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Blog: स्वार्थ

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मेरे एक कम्यूनिस्ट मित्र थे- वे वास्तव में बड़े बौद्धिक थे| उन्होंने बहुत सारी किताबें लिखीं, सौ के आसपास, और सारी की सारी कम्यूनिस्ट थीम से भरी हुई, पर अपरोक्ष रूप से ही, वे उपन्यासों के माध्यम से यह करते थे|  वे अपने उपन्यासों के माध्यम से कम्यूनिस्म का प्रचार करते थे और ... Read more
clicks 252 View   Vote 0 Like   6:45am 2 Jun 2013 #ओशो
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इतना ज्यादा भरा हुआ हूँ लगता है मैं मरा हुआ हूँ कोशिश करके धनवन्तरी से तुम मुझको दिखला दो भाई ! थोड़ी और पिला दो भाई! अगर इसे मैं पी जाउंगा शायद मैं कुछ जी जाउंगा जीवन की अंतिम साँसों को कुछ तो और जिला दो भाई! थोड़ी और पिला दो भाई! खामोशी का टुकड़ा […]... Read more
clicks 215 View   Vote 0 Like   3:19pm 1 Jun 2013 #कविता
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समाजवाद और साम्यवाद वही फर्क करता हूं मैं जो टी.बी. की पहली स्टेज में और तीसरी स्टेज में होता है, और कोई फर्क नहीं करता हूं। समाजवाद थोड़ा सा फीका साम्यवाद है, वह पहली स्टेज है बीमारी की। और पहली स्टेज पर बीमारी साफ दिखाई नहीं पड़ती इसलिए पकड़ने में आसानी होती है। इसलिए स... Read more
clicks 247 View   Vote 0 Like   7:39am 31 May 2013 #ओशो
clicks 213 View   Vote 0 Like   7:20am 31 May 2013 #Uncategorized
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वह अपने घर का तमाम जरूरी सामान एक ट्रक में लदवाकर दूसरे शहर जा रहा था कि रास्ते में लोगों ने उसे रोक लिया| एक ने ट्रक के सामान पर नज़र डालते हुए कहा,” देखो यार, कितने मजे से अकेला इतना सामान उडाये चला जा रहा है|” सामान के मालिक ने कहा.”जनाब माल मेरा है|” […]... Read more
clicks 208 View   Vote 0 Like   7:04am 31 May 2013 #लघुकथा
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‘आम के आम गुठलियों के दाम’ और ‘आम फलों का राजा है’ इन दो कथनों से हरेक हिंदी भाषी भली-भांति परिचित रहता है| ये भी सच है कि मौसम में आम ही नहीं बौराते बल्कि आम की आमद होने पर इसके प्रशंसक भी बौरा जाते हैं| जैसे ही आम के वृक्षों पर बौर आने शुरू […]... Read more
clicks 148 View   Vote 0 Like   8:55am 28 May 2013 #राकेश
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सादत हसन मंटो ने भारत-पाकिस्तान बंटवारे और इससे उपजी हिंसा पर बेहद प्रभावशाली कहानियां लिखी हैं और नफ़रत के ऐसे माहौल में इंसानियत कितना गिर सकती है इस बात को अपनी कहानियों के जरिये दुनिया को बताया है| अज्ञेय ने भी पनी संवेदनशीलता के बलबूते बंटवारे के समय उपजे अमानवीय ... Read more
clicks 136 View   Vote 0 Like   7:54pm 25 May 2013 #कहानी
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लगता है भारत में लोगों के जीवन में वाकई बोरियत आ गयी है या कि भीषण गर्मी का असर है| जनता का एक तबका इसी बात पर न्यौछावर हुआ जा रहा है कि श्री अमिताभ बच्चन ने कान फेस्टीवल में हिंदी में अपना भाषण/संबोधन बोला/पढ़ा? अमिताभ बच्चन इलाहाबद में जन्मे, पिता उनके हिंदी के लेखक, […]... Read more
clicks 179 View   Vote 0 Like   8:59am 23 May 2013 #रचनाकार
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गीतों में ही रहा करोगे शब्द-शब्द में बहा करोगे मुझे तलाशोगे उनमें तुम फिर भी मीत नहीं पाओगे मेरे गीत नहीं पाओगे… तुमसे मैंने कब कुछ माँगा फिर क्यों तोड़ दिया यह धागा खोज खोज कर थक जाओगे ऐसी प्रीत नहीं पाओगे मेरे गीत नहीं पाओगे… तुम्हे एक संसार मिला है और बहुत-सा प्यार मि... Read more
