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Blog: "KUMAR SINGH'S BLOG"

Blogger: KUMAR SINGH
" बरसात का महीना "याद आती हैं बहुत हमे ,जब भी आता हैं,बरसात का महीना,,डूब जाते हैं सभी ,यादों के सागर में,,जब भी आता हैं,यह बरसात का महीना,,पानी में आग लगा कर,जला देती हैं दिलों कों ,,सजनी  भी झूम जाती हैं,अपने साजन के याद में,,जब भी आता हैं,यह सावन का महीना,,आगों कों जला कर दिलों मे... Read more
clicks 245 View   Vote 0 Like   6:09am 18 Jan 2013 #
Blogger: KUMAR SINGH
"सलाम हैं तुम कों ये वीर सपूतों"       तेरे कुर्बानी कों सलाम हैं,हम-सभी के तरफ से ,ये हिन्दुस्तान के वीर सपूतों,तेरे जज्बें पे,नाज हैं हम-सबको,ये हिन्दुस्तान के वीर सपूतों,यह तुम्हारे माँ के प्रति,  प्रेम हैं,जों हँसतें-हँसतें,कटा दिये अपने,सिस कों भी ,मातृभूमि के लिये ,तुम... Read more
clicks 222 View   Vote 0 Like   12:10pm 10 Jan 2013 #
Blogger: KUMAR SINGH
"सून ले खुदा' ये खुदा कहाँ चली गई ,तेरी खुदाई इस जग से ,,क्या तुम्हें भी नहीं हैं ,पता ?जब तुने बनाया इस जग कों ,तों क्यों छोड़ दिया हैं हम इंसानों ,यु बेदर्द बना के ,अपने ही आज हों रहें हैं,अपनों से ही घायल ,बरे बेदर्दी से ,फिर भी तुम कों नहीं हो,रहा हैं दर्द,अरे मेरे खुदा,अब तों जा... Read more
clicks 255 View   Vote 0 Like   7:48am 9 Jan 2013 #
Blogger: KUMAR SINGH
"मैं और मेरा दुःख"जिंदगी ही अजीब होतीं हैं,कभी रुलाती हैं  हमे ,तों कभी हँसाती हैं,पर यहीं हें जीने की ,कला भी सिखलाती,जों भी मिला मुझें जीवन में,बना लिया उन्हें मैंने अपना, चाहें वों सुख या दुःख हों,पर ना जाने क्यों ,दुःख ही आया अधिक मेरे जीवन में,और मैं झेलता रहा बस , उसे हँ... Read more
clicks 209 View   Vote 0 Like   11:43am 7 Jan 2013 #
Blogger: KUMAR SINGH
एक संदेश यही है मेरा ,इस नव वर्ष मै सभी को ,,जीवो आप इस जग  मै खुब, एक जिन्दा इन्सान बन के ,,पर ना मारो आप किसी को,जग में मुर्दा इंसान समझ के ,,जिन्दा वहीं हैं जग में,जो मरते हैं अपने धर्म -इमान पे ,,मुर्दा  तो वे सब हैं यहाँ,जो खुद जिते हैं बे-इमान से ,,जो लोगों गरीब हैं दिल से यहाँ, व... Read more
clicks 195 View   Vote 0 Like   1:33pm 2 Jan 2013 #
Blogger: KUMAR SINGH
हार गईं दामिनीं हें माँ आज तेरे आंगन में,और तू देखतीं ही रह गई एक नवीन इतिहास बनके,,जिन आखोँ ने देखा था एक सपना की ,जाऊँगी घर से अपने बाबुल के ,,संग एक नव-जीवन के सपन लिये,वों आखें आज बंद हो गई,,अधूरें हसिन सपन कों अपने संग लिये ,,,जिस बाबुल ने सजायें थे सपने कई की,करूँगा बिदाई ड... Read more
clicks 228 View   Vote 0 Like   7:42am 30 Dec 2012 #
Blogger: KUMAR SINGH
जग जननी जब घर आवत है,तब ही जागत यह जग सारा ,,ना जनति जिस घर जननी ,वों घर हो जाता मरू-शमसान,,पर ना जाने क्या हो गया है इस जग को ,जों जननी को ही खावन पे तुला है,,अरे मूर्ख वाशी क्या तुम बच पावोगे,जों मार दोगे इस जगत धारणी को ,,कहतें हो जिसको माँ -बहन- बहू -बेटी ,उसके ही आस्मिता को तुम बे... Read more
