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Blog: Voice of Silence

Blogger: Brijesh Neeraj
गम तो दिए हैं जिंदगी ने लेकिन उम्मीद है कि दीदारे-यार होगा बहाने बहुत हैं जीने के लेकिन जीता हूँ कि विसाले-यार होगा होती है जब हवाओं में जुंबिश लगता है तू आस-पास होगा रात की तन्हाइयाँ डराती नहीं किसी सुबह तू मेरे साथ होगा ... Read more
clicks 257 View   Vote 0 Like   3:24pm 19 Dec 2015 #
Blogger: Brijesh Neeraj
इस रात का सबेरा नहीं है तू मिलेगा आसरा नहीं है मन्दिर मस्जिद आरती अजानें सब कुछ है, आस्था नहीं है टूटे मिथक सभी जिंदगी के साँसें हैं लालसा नहीं है मौसम का ये कैसा मिजाज चंदा नहीं है, सूरज नहीं है ... Read more
clicks 260 View   Vote 0 Like   3:04pm 19 Dec 2015 #
Blogger: Brijesh Neeraj
अम्बे तेरी वंदना, करता हूँ दिन-रात मिल जाए मुझको जगह, चरणों में हे मात चरणों में हे मात, सदा तेरे गुण गाऊँ चरण-कमल-रज मात, नित्य ही शीश लगाऊँ अर्पित हैं मन-प्राण, दया करिए जगदम्बे शब्दों को दो अर्थ, मात मेरी हे अम्बे  ... Read more
clicks 232 View   Vote 0 Like   3:10pm 18 Dec 2015 #
Blogger: Brijesh Neeraj
तुम्हारे घर सुना सबेरा बहुत है यहाँ रात बीती अँधेरा बहुत है समय की हैं बातें सबेरे-अँधेरे कहीं नींद, कहीं रतजगा बहुत है तुम्हें मिलते हैं साथी बहुत से हमें तन्हाई का सहारा बहुत है याद करना और आँसू बहाना वक्त बिताने का बहाना बहुत है कभी तो निकलोगे रस... Read more
clicks 279 View   Vote 0 Like   2:58pm 18 Dec 2015 #
Blogger: Brijesh Neeraj
थोड़ा बरस के थम गए वो बादल कहाँ के थे आँखों में नमी शेष है आँसू यहाँ पे थे इस माहौल को देखते सोचता हूँ एक बात आदम यहां हैं तो अहरमन कहां पे थे कई बरस हो गए कोई शोर नहीं हुआ लगता है क्या आपको गांधी यहां पे थे अब तो मिसालें भी न रहीं कुछ कहने के लिए बातों को यूं समझ लें वो सम... Read more
clicks 284 View   Vote 0 Like   4:33pm 16 Dec 2015 #
Blogger: Brijesh Neeraj
भरती खातिर आये लल्ला, सीना झट से दिया फुलाय। नाप सको तो नापो सीना, पसली पसली दिया दिखाय।। पेट पीठ सब एक हो गयी, दम ऐसा कुछ दिया लगाय। प्रत्यंचा सी देह तन गयी, तन कुछ ऐसा दिया लचाय।। गर्दन अकड़ी सीना फूला, पाछे हाथ दिया फैलाय। सूरत जैसे आम चुसा हो, अँखिया भीतर कोटर नाय।। ... Read more
clicks 138 View   Vote 0 Like   4:29pm 16 Dec 2015 #
Blogger: Brijesh Neeraj
खेल ऐसा ये अनोखा हम सभी को भा गया देश का हर खेल छूटा, यह विदेशी छा गया खेल की दीवानगी है, रंग ऐसा चढ़ गया छोड़ के सब काम अपने, मन इसी में रम गया आड़ में इस खेल की बाजार अब सजने लगे बोलियां अब लग रहीं, ईमान अब बिकने लगे लोभियों ने यूं डसा है, दंश अब चुभने लगे अब नियंता खेल के, इस खे... Read more
clicks 124 View   Vote 0 Like   4:28pm 16 Dec 2015 #
Blogger: Brijesh Neeraj
सिखावा रे हमहूं का, अइसा जतन कछु हम होइ जाई अब, पास ई भरती मा। मोट ताज लोग सब, आय तो इहां बाटेन कइसे होइ पइबै, पास ई भरती मा। जाने किता चौड़ा चाहे, सीना पुलिस खातिर थक गय फुलाय के, छाती ई भरती मा। तनि गय शरीर ई, तीर कमान जइसे तबहूं न ई भइले, खुश ई भरती मा। राम जाने कौन गति, होइह... Read more
clicks 136 View   Vote 0 Like   4:28pm 16 Dec 2015 #
Blogger: Brijesh Neeraj
पास न उम्मीद कोई रह गयी उम्र भी बस आह बनकर बह गई रात सारी कट गयी बस कैद में आस कोई अब न दिल की रह गयी अब मेरे जिस्म में साँस चलने लगी तू मुझे याद आने की कोशिश न कर जब ये गम की अँधेरी घटा छा गयी बेवजह मुस्कुराने की कोशिश न कर ... Read more
