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Blog: मै और मेरी कलम अक्सर जब बातें करते हैं .....

Blogger: manoj
मित्रों संसार में मित्रता का सबसे बड़ा उदाहरण है कृष्ण और सुदामा की मित्रता का वृत्तांत | उसी करुण मित्रता के दृश्य को एक रचना के माध्यम से लिखने का प्रयास किया है | कृपया आप अवलोकित करें |एक बार द्वारिका जाकर बाल सखा से मिल कर देखोअपने दुःख की करुण कहानी करूणाकर से कह कर... Read more
clicks 320 View   Vote 0 Like   10:39am 19 Feb 2013 #
Blogger: manoj
मित्रों , सुप्रभात | यह रचना है कुरुवंश के दरबार में जब पांडव द्यूत गृह में कौरवों से हार जाते हैं और इस हार जीत के खेल में इतिहास की यह पहली घटना है जब एक नारी को भी दांव पर लगाया जाता है | द्रोपदी को दुशासन खींच कर सभा में ले आता है | और फिर द्रोपदी सभी कुरुवंशी अपने अग्रजों ... Read more
clicks 233 View   Vote 0 Like   3:50am 19 Feb 2013 #
Blogger: manoj
+++++++++++++++++++++++++++++++दिया अब सब्र का भी बुझ रहा अंतिम बगावत हैमगर ये  रात खुलती ही नहीं लम्बी अमावस है ||तमन्ना की जमीं पर जब कभी भी घर बनाया थाहकीकत की लहर ने एक पल में सब डुबा डाला |मेरी कोशिश मनाने की अभी तक भी निरंतर हैसभी  नाराज होने की वजह को भी मिटा डाला ||तुम्हारा रूठना अब लग र... Read more
clicks 190 View   Vote 0 Like   9:37am 18 Feb 2013 #
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कवियों की बस्ती में कौवे करते यहाँ बसेरा हैं आग उगलते खुद ही जलते दीपक तले अँधेरा है ||एहसास हुआ निस्वास यहाँ पर मर्यादा का ओछापनकरतूतें काली करते हैं ज्ञान बांटते मूरख जनदुर्व्यवहार दंभ अभिलाषी सरपंचों का मंच गजब हैलेखन नहीं लेखनी इनकी अपशब्दों का दंश अजब है ||काली र... Read more
clicks 168 View   Vote 0 Like   1:25pm 15 Feb 2013 #
Blogger: manoj
हनुमंत नाम रख देने से क्या रामदूत बन जाओगेराजा की भक्ति करके क्या राजपूत बन जाओगेअपने ही शब्दों में खुद को बड़ा बताने वाले लोंगोराख बनोगे जिस दिन उस दिन क्या भभूत बन जाओगे ||रावण के अंतर्मन में भी ज्ञान पुंज का उजियारा थादंभ भरा था दस शीशों में बडबोले का अंधियारा थावर्... Read more
clicks 191 View   Vote 0 Like   9:34am 13 Feb 2013 #
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कभी गुलामी के दंशों ने , कभी मुसलमानी वंशों नेमुझे रुलाया कदम कदम पर भोग विलासीरत कंसो नेजागो फिर से मेरे बच्चों शंख नाद फिर से कर डालोफिर कौरव सेना सम्मुख है एक महाभारत रच डालो||मनमोहन धृष्टराष्ट बन गया कलयुग की पहचान यही है गांधारी पश्चिम से आकर जन गण मन को ताड़ रही है... Read more
clicks 199 View   Vote 0 Like   9:29am 13 Feb 2013 #
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प्रेम तत्व का सार कृष्ण है जीवन का आधार कृष्ण है |ब्रह्म ज्ञान मत बूझो उद्धव , ब्रह्म ज्ञान का सार कृष्ण हैं ||मुरली की धुन सामवेद है , ऋग् यजुर आभा मुखमंडलवेद अथर्व रास लीला है ,शास्त्र ज्ञान कण कण बृजमंडल ||अब कौन रहा जो धर्म सिखावन चाह रहे हो उद्धव तुमजा कर कह दो निर्मोही ... Read more
clicks 206 View   Vote 0 Like   9:28am 13 Feb 2013 #
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जला देना पुराने ख़त निशानी तोड़ देना सब तुम्हारी बात को माने बिना भी रह नहीं सकता मिटा दूं भी अगर मै याद करने के बहानों को तुम्हारी याद के रहते जुदाई सह नहीं सकता ||तुम्हे तो सब पता है एक दिन की भी जुदाई में वो सारा दिन मुझे बासी कोई अखबार लगता थातुम्हारी दीद के सदके कई द... Read more
clicks 202 View   Vote 0 Like   9:27am 13 Feb 2013 #
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                                                     ख़ुशी को ये भिगाते हैं ग़मों को ये जलाते हैंबिना बोले कभी आंसू बहुत कुछ बोल जाते हैंसमझने के लिए इनको मोहोब्बत का सहारा है......नहीं तो देखने वाले तमाशा ही बनाते हैं ||सिसक हो बेवफाई की कसक चाहे जुदाई कीपिघलता है सभी का दिल हवन की आहुती जैसेख़... Read more
clicks 190 View   Vote 0 Like   9:25am 13 Feb 2013 #
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बहती पवन भाष्कर किरन सरिता गमन दासी नहीं कल्पना कवि की किसी परिणाम की प्यासी नहीं तोलना रचना किसी की तुला दान नहीं कोई हृदय के उदगार की एक आह कविलासी नहीं ||ये नुमाइश मर्म की है दर्द को महसूस कर चाँद भी तप जायेगा  शब्दों की ये ऐसी अगन लेखनी ने राम को भी पुस्तक बना कर रख द... Read more
