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वंदे मातरम्

झरने इंतज़ार में थेकोई उन्हें रुकने को कहेगाबूंदें चाहती थींधरती पर न गिरेंसूरज स्वार्थी होना चाहता थाएक दिन के लिएचांद चाहता थाउसे न मिले उधार की रोशनी,पेड़ की बहुत इच्छा थीकिइक रोज़ वह अपना फल खाएगाय अपना ही दूध पीने के लिएकई दिनों से तड़प रही थीनदियों की इच्छा थीकि एक ...
वंदे मातरम्...
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  March 30, 2019, 3:36 am
 यार! अब मन न कहीं लगे।अपलक देखूँ, व्योम निहारूँ,आतुर होकर तुम्हें पुकारूँ;अहो! हुए तुम इतने निष्ठुर,तुम्हारी, चुप्पी क्यों न खले?सारे वचन तोड़ बैठे हो,अपने नयन फोड़ बैठे हो;किसने प्रियतम मति है फेरीअकिंचन, हम रह गए ठगे!कल तक सब कुछ उत्सवमय था,जीवन कितना सुमधुर लय था;हुए प...
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  March 24, 2019, 9:09 pm
जिन्हें चम्बल में रहना था वे अब संसद में रहते हैं।किसी ने ठीक ही कहा है।हमारे जनप्रतिनिधि ऐसे हैं। इन्हें जनता ने अपना प्रतिनिधि बनाकर संसद और विधानसभा में भेजा है।अब वक़्त आ गया है इन्हें जेल भेजा जाए। अपने-अपने कार्यों के अनुरूप। लोकतांत्रिक देश में ये आज़ाद घूमने ल...
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  March 6, 2019, 5:51 pm
हमारा वक्त बिक चुका है. एक-एक पल किसी ने खरीद रखा है. किसी की आधीनता के बदले हमें कागज के कुछ टुकड़े मिलते हैं, जिनसे हमारी थोड़ी बहुत जरूरतें पूरी होती हैं. बस पेट पालने भर तक.पेट सागर है....भर नहीं सकता. आजीवन रिक्त रहता है. ऐसा मैं नहीं 'कड़जाही काकी'कह के गई है.कई बार लगता है...
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  March 3, 2019, 11:31 pm
अम्मा(दादी) वादा तोड़ गई। अम्मा ने कहा था कि अभी कहीं नहीं जाने वाली। जिस दिन अम्मा ने हमें छोड़ा उस दिन सुबह अम्मा से वीडियो चैट भी हुई थी। अम्मा ने कहा था, 'लाला ते परेशान न हो, हम कहूं जाब नाहीं। हमार तबियत बहुत ठीक है। घबरा न।'भाभी ने रात में मैसेज किया था कि अम्मा की तबि...
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  January 8, 2019, 10:06 am
कई बार भाग जाने का मन करता है। अकेलापन काटने दौड़ता है, किसी का साथ होना चुभता है।लोग साथ हों तो बेचैनी, न हों तो अजीब सी चुभन। ठहाके हर बार अच्छे नहीं लगते, अपनी हंसी भी कई बार ख़राब लगती है।ख़ुश होना चाहते हैं लेकिन हो नहीं पाते। सच है जो गया है उसे लाया नहीं सकता, फिर भी मन क...
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  November 15, 2018, 6:24 pm
हादसों की आदत हो गई है. हादसे हर बार आंखों में ढेर सारा आंसू देकर चले जाते हैं.अमृतसर हादसे में जिन लोगों की मौत हुई है उनकी तस्वीरें देखकर दिल थमा सा जा रहा है.इतनी विभत्स तस्वीरें शायद ही पिछले दिनों में देखने को मिली हों.बहुत डरावनी तस्वीरें हैं भीतर से कंपकंपा देने व...
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  October 19, 2018, 11:47 pm
वही कविताएं सबसे ख़ूबसूरत होती हैं जो कवि के मन में पलती हैं। जिन्हें कोई और नहीं सुन पाता। जिनकी तारीफ़ कवि ख़ुद ही करता है, जिन्हें वह ख़ुद लिखकर मिटा देता है।उसकी नज़रों में अपनी अनगढ़ कविताएं सबसे ख़ूबसूरत होती हैं लेकिन दुनिया के लिए वह उन्हें छंदों की बेड़ियों में जकड़ता ...
