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Blog: वंदे मातरम्

Blogger: abhishek shukla
रूप के उपमान आकुल हो गए हैंदर्प भी उन्माद जितना छा गया है,हम परागों के निषेचन में फंसे हैंफूल के प्राणों पे संकट आ गया है।सूख जाना फूल की अन्तिम नियति हैपर भंवर को कब हुआ है भान इसका,प्यास अधरों की रहे बुझती परस्परलालसा में सच कहो क्या दोष किसका?जीविका है या गले की फांस ह... Read more
clicks 10 View   Vote 0 Like   5:00pm 14 May 2019
Blogger: abhishek shukla
झरने इंतज़ार में थेकोई उन्हें रुकने को कहेगाबूंदें चाहती थींधरती पर न गिरेंसूरज स्वार्थी होना चाहता थाएक दिन के लिएचांद चाहता थाउसे न मिले उधार की रोशनी,पेड़ की बहुत इच्छा थीकिइक रोज़ वह अपना फल खाएगाय अपना ही दूध पीने के लिएकई दिनों से तड़प रही थीनदियों की इच्छा थीकि एक ... Read more
clicks 12 View   Vote 0 Like   10:06pm 29 Mar 2019
Blogger: abhishek shukla
 यार! अब मन न कहीं लगे।अपलक देखूँ, व्योम निहारूँ,आतुर होकर तुम्हें पुकारूँ;अहो! हुए तुम इतने निष्ठुर,तुम्हारी, चुप्पी क्यों न खले?सारे वचन तोड़ बैठे हो,अपने नयन फोड़ बैठे हो;किसने प्रियतम मति है फेरीअकिंचन, हम रह गए ठगे!कल तक सब कुछ उत्सवमय था,जीवन कितना सुमधुर लय था;हुए प... Read more
clicks 16 View   Vote 0 Like   3:39pm 24 Mar 2019
Blogger: abhishek shukla
जिन्हें चम्बल में रहना था वे अब संसद में रहते हैं।किसी ने ठीक ही कहा है।हमारे जनप्रतिनिधि ऐसे हैं। इन्हें जनता ने अपना प्रतिनिधि बनाकर संसद और विधानसभा में भेजा है।अब वक़्त आ गया है इन्हें जेल भेजा जाए। अपने-अपने कार्यों के अनुरूप। लोकतांत्रिक देश में ये आज़ाद घूमने ल... Read more
clicks 14 View   Vote 0 Like   12:21pm 6 Mar 2019
Blogger: abhishek shukla
हमारा वक्त बिक चुका है. एक-एक पल किसी ने खरीद रखा है. किसी की आधीनता के बदले हमें कागज के कुछ टुकड़े मिलते हैं, जिनसे हमारी थोड़ी बहुत जरूरतें पूरी होती हैं. बस पेट पालने भर तक.पेट सागर है....भर नहीं सकता. आजीवन रिक्त रहता है. ऐसा मैं नहीं 'कड़जाही काकी'कह के गई है.कई बार लगता है... Read more
clicks 14 View   Vote 0 Like   6:01pm 3 Mar 2019
Blogger: abhishek shukla
अम्मा(दादी) वादा तोड़ गई। अम्मा ने कहा था कि अभी कहीं नहीं जाने वाली। जिस दिन अम्मा ने हमें छोड़ा उस दिन सुबह अम्मा से वीडियो चैट भी हुई थी। अम्मा ने कहा था, 'लाला ते परेशान न हो, हम कहूं जाब नाहीं। हमार तबियत बहुत ठीक है। घबरा न।'भाभी ने रात में मैसेज किया था कि अम्मा की तबि... Read more
clicks 27 View   Vote 0 Like   4:36am 8 Jan 2019
Blogger: abhishek shukla
कई बार भाग जाने का मन करता है। अकेलापन काटने दौड़ता है, किसी का साथ होना चुभता है।लोग साथ हों तो बेचैनी, न हों तो अजीब सी चुभन। ठहाके हर बार अच्छे नहीं लगते, अपनी हंसी भी कई बार ख़राब लगती है।ख़ुश होना चाहते हैं लेकिन हो नहीं पाते। सच है जो गया है उसे लाया नहीं सकता, फिर भी मन क... Read more
clicks 20 View   Vote 0 Like   12:54pm 15 Nov 2018
Blogger: abhishek shukla
हादसों की आदत हो गई है. हादसे हर बार आंखों में ढेर सारा आंसू देकर चले जाते हैं.अमृतसर हादसे में जिन लोगों की मौत हुई है उनकी तस्वीरें देखकर दिल थमा सा जा रहा है.इतनी विभत्स तस्वीरें शायद ही पिछले दिनों में देखने को मिली हों.बहुत डरावनी तस्वीरें हैं भीतर से कंपकंपा देने व... Read more
clicks 23 View   Vote 0 Like   6:17pm 19 Oct 2018
Blogger: abhishek shukla
