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"KUMAR SINGH'S BLOG" : View Blog Posts
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"KUMAR SINGH'S BLOG"

" बरसात का महीना "याद आती हैं बहुत हमे ,जब भी आता हैं,बरसात का महीना,,डूब जाते हैं सभी ,यादों के सागर में,,जब भी आता हैं,यह बरसात का महीना,,पानी में आग लगा कर,जला देती हैं दिलों कों ,,सजनी  भी झूम जाती हैं,अपने साजन के याद में,,जब भी आता हैं,यह सावन का महीना,,आगों कों जला कर दिलों मे...
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  January 18, 2013, 11:39 am
"सलाम हैं तुम कों ये वीर सपूतों"       तेरे कुर्बानी कों सलाम हैं,हम-सभी के तरफ से ,ये हिन्दुस्तान के वीर सपूतों,तेरे जज्बें पे,नाज हैं हम-सबको,ये हिन्दुस्तान के वीर सपूतों,यह तुम्हारे माँ के प्रति,  प्रेम हैं,जों हँसतें-हँसतें,कटा दिये अपने,सिस कों भी ,मातृभूमि के लिये ,तुम...
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  January 10, 2013, 5:40 pm
"सून ले खुदा' ये खुदा कहाँ चली गई ,तेरी खुदाई इस जग से ,,क्या तुम्हें भी नहीं हैं ,पता ?जब तुने बनाया इस जग कों ,तों क्यों छोड़ दिया हैं हम इंसानों ,यु बेदर्द बना के ,अपने ही आज हों रहें हैं,अपनों से ही घायल ,बरे बेदर्दी से ,फिर भी तुम कों नहीं हो,रहा हैं दर्द,अरे मेरे खुदा,अब तों जा...
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  January 9, 2013, 1:18 pm
"मैं और मेरा दुःख"जिंदगी ही अजीब होतीं हैं,कभी रुलाती हैं  हमे ,तों कभी हँसाती हैं,पर यहीं हें जीने की ,कला भी सिखलाती,जों भी मिला मुझें जीवन में,बना लिया उन्हें मैंने अपना, चाहें वों सुख या दुःख हों,पर ना जाने क्यों ,दुःख ही आया अधिक मेरे जीवन में,और मैं झेलता रहा बस , उसे हँ...
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  January 7, 2013, 5:13 pm
एक संदेश यही है मेरा ,इस नव वर्ष मै सभी को ,,जीवो आप इस जग  मै खुब, एक जिन्दा इन्सान बन के ,,पर ना मारो आप किसी को,जग में मुर्दा इंसान समझ के ,,जिन्दा वहीं हैं जग में,जो मरते हैं अपने धर्म -इमान पे ,,मुर्दा  तो वे सब हैं यहाँ,जो खुद जिते हैं बे-इमान से ,,जो लोगों गरीब हैं दिल से यहाँ, व...
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  January 2, 2013, 7:03 pm
हार गईं दामिनीं हें माँ आज तेरे आंगन में,और तू देखतीं ही रह गई एक नवीन इतिहास बनके,,जिन आखोँ ने देखा था एक सपना की ,जाऊँगी घर से अपने बाबुल के ,,संग एक नव-जीवन के सपन लिये,वों आखें आज बंद हो गई,,अधूरें हसिन सपन कों अपने संग लिये ,,,जिस बाबुल ने सजायें थे सपने कई की,करूँगा बिदाई ड...
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  December 30, 2012, 1:12 pm
जग जननी जब घर आवत है,तब ही जागत यह जग सारा ,,ना जनति जिस घर जननी ,वों घर हो जाता मरू-शमसान,,पर ना जाने क्या हो गया है इस जग को ,जों जननी को ही खावन पे तुला है,,अरे मूर्ख वाशी क्या तुम बच पावोगे,जों मार दोगे इस जगत धारणी को ,,कहतें हो जिसको माँ -बहन- बहू -बेटी ,उसके ही आस्मिता को तुम बे...
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  December 25, 2012, 3:44 pm
माँ -बहन - बहू-बेटी  कह के ,हम पुकारे जिस नारी जाति को,,उसकी इज्जत लुट जाती है ,समाज के ठेकेदारों के नगर में,,जिसनें तोरा मान नारी का ,वों तो सारे नपुंसक है,,पर जों बन बैठें है ठेकेदार देश के ,वे क्यों सो रहें है अपने-अपने कब्रों,,रो देती है आँखे हर किसी का ,दर्दे-हाल जान उस नारी क...
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  December 24, 2012, 5:15 pm
जों माँगते हैं भीख ,उनकी तो कुछ मजबुरी हैं,,जलन भूख का मिटाना ही ,उनके लिये जरूरी हैं,,पर क्या करे उन इंसानों का ,जिनकी नहीं कोई मजबुरी हैं,,भरे होते हैं उनके पेट खूब,फिर भी नहीं मिटती हैं चाहत कि भूख ,,यहीं तो हम इंसानों कि कमजोरी हैं,जलना ही हमारी सबसे बरी मजबुरी हैं,,पर आज ख...
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  December 18, 2012, 1:38 pm
 राहें जुदा हो जाती हैं,मंजिले भी बिछर जाती हैं,,दुनिया के भाग दौर मैं,जिंदगी अक्सर गुम सी हो जाती हैं,, जों मिलते हैं राहों मैं,वहीं अपने हो जातें हैं,,और जों थे अपने कभी,वे सब हम से बेगानें  हो जातें हैं,,आज-कल समझ में आता नहीँ,किसे कहें हम इंसान यहां,,जों थे कल परिंदे इंसान...
