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Sahityayan. साहित्यायन

उत्तरप्रदेशकेसोनभद्रके  सुपरिचितग़ज़लकारऔरगीतकारशिवकुमारशिवके कुछगीतयहाँप्रस्तुतकररहाहूँ।येनवगीतहीहैं। सुधेश                            गीत  1 सुखसारे स्वप्नहोगये, दुखढोईगली-गलीजिन्दगी।           रक्तहुई  &...
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  May 21, 2019, 5:19 pm
नैनीताल , उत्तराखण्ड की कवयित्री आशा शैली  के कुछ दोहेयहाँ प्रस्तुत कर रहा हूँ । आशा जी शैल सूत्र नामक एक  पत्रिका अनेकवर्षों से मुद्रित रूप में सम्पादित एवम् प्रकाशित कर रही हैं । वार्धक्यमें भी वे बहुत सक्रिय हैं ।सुधेश1.सकंट जीवन में सखे, देते हमको सीखकभी न हाथ प...
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  May 11, 2019, 1:01 pm
1   चाह बड़े बड़े फ़लसफ़े  मुझसे कहे नहीं जाते दर्शन और उपदेश मुझसे सहे नहीं जाते मुझे तो ज़िन्दगी 'कनुप्रिया 'में  दिखती है संदेशे की बात 'मेघदूत की जंचती है मेरे लिए इंसान 'गुनाहों का देवता 'है  'आषाढ़ का एक दिन 'ही सारा सिलसिला है  प्यार के जो रूप सम...
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  May 7, 2019, 8:00 pm
छत्तीसगढ़केपुख़्ताशायरश्रीदेववंशदुबेकीग़ज़लेंलम्बेसमयसेफ़ेसबुक परपढ़तारहाहूँऔरउन्हेंसराहतारहा।अभीहालमेंमेरेआग्रहपरउन्होंने अपनीकुछग़ज़लेंमेरेपासभेजनेकीकृपाकी।तोउन्हेंआपभीपढ़ें। (1)रंग   उड़ने   लगे    गुलाबों  केढलगएदिनहसीनख़्वा...
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  March 25, 2019, 4:52 pm
5 ग़ज़लें देववंश दुबे की(1)रंग   उड़ने   लगे    गुलाबों  केढल गए दिन हसीन ख़्वाबों केदेखकर कज अदाई दुनिया कीलोग   आदी   हुए   हिजाबों  केये चमन मुस्कुराए जाने कबज़र्द   पत्ते    हुए   गुलाबों  केजिनमें लिक्खी है प्यार की भाषाहर्फ़   ज़िं...
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  March 24, 2019, 10:25 pm
1.सब तो न किताबें कहती हैं इतिहास गवाह तो होता है घटनाओं कालेकिन सारा कब कलम लिखा करती हैं?जो उत्कीर्ण पाषाणों में, सब तो न किताबें कहती हैं,सत्ताएं सारी ही स्वविवेक से, पक्षपात करती हैं।किसके लहू से रंगी शिला, किसका कैसे मोल हुआअव्यक्त मूक कितनी बातें, धरती में सोया क...
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  February 7, 2019, 6:51 pm
बेशक दिल को सदमा गहरा लगता है। सुनने वाला भी    जब बहरा लगता है। आँसू भर देता है    हंसती    पलकों में, यही  वक्त जो आज सुनहरा लगता है। जीवन की हर शाम   वहीँ पर ढलती है, दर्द जहाँ  पहले      से ठहरा लगता है। बाजे बजते   हैं तेरी    तो खुशियों पर,मे...
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  February 2, 2019, 9:22 pm
Dr Devi Sahai Pandeymaneesh deepto me1 day agoDetails🌼सिद्धान्तों की सड़ी लाश🌼लाश सिद्धांतों की सड़कर दे रही बदबू बडी दल प्रबल   हैं मक्खियों के भिनभिनाने लग गये। गिद्धगण खाने लगे हैं जीवितों के मांस को कौवे बुला लाये विदेशी गिद्ध आने लग गये। श्वान और श्रृगाल सारे इंकलाबी बन गये ...
