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Sahityayan. साहित्यायन

एक रुपया ईश्वर चन्द्र विद्यासागर कलकत्ता में अध्यापन कार्य करते थे। वेतन का उतना ही अंश घर परिवार के लिए खर्च करते जितने में कि औसत नागरिक स्तर का गुजारा चल जाता। शेष भाग वे दूसरे जरूरतमंदों की, विशेषता छात्रों की सहायता में खर्च कर देते थे। आजीवन उनका यही व्रत रहा।&...
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  July 31, 2017, 3:36 pm
हरियाणा की कवयित्री डेज़ी नेहरा की कविताओं में प्रेम की मादकता के साथ एक तार्शनिकता भी मिलती है । उन में प्रकृति के विभिन्न रंगों का वैभव भी मिलता है । उन का संक्षिप्त परिचय यह है । डॉ डेज़ीएसोसिएट प्रोफेसर, अंग्रेजी, गर्ल्स' कॉलेजभक्त फूल सिंह म...
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  May 20, 2017, 6:26 pm
   कुशीनगर (  उ प्र ) की कवयित्री वसुन्धरा पाण्डेय की कविताएँ पढ़ना एक सुखद अनुभव है । उन की कुछ चुनी हुई कविताएँ आप के अवलोकनार्थ यहाँ प्रस्तुत कर रहा हूँ ।   ----  सुधेश प्रेम....एक ख़ामोशी चुपचापपत्तों पर ठहर गईआसमान में तारे टिमटिमाते रहेआदमियत की परम्परा ...
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  May 17, 2017, 9:33 pm
         कवि भवानी प्रसाद मिश्र के संस्मरण कहते हैं लाख मतभेद हो, मनभेद न हो । मतभेद होने पर आख़िर संबंधों की तरलता को कैसे बरकरार रखी जाये यह बड़े रचनाकारों से अधिक और किससे समझा जाय ! कैसे मन-मलीनता पर भी संबंधों की रोचकता और आकर्षण को बरकरार रखा जाये ! एक रोचक वाक...
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  March 9, 2017, 8:36 pm
व्यक्तिगत परिचय जन्म – ०३ अगस्त को पूर्वी उत्तर-प्रदेश के पडरौना जिले में |आरम्भिक शिक्षा –पडरौना में |उच्च-शिक्षा –गोरखपुर विश्वविद्यालय से “’प्रेमचन्द का साहित्य और नारी-जागरण”’ विषय पर पी-एच.डी |प्रकाशन –आलोचना ,हंस ,वाक् ,नया ज्ञानोदय,समकालीन भारतीय...
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  January 30, 2017, 10:01 pm
    कानपुर विश्वविद्यालय की स्नातक श्रीमती शुभदा वाजपेयी हिन्दी की श्रेष्ठ गीतकार    ग़ज़लकार दोहाकार और मुक्तक लेखिका हैं । भारतीय साहित्य उत्थान समिति दिल्ली द्वारा *गगन स्वर  सेवी सम्मान और हिन्दुस्तानी भाषा अकादमी आदि अनेक संस्थाओं से उन्हें अने...
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  September 16, 2016, 11:40 am
     मेरे मुक्तक हरे मैदान  में कोई पहाड़ में हैं उस का राग भोपाली वो दहाड़ में है ख़ुशामद से या धमका चमका कर ही सब अपनी अपनी किसी जुगाड़ में हैं । वो गीत गाता कोई गजल कहता है वो ऊँची कुर्सी पर नशे में रहता है कोई सिंहासन हथियाने की जल्दी में हर दिन नंगे...
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  July 26, 2016, 10:25 am
         लखनऊ के उदीयमान कवि तरुण प्रकाश से हाल में परिचय हुआ , पर मैं उन के गीत पढ कर मुग्ध हो गया । उन के गीत नूतन विम्बों की लड़ियाँ हैं , उन में नवीन उपमाओं और रूपकों की मालाएँ सज रही हैं । कथ्य की विविधता और शिल्प की नवीनता उन के गीतों में भरपूर है । नवगीत के इस ...