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  October 17, 2018, 4:31 am
सहज भाषा के नाम पर हमने, भाषा का वास्तविक सौंदर्य बोध खो दिया है।नई पीढ़ी कितना कुछ क्लिष्ट कहकर अनदेखा कर देगी। कितने अध्याय अनछुए रह जाएंगे। भाषाई सरलीकरण के नाम पर कितने शब्दों की निर्मम हत्या हुई है। उन्हें याद रखने वाली पीढ़ी अंग्रेज़ी में भविष्य तलाश रही है। एक...
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  September 21, 2018, 2:48 am
एक लड़की अपने प्यार के साथ भागने के लिए कैसे भी तैयार हो जाती है, बिना कुछ सोचे-समझे लेकिन लड़के बहुत सोचते हैं। उनके लिए बेड सेफ़ साइड है, लिव-इन या शादी मुश्किल। मां-बाप शादी के लिए तैयार भी हों तो भी, लड़के अकसर बचते हैं। वजह बेहतर की तलाश हो, या कुछ और लेकिन अकसर ऐसा होता है। ...
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  September 18, 2018, 9:41 pm
राखी वाले दिन कलाई का सूना रह जाना अखरता है। बेहद ज़्यादा। तब और भी जब आपके पास ढेर सारी बहनें हों, जिनके पास जाने के लिए आपको कम दूरी तय करनी हो।मन लाख समझाए कि बहनों का आशीर्वाद हमेशा साथ रहता है भले ही वे कलाई पर राखी बांधे या न बांधे लेकिन दिल नहीं मानता। तब तक, जब तक कि व...
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  August 26, 2018, 9:39 pm
कोई छह-सात वर्ष हो गए थे झूला झूले हुए. बारहवीं पास करने के बाद जो त्योहार छूटे, सावन में भी उनमें से एक था. मुझे सावन  त्यौहार ही लगता है. महीने भर का त्यौहार. कजरी, आल्हा और गीतों का महीना. जिधर से गुज़रो कहीं न कहीं से किसी की खनकती आवाज़ में कोई गीत कानों तक पहुंच ही जाता ...
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  August 13, 2018, 12:30 am
दोस्ती का नाम ज़ेहन में आते ही सरस्वती संस्कार मंदिर की कक्षा याद आने लगती है। उस वक़्त क्लास जैसी कोई चीज़ नहीं हुआ करती थी और 'सर'नहीं आचार्य जी हुआ करते थे।कक्षा शिशु में मेरे चार बेस्ट फ्रेंड बने। सुमित, अमित, सूरज और अनिल। टिकाऊ दोस्त थे। इनके रहते बहुत दिनों तक कोई और ...
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  August 5, 2018, 2:30 pm
जिस प्यार के होने का एहसास आपको साथ रहने पर न होता हो, छूटने पर वही प्यार सबसे ज़्यादा याद आता है।ख़ालीपन में मोहब्बत की ज़रूरत इंसान को ज़्यादा होती है, जिसे किसी के साथ रहने पर समझना मुश्किल होता है।बोलना, ख़ूबसूरत हुनर है। हमेशा नहीं, पर कभी-कभी तो ज़रूर।उपेक्षा रिश्तों के ...
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  August 3, 2018, 8:49 pm
जिस प्रलय की धार में तुम यूं प्रफुल्लित हो रहे होजाल में उसकी उलझकर कुछ अभागे रो रहे हैं,उम्रभर की सब कमाई आंसुओं में बह गई हैस्वप्न की कुटिया नयन के सामने वे खो रहे हैं।पीर का विस्तार देखो हर तरफ जल ही भरा हैनाव के सौदागरों में कुछ थके हैं सो रहे हैं,भार पतवारों पे इतना ...
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  July 27, 2018, 8:19 pm
वेदना का अंत बहुत सुखद होता है। प्रायः, हर बार नहीं। सुख मूल्य वसूलता है। कुछ का जीवन कइयों की मृत्यु की परिणति है।हर दुख की वैतरणी को पार करने के लिए कोई न कोई ऐसी नाव मिल जाती है जो अंततः सुख के तट तक पहुंचा ही देती है।कुछ दुखों का कोई उपचार नहीं, कुछ घटनाओं का भी। किसी ...
