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Blog: Pratibha Verma

Blogger: Pratibha Verma
कैसे शुभकामनाएं दूँ तुमको इस गड्तंत्र दिवस की बोलो कोई है वज़ह हमारा भारत आज भी तो वहीं है जहाँ कल था जाके देखो उन गाँव में जहाँ आज भी बिजली की ज़गह दिया जलता है उन मिट्टी की दीवारों से आज भी बारिश में पानी अन्दर आता है तब अपने तन को ढकने के बजाय वो आज भी अपने जानवरों ... Read more
clicks 166 View   Vote 0 Like   11:59am 26 Jan 2013 #
Blogger: Pratibha Verma
आज तुमसे कुछ कहना और कुछ सुनना चाहती हूँ,फिर से तुम्हें पलकों के साए में रखना चाहती हूँ।सदियों से इंतज़ार था तुम्हारा,अब आये हो तो पहलु में ठहरो भी ज़रा।कुछ कहो और कुछ सुनो तो ज़रा,हवाओं का अंदाज़ भी कुछ बदला - बदला सा है,कुछ तुम्हारी ही तरह खफा - खफा सा है।गर शिकायत है ... Read more
clicks 171 View   Vote 0 Like   4:30pm 18 Jan 2013 #
Blogger: Pratibha Verma
रिश्तों की ये अजब सी सौगात है,आज खुद हमें ये एहसास है।क्या ज़माना आ गया है ,कि  कोई रिश्ता न अब खास है।माँ - बाप का नाम जल्द कहीं आता नहीं,हम कहतें हैं आज हमारा उनसे कोई नाता नहीं।कैसा अजब है ये दुनिया का दस्तूर,जो हमें इस दुनिया में लाया वही है अब हमसे दूर।तो चलो आज ये खुद... Read more
clicks 169 View   Vote 0 Like   5:26pm 11 Jan 2013 #
Blogger: Pratibha Verma
आज के  हिंदुस्तान टाइम्स के सर्वे की एक  रिपोर्ट के अनुसार अठत्तर प्रतिशत महिलाएं दिल्ली में  बीते वर्ष सुरछित नहीं थीं ...अब चिंता का विषय ये है कि आने वाला साल इस राजधानी को क्या एक सुरक्षित भाविष्य दे पायेगा ? क्या कोई औरत, बेटी, बहन अपने आपको सुरक्षित महसूस कर पायेग... Read more
clicks 172 View   Vote 0 Like   5:06am 2 Jan 2013 #
Blogger: Pratibha Verma
नया साल आया हैकुछ सपने सुहाने लिएकुछ नगमें सुहाने लिए ...इसलिए नव वर्ष कास्वागत करो दिल कीगहराइयों से ....माना कि एक औरवर्ष बीत गयाबहुत सारी मीठी - कड़वीयादों के साथ ...लेकिन जो आया हैउसे अपना बनाओनई उम्मीदों के साथ ...कुछ सपने सजाओकुछ नगमें गुनगुनाओताकि पूरा कर सको उन्हे... Read more
clicks 181 View   Vote 0 Like   10:12am 1 Jan 2013 #
Blogger: Pratibha Verma
एक कशिश रह गईहर दिल में  बाकीहर दिल में था एक तूफांहर दिल में थी एक आसकि एक दिन वो उठ खड़ी होगीऔर लेगी बदला अपने गुनहगारों सेपर नहीं हुआ कुछ भी ऐसाबुझ गई वो लौ आजअब कौन लेगा बदलाऔर कौन करेगा इन्साफबस छोड़ गई हर दिल मेंएक सवालबेटी को ज़न्म दें या सिर्फ बेटों को??... Read more
clicks 171 View   Vote 0 Like   8:13am 29 Dec 2012 #
Blogger: Pratibha Verma