clicks 166 View   Vote 0 Like   8:38am 21 May 2013 #कविता
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मैंने जन्म लिया था एक आयुर्वेदिक अस्पताल में मगर अब उसी इमारत की नींव पर खड़ा है एक एलोपेथिक अस्पताल मेरा तो कर्तव्य है कि मुझे गिराना है वह एलोपेथिक अस्पताल और खड़ा करना है वही आयुर्वेदिक अस्पताल हालांकि मुझे मालूम है एलोपेथिक हो या आयुर्वेदिक अस्पतालों का मकसद एक है ... Read more
clicks 161 View   Vote 0 Like   10:53am 17 May 2013 #कविता
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हाँ वे मुसलमान थे हम जैसे इंसान थे लेकिन उनके सीनों में कुरआन था और हाथों में तलवार यकीनन वे पुकारते होंगे हिन्दू! हिन्दू!! हिन्दू!!! हिंद के वासियों को वे हिन्दू ही कह सकते थे| और हिंद के वासी यानी बड़े नाम वाली नामवर जाति बाएं बाजू की ताकत से बेखबर दायें हाथ में तराजू […]... Read more
clicks 144 View   Vote 0 Like   11:07am 13 May 2013 #कविता
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जनाब युसूफ खानउर्फ दिलीप कुमार साहब, आपको ‘भारत रत्न’ न मिले इसकी सिफारिश इसलिए नहीं की जानी चाहिए क्योंकि आप हाजी मस्तान, अब- मरहूम-पर-कभी बम्बई  में अपराध जगत के सरगना, के साथ बैठ कई आयोजनों में शिरकत कर चुके हैं, उसके साथ व्यक्तिगत मुलाक़ात के फोटो खिंचवा चुके हैं, या उ... Read more
clicks 169 View   Vote 0 Like   8:28am 10 May 2013 #रचनाकार
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तुझे मैं सुला लूंगी अपनी छाती के कंटीले वन में , उलझे बालों को तेरे संवार दूंगी, रेगिस्तानों की हवा से पहना दूंगी तुझे समुद्र और पूरा आसमान कहलने को दूंगी तुझे निर्वासितों को उसाँसें| चले जायेंगे हम दोनों एक रोग-शून्य जगह, जहां बच्चे खेलते होंगे अस्पताल के खाली कमरों मे... Read more
clicks 152 View   Vote 0 Like   4:24am 9 May 2013 #कविता
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मौत ने एक दौड़ आयोजित की हुयी है और हम सब अभिशप्त हैं उसमें हिस्सा लेने के लिए, जीवन में भले ही कुछ भी निश्चित न हो पर अनिश्चितता तो मौत की तरफ दोस्ती का हाथ भी नहीं बढ़ा सकती| चाहे तो हम दौड़ लें, दौड़ते रहें या आराम से बैठ जाएँ, लेट जाएँ, सो […]... Read more
clicks 136 View   Vote 0 Like   5:48pm 8 May 2013 #कविता
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अब असंभव है तुम्हे चिट्ठी लिख पाना चाहता हूँ कितना खोलूँ खिड़की जी भरकर पीऊँ समुद्र-पवन फिर बैठूं लिखने जो दुनिया का सबसे आवेगपूर्ण प्रेम पत्र हो और उसका हर पैराग्राफ वर्णन करे एक सुवासित स्वप्न उस स्वप्न के कुछ-कुछ आलोकित गलियारों से मैं तुम्हारे होने की जगह जाता वह च... Read more
clicks 158 View   Vote 0 Like   6:58pm 6 May 2013 #कविता
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वह कामगार मैं कामगार दोनों लौटते थे घर कभी वह बैठती मैं खड़ा रहता कभी मैं बैठता और वह खड़ी रहती थी| कभी-कभी मैं देख लेता था उसकी आँखों की ओर और उतर जाती थी मेरी थकान, कभी-कभी मैं खोल देता था उसकी खिड़की का शीशा उससे जो खुलता न था| इससे ज्यादा मेरा उससे [...]... Read more
clicks 194 View   Vote 0 Like   6:16pm 4 May 2013 #कविता
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आज फिर से उग आयी है एक शाम आसपास हिरण्यमय वृत्त लिए कंधे पर घटाएं फैलाए| दो  तृषित हाथों से एक चाँद अमृत बरसा रहा है | एक अनउगी सपनीली झील के आँगन में खिले कमल से पंख पसारे खेलता है कोई जलपांखी लहरों के खेल पानी के सुमेरु उछालता जगाता सहस्त्रों अनगाये गीत| आज [...]... Read more