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  January 19, 2019, 3:24 pm
1. शब्द अगर इतने हीसमझदार होतेतो खुद हीगीत,कविता,कहानी,नज़्म,संस्मरण या यात्रा-वृतांतबन जातेशब्दबच्चों की तरहनासमझ और मासूमहोते हैंजिन्हें भावों मेंपिरोना पड़ता हैआहसासों मेंसंजोना पड़ता हैएक अक्षरके हर-फेर सेपूरी रचना को आँख भिगोना पड़ता हैजैसी कल्पना मि...
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  December 20, 2018, 11:28 am
 अम्बाला ( हरियाणा , भारत ) की उदीयमान कवयित्री अंजलि गुप्ता सिफ़र गजलें , लघुकथाएं लिखती हैं । उन की गजलों का संग्रह छपने वाला है । वे गणित की अध्यापिका हैं । उन के उज्ज्वल भविष्य की कामना  है । सुधेश  अम्बाला ( हरियाणा , भारत ) की उदीयमान कवयित्री अंजलि गुप्ता ...
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  September 11, 2018, 10:12 pm
-मित्रो, नवगीत विमर्श पर मेरा यह आलेख लगभग एक दशक पूर्व लिखा गया था। कृपया इस पर अपना स्पष्ट मंतव्य देकर इस विमर्श को आगे बढ़ायें -नवगीतः मेरी आत्मा की अंतर्साधना---------------------------------------------------------------------कविता की रचना प्रक्रिया का प्रश्न मनुष्य की आदिम सर्जना क्रिया से जुड़ा हुआ है। ...
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  March 20, 2018, 3:14 pm
एक रुपया ईश्वर चन्द्र विद्यासागर कलकत्ता में अध्यापन कार्य करते थे। वेतन का उतना ही अंश घर परिवार के लिए खर्च करते जितने में कि औसत नागरिक स्तर का गुजारा चल जाता। शेष भाग वे दूसरे जरूरतमंदों की, विशेषता छात्रों की सहायता में खर्च कर देते थे। आजीवन उनका यही व्रत रहा।&...
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  July 31, 2017, 3:36 pm
हरियाणा की कवयित्री डेज़ी नेहरा की कविताओं में प्रेम की मादकता के साथ एक तार्शनिकता भी मिलती है । उन में प्रकृति के विभिन्न रंगों का वैभव भी मिलता है । उन का संक्षिप्त परिचय यह है । डॉ डेज़ीएसोसिएट प्रोफेसर, अंग्रेजी, गर्ल्स' कॉलेजभक्त फूल सिंह म...
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  May 20, 2017, 6:26 pm
   कुशीनगर (  उ प्र ) की कवयित्री वसुन्धरा पाण्डेय की कविताएँ पढ़ना एक सुखद अनुभव है । उन की कुछ चुनी हुई कविताएँ आप के अवलोकनार्थ यहाँ प्रस्तुत कर रहा हूँ ।   ----  सुधेश प्रेम....एक ख़ामोशी चुपचापपत्तों पर ठहर गईआसमान में तारे टिमटिमाते रहेआदमियत की परम्परा ...
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  May 17, 2017, 9:33 pm
         कवि भवानी प्रसाद मिश्र के संस्मरण कहते हैं लाख मतभेद हो, मनभेद न हो । मतभेद होने पर आख़िर संबंधों की तरलता को कैसे बरकरार रखी जाये यह बड़े रचनाकारों से अधिक और किससे समझा जाय ! कैसे मन-मलीनता पर भी संबंधों की रोचकता और आकर्षण को बरकरार रखा जाये ! एक रोचक वाक...
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  March 9, 2017, 8:36 pm
व्यक्तिगत परिचय जन्म – ०३ अगस्त को पूर्वी उत्तर-प्रदेश के पडरौना जिले में |आरम्भिक शिक्षा –पडरौना में |उच्च-शिक्षा –गोरखपुर विश्वविद्यालय से “’प्रेमचन्द का साहित्य और नारी-जागरण”’ विषय पर पी-एच.डी |प्रकाशन –आलोचना ,हंस ,वाक् ,नया ज्ञानोदय,समकालीन भारतीय...