clicks 188 View   Vote 0 Like   10:14am 25 Dec 2012 #
Blogger: KUMAR SINGH
माँ -बहन - बहू-बेटी  कह के ,हम पुकारे जिस नारी जाति को,,उसकी इज्जत लुट जाती है ,समाज के ठेकेदारों के नगर में,,जिसनें तोरा मान नारी का ,वों तो सारे नपुंसक है,,पर जों बन बैठें है ठेकेदार देश के ,वे क्यों सो रहें है अपने-अपने कब्रों,,रो देती है आँखे हर किसी का ,दर्दे-हाल जान उस नारी क... Read more
clicks 229 View   Vote 0 Like   11:45am 24 Dec 2012 #
Blogger: KUMAR SINGH
जों माँगते हैं भीख ,उनकी तो कुछ मजबुरी हैं,,जलन भूख का मिटाना ही ,उनके लिये जरूरी हैं,,पर क्या करे उन इंसानों का ,जिनकी नहीं कोई मजबुरी हैं,,भरे होते हैं उनके पेट खूब,फिर भी नहीं मिटती हैं चाहत कि भूख ,,यहीं तो हम इंसानों कि कमजोरी हैं,जलना ही हमारी सबसे बरी मजबुरी हैं,,पर आज ख... Read more
clicks 228 View   Vote 0 Like   8:08am 18 Dec 2012 #
Blogger: KUMAR SINGH
 राहें जुदा हो जाती हैं,मंजिले भी बिछर जाती हैं,,दुनिया के भाग दौर मैं,जिंदगी अक्सर गुम सी हो जाती हैं,, जों मिलते हैं राहों मैं,वहीं अपने हो जातें हैं,,और जों थे अपने कभी,वे सब हम से बेगानें  हो जातें हैं,,आज-कल समझ में आता नहीँ,किसे कहें हम इंसान यहां,,जों थे कल परिंदे इंसान... Read more
clicks 219 View   Vote 0 Like   2:35pm 16 Dec 2012 #
Blogger: KUMAR SINGH
 जल ही जीवन हैं,जीवन ही जल हैं,,बिन जल यह जग सून हैं,,,जहाँ -जहाँ से यह जल निकला,जीवन वहीं हैं चारोँ और बिखरा,,जितना आदर दिया हैं,इस जल ने हम-सब को,,उतना आदर नहीं हैं दिया,हम-सब ने इस को,,फिर भी यह दे रहा हैं,हम-सब को नव जीवन,,पर यह होगा आखिर कब-तक,,,अगर फिर भी ना समझ सके,हम-सब इस कों,,तो ... Read more
clicks 218 View   Vote 0 Like   7:48am 16 Dec 2012 #
Blogger: KUMAR SINGH
राजनेता किसे कहतें हैं,यहीँ सवाल सभी मुझे करतें हैं,,मैं कहता हु उन सभी से कि ,जों जिते हैं घोटालों पे उन्हें ही आज राजनेता कहते हैं,,किसी ने पूछा मुझे से कि क्यों करते हैं घोटाले वे ,क्या नहीं हैं उनकें पास कुछ कहने को अपना ,,मैं कहता हु उन से कि एक-दमा सही कहाँ आपने ,अगर होता... Read more
clicks 213 View   Vote 0 Like   8:01am 4 Dec 2012 #
Blogger: KUMAR SINGH
यह सहमे सहमे आँखे हमे याद दिलातीं हैं,अपनों के साथ हुयें जज्तियो का ऐहसास कराती हैं,,हम भी गुजरेंगे जिंदगी के इस पवार से ,इसी का हमे बारम-बार ऐहसास करती हैं,,कैसे छोर देते हैं हम अपनों को इस तरह बैबस ,कि हमे अपने बेसर्मी का ऐहसास भी नहीँ होता ,,खुद को दिखाने हैं हम सबसे सभ्य ... Read more
clicks 235 View   Vote 0 Like   11:21am 2 Dec 2012 #
Blogger: KUMAR SINGH
