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Blog: Sahityayan. साहित्यायन

Blogger: डा सुधेश
Hindi poems /  Alka kansra / Chandi Garh Punjab  चण्डीगढ़ गढ़  में रसायन शास्त्र की प्रोफ़ेसर श्रीमती अलका कांसरा हिन्दी की सफल कवयित्री भी हैं । उन की कई पुस्तकें छपी हैं । वे कई पुरस्कार भी पा चुकी हैं । यहाँ उन की कुछ क... Read more
clicks 58 View   Vote 0 Like   1:16pm 20 Jul 2020 #
Blogger: डा सुधेश
         कानपुर के नवोदित ग़ज़लकार आनन्द  पाण्डेय तन्हा की कुछ गजलें                यहाँ  प्रस्तुत कर रहा हूँ  ।          सुधेश     ग़ज़ल-1जो  हमारे  जिस्म  की  दुश्वारियाँ  हैं,इक  नये  परवाज़ की  तैयारियाँ  हैं।मुफ़लिसी की इक त... Read more
clicks 26 View   Vote 0 Like   4:05pm 2 Apr 2020 #
Blogger: डा सुधेश
मैला आँचल का रूसी अनुवाद और संकटभारत यायावर"मैला आँचल "का प्रकाशन 1954 में हुआ और देखते ही देखते यह हिन्दी के साहित्यिक जगत को प्रभावित करता चला गया । इससे प्रभावित होने वालों में हजारी प्रसाद द्विवेदी और नामवर सिंह भी थे । 1956 ई. में इन्होंने बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के... Read more
clicks 26 View   Vote 0 Like   1:21am 15 Mar 2020 #
Blogger: डा सुधेश
मृत्युंजय साधक के दोहे.....1..लोहे- सरिए जोड़के, खर्चे किए करोड़।  सबसे ऊँचा कौन हो,लगी बुतों की होड़।।2...बाढ़ चढ़ाने आ गई, नरमुंडों का हार।कंकालों के ढेर में, सिसक रहा केदार ।।3..बंजर धरती हो गई, जीवन की बदहाल।भावों का सूखा पड़ा , फटा हृदय तत्काल।।4....अरी मिसाइल ! इस तरह, मत बन त... Read more
clicks 50 View   Vote 0 Like   4:06am 10 Mar 2020 #
Blogger: डा सुधेश
हिन्दी के यशस्वी कवि नरेन्द्र शर्मा की पुत्री लावण्या शाह जी से जयप्रकाश मानस की बातचीत ।प्रश्न- लावण्या जी, आप उम्र के इस मुकाम में वह भी विदेशी भूमि में रहते हुए भी रचना-कर्म से संबंद्ध हैं ।यह ह... Read more
clicks 29 View   Vote 0 Like   11:40am 5 Mar 2020 #
Blogger: डा सुधेश
.         ग़ाज़ियाबाद के युवा ग़ज़लकार मृत्युंजय साधक की ग़ज़लें           मुझे पसन्द आईं । आप भी इन का आनन्द लें ।            सुधेश ठसपनों की क्या बात करें जब सारे सपने झूठे हैंअपनों की क्या&... Read more
clicks 28 View   Vote 0 Like   1:27pm 27 Feb 2020 #
Blogger: डा सुधेश
व्यवसाय  से सी ए          रुचि से  कवि और ब्लागर दिगम्बर नासवा  की कुछ गजलें प्रस्तुत कर रहा हूँ ।  सुधेश किस्मत जब अच्छी लिखवाई होती हैजेबों में तब पाई पाई होती हैआसमान पे नज़र टिकाई होती हैखेतों में जब फसल उगाई होती हैजिसने भी ये आग लगाई होती हैतीली हलके ... Read more
clicks 157 View   Vote 0 Like   3:53pm 14 Sep 2019 #
Blogger: डा सुधेश
उत्तरप्रदेशकेसोनभद्रके  सुपरिचितग़ज़लकारऔरगीतकारशिवकुमारशिवके कुछगीतयहाँप्रस्तुतकररहाहूँ।येनवगीतहीहैं। सुधेश                            गीत  1 सुखसारे स्वप्नहोगये, दुखढोईगली-गलीजिन्दगी।           रक्तहुई  &... Read more
clicks 215 View   Vote 0 Like   11:49am 21 May 2019 #
Blogger: डा सुधेश
नैनीताल , उत्तराखण्ड की कवयित्री आशा शैली  के कुछ दोहेयहाँ प्रस्तुत कर रहा हूँ । आशा जी शैल सूत्र नामक एक  पत्रिका अनेकवर्षों से मुद्रित रूप में सम्पादित एवम् प्रकाशित कर रही हैं । वार्धक्यमें भी वे बहुत सक्रिय हैं ।सुधेश1.सकंट जीवन में सखे, देते हमको सीखकभी न हाथ प... Read more