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  January 30, 2017, 10:01 pm
    कानपुर विश्वविद्यालय की स्नातक श्रीमती शुभदा वाजपेयी हिन्दी की श्रेष्ठ गीतकार    ग़ज़लकार दोहाकार और मुक्तक लेखिका हैं । भारतीय साहित्य उत्थान समिति दिल्ली द्वारा *गगन स्वर  सेवी सम्मान और हिन्दुस्तानी भाषा अकादमी आदि अनेक संस्थाओं से उन्हें अने...
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  September 16, 2016, 11:40 am
     मेरे मुक्तक हरे मैदान  में कोई पहाड़ में हैं उस का राग भोपाली वो दहाड़ में है ख़ुशामद से या धमका चमका कर ही सब अपनी अपनी किसी जुगाड़ में हैं । वो गीत गाता कोई गजल कहता है वो ऊँची कुर्सी पर नशे में रहता है कोई सिंहासन हथियाने की जल्दी में हर दिन नंगे...
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  July 26, 2016, 10:25 am
         लखनऊ के उदीयमान कवि तरुण प्रकाश से हाल में परिचय हुआ , पर मैं उन के गीत पढ कर मुग्ध हो गया । उन के गीत नूतन विम्बों की लड़ियाँ हैं , उन में नवीन उपमाओं और रूपकों की मालाएँ सज रही हैं । कथ्य की विविधता और शिल्प की नवीनता उन के गीतों में भरपूर है । नवगीत के इस ...
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  May 19, 2016, 9:33 am
            दीप्ति शर्मा आगरा की नवोदित कवयित्री हैं , जिन की कविताओं में नवोदित प्रेम            की कोमल अनुभूतियाँ कथन की ताज़गी और सादगी के साथ प्रकट होती हैं ।            आशा है कि भविष्य में उन की कविता के विविध आयाम खुलेंगे ।            ---- स...
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  February 16, 2016, 8:02 pm
निदा फाज़ली साहब को श्रद्धांजलि----------------------------------------          "घर से मस्जिद है बहुत दूर ,चलो यूँ कर लें ,किसी रोते हुए बच्चे को हंसाया जाए----"                जैसे मानवीयता से ओत-प्रोत शेर कहने वाले श्री निदा फाजली साहब आज हमारे बीच में नहीं हैं परन्तु उनकी यह मानवीय ...
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  February 9, 2016, 11:25 am
कवि परिचयःजन्मः  1932 में सूरीनाम में। ९ जनवरी २०१६ को दिवंगत । शिक्षाः  आरंभिक शिक्षा डच प्राइमरी स्कूल में, स्वाध्याय से हिंदी पढ़ना आरंभ। सन् 1960 में भारत से श्री महातम सिंह के आने से प्रेरणा मिली तथा 1980 में भारत जा कर हिंदी अध्ययन किया। निरंतर हिंदी अध्यापन।...
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  February 6, 2016, 9:52 am
Govind Acharya*** गृहस्थी हीन एक गृह कवि ***मित्रों, अभी चार दिन पहले मैंने "घर"शिर्षक चार पंक्तियाँ पेश की थी जिसमें Home Sweet Home के प्रसिद्ध कवि जन हवार्ड का जिक्र था। मित्रों के आग्रह पर जन हवार्ड के बारे में ये कुछ पंक्तियाँ...जन हवार्ड (June 9, 1791----April 10, 1852)। पुरा नाम जन हवार्ड पाइन(John Howard Payne)। अमेर...
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  January 17, 2016, 7:11 pm
                 उर्मिल सत्यभूषण की संगति में कुछ क्षण    उर्मिल जी को मैं ने पहलेपहल दिल्ली के रूसी सांस्कृतिक केन्द्र में देखा , जहाँ उन्होंनें परिचय साहित्य परिषद के तत्वावधान में एक गोष्ठी का आयोजन किया था । यह लगभग पन्द्रह बीस वर्ष पहले की बात है । ...
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  January 10, 2016, 11:34 am
          मेरे दोहे इन को तो बस चाहिये सब की केवल वाह देश मरे मानव मरे  दुख में उठे क़राह इस आभासी जगत में मिलना तो है दूर निकट न आएँ दिल मगर प्रेम नशे में चूर ।यों ही बस उडती रहो देश कि हो परदेश जोश जोश में पर रखो तुम संभाल कर होश जितनी चाहे देख लो भारत की तस...
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  December 30, 2015, 7:31 pm
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