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  July 3, 2018, 11:37 pm
                                                          (तस्वीर: पुराना किला, दिल्ली) एक लड़के ने कल रोते हुए फ़ोन किया था, "भइया मैं एक लड़की से प्यार करता हूं। मंदिर में हमने शादी कर ली है। लड़की दूसर...
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  June 29, 2018, 7:22 pm
पहाड़ जैसे मन से बहने वाली कविताएं, व्याकरण और छंदों की खाइयों में उलझकर प्रायः मृतप्राय हो जाती हैं। उनमें प्राण डालने की कितनी भी कोशिश क्यों न की जाए, जीवन का संचार नहीं दिख सकता। टूटे हाथ-पैरों की मरम्मत हो जाती है, वैद्य उन्हें जोड़ने में सक्षम हैं लेकिन कविताओं का इ...
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  June 20, 2018, 11:30 pm
नोयडा फिल्म सिटी में चाय बेचने का लीगल/इलीगल टेंडर खत्म कर दिया गया है। चायबंदी लागू हो गई है। चायबंदी क्या कहें, गुमटीबंदी हो गई है। पहले खाने-पीने के तमाम जुगाड़ सुबह दस से रात नौ बजे तक चालू रहते थे लेकिन न जाने किस देवता की कृपा हो गई है कि फिल्म सिटी में एक भी गुमटीवाल...
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  May 24, 2018, 7:09 pm
सांकेतिक तस्वीरकिसी गांव में एक मुंशी रहता था, नाम था खटेसर लाल। बहुत धूर्त और काइंया किस्म का आदमी था। जितनी भद्दी शक्ल उतनी ही बुरी अक्ल। गांव वाले उसे राक्षस कहते थे। पाई-पाई का हिसाब रखता था। गांव भर में सूद पर पैसे बांटता फिर उगाही करता। दादा ले पोता बरते। हाल यह ...
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  April 27, 2018, 8:04 pm
किसी के आप सच्चे हितैषी हैं तो उसके साथ सहानुभूति न रखें. सहानुभूति और संवेदनाएं किसी के राहों का कांटा जरूर बन सकती हैं ग्लूकोज का काम कतई नहीं करने वाली. सहानुभूति की तुलना आप जहर से कर सकते हैं. मीठा जहर. आज कल लोग बहुत संवेदनशील हो गए हैं. सवा सौ करोड़ की आबादी में सारे...
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  April 10, 2018, 11:08 pm
तनिक समय अनुकूल हुआ तो नाथ! दर्प क्यों इतनानेह विसर्जित कर बैठे औ गरल सर्प के जितना?छोड़ोगे जो गरल जगत में क्या तुम नहीं जलोगे?तुमको भी रहना धरती पर कैसे यहां पलोगे?किसी समय तुम अपने विष को खुद ही पी जाओगेविषधर तुम अपना विष चख कर कैसे जी पाओगे?मन का झूठा दर्प सहज ही जीवन मे...
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  April 2, 2018, 6:45 pm
अब मैंने पढ़ना छोड़ दिया है। मेरी किताबें, अलमारियां रोज़ पढ़ती हैं। उनसे जो छूट जाता है, उन्हें मेरा बैग पढ़ता है। मेरे कमरे में अलमारी, बैग, रैक, दरी, चटाई, बेड सब पढ़ने वाले बन गए हैं। जबसे उन्होंने पढ़ना शुरू किया है, मेरा पढ़ने का मन ही नहीं करता।कई बार सोचता हूं जब रूम में इतने...
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  March 21, 2018, 12:03 am
जीवंत किरदारों से प्रेरणा लेना हर लेखक का सामान्य व्यवहार है लेकिन जब लेखक किसी जीवंत किरदार का पीछा करने लगता है तो वह अनभिज्ञता में ही सही, अपने लेखकीय धर्म को तिलांजलि दे रहा होता है। किरदारों का पीछा पत्रकार करते हैं, साहित्यकार नहीं। साहित्य पत्रकारिता नहीं है।...
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  March 17, 2018, 11:49 pm
तुम अलग युग की कहानीहम अलग युग की कथा हैं,व्यक्त जिनको कर न पाएमूकवत मन की व्यथा हैं ।।तुम किसी मरुभूमि में से मेघ का संधान हो क्या?साधना की ही नहीं परईश का वरदान हो क्या??- अभिषेक ...
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  November 14, 2016, 4:02 pm
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