clicks 137 View   Vote 0 Like   7:31am 11 May 2019 #
Blogger: डा सुधेश
1   चाह बड़े बड़े फ़लसफ़े  मुझसे कहे नहीं जाते दर्शन और उपदेश मुझसे सहे नहीं जाते मुझे तो ज़िन्दगी 'कनुप्रिया 'में  दिखती है संदेशे की बात 'मेघदूत की जंचती है मेरे लिए इंसान 'गुनाहों का देवता 'है  'आषाढ़ का एक दिन 'ही सारा सिलसिला है  प्यार के जो रूप सम... Read more
clicks 144 View   Vote 0 Like   2:30pm 7 May 2019 #
Blogger: डा सुधेश
छत्तीसगढ़केपुख़्ताशायरश्रीदेववंशदुबेकीग़ज़लेंलम्बेसमयसेफ़ेसबुक परपढ़तारहाहूँऔरउन्हेंसराहतारहा।अभीहालमेंमेरेआग्रहपरउन्होंने अपनीकुछग़ज़लेंमेरेपासभेजनेकीकृपाकी।तोउन्हेंआपभीपढ़ें। (1)रंग   उड़ने   लगे    गुलाबों  केढलगएदिनहसीनख़्वा... Read more
clicks 165 View   Vote 0 Like   11:22am 25 Mar 2019 #
Blogger: डा सुधेश
5 ग़ज़लें देववंश दुबे की(1)रंग   उड़ने   लगे    गुलाबों  केढल गए दिन हसीन ख़्वाबों केदेखकर कज अदाई दुनिया कीलोग   आदी   हुए   हिजाबों  केये चमन मुस्कुराए जाने कबज़र्द   पत्ते    हुए   गुलाबों  केजिनमें लिक्खी है प्यार की भाषाहर्फ़   ज़िं... Read more
clicks 177 View   Vote 0 Like   4:55pm 24 Mar 2019 #
Blogger: डा सुधेश
1.सब तो न किताबें कहती हैं इतिहास गवाह तो होता है घटनाओं कालेकिन सारा कब कलम लिखा करती हैं?जो उत्कीर्ण पाषाणों में, सब तो न किताबें कहती हैं,सत्ताएं सारी ही स्वविवेक से, पक्षपात करती हैं।किसके लहू से रंगी शिला, किसका कैसे मोल हुआअव्यक्त मूक कितनी बातें, धरती में सोया क... Read more
clicks 89 View   Vote 0 Like   1:21pm 7 Feb 2019 #
Blogger: डा सुधेश
बेशक दिल को सदमा गहरा लगता है। सुनने वाला भी    जब बहरा लगता है। आँसू भर देता है    हंसती    पलकों में, यही  वक्त जो आज सुनहरा लगता है। जीवन की हर शाम   वहीँ पर ढलती है, दर्द जहाँ  पहले      से ठहरा लगता है। बाजे बजते   हैं तेरी    तो खुशियों पर,मे... Read more
clicks 143 View   Vote 0 Like   3:52pm 2 Feb 2019 #
Blogger: डा सुधेश
Dr Devi Sahai Pandeymaneesh deepto me1 day agoDetails🌼सिद्धान्तों की सड़ी लाश🌼लाश सिद्धांतों की सड़कर दे रही बदबू बडी दल प्रबल   हैं मक्खियों के भिनभिनाने लग गये। गिद्धगण खाने लगे हैं जीवितों के मांस को कौवे बुला लाये विदेशी गिद्ध आने लग गये। श्वान और श्रृगाल सारे इंकलाबी बन गये ... Read more
clicks 162 View   Vote 0 Like   9:54am 19 Jan 2019 #
Blogger: डा सुधेश
1. शब्द अगर इतने हीसमझदार होतेतो खुद हीगीत,कविता,कहानी,नज़्म,संस्मरण या यात्रा-वृतांतबन जातेशब्दबच्चों की तरहनासमझ और मासूमहोते हैंजिन्हें भावों मेंपिरोना पड़ता हैआहसासों मेंसंजोना पड़ता हैएक अक्षरके हर-फेर सेपूरी रचना को आँख भिगोना पड़ता हैजैसी कल्पना मि... Read more
clicks 162 View   Vote 0 Like   5:58am 20 Dec 2018 #
Blogger: डा सुधेश
 अम्बाला ( हरियाणा , भारत ) की उदीयमान कवयित्री अंजलि गुप्ता सिफ़र गजलें , लघुकथाएं लिखती हैं । उन की गजलों का संग्रह छपने वाला है । वे गणित की अध्यापिका हैं । उन के उज्ज्वल भविष्य की कामना  है । सुधेश  अम्बाला ( हरियाणा , भारत ) की उदीयमान कवयित्री अंजलि गुप्ता ... Read more
clicks 209 View   Vote 0 Like   4:42pm 11 Sep 2018 #
