागर, धन से हैं भरते वो गागर ।लोभ मोह का नाम मिटाकर, करते मोक्ष प्रदान ।वो हैं दयानिधान ॥अक्टूबर अंकनिरज कुमार सिंह(छपरा, बिहार)... Read more
clicks 180 View   Vote 0 Like   9:09pm 12 Nov 2013 #
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चिढ़ाने का सा भावसपनीली आँखों सेदेख करमैं अपने को पाता हूँआधा अधूरायह खालीपन …जाने क्यों ?ढूढंता हूँकुछ पाने के लियेपर हाथ बढ़ा कर भीरोक नहीं पाताफिसलते क्षण;विरान दिल कोडूबा देती हो अथाह सागर मेंतुम्हारे धनुष-बाण घुस आते हैं -दिल-दिमाग की तंत्रियां झंझोड़ करनग्न व... Read more
clicks 179 View   Vote 0 Like   6:40pm 6 Sep 2013 #
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लो आ गई बसंत, छायी बहार...प्रकृति कर रही अपनी श्रृंगार,लाल, हरे और पीले, नीले,ऋतुओं ने हैं सब रंग बिखेरे।मंद-मंद चलती बयार,कल-कल करता ये नद-संसार।पक्षियों की चहचहाहट में,सिंह की गरजती दहाड़।लो आ गई बसंत, छायी बहार...पेड़ों पर कलियाँ लगीं हैं आने,हरियाली का कंबल ताने,आम्... Read more
clicks 193 View   Vote 0 Like   6:02pm 11 Aug 2013 #
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शीत-शक्ति से सिक्त धरा कीसिहरन का आभास किसे है?स्वयं बन्द हो पशमीना मेंपर-पीड़ा-प्रति अवकाश किसे है?कौन जानता उस चीरू को?जिसका केश-वसन तन ढँकता ।जब आभास नहीं है दिनकरकब उगता है कब ढलता ।चीरू के निश्छल नयनों काकर्मठ तन्तुवाय हस्तों का,भान किसे है, ज्ञान किसे है?चन्देरी बु... Read more
clicks 201 View   Vote 0 Like   3:58pm 20 Jul 2013 #
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सितारोंपरचढ़नेकीख़्वाहिशलिएबैठीथीएकबादलपर,बादलमेंकितनेछिद्रथेपतानहींथाअबतक, तेजहवाआईसबकुछलेगई, नहीरहाबादलऔरनहीरहीसितारोंकीमहफिल।महफिलजोमदहोशथी, कामयाबीकीवोडोरथी,उजियालाऔरसुहानासमाथा, निराशाओंकातूफानवहाँथमाथा।सितारोंकीचमककाअन्दाज़ानथामुझे, पर... Read more
clicks 176 View   Vote 0 Like   2:54pm 19 Jul 2013 #
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माँ, काश! मैं लड़का होतीभँवरोकीतरहघूमती,मस्तपवनमेंझूमती,रातकेअंधेरोंसेनडरती,काश! मैंलड़काहोती |माँ ! अगर मैंलड़काहोती,तोदादीकितनीखुशहोती,लड्डूबटते, ढोलबाजेपिटते,गलीगलीमेंमाँ ,तुम्हेंदुआएँमिलती |माँ ! अगरमैंलड़काहोती,तोमस्तीसेमैं स्कूलजाती ,देरीकीचिंतातुम्... Read more
clicks 183 View   Vote 0 Like   10:58am 29 Jun 2013 #
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माँ तुम महकती होघर में जलती धूपऔर मसालों की सौंध से ज्यादाप्रत्येक कोना घर कातृप्त है तुम्हारी पावन अनुभुति से।माँ तुम मीठी होगुझिया की मिठासऔर मेवामिश्र केसर खीर से ज्यादाप्रत्येक स्वादरहित तत्त्वअनुप्राणित है तुम्हारी मधुरता से।माँ तुम विराट् छत होकुटुम्ब की... Read more
clicks 193 View   Vote 0 Like   2:49am 23 Jun 2013 #
