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Blog: स्याही के बूटे .....

Blogger: Shikha Gupta
मैं बीत गयी इक और साल ...लम्हे-लम्हे कुछ ठहरी सीलम्हा-लम्हा ही बढ़ी चलीविकट रहा समय का जालमैं बीत गयी इक और साल ...रोयी तो मुस्कायी भीसपनों की परछाई सीअभी सुकूं अभी बेहालमैं बीत गयी इक और साल ...पलकें ना झपकाई थींरात कहाँ मुरझाई थीजलना जिसे, बुझी मशालमैं बीत गयी इक और साल ...हवा... Read more
clicks 162 View   Vote 0 Like   6:24am 3 Jan 2015 #
Blogger: Shikha Gupta
डूबते-डूबते फिर  धीरे-धीरे उबरती हूँ छितरी हुई  बिखरी सी सागर के थपेड़ों से टूटी रह जाती हूँ मात्र अवशिष्ट समान जानती हूँ ... मैं ही हूँ दुर्गा मैं ही सिंदूर खेलती स्त्री और मैं ही हूँ वो अभिशप्त जिससे छीना गया अधिकार सिंदूर खेलने का दुर्गा-सम क... Read more
clicks 143 View   Vote 0 Like   11:44am 7 Oct 2014 #
Blogger: Shikha Gupta
मखमली रूई के फाहे सा बादलों से चुहल करता ग़ज़लों में बसा आशिक़ महबूबा ... नज़्मों-रुबाई का रातों का सूरज सितारों का शहंशाह आसमान के सहन में इठलाता था चाँद चांदनी बिखेरता ... अपनी गोलाइयों पर मुस्कुराता था चाँद आसमां से पिघल ... पानी में अकसर उतर आता था चा... Read more
clicks 160 View   Vote 0 Like   12:25pm 19 Jul 2014 #
Blogger: Shikha Gupta
लोमड़ की टोली ने जम कर शिकार किया माँस इकठ्ठा कर दावतें उड़ायीं लहू के रंगों से आतिश सजायी जो जी भर गया तो कुछ निशानियाँ रख लीं जश्न की और पूँछ फटकारते फेंक दिये माँस के लोथड़े सड़ने के लिये उनके साथ चले आये थे खून सने पंजों के निशान उनके दाँतों में अभी भी क... Read more
clicks 166 View   Vote 0 Like   9:39am 14 Apr 2014 #
Blogger: Shikha Gupta
देखो! रोज़ की तरहउतर आयी हैसुबह की लालीमेरे कपोलों परमहक उठी हैं हवायेंफिर से ...छू कर मन के भावपारिजात के फूलसजाये बैठे हैं रंगोलीपंछी भी जुटा रहे हैंतिनके नये सिरे सेसजाने को नीड़सुनो! कोयल ने अभी-अभीपुकारा हमारा नामअच्छा,कहो तो...आज फिर लपेट लूँचंपा की वेणी अपने जूडे म... Read more
clicks 186 View   Vote 0 Like   11:08am 22 Mar 2014 #
Blogger: Shikha Gupta
मेरे तुम्हारे संबंधों कीक्यूँ सदा पृथक रही धुरीजो तुम रहे सदा से तुममात्र मेरे लिये ही क्यूँलक्ष्मण-रेखित परिधि विषमस्वीकृत थी जब जानकीअग्नि-परीक्षा क्यूँ रचीकैसी प्रीत की रागिनीमेरे तुम्हारे संबंधों कीक्यूँ सदा पृथक रही धुरीनदिया की जल-धारा सेनव-जीवन सोपान ... Read more
clicks 173 View   Vote 0 Like   4:50pm 10 Mar 2014 #
Blogger: Shikha Gupta
कई नाग फुँफकारते हैंअँधेरे चौराहों परअटकने लगती है साँसों मेंठिठकी सी सहमी हवायेंखौफनाक हो उठते हैंदरख्तों के साये भीअपने ही कदमों की आहटडराती है अजनबी बनसूनी राह की बेचैनीबढ़ जाती है हद से ज़्यादातब ...टाँक लेते हैं दरवाज़ेखुद ही कुंडियों में साँकलकि इनमें क़रार ह... Read more
clicks 155 View   Vote 0 Like   8:00am 21 Jan 2014 #
Blogger: Shikha Gupta
संबंधों के रेशेकुछ मुलायम कुछ चुभते सेशून्य से हो के शुरूनित नये समीकरणों से गुज़रतेपहुँचना चाहते थे जहाँ हम दोनों हों समान हक़दारसंबंधों के रेशेकुछ मुलायम कुछ चुभते सेसहेज कर पिरोते ताना-बानासरल से जटिल की ओरबुनना चाहते थे बूटे जिनमें रंग सभी हों चमकदार संबंधों... Read more
clicks 150 View   Vote 0 Like   6:16pm 23 Dec 2013 #
Blogger: Shikha Gupta