Blogger: डा सुधेश
-मित्रो, नवगीत विमर्श पर मेरा यह आलेख लगभग एक दशक पूर्व लिखा गया था। कृपया इस पर अपना स्पष्ट मंतव्य देकर इस विमर्श को आगे बढ़ायें -नवगीतः मेरी आत्मा की अंतर्साधना---------------------------------------------------------------------कविता की रचना प्रक्रिया का प्रश्न मनुष्य की आदिम सर्जना क्रिया से जुड़ा हुआ है। ... Read more
clicks 146 View   Vote 0 Like   9:44am 20 Mar 2018 #
Blogger: डा सुधेश
एक रुपया ईश्वर चन्द्र विद्यासागर कलकत्ता में अध्यापन कार्य करते थे। वेतन का उतना ही अंश घर परिवार के लिए खर्च करते जितने में कि औसत नागरिक स्तर का गुजारा चल जाता। शेष भाग वे दूसरे जरूरतमंदों की, विशेषता छात्रों की सहायता में खर्च कर देते थे। आजीवन उनका यही व्रत रहा।&... Read more
clicks 200 View   Vote 0 Like   10:06am 31 Jul 2017 #
Blogger: डा सुधेश
हरियाणा की कवयित्री डेज़ी नेहरा की कविताओं में प्रेम की मादकता के साथ एक तार्शनिकता भी मिलती है । उन में प्रकृति के विभिन्न रंगों का वैभव भी मिलता है । उन का संक्षिप्त परिचय यह है । डॉ डेज़ीएसोसिएट प्रोफेसर, अंग्रेजी, गर्ल्स' कॉलेजभक्त फूल सिंह म... Read more
clicks 177 View   Vote 0 Like   12:56pm 20 May 2017 #
Blogger: डा सुधेश
   कुशीनगर (  उ प्र ) की कवयित्री वसुन्धरा पाण्डेय की कविताएँ पढ़ना एक सुखद अनुभव है । उन की कुछ चुनी हुई कविताएँ आप के अवलोकनार्थ यहाँ प्रस्तुत कर रहा हूँ ।   ----  सुधेश प्रेम....एक ख़ामोशी चुपचापपत्तों पर ठहर गईआसमान में तारे टिमटिमाते रहेआदमियत की परम्परा ... Read more
clicks 158 View   Vote 0 Like   4:03pm 17 May 2017 #
Blogger: डा सुधेश
         कवि भवानी प्रसाद मिश्र के संस्मरण कहते हैं लाख मतभेद हो, मनभेद न हो । मतभेद होने पर आख़िर संबंधों की तरलता को कैसे बरकरार रखी जाये यह बड़े रचनाकारों से अधिक और किससे समझा जाय ! कैसे मन-मलीनता पर भी संबंधों की रोचकता और आकर्षण को बरकरार रखा जाये ! एक रोचक वाक... Read more
clicks 250 View   Vote 0 Like   3:06pm 9 Mar 2017 #
Blogger: डा सुधेश
व्यक्तिगत परिचय जन्म – ०३ अगस्त को पूर्वी उत्तर-प्रदेश के पडरौना जिले में |आरम्भिक शिक्षा –पडरौना में |उच्च-शिक्षा –गोरखपुर विश्वविद्यालय से “’प्रेमचन्द का साहित्य और नारी-जागरण”’ विषय पर पी-एच.डी |प्रकाशन –आलोचना ,हंस ,वाक् ,नया ज्ञानोदय,समकालीन भारतीय... Read more
clicks 188 View   Vote 0 Like   4:31pm 30 Jan 2017 #
Blogger: डा सुधेश
    कानपुर विश्वविद्यालय की स्नातक श्रीमती शुभदा वाजपेयी हिन्दी की श्रेष्ठ गीतकार    ग़ज़लकार दोहाकार और मुक्तक लेखिका हैं । भारतीय साहित्य उत्थान समिति दिल्ली द्वारा *गगन स्वर  सेवी सम्मान और हिन्दुस्तानी भाषा अकादमी आदि अनेक संस्थाओं से उन्हें अने... Read more
clicks 211 View   Vote 0 Like   6:10am 16 Sep 2016 #
Blogger: डा सुधेश
     मेरे मुक्तक हरे मैदान  में कोई पहाड़ में हैं उस का राग भोपाली वो दहाड़ में है ख़ुशामद से या धमका चमका कर ही सब अपनी अपनी किसी जुगाड़ में हैं । वो गीत गाता कोई गजल कहता है वो ऊँची कुर्सी पर नशे में रहता है कोई सिंहासन हथियाने की जल्दी में हर दिन नंगे... Read more
clicks 189 View   Vote 0 Like   4:55am 26 Jul 2016 #
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