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 हरियाली के बीचप्रथम बार उसेजब ईंट-पत्थर दिखा।शनैः-शनैःखड़ी होतीइमारत दिखीहृदय में विकास की एक अलख जगीआगे बढ़ने कीजीवन जीने की, ललक जगी॥उसकी आँखों में भीएक सपना जगापर.................जैसे –जैसे इमारतऊपर उठती गयी,आकाश को छूती गयी,उसका सपना तार-तार होता गया।जो कुछ .....अबतक उसका थ... Read more
clicks 203 View   Vote 0 Like   7:32pm 14 Jun 2013 #
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खुदा हमारे दिल में हैबंदे हम खुद भगवान हैंसबसे सच्चे सबसे अच्छेदुनिया से हम अंजान हैंबंदे हम खुद भगवान हैंनन्ही हथेलीपर बड़ी है खुशियों की थैलीमन बड़ा “बलवान” हैबंदे हम खुद भगवान हैंकद तो छोटा रखते हैंऊँचाई मगर छूने का हौसला रखते हैंमुट्ठी में आसमान हैबंदे हम खुद भ... Read more
clicks 212 View   Vote 0 Like   8:58pm 14 May 2013 #
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भवन की नयी कहानीथोड़ा काम और लंबी वाणीअपनी चर्चा लंबी कहानीदिन भर सोचे लाभ हानिदेखने और दिखाने की वृतिसब खोकर बनायें अपनी कृतिहम और हमारी मायाभौतिक लाभ और सुखमय कायासेवा की संज्ञा मिलने भर देरलूट जितना हो देर या सवेरकोई अगर करे न चर्चाफँसा दो लगा कर मर्चा कूद-कूद कर ... Read more
clicks 223 View   Vote 0 Like   11:34pm 7 May 2013 #
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जब उनकी वो धूमल यादें, खिड़की के झीने परदे से ।झाँक-झाँककर मुझे देखती,चिर-उत्सुक अपने नयनों से ॥तब स्मृतियों का महासमुद्र,लहर-लहर जग उठता है ।उर्मि-उर्मि को चूम-चूमकर,नया झरोखा खुलता है ॥झीने से झिलमिल अंशुक से,झीनी यादों का सूत्रपात ।मधुऋतु की मोहक छवियों पर,छुप-छुप ह... Read more
clicks 176 View   Vote 0 Like   11:07am 5 May 2013 #
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चाहा तो बहुत उसको,लेकिन कह नहीं पाया॥बचपन साथ साथ पला,जवानी साथ साथ बढ़ा।शायद वो भी चाहती मुझको,लेकिन मैं कह नहीं पाया॥बचपन उंगली पकड़कर बीता,जवानी हाथ पकड़कर चलती। शायद उसको भी मेरे साथ का था इन्तज़ार,लेकिन मैं कह नहीं पाया॥आज जब मैं सोचता हूँ बचपन के वो दिन,आम के छ... Read more
clicks 198 View   Vote 0 Like   8:22pm 2 May 2013 #
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शक्तियाँ असीमित,बस नेत्र हैं निमीलित,निज पर विश्वास करें,जीवन में सुवास भरें,अन्तर्मन मुखरित हो,क्लेश सब विगलित हो,क्लान्ति-श्रान्ति त्यागें हम,फिर एक बार जागें हम,गहें पावन शिवाज्ञा।करें हम प्रत्यभिज्ञा।।मुख न कभी म्लान हो,शक्ति का संचार हो,लक्ष्य का संधान हो,... Read more
clicks 172 View   Vote 0 Like   10:10am 30 Apr 2013 #
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               तुमने कहा था कि...............रात के अंधकार मे मिलोगी तुममैंने भी सुना था किरात के अंधकार में मिलोगी तुमदुर्भाग्य से उस दिनजिस दिन का येवाकया हैपूनम की रात थीअंधेरी रात तोबहुत दूर की बात थीफिर भीपत्थर रखअपने कलेजे परमैंने तुम्हारी यहशर्त बिना शर्तस्वीक... Read more
clicks 177 View   Vote 0 Like   8:57am 30 Apr 2013 #
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