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Blog: साझी धरती

Blogger: सुरेश स्वप्निल
कबीर  जयंती :  कुछ  दोहे 'साहिब  हम  बौरा  भले  लुटिबे  को  तैयार जा  ऊपर  बिपदा  बड़ी  बांधि  लेहु  घर-बार । कौनो   देव  न  जानि  हम  जो  पूजै  संसार सदगुरु  हमरे  दाहिने  करिहै  बेड़ा  पार ।जुलुम  न  कीजे  काहु  पर जो  ... Read more
clicks 113 View   Vote 0 Like   11:53am 20 Jun 2016 #
Blogger: सुरेश स्वप्निल
क़स्बाई लड़कियां कविताएं लिखती नहीं वे रचती हैं कविताएं जीवन के इर्द-गिर्द तपते चूल्हे पर पकाती हैं बहुत सी छोटी-बड़ी कविताएं क़स्बाई लड़कियां छंद गढ़ते-गढ़ते महाकाव्य हो जाती हैं निर्विकार प्रेम को समर्पित !                     ... Read more
clicks 231 View   Vote 0 Like   12:43am 15 Jan 2016 #
Blogger: सुरेश स्वप्निल
बहुत समय लगता है देहांतरण की प्रक्रिया में एक सम्पूर्ण युग कदाचित्  बहुत कुछ ऊग जाता है नि-गोड़ी भूमि में !मसलन, वे गुलाबजो रोक लेते हैं तुम्हेंइस राह से आते-जाते...सचकिसी ने नहीं रोपा था उन्हेंपता नहींकितनी सारी संवेदनाएं दबा गए थेमिट्टी डालने वाले ... देखो ! तु... Read more
clicks 141 View   Vote 0 Like   2:57pm 7 Jan 2016 #
Blogger: सुरेश स्वप्निल
वे  हाथ जो  तोड़ते  हैं  पत्थर लिखते  हैं सुंदरतम  कविताएं इतिहास  के  माथे और  भविष्य  की  छाती  पर... वे  हाथ किसी  भी  क्षण बदल  सकते  हैं वर्त्तमान  की  दिशा  और  गति रंग-रूप और  आकार  ! कर्णधारों  ! गर्व  मत  कर... Read more
clicks 126 View   Vote 0 Like   1:37pm 29 Oct 2015 #
Blogger: सुरेश स्वप्निल
लो,  वे  आ  गएअपनी  सेनाएं  ले  करवे  जानते  हैंहम  कहां-कहां  छिप  सकते  हैंकौन-कौन  से  हथियार  जुटा  सकते  हैंऔर  लड़  सकते  हैं  कितने  दिनसिर्फ़  यह  नहीं  जानते  वेकि  हम  मर  भी  जाएं  तो  बहुत-कुछ छोड़  जाएंगेआगामी  पी... Read more
clicks 126 View   Vote 0 Like   12:35pm 18 Oct 2015 #
Blogger: सुरेश स्वप्निल
तुम  अगर  चाहो तो  पत्थरों  पर  लिख  दोकविताया  उठा  लो  हाथ  में  उन्हेंहथियार  की  तरह ...चुनाव  तुम्हारा  हैचाहो  तो  बदल  दो  शक्ल-सूरतअपने  समय  कीया  स्वीकार  कर  लोयथास्थिति  कोकायर  राष्ट्रवादियों  की  तरह !बड़ा  आसान  र... Read more
clicks 105 View   Vote 0 Like   3:02pm 17 Oct 2015 #
Blogger: सुरेश स्वप्निल
'तुम  उस  दिन  मारे  जाओगेजबजंगल  तुम्हारे  घर  आएगा !'सैकड़ों  साल  हो  गएइस  बात  को  क़लम  से  और  जंगलआज  तक  नहीं  पहुंचासत्ताधीश  के  घर  तक !लेकिन  कोई  समस्या  नहींजंगल  की  गहराई  में  देर  हैअंधेर  नहींकुछ  दिन  और  इं... Read more
clicks 103 View   Vote 0 Like   1:44pm 16 Oct 2015 #
Blogger: सुरेश स्वप्निल
अरे ! आज  दो  अक्टूबर  हैऔर  बापू आज  राजघाट  पर  नहीं  हैं ...वे  गए  हैं  बसहड़ागांव  की  गलियों  मेंअख़्लाक़  अहमद  का  ख़ून  साफ़  करने !भक्त  जन !अब  बस  भी  करोनौटंकी !                                &... Read more
clicks 106 View   Vote 0 Like   11:27am 2 Oct 2015 #
Blogger: सुरेश स्वप्निल