clicks 148 View   Vote 0 Like   11:10am 30 Apr 2013 #कविता
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जब हम नहीं करते थे प्रेम तब कुछ नहीं था हमारे पास फटी हथेलियों और थके पैरों से हल लगाते थे हम कोहरे में घाम को देते थे आवाज हम देखते थे आकाश जिसका मतलब आकाश के सिवाय कुछ नहीं था हमारे लिए जब हम प्रेम में गिरे हम यादों में गिरे जब यादों में [...]... Read more
clicks 134 View   Vote 0 Like   10:40am 30 Apr 2013 #कविता
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चाहे घड़ी विदा की आये दुनिया ठुकुरसुहाती गाये मेरा धैर्य नहीं टूटेगा मैं खुद को न ढहने दूंगा आंसू एक न बहने दूंगा… युगों युगों से रोज संजोया अंतर्मन ने खूब भिगोया फिर भी कसम यही खाई है मैं इनको न बहने दूंगा आंसू एक न बहने दूंगा… दुनिया ने खेती की धन की मेरी [...]... Read more
clicks 155 View   Vote 0 Like   9:27am 29 Apr 2013 #कविता
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ये दिल्ली है! भारत देश की राजधानी| यहाँ रहते हैं प्रधानमंत्री से लेकर तमाम केन्द्रीय मंत्री, तमाम बड़े बड़े नेता यहाँ रहते हैं देश के प्रथम नागरिक| कहा जाता रहा है - - दिल्ली है दिल वालों की - ज़रा सामने तो आओ और कहो कि - दिल्ली है दिल वालों की? नहीं हुजूर! दिल्ली [...]... Read more
clicks 135 View   Vote 0 Like   6:26pm 20 Apr 2013 #कविता
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या तो पकडे बैठे रहो, जकड़े बैठे रहो, पर तब हर पल का, हर कदम का, हर गति का, हर इशारे का, हिसाब लगाते रहना होगा| और तय है यह भी कि इस पकडन में, इस जकडन में, ऐठन भी होगी, तनाव भी होगा, तंगी का अहसास भी होगा| समय लाएगा ही लाएगा घुटन भी, [...]... Read more
clicks 169 View   Vote 0 Like   12:32am 19 Apr 2013 #कविता
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नयन के बादल घने हो गये क्यों इतने अनमने हो गये सुनो सुनो ऐ बंधु! न रूठो, मुझको जीत तुम्ही पाओगे, मेरे गीत तुम्ही गाओगे…| छोडो तुम यह रोना-धोना चलो सजाओ स्वप्न सलोना इतना तो विश्वास करो तुम मेरी प्रीत तुम्ही पाओगे मेरे गीत तुम्ही गाओगे…| यह मौसम तूफानी देखो कितना रेगिस्ता... Read more
clicks 193 View   Vote 0 Like   8:35am 15 Apr 2013 #कविता
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सूरज डूबेगा तो रात भी हो जायेगी , बाजी लगेगी तो मात भी हो जायेगी , धीरज खाना महज भूल है बड़ी प्यार होगा तो मुलाक़ात भी हो जायेगी| मुझे ज़िंदगी का फटा कफ़न सी लेने दो, न बहलाओ उन्ही की आस पे जी लेने दो, पीऊँगा न कल एक भी घूँट तुम्हारी ही कसम, [...]... Read more
clicks 381 View   Vote 0 Like   7:17pm 11 Apr 2013 #कविता
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ज़ख्म हंस हंस के उठाने वाले फन है जीने का सिखाने वाले आज जब हिचकी अचानक आई आ गये याद भुलाने वाले बात को तूल दिए जाते हैं झूठ का जाल बिछाने वाले रहनुमा जितने मिले जो भी मिले हाथ पर सरसों उगाने वाले लो चले नींद की गोली देकर वो जो आये थे जगाने [...]... Read more
clicks 271 View   Vote 0 Like   6:22pm 8 Apr 2013 #साहित्य
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तुम मुझे पराजित हुआ साबित कर सकते हो इतिहास के पन्नों में अपनी कड़वाहट और तोड़े मरोड़े झूठों के जरिये तुम मुझे धूल -धूसरित कर सकते हो पर मैं तब भी धूल की तरह ही उठ जाउंगी| क्या मेरी जीवंतता तुम्हे विचलित करती है? तुम निराशा के गर्त में क्यों गिरे हुए हो? क्योंकि मैं [...]... Read more
clicks 145 View   Vote 0 Like   1:12am 7 Apr 2013 #कविता
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