Hamarivani.com

काव्यरचना

चाहतों की चाहतें, चाहत ही बनकर रह गयी।उनको पाने की तमन्ना ख्वाहिशें ही रह गयी॥कुछ तो उनमें बात थी जो, दिल तड़प कर रह गया।उनकी अदाएँ देखकर, दिल मचल के रह गया॥भावनाओं में थी मासूमियत की कुछ ऐसी लहर।अ़क्लमन्दी की सारी क़यासें उनमें बहकर रह गयी॥परम्पराओं में कुछ इस तरह जकड़ा ...
काव्यरचना ...
Tag :
  December 9, 2013, 9:48 pm
      हूँ  विशिष्टतम !      गुण  निज  आकुंचन,      सतत  परिवर्तित  एकाग्र-चिँतन ।      प्रार्थी  प्रेम  की      वृक्ष  मनोहारी, आकर्षी      रुप-विजन छाँह  सघन ।     बैठ  तू  इस  ठाँव     आ  क्षणिक  विश्राम  कर     ...
काव्यरचना ...
Tag :
  December 8, 2013, 1:19 am
मन में अंधेरातन में अंधेराप्यार में अंधेरातकरार में अंधेराविश्वास में अंधेराअंधविश्वास में अंधेराअंदर भी अंधेराबाहर भी अंधेरा            क्या कोई उपाय नहीं है ? है आओ पायें ज्ञान कोखोये हुए विश्वास को समेटें उन बिखरते रिश्तों कोजिन्हें बनाये बरसों ...
काव्यरचना ...
Tag :
  December 8, 2013, 1:06 am

"काव्यरचना"का प्रथम प्रिंट संस्करण (with ISBN)प्रकाशित होने जा रहा है……एक रचनाकार अपनी पाँच रचनाएं प्रेषित कर सकता है...... रचना भेजने की अन्तिम तिथि: १५ दिसम्बर २०१३email- kavyarachana21@gmail.com...
काव्यरचना ...
Tag :
  November 15, 2013, 5:57 am
बाद बहुत संघर्षों के।सज पाई बगिया में क्यारी।माली की इच्छा फूल हो नर।पर कली खिल गई नारी।माली-मालिन का खून सूख गया।दोनों की मति गई मारी।दोनों दृण हुए धीरे धीरे।और फरमान कर दिया जारी।होगा तो नर फूल ही होगा।फूल न खिलने देंगे नारी।आखिर हिम्मत आई माली में।मालिन भी हिम्म...
काव्यरचना ...
Tag :
  November 14, 2013, 3:49 pm
माँ !मैं बहुत खुश हूँयहाँ तुम्हारे अंदर...सुखी, सुरक्षित, निर्भीकऔर स्वतन्त्र भी. ले सकती हूँ अपनी मर्जी की साँसेंयहाँ मेरे लिए कोई बंदिश भी नहीं हैफैला सकती हूँ पंखेंउड़ सकती हूँ निर्बाध.दूर-दूर तक नहीं है यहाँ  घृणित मानसिकता की घूरती आँखेंआदमजात की खालों मेंपश...
काव्यरचना ...
Tag :
  November 13, 2013, 2:54 am
कब तक मनाऊँ मैं, वो अक्सर रूठ जाते हैं|गर्दिश में अक्सर.... हर सहारे छूट जाते हैं|1न मनाने का सलीका है,न रिझाने का तरीका है|मनाते ही मनाते वो........ अक्सर  रूठ जाते है|2संजोकर दिल में रखता हूँ,नजर को खूब पढ़त...
काव्यरचना ...
Tag :
  November 13, 2013, 2:47 am
प्रातः काल उठते ही कर ले, नियत प्रभु का ध्यान ।दुःख दर्द हर लेंगे सारे, देंगे प्राणों को त्राण ।वो हैं दयानिधान ॥करूणापती करूणा के सागर, धन से हैं भरते वो गागर ।लोभ मोह का नाम मिटाकर, करते मोक्ष प्रदान ।वो हैं दयानिधान ॥अक्टूबर अंकनिरज कुमार सिंह(छपरा, बिहार)...
काव्यरचना ...
Tag :
  November 13, 2013, 2:39 am
चिढ़ाने का सा भावसपनीली आँखों सेदेख करमैं अपने को पाता हूँआधा अधूरायह खालीपन …जाने क्यों ?ढूढंता हूँकुछ पाने के लियेपर हाथ बढ़ा कर भीरोक नहीं पाताफिसलते क्षण;विरान दिल कोडूबा देती हो अथाह सागर मेंतुम्हारे धनुष-बाण घुस आते हैं -दिल-दिमाग की तंत्रियां झंझोड़ करनग्न व...
काव्यरचना ...
