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Blog: बचाखुचा

Blogger: मृदुलिका झा
एक नंबर की कबाड़ी है तुम्हारी बेटी! मां को पापा का ये ताना गाहे-बगाहे सुनना पड़ जाता, खासकर, जब पापा तय करते कि आज बच्चों का स्कूल बैग चेक करना है। चूंकि पापा का औचक निरीक्षण यानी सडन इन्सपैक्शन पर खासा यकीन था इसलिए जब भी उनका मूड खराब होता, मेरे फ्यूचर प्रोफेशन की नींव र... Read more
clicks 107 View   Vote 0 Like   6:44am 3 Jan 2017 #
Blogger: मृदुलिका झा
क्यों नहीं कह सकती कि ख़ुदकुशी भी एक विकल्प है मेरे पास.इसमें भी लगती है मेहनत, चाहिए इसमें भी बड़ा जिगर, बड़ा हुनर,कि लोग ये न कहें कि जानकर इतना ही ज़हर पिया कि बच जाए.पेनकिलर या एनेस्थिशिया नहीं, बस, कोशिश करनी होगी एक सहनीय मौत की.जगह भी माफ़िक चुननी होगी,वहां जहां धूल ... Read more
clicks 124 View   Vote 0 Like   5:08pm 28 Dec 2016 #
Blogger: मृदुलिका झा
मैं असुरक्षित महसूस करती हूं, जब मोटापे पर चर्चा होती है। भरी गर्मी में सफर के दौरान भी मैं वही कपड़े चुनती हूं जो औरों की आंखों को आरामदायक लगें। अगर मेरा रंग खिलता हुआ और शरीर इकहरा है तो मुझे सुरक्षा की जरूरत है और दबा हुआ है तो फेयरनेस क्रीम की। मैं अकेली नहीं हूं, जो ... Read more
clicks 215 View   Vote 0 Like   4:39am 18 Mar 2013 #
Blogger: मृदुलिका झा
हर बार पहली दफे होता है जब तुझे सोचती हूं,अपने अनंत शून्य को भरने का यही तरीका मुफीद पड़ा मुझे।बेढब सी कल्पना में तुम बराबर साथ उड़ते हो कल्पनाओं के पंख लगाकरखुरदुरी ज़मीन से शुरु कर लांघ जाते हैं हम सातों समुंदर दूरियों केछूते हैं चौदहवों आसमान सपनों के।क्या ही स्वा... Read more
clicks 217 View   Vote 0 Like   5:42pm 16 Feb 2013 #
Blogger: मृदुलिका झा
ये कहानी है एक राक्षसी के रूपसी और फिर राक्षसी बनने की.‘पंचवटी’में शूर्पनखा की ‘नाक का किस्सा’और उसके बाद की रामायण सबको पता है,बिरले ही वाकिफ होंगे प्रेम की उसकी तीखी चाहना और रिजेक्शन से उपजी पीड़ा से.उत्तर-आधुनिक कथाओं में भी इसका कोई ज़िक्र नहींन ही तथाकथित स्त्र... Read more
clicks 207 View   Vote 0 Like   5:50pm 15 Feb 2013 #
Blogger: मृदुलिका झा
बड़ी दूर थे हम जब पहली बार तुम्हारी आंखों ने मुझे छुआ।कोई जलजला नहीं आया था।हमारे बदन के ताप से न ग्लेशियर पिघले, न फूल झूमे,बस, मेरे भीतर का मोम गलकर कहीं बालों में अटक गया होगा।मुलाकातियों की नजरें टोहभरी और मुस्कानें गहरा गई थीं।बार-बार बालों को झटकारती, गालों-होंठो... Read more
clicks 184 View   Vote 0 Like   7:46am 15 Feb 2013 #
Blogger: मृदुलिका झा
आंसू कभी नहीं सूखते.वो भेदते हैं त्वचा का झीना आवरण और समा जाते हैं शरीर के भीतर,दौड़ते हैं खून के साथ नसों-औ-शिराओं में.दिलो-दिमाग से गुज़रकर जज़्ब हो जाते हैं आत्मा मेंशायद इसलिए आत्मा कभी नहीं मरती.... Read more
clicks 238 View   Vote 0 Like   4:42pm 1 Feb 2013 #
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