रख  ले,  भैये !यह  आज़ादी  तू  ही  रख  लेलूट-मार  कर  खाने  वालीसब  का  हक़्क़  दबाने वालीसब  का  गला  काटने  वालीहर  आज़ादी तू  ही  रख  ले !लाल  क़िले  के  ऊपर  चढ़  जाहाथ  उठा  करखुल  कर  चिल्ला जितना  झूठ  बोल  सकता  हैज़ोर-ज़ोर  ... Read more
clicks 116 View   Vote 0 Like   2:12pm 15 Aug 2015 #
Blogger: सुरेश स्वप्निल
न्याय  क्या  होता  है  ?कहां  मिलता  है  ?किस  क़ीमत  परकिसकी  क़ीमत  पर  मिलता  हैन्याय  ?कटे  हुए  वृक्षों  से  पूछोपूछो  गौरैयों  से,  कौव्वों  से शिकार  होते  हिरणों  से  पूछोपूछो  सड़क  पर  सोने  वालेकुत्तों  की  मौत  मारे ... Read more
clicks 123 View   Vote 0 Like   11:43am 8 May 2015 #
Blogger: सुरेश स्वप्निल
धरती  थर-थर  कांप  रही  हैमनुष्य  के  भय  से और  मनुष्यप्रकृति  के  प्रकोप  सेहर्क्युलिस  के  कंधे  झुक  गए   हैंबोझ  सेबार-बार  पांव  फिसल  जाता  हैउस  बूढ़े  देवता  काऔर  मुश्किल  यह  हैकोई  नया  देवता पैदा  ही  नहीं  हु... Read more
clicks 128 View   Vote 0 Like   11:01am 7 May 2015 #
Blogger: सुरेश स्वप्निल
आज  फिरआत्म-हत्या  करेंगे  कुछ  किसानज़हर  पी  करफांसी  लगा  करया  सदमे  से...सरकार  फिर  घोषणाएं  करेगीभारी-भरकम  मुआवज़े  कीअख़बार  फिर  ख़बर  छापेंगेआत्म-हत्याओं  की  बढ़ती  संख्या  कीऔर  फिर  मेरे-जैसे  कविगालियां-उलाहने  देंगे  स... Read more
clicks 145 View   Vote 0 Like   10:02am 11 Apr 2015 #
Blogger: सुरेश स्वप्निल
रोज़-रोज़हवाएं  बदल  रही  हैंदुनियादुनिया  कोतुम  कुछ  मत  करना  तुम  मत  बदलनाबैठे  रहना  चुपचाप घर  मेंहाथ  पर  हाथ  धरे इस  उम्मीद  में  किहवाएं  आएं और  बदल  दें  घर  की  रंगततुम्हारी  इच्छा  अनुरूप  !न,  कोई  ज़रूरत  नहीं  ... Read more
clicks 124 View   Vote 0 Like   6:16am 18 Feb 2015 #
Blogger: सुरेश स्वप्निल
सांप  फिर  आ  गए  हैंबिलों  के  बाहरसही  बात  तो  यह  है  किहर  सांप  विषहीन / दंतहीन  भी  नहीं  होताऔर  न  ही  डरपोक  भीकभी  आना  करैत  के  दांव  मेंछोड़ेगा  नहीं  तुम्हेंदौड़ा-दौड़ा  कर  डंसेगा  तुम्हें  !सवाल  यह  भी  हैकि  ह... Read more
clicks 226 View   Vote 0 Like   1:50pm 12 Jan 2015 #
Blogger: सुरेश स्वप्निल
विदूषक  को  मार डालोवह  सबसे  बड़ा  ख़तरा  हैतुम्हारे  धर्म  के लिएविदूषक  को  मारना  ही  होगावह  आवाज़  उठाएगातुम्हारी  निरंकुश  सत्ता  के  विरुद्धविदूषक  को  कम  मत  आंकनावही  लाएगा  तुम्हारा  मृत्यु-संदेशअपने  नए-नए  कारनामों ... Read more
clicks 143 View   Vote 0 Like   3:55pm 8 Jan 2015 #
Blogger: सुरेश स्वप्निल
किसी  भ्रम  में  मत  रहनाजहांपनाह  !यह   वह  जनता  नहीं  हैजो  स्मृति-दोष  का  शिकार  थीऔर  भूल  जाती  थी  हर  बारशासकों  के  अत्याचारऔर  भ्रष्टाचारइसके  पासतुम्हारे  सारे  कुकर्मों  काहिसाब  है  !  यह  जनता किसी  और  ही  ... Read more
clicks 180 View   Vote 0 Like   7:55am 2 Dec 2014 #
Blogger: सुरेश स्वप्निल
फ़राओ  जब  मरेगातबदफ़नाए  जाएंगे  उसके  साथउसके  सारे  विश्वस्त  अनुचरउसका  सिपहसालार  भीउसके  विशाल  पिरामिड  में  !अपनी  बारी  की  प्रतीक्षा  करो,भक्त-जन  !एक  महान  फ़राओ  के  साथएक  ही  क़ब्र  में  सोने  का  सुखकिसी  और  देश ... Read more