मुझे स्वीकारना थाजो भी दिया गयाहँस कर ...विनम्रता सेसामंजस्य बिठाना थाहर सुख हर दुःख सेपिंजरे वही थेआस-निराश केआँसू और मुस्कान केबस ...बदल गया थाहवाओं का रुख औरपानी का स्वाद...बदल गये थेकुंजी से खेलते हाथमुझे स्वीकारना थाजो भी दिया गयाहँस कर ...विनम्रता सेक्यूंकि नहीं ह... Read more
clicks 196 View   Vote 0 Like   4:10pm 1 Dec 2013 #
Blogger: Shikha Gupta
कब से पड़ी थी चौखट पे नैनन में थी समाये रहीआ थोडा तुझे निचोड़ लूँअरी !बच के कहाँ जायेगीकरती है मुझसे दिल्लगीनये खेल काहे रचाय रीधर लूँगी बैया आज तोअरी !बच के कहाँ जायेगीकूक-कूक मन को रिझाये फुदके है ज्यूँ मुनिया कोई ले पंख तेरे मैं भी उड़ूँ अरी !बच के कहाँ जायेगी... Read more
clicks 196 View   Vote 0 Like   4:38am 26 Nov 2013 #
Blogger: Shikha Gupta
लौ को बचाने की जुगत मेंढीठ हवाओं से जूझ रहे थे.....कुछ मासूम दियेजाने कब ...अचानकमनचली हवाओं ने लहरा कर......तीली और बारूदउड़ा दी....रोशनी की सारी कतरनेंअब रह गया है शेष .....चीख .....धुंआबेबसी के टुकड़े और नमकीन आँखों में बुझी चिंगारियों की राख  हवाओं पे मचलता नेपथ्य का संगीतआज भी गु... Read more
clicks 167 View   Vote 0 Like   12:47pm 7 Nov 2013 #
Blogger: Shikha Gupta
वो शब्द अलंकार जिन्होंने गढ़ी प्रेम की परिभाषा मेरे तुम्हारे बीच मेरी कल्पना थी कविता थी या ...थे तुम स्वप्नों का ब्रह्मांड जिसमें पूरक ग्रहों से करते रहे परिक्रमा मैं और तुम मेरी कल्पना है कविता हैया हो तुम काल से चुराया एक पल जिसको पाकरबढ़ गयी जिजीविषा मुझमें ... तुम में ... Read more
clicks 188 View   Vote 0 Like   12:24pm 25 Oct 2013 #
Blogger: Shikha Gupta
शब्द ...गहरे अर्थों वाले भाव ...कुछ मनचले से श्वास भर समीर ......चंचल महकी सफेद चंपा ......कुछ पत्तियाँ पीली एक राग मल्हार एक पूस की रात घास ...तितलियाँ बत्तख ...मछलियाँ फूलों के रंग ...वसंत का मन तड़प ...थोड़ी चुभन स्मृति की धडकन एक माचिस आग एक मुठ्ठी राख एक टुकड़ा धूप चाँद का रुपहला रूप सब ... Read more
clicks 183 View   Vote 0 Like   12:27pm 26 Sep 2013 #
Blogger: Shikha Gupta
सितारे जड़े आँचल में चाँद सा चेहरा किया और अन्तरिक्ष की डोर थमा दी मेरे हाथ  अब घिरी हूँ मैं ग्रहों से अपनी धुरी पे नाचती न भीतर न बाहर परिधि की लकीर भर  ....दुनिया मेरे पास नहीं ...बेवजह न था सनद में लिखना तुम्हारा आकाश मेरे नाम ... Read more
clicks 181 View   Vote 0 Like   2:05pm 4 Sep 2013 #
Blogger: Shikha Gupta
ज़हर है शिराओं मेंशब्द आग-आग हैकलम के सिरों पे अबधधक रही मशाल हैरूह की बेचैनियाँस्याह रंग बदल रहींचल रही कटार सीलिए कई सवाल हैध्वस्त हैं संवेदनालोटती अंगार पे अर्थ हैं ज्वालामुखी लावे में उबाल है स्वप्न चढ़ चले सभी वेदना की सीढ़ियाँ नज़्म के उभार में लहू के भी निशान हैं ब... Read more
clicks 147 View   Vote 0 Like   12:50pm 26 Aug 2013 #
Blogger: Shikha Gupta
स्वच्छ श्वेताकाश में बदलियाँकिसे चल रहीं पुकारतीबूँदें ....आसमान से टपकरह जातीं अधर में लटकीदूर ....चटख रंगों का इंद्र-धनुषकानों में गूँजती कोयल की कूक ....शायद वही .....नहीं ....पता नहीं !!मखमली घास के बिस्तर पर चुभन सीरंगीन पंखुड़ियाँ ....दूर हैं ?....पास हैं ?क्यूँ है उलझन सी ???बह जान... Read more
clicks 192 View   Vote 0 Like   12:02pm 12 Aug 2013 #
Blogger: Shikha Gupta
खो गया वजूद मेरा यूँ वक़्त की सख्त दरारों में मेरे हिस्से की धूप अब मुझ तक ही आ पाती नहीं आसमां पे टँगा रहा जो  मीनारों तक पहुंचा है बिखरे टुकड़े चाँदनी,पर छत तक सीढ़ी जाती नहींतारों की झिलमिलाहट मेंसपने भी मुस्कुराये थे  अँधेरा हुआ है आसमां सपनों को सु... Read more
