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Dastan-E-Sahil

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Dastan-E-Sahil...
Tag :
  July 11, 2013, 6:09 pm
तू है तेरी आरजू भी है, और तेरी नज़र-ऐ-साकी है जिंदगी के गुजर जाने में,बस दो चार पहर बाकी है ऐसे न चिल्मन से छुपाओ अपना हुस्न- ऐ -माहताब,रात बाकि है अभी, और सहर बाकी  है - साहिल (४/६/१३)...
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  June 4, 2013, 12:22 pm
मैं ख़ुली हुई सी किताब का छुपा  हुआ सा एक हर्फ़ हूँ ये मुड़ी हुई सी जो पर्त  है सरका  के इसको  तो देख ज़रा रुख से पर्दा हटा के तो देख ज़रा मुझसे नजरें मिला के तो  देख ज़रा हर्फ़ = शब्दमोहन गोडबोले ( साहिल) - 29-5-13...
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  May 30, 2013, 5:50 pm
हमारी ख़ामोशी को हमारी कमजोरी न समझ हमारी सहिष्णुता को हमारी मजबूरी न समझ जिस दिन शमशीर उठा लेंगे कश्मीर तो क्या तुझसे लाहौर भी छुड़ा लेंगे मत भूल ऐ पडोसी मुल्क कि, सियासत में मुनासिब रवादारीबखूबी हम समझते हैं हो लबों पर भले ही ख़ामोशी, पर हाथ हम ...
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  May 3, 2013, 10:46 pm
शहर की रगों में बहुत दबाव आ गया है लगता है शायद चुनाव आ गया है,चमचों की मूंछो पे अचानक बहुत ताव आ गया है लगता है शायद चुनाव आ गया है,सरकारी बाशिंदों की पेशानी पे, बहुत तनाव आ गया है लगता है शायद चुनाव आ गया है, हुआ छतों से नदारद तिरंगा , साईकिल,पंखा और नाव आ गया है ,लगता है शाय...
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  April 24, 2013, 5:55 pm
जिंदगी तेरे अजब मोड़ पे, आके खड़ा हो गया हूँ उम्र से पहले ही शायद, उम्र से "बड़ा "हो गया हूँ है उम्मीद की जाने लगी, मुझसे  बड़ों की तरह लगता है की सचमुच,  अब "बड़ा "हो गया हूँ   मुझसे छोटे मेरी सुनते नहीं, बड़े सुनाने नहीं देतेकुछ बोलो तो कहते हैं, की नकचढ़ा...
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  April 18, 2013, 11:58 pm
दिल के मौसमों पे, अपनी नज़र कर दे ,शबें रातरानी, दिन गुलमोहर कर दे , सुबह गेंदे सी,वासंती दोपहर कर दे महकी महकी सी मेरी, शाम-ओ-सहर कर दे ,बिखर जा मुझ पे , ओस की बूंदों की तरह,मेरा दामन भिगो के, तर-बतर कर दे , अपने आगोश में ही , अब तो समा जाने दे ,दीन-ओ-दुनिया से , मुझको बेखबर कर दे ,...
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  April 4, 2013, 4:38 pm
हे मालव माटी तुझे नमन है तेरे चरणों में वंदन है रज तेरी  माथे पर लगाऊजैसे शीतल चन्दन है हे  मालव माटी तुझे नमन है तेरे चरणों में वंदन हैतेरी गोद में जन्मा हूँ तो आनंदित मेरा  हर क्षण है तेरे  आशीष से बना हुआ मेरे शरीर का हर एक कण है हे मालव माटी तुझ...
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  February 10, 2013, 1:29 pm
मेरे अल्फाजों को बंदिश में, सजाने के लिए लौट कर आजा एक बार, ज़माने के लिए बुझे बुझे से थे मेरे दिल में, जो बरसों बरस ऐसे अरमानों को फिर आग लगाने के लिए लौट कर आजा एक बार, ज़माने के लिए तुझमे मुझमे जो कभी पा न सके, मंजिल अपनी ऐसे जज्बातों को सही राह, दिखाने  क...
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  January 7, 2013, 1:00 am
मुझसे बेहतर तुझे इश्क की, कोई वजह मिले न मिले आरज़ू है  मेरे दिल को , तू आजमा के तो देख तेरे दिल की हो या मेरे दिल की, कोई सुबह खिले न खिले   चन्द लम्हों की मुलाक़ात को तू आ के तो देख पिघल जाने दे आज  जज्बातों को मोंम की तरह एक बार मुझे सीने से लगा के तो देख ...
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  November 21, 2012, 12:32 pm
उम्र भर सूखे पत्तों की तरह बिखरे हुए थे हममुद्दतों बाद किसी ने समेटा भी तो जलाने के लिए ,रह रह कर हवा के झोकों ने कर दिया हैरान मै समझ नहीं पाया ये बुझाने के लिए थे या जलाने के लिए,वो टूटे रिश्तों की चिता हो या यादों की गर्माहट ,दिल के अंगार ही लगते हैं आग जलाने ...
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  March 4, 2012, 10:43 pm
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