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  May 19, 2016, 9:33 am
            दीप्ति शर्मा आगरा की नवोदित कवयित्री हैं , जिन की कविताओं में नवोदित प्रेम            की कोमल अनुभूतियाँ कथन की ताज़गी और सादगी के साथ प्रकट होती हैं ।            आशा है कि भविष्य में उन की कविता के विविध आयाम खुलेंगे ।            ---- स...
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  February 16, 2016, 8:02 pm
निदा फाज़ली साहब को श्रद्धांजलि----------------------------------------          "घर से मस्जिद है बहुत दूर ,चलो यूँ कर लें ,किसी रोते हुए बच्चे को हंसाया जाए----"                जैसे मानवीयता से ओत-प्रोत शेर कहने वाले श्री निदा फाजली साहब आज हमारे बीच में नहीं हैं परन्तु उनकी यह मानवीय ...
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  February 9, 2016, 11:25 am
कवि परिचयःजन्मः  1932 में सूरीनाम में। ९ जनवरी २०१६ को दिवंगत । शिक्षाः  आरंभिक शिक्षा डच प्राइमरी स्कूल में, स्वाध्याय से हिंदी पढ़ना आरंभ। सन् 1960 में भारत से श्री महातम सिंह के आने से प्रेरणा मिली तथा 1980 में भारत जा कर हिंदी अध्ययन किया। निरंतर हिंदी अध्यापन।...
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  February 6, 2016, 9:52 am
Govind Acharya*** गृहस्थी हीन एक गृह कवि ***मित्रों, अभी चार दिन पहले मैंने "घर"शिर्षक चार पंक्तियाँ पेश की थी जिसमें Home Sweet Home के प्रसिद्ध कवि जन हवार्ड का जिक्र था। मित्रों के आग्रह पर जन हवार्ड के बारे में ये कुछ पंक्तियाँ...जन हवार्ड (June 9, 1791----April 10, 1852)। पुरा नाम जन हवार्ड पाइन(John Howard Payne)। अमेर...
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  January 17, 2016, 7:11 pm
                 उर्मिल सत्यभूषण की संगति में कुछ क्षण    उर्मिल जी को मैं ने पहलेपहल दिल्ली के रूसी सांस्कृतिक केन्द्र में देखा , जहाँ उन्होंनें परिचय साहित्य परिषद के तत्वावधान में एक गोष्ठी का आयोजन किया था । यह लगभग पन्द्रह बीस वर्ष पहले की बात है । ...
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  January 10, 2016, 11:34 am
          मेरे दोहे इन को तो बस चाहिये सब की केवल वाह देश मरे मानव मरे  दुख में उठे क़राह इस आभासी जगत में मिलना तो है दूर निकट न आएँ दिल मगर प्रेम नशे में चूर ।यों ही बस उडती रहो देश कि हो परदेश जोश जोश में पर रखो तुम संभाल कर होश जितनी चाहे देख लो भारत की तस...
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  December 30, 2015, 7:31 pm
      विजय कुमार सप्पत्ति बैंगलोर के हिन्दी कवि है । उन की मातृ भाषा कन्नड़ है    पर वे हिन्दी में     और कभी अँगरेजी में कविताएँ आदि लिखते हैं । वे जाने माने    चिट्ठाकार ( ब्लागर ) हैं । हिन्दी    और अँगरेजी में उन के ब्लाग हैं । यहाँ उन     की कुछ कविताएँ ...
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  October 7, 2015, 8:04 pm
     अमेरिका में बसी  भारतीय कवयित्री शशि पाधा ने रोचक संस्मरण  तथा यात्रा वृत्तान्त लिखे है और साथ ही अनेक मर्म स्पर्शी कविताएँ भी  लिखी हैं । यहाँ पढ़िये उन की कुछ कविताएँ --- ---  सुधेश      बीज मंत्रचल पथिक, कभी न रुक  ताड़ के पेड़ सा&nb...
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  October 2, 2015, 3:11 pm
         लखनऊ की कवयित्री    रंजना अनुराग लगभग चार दशकों से कविता   , कहानी , लेख          आदि लिख रहीं हैं ।   उन के दो काव्यसंग्रह ( रजनी कन्धा , परिन्दे ) और कहानियों का संग्रह          ( स्वयम् सिद्धा )    आदि छप चुके हैं ।  संचार माध्यमों पर भी ...