clicks 208 View   Vote 0 Like   9:16am 13 Feb 2013 #
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मै एक नवजात शिशु हूँ मेरी कोई भाषा नहीं है केवल भाव हैं ..... हँसना और रोना मेरा संसार ये छोटा सा बिछौनामातृत्व का बोध ही मेरा पहला ज्ञान है बस यही मेरी पहचान है कोई पुस्तक नहीं पढ़ी न वेद न कुरान और न ही जनता हूँ मै कोई संविधान आत्मा और शरीर का मिलन हूँ बिल्कुल खाली हूँ को... Read more
clicks 185 View   Vote 0 Like   9:14am 13 Feb 2013 #
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ये कलम हम कलम बन गई है शौक ही अब सनम बन गयी है बेवफाई करेगी क्या मुझसे आइना-ए- भरम बन गई है जिक्र करती मेरी हर फिकर कीदर्द की और मेरी खुस नजर कीहमसफ़र हमकदम बन गई हैये कलम हम कलम बन गई हैये सवाँरे मेरी हर गजल कोदिखाए मुझे राहे कल कोदर्द का ये मलहम बन गई हैये कलम हम कलम बन गई ... Read more
clicks 171 View   Vote 0 Like   9:11am 13 Feb 2013 #
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अभी अभी  चलना सीखा हूँ तुतला कर कहना सीखा  हूँअंजलि भर बूदों का पानी अभी अभी बहना सीखा हूँअभी अभी  चलना सीखा हूँ वात्सल्य का प्यासा हूँ नट खट की परिभाषा हूँ शोभा हूँ अपने आँगन की पौधा हूँ बढ़ना सीखा हूँ अभी अभी  चलना सीखा हूँ देखा देखी करता हूँ आवाजों से भी डरता हूँ भ... Read more
clicks 181 View   Vote 0 Like   9:09am 13 Feb 2013 #
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जीवन और गणित दोनों विषय हैं गणना के प्रश्न चिन्ह के और कल्पना के  दोनों का एक परिणाम है एक का मृत्यु और दूसरे का उत्तर उत्तर में ही छुपा है प्रश्न और मृत्यु में जीवन या फिर पलट कर देख लो फिर समीकरण जीवन और गणित सम्भावनाये अनंत हैं और विस्तार भी अनंत उतने ही अनंत है परि... Read more
clicks 181 View   Vote 0 Like   9:08am 13 Feb 2013 #
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कुछ अनचाहा कुछ मनचाहा सुख दुःख से संदर्भित जीवन परिभाषा के अर्थ अनगिनत कभी निरर्थक कभी प्रश्न चिन्ह ....चित्त की चंचल कल्पित माया राग द्वेष भ्रम जाल अकारण शाश्वत मंडित बना  निरर्थक मृग बन भटके उपवन उपवन तृप्त हुआ घट छणिक राग में छण में नूतन  तृष्णा उत्पन चक्षु जागृत ... Read more
clicks 183 View   Vote 0 Like   9:06am 13 Feb 2013 #
Blogger: manoj
  तुम हो आज भी                         मेरा पहला और आखिरी एहसास                          बचपन की पहली तीस जो आज भी है                         लेकिन कोई दुःख नहीं कोई विरह नहीं                         सबने खोया है प्रेम में मैंने पाया है                         पाया है ये सारा वर्तमान                        पाया है सम्पूर्ण ज्ञान  ... Read more
clicks 182 View   Vote 0 Like   9:05am 13 Feb 2013 #
Blogger: manoj
अंतर्मन की आवाजेंसुनी है मैंने जब कभीशाक्षी हुआ हूँ स्वः मेंदेखा है एक संग्राम विचारों काउजड़ते हुए बसते हुए कई गाँवअपने अंतर्मन में ............अनगिनत आशाओं के बाग़और देखी है क्रोध की आगझुलसते हुए एहसासपनपते हुए छल पाशकामनाओं का ज्वारवासना की फुहारदौड़ती हुई सारे तन मे... Read more
clicks 180 View   Vote 0 Like   9:04am 13 Feb 2013 #
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मैंने बहुत खोजा तुम भी खोजो पता नहीं कहाँ खो गया कब से ओझल हो गया पुतला रह गया तनस्वार्थ से भर गया मन बिलकुल खामोश सुनसान है ये वही इन्सान है ?वही इंसान जो स्तंभित था दया से परोपकार की दवा से  भाव का सागर बहाताज्ञान गंगा से नहाता कुंठित क्यूँ हो गया ?अवसाद से क्यूँ भर ग... Read more
clicks 189 View   Vote 0 Like   9:04am 13 Feb 2013 #
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मेरे प्रियतमतुमबिन प्रतिक्षण युग बीते हैंआशा पात्र भये रीते हैंप्रेम छुदा की प्यासी विरहनकब आओगे बन कर सावनमेरे प्रियतमइन नैनो में विगत मिलन छणकरते  हैं नित स्वप्न सृजन तुमको पाऊं संग अपने मैनिहारती हूँ जब जब  दर्पण मेरे प्रियतम कागा आश बंधाता प्रतिदिन बासे बैरी... Read more
clicks 213 View   Vote 0 Like   9:02am 13 Feb 2013 #
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