ऐसा नहीं कि  हर पहलूहमें ख़ुशी दे जाएऐसा भी नहीं कि  हर पहलूहमें गम दे जाएपर कौन सा पहलूकब क्या दे जाएये हम कैसे जान पायेंगेंजब खुद के सीने की साँसों  कोहम महसूस नहीं कर पातेहर धड़कन को हमपहचान नहीं पातेतो हम कैसे पता करेंकि कौन सा इंसान हमेंकब क्या दे जाएगा ।।... Read more
clicks 123 View   Vote 0 Like   6:58pm 25 Dec 2012 #
Blogger: Pratibha Verma
गुज़रे हुए लम्हों को कौन याद रखता है,बीत गया जो पल उसका किसको एहसास होता है।चार दिनों की है ये ज़िन्दगी, जिसमें हर कोई ख़ुशी तलाशता है।मिल गई तो अच्छा न मिलीतो दूजी राह पकड़ता है,जहाँ उसे ये नहीं पता कि खुशियाँ मिलेंगी भी या नहीं पर फिर भी हर बार वो अपनी किस्मत अजमाता ह... Read more
clicks 168 View   Vote 0 Like   4:05pm 18 Dec 2012 #
Blogger: Pratibha Verma
इन्सान की फितरत है बदलना ,वक्त का काम है चलना।राह में हमें साथी तो कई मिलतें हैं ,पर हर कोई हमसफ़र नहीं बनता ।ये ज़िन्दगी है इसका तो काम है चलते रहना,फिर इंसान की  फितरत भी तो है हमेशा बदलते रहना ।।... Read more
clicks 158 View   Vote 0 Like   4:51pm 16 Dec 2012 #
Blogger: Pratibha Verma
ये किस तरह याद आ रहे होहमें इस कदर क्यों तड़पा रहे होक्या कसूर है मेराजो मेरे ख्वाबों में आकेमेरी नींद उड़ा रहे हो।ये किस तरह ....ख्वाबों में न सही लेकिनएक बार सामने तो आ जाओ ज़रासामने आके मुस्कुरा दो ज़राये किस तरह ...क्यों दूर रहकर मुझसेमुझे तड़पा  रहे होआखिर इस तरह क्य... Read more
clicks 155 View   Vote 0 Like   6:37pm 14 Dec 2012 #
Blogger: Pratibha Verma
लोग कहते हैं कि गुनाह मत करो ज़िन्दगी में ,ये खुदा सजा देता है सबको!तो हमने सोंचा की चलो एक गुनाह हम भी तो करके देखें,इसी बहाने उस खुदा के दर्शन  तो मिलेंगें!!... Read more
clicks 181 View   Vote 0 Like   7:40pm 13 Dec 2012 #
Blogger: Pratibha Verma
मुबारक हो ये पल और ये साथ आपको,खुशियों से भरा ये संसार आपको ।ख्वाहिशों की महफ़िल सजा कर रखना ,छोटी - छोटी बातों का गम न करना ।जी लो ज़िन्दगी की हर खुशी साथ मिलके,कि खुदा भी झुक जाए तुम्हारे सामने हंस के।ये पल ये खुशियाँ समेट लो दामन में अपने ,की फिर कभी अँधेरा न हो आँगन में ।... Read more
clicks 188 View   Vote 0 Like   7:03am 11 Dec 2012 #
Blogger: Pratibha Verma
दोस्ती का हर फ़र्ज़ अदा किया हमने,आपकी बेरुखी को भी अपना कहा हमने ।यूँ तो ज़माने ने बहुत कुछ सिखाया हमको ,पर आपने अपनी वफ़ा के लिए बहुत तरसाया हमको ।हमारी क्या मजाल थी की हम तुमसे दूर जाने की सोंचते ,पर तुमने तो अपने ही गले से लगा के रुलाया हमको ।।... Read more
clicks 180 View   Vote 0 Like   1:40pm 9 Dec 2012 #
Blogger: Pratibha Verma
समन्दर  से अलग होकर  बूँद,समन्दर से बेवफाई करती है ,लेकिन अपने आस्तित्व को एक नया जन्म देती है !बूँद फिर से समन्दर में समाकर,समन्दर से अपनी  वफ़ा निभाती है,और अपने आस्तित्व को एक बार फिर से मिटाती  है !!... Read more