clicks 170 View   Vote 0 Like   11:43am 1 Dec 2014 #
Blogger: सुरेश स्वप्निल
भ्रम  कहां  टूटते  हैंइस  देश  में  ?एक  भ्रम  टूटता  लगता  हैतो  और  सौ  नए  भ्रमपैदा  कर  दिए  जाते  हैंसमाज  के  हर  छोर  सेप्रकट  हो  जाते  हैंभ्रमों  के  समर्थकभीड़  बढ़ती  चली  जाती  हैहर  भगवा, हर  हरे  रंग  के  लिबास&nbs... Read more
clicks 162 View   Vote 0 Like   11:46am 20 Nov 2014 #
Blogger: सुरेश स्वप्निल
सभ्यताऔर  शिष्टाचार  के  विपरीतकहना  पड़  सकता  हैबहुत-कुछआज  मुझेकुछ  अ-सांस्कृतिक और  अ-श्लील  शब्द संभवतः,  उधार  लेकर अपने  शत्रुओं  की  भाषा  सेशस्त्र  भी  उठाने  पड़  सकते  हैंशायद ...हिंस्र  पशुओं  के  समक्षशब्द  असफल  हो  ... Read more
clicks 145 View   Vote 0 Like   11:11am 18 Nov 2014 #
Blogger: सुरेश स्वप्निल
बबूल  हो  जाना  हीश्रेष्ठ  विकल्प  हैलकड़हारों  के  देश  मेंतन  की  सुरक्षा और  मन  मेंअनधिकृत  प्रवेश   रोकने  के  लिए ...अस्मिता  बनाए  रखने  के  लिएबेहतर  हैअलोकप्रिय  हो  जाना !                          &n... Read more
clicks 203 View   Vote 0 Like   9:22am 8 Nov 2014 #
Blogger: सुरेश स्वप्निल
असंभव  हैसमुद्र  की  तलहटी  कोभेद  करअंतरिक्ष  में  छलांग  लगानाऔर  अपनी  मुट्ठी  मेंचांद-तारे  क़ैद  कर  लानासंसार  की  नवीनतम  तकनीकऔर  सर्व-सक्षम  मशीनोंऔर  सबसे  शक्तिशालीमनुष्य  के  लिएयहां  तक  किकवि  के  मनऔर  कल्पनाशक्... Read more
clicks 206 View   Vote 0 Like   9:23am 7 Nov 2014 #
Blogger: सुरेश स्वप्निल
हरसिंगार : एक ठीक   नहीं मन  को  हरसिंगारबना  लेनासारी  संवेदनाएंझर  जाती  हैंधीरे-धीरेऔर  तुम्हेंपता  भी  नहींचलता  कभी  !हरसिंगार: दो  क्या  फ़ायदा हरसिंगार  होने  से अब  यहांलोग  अबदुआ  मांगने  भीनहीं  आते कोई  आंचलनहीं  फैलाता&... Read more
clicks 217 View   Vote 0 Like   9:24am 6 Nov 2014 #
Blogger: सुरेश स्वप्निल
क्यों  लगता  है  तुम्हें कि  मैंनहीं  जानता  गुलाबों  केरंग  के  बारे  मेंकि  मुझे  नहीं  पताहरित  चम्पा  की  गंधऔर  केवड़े  केकांटों  के  बारे  में  ?मैंमौलिश्री  के  फूलों  कीमाला  पहनता  थागले  में  और  पलाशऔर  अमृताश  के&nb... Read more
clicks 197 View   Vote 0 Like   1:49am 5 Nov 2014 #
Blogger: सुरेश स्वप्निल
अंधियारे  नेफिर  फैलायाउजियारे  परअपना  जादूज़हर  भरा  है  नभ  के  मन  में रात  अभी  भी  काली  हैदीपक  तले  अंधेरा  छाया यह  कैसी  दीवाली  है  ?धरती  के बेटों  ने  चाहाअंबर  के तारे  तोड़ें, परहाथ  लगे  माटी  के  दीपकक़िस्मत  उ... Read more
clicks 185 View   Vote 0 Like   9:51am 23 Oct 2014 #
Blogger: सुरेश स्वप्निल
वही  हुआजिसकी  आशंका  थीएक-एक  कर क़ैद  में  डाल  दिए  गएसारे  शब्द  !विद्रोही  शब्दों  कोढूंढ-ढूंढ  करले  आया  गया  चौराहे  परऔर  गोली  मार  दी  गई....सरे-आम  !वे  नहीं  जानतेरक्त-बीज  होते  हैं  शब्दधरा  पर  गिरे  रक्त  की  हर&nbs... Read more
clicks 161 View   Vote 0 Like   9:33am 16 Oct 2014 #
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