clicks 139 View   Vote 0 Like   6:56am 3 Dec 2015 #
Blogger: Brijesh Neeraj
अब किसी भी बात का जो इल्म होता नहीं खो गए इस वजह से अब तक किनारे कई रंग की पिचकारियों से खेलती है किरन जो छूटते हैं बाग में रंगीन फव्वारे कई कोयलों की कूक गायब ये सबा खुश्क सी साँप, गोजर और बिच्छू घूमते हैं कई ... Read more
clicks 134 View   Vote 0 Like   6:57am 1 Dec 2015 #
Blogger: Brijesh Neeraj
इस तप्त माहौल में भी तुम बांसुरी की तान में मग्न हो यह बांसुरी इस माहौल को ठंडा नहीं करेगी सुनो, शिखरों पर जमी बर्फीली चट्टानों के दरकने की आवाज़ बर्फ पिघल रही है पिघल रही हैं सड़कें पिघल रहे हैं शरीर मोम के पुतले की तरह सैलाब उमड़ रहा है इस सैलाब में बहते जा रहे हैं पेड़, पत्... Read more
clicks 135 View   Vote 0 Like   4:11pm 3 Oct 2015 #
Blogger: Brijesh Neeraj
हम लड़ेंगे साथी, उदास मौसम के लिए हम लड़ेंगे साथी, ग़ुलाम इच्छाओं के लिए हम चुनेंगे साथी, ज़िन्दगी के टुकड़े हथौड़ा अब भी चलता है, उदास निहाई पर हल अब भी चलता हैं चीख़ती धरती पर यह काम हमारा नहीं बनता है, प्रश्न नाचता है प्रश्न के कन्धों पर चढ़कर हम लड़ेंगे साथी क़त्ल... Read more
clicks 137 View   Vote 0 Like   6:17pm 12 Apr 2015 #
Blogger: Brijesh Neeraj
मेरे पास उत्तेजित होने के लिए कुछ भी नहीं है न कोकशास्त्र की किताबें न युद्ध की बात न गद्देदार बिस्तर न टाँगें, न रात चाँदनी कुछ भी नहीं बलात्कार के बाद की आत्मीयता मुझे शोक से भर गयी है मेरी शालीनता – मेरी ज़रूरत है जो अक्सर मुझे नंगा कर गयी है जब कभी जहाँ कहीं जात... Read more
clicks 147 View   Vote 0 Like   8:39am 12 Apr 2015 #
Blogger: Brijesh Neeraj
उसे मालूम है कि शब्दों के पीछे कितने चेहरे नंगे हो चुके हैं और हत्या अब लोगों की रुचि नहीं – आदत बन चुकी है वह किसी गँवार आदमी की ऊब से पैदा हुई थी और एक पढ़े-लिखे आदमी के साथ शहर में चली गयी एक सम्पूर्ण स्त्री होने के पहले ही गर्भाधान कि क्रिया से गुज़रते हुए उसने जान... Read more
clicks 141 View   Vote 0 Like   8:13am 12 Apr 2015 #
Blogger: Brijesh Neeraj
- चण्डीदत्त शुक्ल जरूरी नहीं है कि, आप पढ़ें इस सदी की, यह निहायत अश्लील कविता और एकदम संस्कारित होते हुए भी, देने को विवश हो जाएं हजारों-हजार गालियां। आप, जो कभी भी रंगे हाथ धरे नहीं गए, वेश्यालयों से दबे पांव, मुंह छिपाए हुए निकलते समय, तब क्यों जरूरी है कि आप पढ़ें अश्ली... Read more
clicks 190 View   Vote 0 Like   7:30am 11 Apr 2015 #
Blogger: Brijesh Neeraj
          "अपने प्रेम की परिधि हमें इतनी बढ़ानी चाहिए कि उसमे गाँव आ जाएँ, गाँव से नगर, नगर से प्रान्त, यों हमारे प्रेम का विस्तार सम्पूर्ण संसार तक होना चाहिए।"                                                      -बापू           ''कोई भी जो इतिहास की कुछ जानकारी रखता है वो ये जानता है कि महान सामाजिक ब... Read more
clicks 143 View   Vote 0 Like   4:11pm 9 Apr 2015 #
Blogger: Brijesh Neeraj
        - W. B. Yeats (1865-1939) SWAYED upon the gaudy stern The butt-end of a steering-oar, And saw wherever I could turn A crown upon the shore. And though I would have hushed the crowd, There was no mother's son but said, 'What is the figure in a shroud Upon a gaudy bed?' And after running at the brim Cried out upon that thing beneath --It had such dignity of limb-- By the... Read more
clicks 173 View   Vote 0 Like   4:38pm 19 Nov 2014 #