clicks 184 View   Vote 0 Like   6:57am 7 Dec 2012 #
Blogger: Pratibha Verma
लम्हा - लम्हा कर ज़िंदगी बीतती जा रही है ,ऐसा क्यों  लग रहा है मुझे जैसे की सारे लम्हे,मेरे हांथों से फिसलते जा रहे हैं ।इन लम्हों को जितनी तेजी से पकड़ना चाहा हमने ,फिर क्यों उतनी ही तेजी से मेरा साथ छोड़ते जा रहे हैं ।ज़िन्दगी रेत  की तरह हो चुकी है अब तो,जितनी तेज़ से पक... Read more
clicks 158 View   Vote 0 Like   11:48am 6 Sep 2012 #
Blogger: Pratibha Verma
कभी उन्हें हम पर गुस्सा आता थाकभी हमें उन पर गुस्सा आता था,जब एक्स्ट्रा क्लासेस में वो हमें बार -बार बुलाते थे ,और हम क्लासरूम से बंक करके भाग जाते थे ।फिर अगले दिन वो हम पर चिल्लाते थे ,और हम बेशरम सर झुकाकर माफ़ी भी मांगते थे।कभी उनका कहना सुनते थे तो कभी ,अपनी मनमानी करत... Read more
clicks 187 View   Vote 0 Like   6:21am 5 Sep 2011 #
Blogger: Pratibha Verma
दोस्ती एक ऐसा रिश्ता है एक ऐसा नाता है ,जिसने एक दिल को दुसरे दिल से बंधा है|दोस्ती का ये रिश्ता हर रिश्ते से ऊपर है,ये तो एक ऐसा पवित्र बंधन है,जो हर रिश्ते को पीछे छोड़ आया है,आज भी हमें याद है वो बचपन के दिन,जब हम साथ खेलते थे और लड़ते भी थे,लेकिन आज भी हम उसी पवित्रता से एक द... Read more
clicks 149 View   Vote 0 Like   7:35am 6 Aug 2011 #
Blogger: Pratibha Verma
हमें न जाने कहाँ से परिंदों से प्यार हो गयासुबह बाज़ार जाकर हम कुछ परिंदे ले आयेकैद कर के रखा था हमने उन्हें किकहीं हमें छोड़ कर शायद वो उड़ न जाएँहर सुबह मैं उन्हें दाना खिलातीउनके साथ मैं घंटों बितातीवो फड़्फड़ाते थे उस बंद पिंजड़े मेंशायद उड़ना चाहते थे खुले असमान में प... Read more
clicks 165 View   Vote 0 Like   6:39pm 21 Jan 2011 #
Blogger: Pratibha Verma
हम ज़िन्दगी से ऐसे क्यों हार जाते हैं,एक ही पल में सारा जहाँ झोड़ जातें हैं|क्या चाहत है हमारी ज़िन्दगी से ,हम उस पल वो भी भूल जातें हैं|लोग कहतें हैं ये तो खेल है कुदरत का ,ये तो किस्मत में लिखा है उस खुदा ने|अगर कहीं खुदा है इस जहाँ में,तो वो इतना बड़ा दर्द हमें कैसे दे पाता... Read more
clicks 155 View   Vote 0 Like   7:06pm 25 Dec 2010 #
Blogger: Pratibha Verma
हम कश्ती में बैठे थे किनारे कि तलाश में ,पर लहरों में कोई तो खलल थी ,कोई तो तूफां था समंदर में|हम समझना चाहते थे कि समन्दर,इतना बेचैन क्योँ है आज |हम कुछ भी समझ पाते ,किनारा तलाश कर पाते |उससे पहले ही हम अपनी कश्ती डूबा बैठे||... Read more
clicks 165 View   Vote 0 Like   10:30am 21 Dec 2010 #
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