वही कविताएं सबसे ख़ूबसूरत होती हैं जो कवि के मन में पलती हैं। जिन्हें कोई और नहीं सुन पाता। जिनकी तारीफ़ कवि ख़ुद ही करता है, जिन्हें वह ख़ुद लिखकर मिटा देता है।उसकी नज़रों में अपनी अनगढ़ कविताएं सबसे ख़ूबसूरत होती हैं लेकिन दुनिया के लिए वह उन्हें छंदों की बेड़ियों में जकड़ता ... Read more
clicks 22 View   Vote 0 Like   11:01pm 16 Oct 2018
Blogger: abhishek shukla
सहज भाषा के नाम पर हमने, भाषा का वास्तविक सौंदर्य बोध खो दिया है।नई पीढ़ी कितना कुछ क्लिष्ट कहकर अनदेखा कर देगी। कितने अध्याय अनछुए रह जाएंगे। भाषाई सरलीकरण के नाम पर कितने शब्दों की निर्मम हत्या हुई है। उन्हें याद रखने वाली पीढ़ी अंग्रेज़ी में भविष्य तलाश रही है। एक... Read more
clicks 18 View   Vote 0 Like   9:18pm 20 Sep 2018
Blogger: abhishek shukla
एक लड़की अपने प्यार के साथ भागने के लिए कैसे भी तैयार हो जाती है, बिना कुछ सोचे-समझे लेकिन लड़के बहुत सोचते हैं। उनके लिए बेड सेफ़ साइड है, लिव-इन या शादी मुश्किल। मां-बाप शादी के लिए तैयार भी हों तो भी, लड़के अकसर बचते हैं। वजह बेहतर की तलाश हो, या कुछ और लेकिन अकसर ऐसा होता है। ... Read more
clicks 24 View   Vote 0 Like   4:11pm 18 Sep 2018
Blogger: abhishek shukla
राखी वाले दिन कलाई का सूना रह जाना अखरता है। बेहद ज़्यादा। तब और भी जब आपके पास ढेर सारी बहनें हों, जिनके पास जाने के लिए आपको कम दूरी तय करनी हो।मन लाख समझाए कि बहनों का आशीर्वाद हमेशा साथ रहता है भले ही वे कलाई पर राखी बांधे या न बांधे लेकिन दिल नहीं मानता। तब तक, जब तक कि व... Read more
clicks 18 View   Vote 0 Like   4:09pm 26 Aug 2018
Blogger: abhishek shukla
कोई छह-सात वर्ष हो गए थे झूला झूले हुए. बारहवीं पास करने के बाद जो त्योहार छूटे, सावन में भी उनमें से एक था. मुझे सावन  त्यौहार ही लगता है. महीने भर का त्यौहार. कजरी, आल्हा और गीतों का महीना. जिधर से गुज़रो कहीं न कहीं से किसी की खनकती आवाज़ में कोई गीत कानों तक पहुंच ही जाता ... Read more
clicks 17 View   Vote 0 Like   7:00pm 12 Aug 2018
Blogger: abhishek shukla
दोस्ती का नाम ज़ेहन में आते ही सरस्वती संस्कार मंदिर की कक्षा याद आने लगती है। उस वक़्त क्लास जैसी कोई चीज़ नहीं हुआ करती थी और 'सर'नहीं आचार्य जी हुआ करते थे।कक्षा शिशु में मेरे चार बेस्ट फ्रेंड बने। सुमित, अमित, सूरज और अनिल। टिकाऊ दोस्त थे। इनके रहते बहुत दिनों तक कोई और ... Read more
clicks 18 View   Vote 0 Like   9:00am 5 Aug 2018
Blogger: abhishek shukla
जिस प्यार के होने का एहसास आपको साथ रहने पर न होता हो, छूटने पर वही प्यार सबसे ज़्यादा याद आता है।ख़ालीपन में मोहब्बत की ज़रूरत इंसान को ज़्यादा होती है, जिसे किसी के साथ रहने पर समझना मुश्किल होता है।बोलना, ख़ूबसूरत हुनर है। हमेशा नहीं, पर कभी-कभी तो ज़रूर।उपेक्षा रिश्तों के ... Read more
clicks 19 View   Vote 0 Like   3:19pm 3 Aug 2018
Blogger: abhishek shukla
जिस प्रलय की धार में तुम यूं प्रफुल्लित हो रहे होजाल में उसकी उलझकर कुछ अभागे रो रहे हैं,उम्रभर की सब कमाई आंसुओं में बह गई हैस्वप्न की कुटिया नयन के सामने वे खो रहे हैं।पीर का विस्तार देखो हर तरफ जल ही भरा हैनाव के सौदागरों में कुछ थके हैं सो रहे हैं,भार पतवारों पे इतना ... Read more
clicks 23 View   Vote 0 Like   2:49pm 27 Jul 2018
Blogger: abhishek shukla
वेदना का अंत बहुत सुखद होता है। प्रायः, हर बार नहीं। सुख मूल्य वसूलता है। कुछ का जीवन कइयों की मृत्यु की परिणति है।हर दुख की वैतरणी को पार करने के लिए कोई न कोई ऐसी नाव मिल जाती है जो अंततः सुख के तट तक पहुंचा ही देती है।कुछ दुखों का कोई उपचार नहीं, कुछ घटनाओं का भी। किसी ... Read more