Blogger: Brijesh Neeraj
        - W. B. Yeats (1865-1939) HY should I blame her that she filled my days With misery, or that she would of late Have taught to ignorant men most violent ways, Or hurled the little streets upon the great, Had they but courage equal to desire? What could have made her peaceful with a mind That nobleness made simple as a fire, With beauty like a tightened bow, a kind That is not ... Read more
clicks 156 View   Vote 0 Like   4:37pm 19 Nov 2014 #
Blogger: Brijesh Neeraj
मेरे इस जीवन की है तू सरस साधना कविता, मेरे तरु की है तू कुसुमित प्रिये कल्पना-ज्ञतिका; मधुमय मेरे जीवन की प्रिय है तू कमल-कामिनी, मेरे कुंज-कुटीर-द्वार की कोमल-चरणगामिनी, नूपुर मधुर बज रहे तेरे, सब श्रृंगार सज रहे तेरे, अलक-सुगन्ध मन्द मलयानिल धीरे-धीरे ढोती, पथश्रान्त त... Read more
clicks 175 View   Vote 0 Like   5:48am 3 Oct 2014 #
Blogger: Brijesh Neeraj
कैकेयी के मोह को पुष्ट करता मंथरा की कुटिल चाटुकारिता का पोषण आसक्ति में कमजोर होते दशरथ फिर विवश हैं मर्यादा के निर्वासन को बल के दंभ में आतुर ताड़का नष्ट करती है जीवन-तप  सुरसा निगलना चाहती है श्रम-साधना एक बार फिर धन-शक्ति के मद में चूर रावण के सिर बढ़ते ही जा रह... Read more
clicks 162 View   Vote 0 Like   6:19am 7 Sep 2014 #
Blogger: Brijesh Neeraj
- शकील बदायूनी              अपनी आज़ादी को हम हरगिज़ मिटा सकते नहीं सर कटा सकते हैं लेकिन सर झुका सकते नहीं हमने सदियों में ये आज़ादी की नेमत पाई है सैंकड़ों कुर्बानियाँ देकर ये दौलत पाई है मुस्कुरा कर खाई हैं सीनों पे अपने गोलियाँ कितने वीरानों से गुज़रे हैं तो जन्नत ... Read more
clicks 168 View   Vote 0 Like   5:02pm 31 Aug 2014 #
Blogger: Brijesh Neeraj
24 अगस्त 2014 को कैफ़ी आज़मी सभागार, निशातगंज, लखनऊ में जनवादी लेखक संघ की लखनऊ इकाई के तत्वाधान में वरिष्ठ लेखक एवं संपादक डॉ गिरीश चन्द्र श्रीवास्तव की अध्यक्षता एवं डॉ संध्या सिंह के कुशल सञ्चालन में कवि बृजेश नीरज की काव्यकृति ‘कोहरा सूरज धूप’ एवं युवा कवि राहुल देव के ... Read more
clicks 168 View   Vote 0 Like   6:42am 29 Aug 2014 #
Blogger: Brijesh Neeraj
अकबर इलाहाबादी हंगामा है क्यूँ बरपा, थोड़ी सी जो पी ली है डाका तो नहीं डाला, चोरी तो नहीं की है ना-तजुर्बाकारी से, वाइज़[1] की ये बातें हैं इस रंग को क्या जाने, पूछो तो कभी पी है उस मय से नहीं मतलब, दिल जिस से है बेगाना मक़सूद[2] है उस मय से, दिल ही में जो खिंचती है वां[3] दि... Read more
clicks 158 View   Vote 0 Like   5:33pm 18 Aug 2014 #
Blogger: Brijesh Neeraj
जैसे हम हैं वैसे ही रहें,  लिये हाथ एक दूसरे का  अतिशय सुख के सागर में बहें। मुदें पलक, केवल देखें उर में,- सुनें सब कथा परिमल-सुर में,  जो चाहें, कहें वे, कहें। वहाँ एक दृष्टि से अशेष प्रणय देख रहा है जग को निर्भय,  दोनों उसकी दृढ़ लहरें सहें। ... Read more
clicks 185 View   Vote 0 Like   2:18pm 9 Aug 2014 #
Blogger: Brijesh Neeraj
      बृजेश नीरज जी की काव्य कृति ‘कोहरा सूरज धूप’ अपने नमानुकूल ही छाप छोड़ती है। जिस प्रकार सर्दी मे कोहरा छाया होता है और सूरज के निकलते ही धीरे-धीरे छटने लगता है और चारों ओर अच्छी धूप फैल जाती है यह धूप जनमानस को राहत पहुँचाती है। उनकी कृति यथार्थ का सम्पूर्ण चित्रण कर... Read more
clicks 178 View   Vote 0 Like   2:25pm 11 Jun 2014 #
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