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  August 16, 2015, 10:23 pm
           युवा कवि पवन गोस्वामी की कविताएँ  तब मानवता रोती हैइज़्ज़त का सर जब कटता हो  जब चुपके चुपके घर लुटता हो जब  लहू से लोहित धरती होजब  पापों से इज़्ज़त पलती होतब  मानवता रोती है  तभी मानवता रोती है।जब भ्रष्ट हमारे  नेता होंवे कुत्सित कर्म ...
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  August 2, 2015, 12:29 pm
          अमन त्रिपाठी की कविताएँ          कविता बहती रहती है कविता बहती रहती हैमेरे अंदरकभी कहीं कोई पेड़ देख लूँ;सूखा, ठूँठया फिर गिरा हुआ..कविता जाग जाती है !कोई भूखी, फटे कपड़ेपहने लड़की देख लूँतो कविता उफान मारने लगती है!कितना छंदमय लगता हैहीरामन का उजड...
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  July 13, 2015, 5:59 pm
          कवि , आलोचक , सम्पादक और शान्ति निकेतन में हिन्दी के प्रोफ़ेसर           डा शैलेन्द्र त्रिपाठी हिन्दी जगत में एक जाना माना नाम है । उन के सम्पादन           में सरयूधारा त्रैमासिक कई वर्षों तक प्रकाशित होती रही । उस के प्रेमचन्द          वि...
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  July 4, 2015, 2:08 pm
कुछ नया रच कुछ नया कह कुछ नया रच ।कुछ और उठ कुछ और चल कुछ और लुट कुछ और खप कुछ और जच ।कुछ नया कह कुछ नया रच ।बातों का ढंगभावों का रंग शब्दों के संग सुर का संगम कुछ और कर कुछ और तप कुछ नया कह कुछ नया रच ।कुछ और सुनकुछ नया चुनकुछ नया गुननहीं ...
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  June 18, 2015, 3:28 pm
सर्वेश कुमार मिश्र हिन्दी के नवोदित कवि हैं , जिन की अनेक रचनाएँ पत्रिकाओं में छप चुकी हैं । वे कवि सम्मेलनों में भी भाग लेते हैं । पिछले दिनों उन्हों ने वाराणसी के एक कवि सम्मेलन में मुझे भी निमन्त्रित किया था । मैं उस में नहीं जा सका । सर्वेश कुमार मिश्र की कविता...
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  June 15, 2015, 9:54 am
“माँ / तलाश” माँ को मुझे कभी तलाशना नहीं पड़ा;वो हमेशा ही मेरे पास थी और है अब भी .. !लेकिन अपने गाँव/छोटे शहर की गलियों में ,मैं अक्सर छुप जाया करता था ;और माँ ही हमेशा मुझे ढूंढती थी ..!और मैं छुपता भी इसलिए था कि वो मुझे ढूंढें !!....और फिर मैं माँ से चिपक जाता था ..!!!अहिस्ता अ...
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  June 7, 2015, 3:42 pm
श्री जगदीश पंकज हिन्दी के सुपरिचित नवगीतकार हैं , जो लम्बे समय से गीत साधनामें लगे हैं । गीत और नवगीत की जो उपेक्षा अनेक वर्षों से हो रही है , उस का एक प्रमाण पंकज जी का पहला नवगीत संग्रह "सुनो मुझे भी "है , जो हाल में ही छपाहै , जिस की एक प्रति उन्होंने मेरे पास भेजी है । उन ...
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  June 1, 2015, 3:13 pm
हिन्दी की क़ानून विषयक पत्रिका विधि भारती की सम्पादिका और विधि भारती परिषद की संचालिका श्रीमती सन्तोष खन्ना कुशल अनुवादक होने के साथ हिन्दी में कविताएँ भी लिखती हैं ।।उन का कवितासंग्रह और दो उपन्यास छप चुके हैं ।। नीचे उन की एक ताज़ा कविता प्रस्तुत की जा रही है...
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  May 23, 2015, 9:52 pm
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