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  December 16, 2012, 8:05 pm
 जल ही जीवन हैं,जीवन ही जल हैं,,बिन जल यह जग सून हैं,,,जहाँ -जहाँ से यह जल निकला,जीवन वहीं हैं चारोँ और बिखरा,,जितना आदर दिया हैं,इस जल ने हम-सब को,,उतना आदर नहीं हैं दिया,हम-सब ने इस को,,फिर भी यह दे रहा हैं,हम-सब को नव जीवन,,पर यह होगा आखिर कब-तक,,,अगर फिर भी ना समझ सके,हम-सब इस कों,,तो ...
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  December 16, 2012, 1:18 pm
राजनेता किसे कहतें हैं,यहीँ सवाल सभी मुझे करतें हैं,,मैं कहता हु उन सभी से कि ,जों जिते हैं घोटालों पे उन्हें ही आज राजनेता कहते हैं,,किसी ने पूछा मुझे से कि क्यों करते हैं घोटाले वे ,क्या नहीं हैं उनकें पास कुछ कहने को अपना ,,मैं कहता हु उन से कि एक-दमा सही कहाँ आपने ,अगर होता...
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  December 4, 2012, 1:31 pm
यह सहमे सहमे आँखे हमे याद दिलातीं हैं,अपनों के साथ हुयें जज्तियो का ऐहसास कराती हैं,,हम भी गुजरेंगे जिंदगी के इस पवार से ,इसी का हमे बारम-बार ऐहसास करती हैं,,कैसे छोर देते हैं हम अपनों को इस तरह बैबस ,कि हमे अपने बेसर्मी का ऐहसास भी नहीँ होता ,,खुद को दिखाने हैं हम सबसे सभ्य ...
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  December 2, 2012, 4:51 pm
तिल-तिल के यह जीते हैं,और हर खुशीयों को सीते,,खुद को मुसीबतों मैं डाल कर,                                                                                                  दूसरों के हँसी को ये सिलते हैं,,होते हैं यह बरे रंग-बिरंगें ,केवल जीवन को ही ये को सिचते है फूलों पे ये घूम-घूम कर,कलियों मैं नव जीवन को ये सिच...
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  November 30, 2012, 3:02 pm
किसे से कहूँ मैं अपना दर्द ,नहीँ हैं मुझे कोइ सुननेवाला,,मैं बयाँ जब भी करता हू,तो वे लोंग मुझ पे हँसते हैं,,उनके हँसी से दर्द जितना नहीं होता,कहीं जादा होता दर्द उनके बेरूखी से,,सोते हैं वे आलीशान कब्ररो मैं,ना जाने कितने एसी तले,,और हम सो जाते खुले आसमान मैं,सभी के नजरो के ...
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  November 29, 2012, 12:47 pm
क्या मिला तुझे अपनो से ही लरके,ना हि कोई तेरा आपना और नी तेरा जमीन,,मारा था तुने मेरे अपनो को,आके मेरे ही जमीन पे,,फिर भी ह्म ने दिया तुझे, सारे रास्से तेरे न्याय के ,,खुद ह्म रोते रहे आपनो के याद मै,पर तुझे देते रहे हम मौके तेरे खुशी के,,और फिर जब मिला तुझे न्याय तेरे कर्मो का,त...
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  November 29, 2012, 12:40 pm
मर रहें हैं लाखो माँ तेरे अपने चाहने वाले ,पर तू हैं की सुनती ही नही पुकार करुण अपनों का ,,जो चढाते माँ भेट तुम्हें हजारों -करोरों का,तो तुभी दे देती हैं उन्हें का साथ मान कर अपना सदा ,,तेरे आशीष को पाके वे मचाते हैं कोहराम हमसब पे ,और तू भी हैं की बंद कर लेती हैं अपनी आखें हमस...
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  November 29, 2012, 12:38 pm
हम भारतीय हैं पुजारी आत्मबल का ,हार हम नही मानते हैं कभी,,मरते भी हैं तो भी जीने की तमन्ना रखते हैं हम ,क्यों की हम भारतीय हैं पुजारी आत्मबल का ,,यह इतिहास गवाह हैं की ,हम लरते नही हैं कुमार किसी से,,पर अगर किसी ने कभी छेरा हैं हमे ,तो हमने भी नहीँ छोरा हैं उसे ,,मरने की कूबत रखत...
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  November 29, 2012, 12:36 pm
जीवन जीने का हैं अपना ही एक मजा,पर आज -कल लोंग जीते ही हैं कहा ,,उठे नहीं सुबह की लग जाते हैं अपने चिताओं मैं,और फिर रात होते ही खोजते नीद के आगोस मैं,,युहीं चलती रहतीं हैं इनकी जिंदगी,और फिर थके सोजते हैं मौत के आगोस मैं,,एक बार भी खुद को खोजने की कोशीश नही करते हैं,बस यूहीं अ...
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  November 29, 2012, 12:34 pm
मानवता से बरा कोइ धर्म नहीँ,ना ही मौत से बरा कोइ सच्च ,,जो भागो गे भाई मौत से,तो कभी ना बच पावोगे,,निभावो गे जो सच्चा मानव धर्म ,तभी ही इस जग मैं जि पवोगे,,कबीर ने कहाँ था कभी एक बोल ,मानवता ही हैं इस जग का सच्चा जोग,,तभी तो मरते थे राम-रहीम रोज ,के लिए वास्ते इस सच्चे जोग,,अंत कहुग...
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  November 29, 2012, 12:28 pm
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