Tag :
  September 7, 2013, 12:10 am
लो आ गई बसंत, छायी बहार...प्रकृति कर रही अपनी श्रृंगार,लाल, हरे और पीले, नीले,ऋतुओं ने हैं सब रंग बिखेरे।मंद-मंद चलती बयार,कल-कल करता ये नद-संसार।पक्षियों की चहचहाहट में,सिंह की गरजती दहाड़।लो आ गई बसंत, छायी बहार...पेड़ों पर कलियाँ लगीं हैं आने,हरियाली का कंबल ताने,आम्...
काव्यरचना ...
Tag :
  August 11, 2013, 11:32 pm
शीत-शक्ति से सिक्त धरा कीसिहरन का आभास किसे है?स्वयं बन्द हो पशमीना मेंपर-पीड़ा-प्रति अवकाश किसे है?कौन जानता उस चीरू को?जिसका केश-वसन तन ढँकता ।जब आभास नहीं है दिनकरकब उगता है कब ढलता ।चीरू के निश्छल नयनों काकर्मठ तन्तुवाय हस्तों का,भान किसे है, ज्ञान किसे है?चन्देरी बु...
काव्यरचना ...
Tag :
  July 20, 2013, 9:28 pm
सितारोंपरचढ़नेकीख़्वाहिशलिएबैठीथीएकबादलपर,बादलमेंकितनेछिद्रथेपतानहींथाअबतक, तेजहवाआईसबकुछलेगई, नहीरहाबादलऔरनहीरहीसितारोंकीमहफिल।महफिलजोमदहोशथी, कामयाबीकीवोडोरथी,उजियालाऔरसुहानासमाथा, निराशाओंकातूफानवहाँथमाथा।सितारोंकीचमककाअन्दाज़ानथामुझे, पर...
काव्यरचना ...
Tag :
  July 19, 2013, 8:24 pm
माँ, काश! मैं लड़का होतीभँवरोकीतरहघूमती,मस्तपवनमेंझूमती,रातकेअंधेरोंसेनडरती,काश! मैंलड़काहोती |माँ ! अगर मैंलड़काहोती,तोदादीकितनीखुशहोती,लड्डूबटते, ढोलबाजेपिटते,गलीगलीमेंमाँ ,तुम्हेंदुआएँमिलती |माँ ! अगरमैंलड़काहोती,तोमस्तीसेमैं स्कूलजाती ,देरीकीचिंतातुम्...
काव्यरचना ...
Tag :
  June 29, 2013, 4:28 pm
माँ तुम महकती होघर में जलती धूपऔर मसालों की सौंध से ज्यादाप्रत्येक कोना घर कातृप्त है तुम्हारी पावन अनुभुति से।माँ तुम मीठी होगुझिया की मिठासऔर मेवामिश्र केसर खीर से ज्यादाप्रत्येक स्वादरहित तत्त्वअनुप्राणित है तुम्हारी मधुरता से।माँ तुम विराट् छत होकुटुम्ब की...
काव्यरचना ...
Tag :
  June 23, 2013, 8:19 am
 हरियाली के बीचप्रथम बार उसेजब ईंट-पत्थर दिखा।शनैः-शनैःखड़ी होतीइमारत दिखीहृदय में विकास की एक अलख जगीआगे बढ़ने कीजीवन जीने की, ललक जगी॥उसकी आँखों में भीएक सपना जगापर.................जैसे –जैसे इमारतऊपर उठती गयी,आकाश को छूती गयी,उसका सपना तार-तार होता गया।जो कुछ .....अबतक उसका थ...
काव्यरचना ...
Tag :
  June 15, 2013, 1:02 am
खुदा हमारे दिल में हैबंदे हम खुद भगवान हैंसबसे सच्चे सबसे अच्छेदुनिया से हम अंजान हैंबंदे हम खुद भगवान हैंनन्ही हथेलीपर बड़ी है खुशियों की थैलीमन बड़ा “बलवान” हैबंदे हम खुद भगवान हैंकद तो छोटा रखते हैंऊँचाई मगर छूने का हौसला रखते हैंमुट्ठी में आसमान हैबंदे हम खुद भ...
काव्यरचना ...
Tag :
  May 15, 2013, 2:28 am
भवन की नयी कहानीथोड़ा काम और लंबी वाणीअपनी चर्चा लंबी कहानीदिन भर सोचे लाभ हानिदेखने और दिखाने की वृतिसब खोकर बनायें अपनी कृतिहम और हमारी मायाभौतिक लाभ और सुखमय कायासेवा की संज्ञा मिलने भर देरलूट जितना हो देर या सवेरकोई अगर करे न चर्चाफँसा दो लगा कर मर्चा कूद-कूद कर ...
काव्यरचना ...
Tag :
  May 8, 2013, 5:04 am
जब उनकी वो धूमल यादें, खिड़की के झीने परदे से ।झाँक-झाँककर मुझे देखती,चिर-उत्सुक अपने नयनों से ॥तब स्मृतियों का महासमुद्र,लहर-लहर जग उठता है ।उर्मि-उर्मि को चूम-चूमकर,नया झरोखा खुलता है ॥झीने से झिलमिल अंशुक से,झीनी यादों का सूत्रपात ।मधुऋतु की मोहक छवियों पर,छुप-छुप ह...