clicks 184 View   Vote 0 Like   6:08am 23 Jul 2013 #
Blogger: Shikha Gupta
ख्वाहिशों की झील में काई ने घर बनाया हैनीला सा आसमानथोड़ा सा धुंधलाया हैकिनारों की सील में   गहराता है सन्नाटा खरपात ने दरारों में फिर आसरा सजाया हैसीढ़ियाँ लिये बैठी हैं  खामोशी के कदमयुगों से कोई प्यासा भीइस तरफ कहाँ आया हैआलीशान गुम्बदी कुकुरमुत्ती हवेली से  ... Read more
clicks 185 View   Vote 0 Like   12:59pm 12 Jul 2013 #
Blogger: Shikha Gupta
आत्ममुग्धा आत्ममग्नकलकल कर चली निनादपर्वत-पर्वत उलाँघतीबही जाती थी चंचल नदीहरियाली को पंख लगानिपट जीव को कर सजीवअमिय रस धाराओं सीबही जाती थी चंचल नदीनिर्मल काया सजल हृदयतरल सुकोमल स्पर्श सेउपल-शिलायें तराशतीबही जाती थी चंचल नदीपखार तप्त रवि-वल्लरीझिलमिल आँचल प... Read more
clicks 188 View   Vote 0 Like   5:30am 4 Jul 2013 #
Blogger: Shikha Gupta
आज मद में चूर है कल रोयेगा ज़ार-ज़ार धरती के आंचल को यूँ ना कर तू तार-तार पर्वत-शिलायें कर देगीं अहम के टुकड़े हज़ार सागर भी लील जायेगा घमंड का कारोबार मरुभूमि के व्यंग का तब होगा कोई जवाब ?नागफनी के फूलों से कब सजे किसी के ख्वाब !सूरज का अट्टाहास जब भेदेगा तेरे कर्ण क... Read more
clicks 190 View   Vote 0 Like   10:23am 23 Jun 2013 #काव्य-रचना
Blogger: Shikha Gupta
सुनाती हैं कहानियाँ यहाँ की वहाँ की धरती आसमां की या फिर ...होते हैं वो छूटे किनारे !!....कौन जाने सच है क्या ....और क्या छलावे .दे रखी है ड़ोर पराये हाथों में नाचती हैं इशारों पर या फिर ....होते हैं मजबूर नचाने वाले !!....कौन जाने सच है क्या ....और क्या छलावे .थिरकती मचलती हैं सज-धज... Read more
clicks 187 View   Vote 0 Like   11:21am 6 Jun 2013 #काव्य-रचना
Blogger: Shikha Gupta
सागर सी गहरी आँखों में खाली एक धुंआ सा है  सूरज तो कब का डूब चुका अब तो बस अमावस्या है मेले थे जिन राहों में नागफनी उग आयी है अपनी ही मंज़िल है लेकिन खुद से ही कतराई है स्वाद सुगंध कब बीत गए यादों में भी याद नहींसन्नाटे कहकहे लगाते  और कोई संवाद नहीं झुलस गये सपनों की गा... Read more
clicks 186 View   Vote 0 Like   1:02pm 25 May 2013 #काव्य-रचना
Blogger: Shikha Gupta
कलाई से कांधों तक आभूषित एक नारी का प्रतिमान मोअन-जो-दाड़ो में दबा मेरा अनकथ संसार क्या हूँ मैं ?पन्नों में सिमटा .....मात्र एक युगीन वृत्तान्त ??? खोया सारा समर्पित अतीत लक्ष्मण-रेखा के पार अग्नि भी जला ना पायी एक संशय का तार क्या हूँ मैं ???युग-युग से पोषित मानस में मर्या... Read more
clicks 180 View   Vote 0 Like   11:35am 7 May 2013 #काव्य-रचना
Blogger: Shikha Gupta
यूँ आईने से मुलाक़ात किया करोकभी खुद को भी यारा जिया करोज़िन्दगी के सफर में बिछड़े कईकभी नाम उनका भी लिया करोरूठों को मनाना नामुमकिन नहींकभी सब्र के जाम पिया करोन रहो अपने ही उजालों में ग़ुमअँधेरों को भी रोशन किया करोमौत के इंतज़ार में बेज़ार हो क्यूँज़िन्दगी को एहत... Read more
clicks 182 View   Vote 0 Like   12:20pm 27 Apr 2013 #काव्य-रचना
Blogger: Shikha Gupta
आँसू ..... एक सैलाबहदों में उफनता बिलखताया सेहरा में ....भटका समंदरपत्थर पे सर पटकनालहरों का बिखरनासब है देखा-भालावेदना ....सुलगी लकड़ीभीगे ख्यालों से नमन जलती है ...न बुझ पातीगीली लकड़ी का जलनापल-पल सुलगनासब है देखा-भालादिलासा ....महीन शब्द महज़ एक उलझन सुलझाओ तो ...हो जाते ... Read more
clicks 214 View   Vote 0 Like   5:38am 26 Apr 2013 #
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