clicks 20 View   Vote 0 Like   6:07pm 3 Jul 2018
Blogger: abhishek shukla
                                                          (तस्वीर: पुराना किला, दिल्ली) एक लड़के ने कल रोते हुए फ़ोन किया था, "भइया मैं एक लड़की से प्यार करता हूं। मंदिर में हमने शादी कर ली है। लड़की दूसर... Read more
clicks 17 View   Vote 0 Like   1:52pm 29 Jun 2018
Blogger: abhishek shukla
पहाड़ जैसे मन से बहने वाली कविताएं, व्याकरण और छंदों की खाइयों में उलझकर प्रायः मृतप्राय हो जाती हैं। उनमें प्राण डालने की कितनी भी कोशिश क्यों न की जाए, जीवन का संचार नहीं दिख सकता। टूटे हाथ-पैरों की मरम्मत हो जाती है, वैद्य उन्हें जोड़ने में सक्षम हैं लेकिन कविताओं का इ... Read more
clicks 21 View   Vote 0 Like   6:00pm 20 Jun 2018
Blogger: abhishek shukla
नोयडा फिल्म सिटी में चाय बेचने का लीगल/इलीगल टेंडर खत्म कर दिया गया है। चायबंदी लागू हो गई है। चायबंदी क्या कहें, गुमटीबंदी हो गई है। पहले खाने-पीने के तमाम जुगाड़ सुबह दस से रात नौ बजे तक चालू रहते थे लेकिन न जाने किस देवता की कृपा हो गई है कि फिल्म सिटी में एक भी गुमटीवाल... Read more
clicks 23 View   Vote 0 Like   1:39pm 24 May 2018
Blogger: abhishek shukla
सांकेतिक तस्वीरकिसी गांव में एक मुंशी रहता था, नाम था खटेसर लाल। बहुत धूर्त और काइंया किस्म का आदमी था। जितनी भद्दी शक्ल उतनी ही बुरी अक्ल। गांव वाले उसे राक्षस कहते थे। पाई-पाई का हिसाब रखता था। गांव भर में सूद पर पैसे बांटता फिर उगाही करता। दादा ले पोता बरते। हाल यह ... Read more
clicks 25 View   Vote 0 Like   2:34pm 27 Apr 2018
Blogger: abhishek shukla
किसी के आप सच्चे हितैषी हैं तो उसके साथ सहानुभूति न रखें. सहानुभूति और संवेदनाएं किसी के राहों का कांटा जरूर बन सकती हैं ग्लूकोज का काम कतई नहीं करने वाली. सहानुभूति की तुलना आप जहर से कर सकते हैं. मीठा जहर. आज कल लोग बहुत संवेदनशील हो गए हैं. सवा सौ करोड़ की आबादी में सारे... Read more
clicks 22 View   Vote 0 Like   5:38pm 10 Apr 2018
Blogger: abhishek shukla
तनिक समय अनुकूल हुआ तो नाथ! दर्प क्यों इतनानेह विसर्जित कर बैठे औ गरल सर्प के जितना?छोड़ोगे जो गरल जगत में क्या तुम नहीं जलोगे?तुमको भी रहना धरती पर कैसे यहां पलोगे?किसी समय तुम अपने विष को खुद ही पी जाओगेविषधर तुम अपना विष चख कर कैसे जी पाओगे?मन का झूठा दर्प सहज ही जीवन मे... Read more
clicks 21 View   Vote 0 Like   1:15pm 2 Apr 2018
Blogger: abhishek shukla
अब मैंने पढ़ना छोड़ दिया है। मेरी किताबें, अलमारियां रोज़ पढ़ती हैं। उनसे जो छूट जाता है, उन्हें मेरा बैग पढ़ता है। मेरे कमरे में अलमारी, बैग, रैक, दरी, चटाई, बेड सब पढ़ने वाले बन गए हैं। जबसे उन्होंने पढ़ना शुरू किया है, मेरा पढ़ने का मन ही नहीं करता।कई बार सोचता हूं जब रूम में इतने... Read more
clicks 21 View   Vote 0 Like   6:33pm 20 Mar 2018
Blogger: abhishek shukla
जीवंत किरदारों से प्रेरणा लेना हर लेखक का सामान्य व्यवहार है लेकिन जब लेखक किसी जीवंत किरदार का पीछा करने लगता है तो वह अनभिज्ञता में ही सही, अपने लेखकीय धर्म को तिलांजलि दे रहा होता है। किरदारों का पीछा पत्रकार करते हैं, साहित्यकार नहीं। साहित्य पत्रकारिता नहीं है।... Read more
clicks 19 View   Vote 0 Like   6:19pm 17 Mar 2018
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