काव्यरचना ...
Tag :
  May 5, 2013, 4:37 pm
चाहा तो बहुत उसको,लेकिन कह नहीं पाया॥बचपन साथ साथ पला,जवानी साथ साथ बढ़ा।शायद वो भी चाहती मुझको,लेकिन मैं कह नहीं पाया॥बचपन उंगली पकड़कर बीता,जवानी हाथ पकड़कर चलती। शायद उसको भी मेरे साथ का था इन्तज़ार,लेकिन मैं कह नहीं पाया॥आज जब मैं सोचता हूँ बचपन के वो दिन,आम के छ...
काव्यरचना ...
Tag :
  May 3, 2013, 1:52 am
शक्तियाँ असीमित,बस नेत्र हैं निमीलित,निज पर विश्वास करें,जीवन में सुवास भरें,अन्तर्मन मुखरित हो,क्लेश सब विगलित हो,क्लान्ति-श्रान्ति त्यागें हम,फिर एक बार जागें हम,गहें पावन शिवाज्ञा।करें हम प्रत्यभिज्ञा।।मुख न कभी म्लान हो,शक्ति का संचार हो,लक्ष्य का संधान हो,...
काव्यरचना ...
Tag :
  April 30, 2013, 3:40 pm
               तुमने कहा था कि...............रात के अंधकार मे मिलोगी तुममैंने भी सुना था किरात के अंधकार में मिलोगी तुमदुर्भाग्य से उस दिनजिस दिन का येवाकया हैपूनम की रात थीअंधेरी रात तोबहुत दूर की बात थीफिर भीपत्थर रखअपने कलेजे परमैंने तुम्हारी यहशर्त बिना शर्तस्वीक...
काव्यरचना ...
Tag :
  April 30, 2013, 2:27 pm
कर तार-तार वसुधा का अञ्चलजगज्जननी का तिरस्कार कियाशक्तिस्वरूपा साक्षात् शक्ति सेतज मानवता दुर्व्यवहार कियाधात्री धरती है जग को वहमत भूलो जो उपकार कियामन्त्रपूत पूजनीया महिला हैपूर्वज ऋषियों ने सत्कार किया कम्पित धरा करुण क्रन्दन सेआन्दोलित मानस जननी कासम्हल ज...
काव्यरचना ...
Tag :
  April 26, 2013, 10:11 pm
वन्दन हैअभिनन्दन हैअर्चन है,उस दिव्य दिया का,जलता रहता शाम-सुबह जो,मेरे अंधकार पथ पर,वन्दन हैअभिनन्दन हैअर्चन है,उस महासलिल का,जो मेरे जीवन खेतों ,को नित-नित सींचा करता है,वन्दन हैअभिनन्दन हैअर्चन है,उस महावायु का,बहता रहता क्षुद्र हृदय में,जो अविरल प्राणरूप में,वन्द...
काव्यरचना ...
Tag :
  April 20, 2013, 1:18 am
-->एक अंकुर नेगीली मिट्टी के अन्दर सेपरिश्रम करअपना शीश उठाया है,संसार की खुशियाँ  बटोरनेनन्हा हाथ फैलाया है।उसकी आहट सुनवायु नेप्रकाश ने,मिट्टी और जल नेसहयोग के लियेअपना हाथ बढ़ाया है।बस उसे चाहिए एक और सहयोग.............मानवीय सहयोग.....उगने के लियेउगकर बढ़ने के लियेबढ़...
काव्यरचना ...
Tag :
  April 20, 2013, 12:38 am
रंग-बिरंगे इन्द्रधनुष को लेकर आयी होली है ।कहीं उड़ रहा अबीर गुलाल कहीं सज रही रोली है ।निकल पड़ी लेकर पिचकारी अब बच्चों की टोली है ।नगर, गाँव औ हर नुक्कड़ पर हँसी और ठिठोली है ॥फागुन की यह देन मनोहर कण्ठ-कण्ठ में फाग सजा है ।हृदय-हृदय उत्सुक आनन्दित अब ऐसा ऋतुराज सजा है ...
काव्यरचना ...
Tag :
  March 7, 2012, 7:53 pm
[ Prev Page ] [ Next Page ]

Share:
  हमारीवाणी.कॉम पर ब्लॉग पंजीकृत करने की विधि बहुत सरल हैं। इसके लिए सबसे पहले प्रष्ट के सबसे ऊपर दाईं ओर लिखे ...
  हमारीवाणी पर ब्लॉग-पोस्ट के प्रकाशन के लिए 'क्लिक कोड' ब्लॉग पर लगाना आवश्यक है। इसके लिए पहले लोगिन करें, लोगिन के उपरांत खुलने वाले प...
और सन्देश...
कुल ब्लॉग्स (3652) कुल पोस्ट (163613)