तिल-तिल के यह जीते हैं,और हर खुशीयों को सीते,,खुद को मुसीबतों मैं डाल कर,                                                                                                  दूसरों के हँसी को ये सिलते हैं,,होते हैं यह बरे रंग-बिरंगें ,केवल जीवन को ही ये को सिचते है फूलों पे ये घूम-घूम कर,कलियों मैं नव जीवन को ये सिच... Read more
clicks 237 View   Vote 0 Like   9:32am 30 Nov 2012 #
Blogger: KUMAR SINGH
किसे से कहूँ मैं अपना दर्द ,नहीँ हैं मुझे कोइ सुननेवाला,,मैं बयाँ जब भी करता हू,तो वे लोंग मुझ पे हँसते हैं,,उनके हँसी से दर्द जितना नहीं होता,कहीं जादा होता दर्द उनके बेरूखी से,,सोते हैं वे आलीशान कब्ररो मैं,ना जाने कितने एसी तले,,और हम सो जाते खुले आसमान मैं,सभी के नजरो के ... Read more
clicks 196 View   Vote 0 Like   7:17am 29 Nov 2012 #
Blogger: KUMAR SINGH
क्या मिला तुझे अपनो से ही लरके,ना हि कोई तेरा आपना और नी तेरा जमीन,,मारा था तुने मेरे अपनो को,आके मेरे ही जमीन पे,,फिर भी ह्म ने दिया तुझे, सारे रास्से तेरे न्याय के ,,खुद ह्म रोते रहे आपनो के याद मै,पर तुझे देते रहे हम मौके तेरे खुशी के,,और फिर जब मिला तुझे न्याय तेरे कर्मो का,त... Read more
clicks 185 View   Vote 0 Like   7:10am 29 Nov 2012 #
Blogger: KUMAR SINGH
मर रहें हैं लाखो माँ तेरे अपने चाहने वाले ,पर तू हैं की सुनती ही नही पुकार करुण अपनों का ,,जो चढाते माँ भेट तुम्हें हजारों -करोरों का,तो तुभी दे देती हैं उन्हें का साथ मान कर अपना सदा ,,तेरे आशीष को पाके वे मचाते हैं कोहराम हमसब पे ,और तू भी हैं की बंद कर लेती हैं अपनी आखें हमस... Read more
clicks 193 View   Vote 0 Like   7:08am 29 Nov 2012 #
Blogger: KUMAR SINGH
हम भारतीय हैं पुजारी आत्मबल का ,हार हम नही मानते हैं कभी,,मरते भी हैं तो भी जीने की तमन्ना रखते हैं हम ,क्यों की हम भारतीय हैं पुजारी आत्मबल का ,,यह इतिहास गवाह हैं की ,हम लरते नही हैं कुमार किसी से,,पर अगर किसी ने कभी छेरा हैं हमे ,तो हमने भी नहीँ छोरा हैं उसे ,,मरने की कूबत रखत... Read more
clicks 207 View   Vote 0 Like   7:06am 29 Nov 2012 #
Blogger: KUMAR SINGH
जीवन जीने का हैं अपना ही एक मजा,पर आज -कल लोंग जीते ही हैं कहा ,,उठे नहीं सुबह की लग जाते हैं अपने चिताओं मैं,और फिर रात होते ही खोजते नीद के आगोस मैं,,युहीं चलती रहतीं हैं इनकी जिंदगी,और फिर थके सोजते हैं मौत के आगोस मैं,,एक बार भी खुद को खोजने की कोशीश नही करते हैं,बस यूहीं अ... Read more
clicks 238 View   Vote 0 Like   7:04am 29 Nov 2012 #
Blogger: KUMAR SINGH
मानवता से बरा कोइ धर्म नहीँ,ना ही मौत से बरा कोइ सच्च ,,जो भागो गे भाई मौत से,तो कभी ना बच पावोगे,,निभावो गे जो सच्चा मानव धर्म ,तभी ही इस जग मैं जि पवोगे,,कबीर ने कहाँ था कभी एक बोल ,मानवता ही हैं इस जग का सच्चा जोग,,तभी तो मरते थे राम-रहीम रोज ,के लिए वास्ते इस सच्चे जोग,,अंत कहुग... Read more
clicks 248 View   Vote 0 Like   6:58am 29 Nov 2012 #
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