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मनवा लेखक हम तो सेवक

रहा तनहा हूँ बहुत कोई बड़ी बात नहीं रंज किस किस का करूं कोई नई बात नहीं हाल ख़ुद कहता हूँ खुद सुनता हूँ खुद सहता हूँ खुदा से जि...
मनवा लेखक हम तो सेवक...
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  May 7, 2015, 7:40 pm
हर वक़्त सोचता हूँ टीस कहीं होती हैअश्क बहते नहीं पर सांसे सर्द होती हैवक़्त कटता नहीं बस काटता ही रहता हैप्यार का ऐसा अक्स प्रीत होती है मोहब्बत कितनी करो काफी नहीं होती इस गुणा भाग में सांसे बाकी नहीं होतीउम्र घटती तो जुड़ता है आशियाना रात को जिस्म सोता है मगर बाह...
मनवा लेखक हम तो सेवक...
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  May 24, 2013, 3:34 pm
ये जो नजरें मिली ये लगा दिल गया एक तू जो मिला ये जहाँ मिल गयाहर छुअन में बफा है हवा में महक, हर तरफ तू ही तू में मेरा 'मैं' गया कल तलक ये हवा ये फिजा और थी रातें छोटी थी काली  अदा और थी अब जुदा है समां रातें रंगीन है, जैसे इसको  तेरा आसरा मिल गया जाने कितने मिले जाने कितने गए भूल ...
मनवा लेखक हम तो सेवक...
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  May 24, 2013, 3:29 pm
नादानों की बस्ती में कुछ राज नहीं होता हर फूल में खुशबू का एहसास नहीं होता  ये पूरी होगी कैसे जन्न्त की चाह आखिरजब सजदा ए खुदा में बिश्वास नहीं होता हम जान गवा बैठे की वो मेरा महताब हैसुर्ख गालों पर मेरी खातिर शवाव हैना जानना ही चाहा न जान ही हम पायेमेरी जान के चे...
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  May 24, 2013, 2:45 pm
इस समाज की खातिर बस हमें शोर मचाना आता हैनई सदी का नया हो सूरज दिल बहलाना आता है    जिम्मेदारी किस पर डालें ये चर्चा है हर बस्ती में भाड़ न भोंडे चना अकेला ये समझाना आता है मेरे जिन्दा होने का सबब पूछो नाकब लगे लब से ये लब पूछो नाजवां थी आग कब तक न पूछो फायदा क्याये श...
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  May 24, 2013, 2:22 pm
"बेशर्म जमाना " कहता है ये बेटी किसकी कौन है ये जज्बाती है, नादाँ है ये गूंगी तो नहीं पर मौन है ये ये बातें सुनती रिश्तों की तो कांप उठे कर नैन सजलकिस्से पूछू कोई बतला दो पहचानो रुदन हाँ कौन है ये कोरा काजल बन बही है ये श्रंगार नहीं बन पाई है जीवन में अश्रुधार सिवा कोई राग नह...
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Tag :delhi rape capital
  April 23, 2013, 11:10 am
** मेरे बच्चो को रुलाना छोड़ दे, मै हिंदुस्तान हू मुझको सताना छोड़ दे । मेरे हाथो में बरदान है, अभिशाप भी है; मेरी मोह्हब्बत को आजमाना छोड़ दे। । मेरे कश्मीर से तेरी कराची दूर कब थी; बस मेरी बस्ती के घर जलाना छोड़ दे । आह सुन बच्चो की तेरे, कितने चूल्हे बंद है; सीख कुछ, उधार का बारू...
मनवा लेखक हम तो सेवक...
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  January 12, 2013, 12:42 pm
** मेरे बच्चो को रुलाना छोड़ दे, मै हिंदुस्तान हू मुझको सताना छोड़ दे । मेरे हाथो में बरदान है, अभिशाप भी है; मेरी मोह्हब्बत को आजमाना छोड़ दे। । मेरे कश्मीर से तेरी कराची दूर कब थी; बस मेरी बस्ती के घर जलाना छोड़ दे । आह सुन बच्चो की तेरे, कितने चूल्हे बंद है; सीख कुछ, उधार का बारू...
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  January 12, 2013, 12:42 pm
उठ खड़े हुए है हम, नए साल के स्वागत में ।कोई अभाव न रह जाये, नब आगत के स्वागत में ।।आंखे मलता सूरज आया फैले किरणों सी खुशियाँ ।जीवन तरंग बज उठे गगन , नब आगत की आहट में ।।उज्जवल भविष्य के आने पर अधरों पर मुस्काने तैरे ।ढांढस बंध पाए मानव को, दिए जले गर्त अंधियारों में ।।इस जीव...
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  January 1, 2013, 11:01 am
उठ खड़े हुए है हम, नए साल के स्वागत में ।कोई अभाव न रह जाये, नब आगत के स्वागत में ।।आंखे मलता सूरज आया फैले किरणों सी खुशियाँ ।जीवन तरंग बज उठे गगन , नब आगत की आहट में ।।उज्जवल भविष्य के आने पर अधरों पर मुस्काने तैरे ।ढांढस बंध पाए मानव को, दिए जले गर्त अंधियारों में ।।इस जीव...
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Tag :happy new year to all
  January 1, 2013, 11:01 am
ये 'दामिनी' ये  'अंजलि' ये किसकी है बेटियाँ जब प्यार ममता चाहिए, किसकी शिकार ये बेटियां ।नादान ये या हम सभी जो देखकर अनजान है हम मूंद कर आँखे  समझते बच गई सब  बेटियां ।हिंसक पशु पर हम दया करते नहीं फिर आज क्योँ इन घूमते नरपशुओं से आओ बचा लें बेटियाँ ।जब रोज चिंगारी उठे क...
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Tag :damini
  December 29, 2012, 11:31 am
ये 'दामिनी' ये  'अंजलि' ये किसकी है बेटियाँ जब प्यार ममता चाहिए, किसकी शिकार ये बेटियां ।नादान ये या हम सभी जो देखकर अनजान है हम मूंद कर आँखे  समझते बच गई सब  बेटियां ।हिंसक पशु पर हम दया करते नहीं फिर आज क्योँ इन घूमते नरपशुओं से आओ बचा लें बेटियाँ ।जब रोज चिंगारी उठे...
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Tag :stri
  December 29, 2012, 11:31 am
बाजार में आया हू मैं भी बिक ही जाऊंगा ,मै कितना भी ना कहू आखिर संभल न पाउँगा ।ये देश ये दुनिया सभी दौलत के आगे 'ढेर' है , इस रात के अँधेरे में कब तक दिया दिखाऊंगा ।।नादान आँखों में मेरे सपने अगर मर भी गए ,इंसान ही सब मर रहे तो इनको क्या बचाऊंगा ।।तेरा दर्द मेरा दर्द है फिर भी ख...
मनवा लेखक हम तो सेवक...
Tag :
  December 29, 2012, 10:41 am
बाजार में आया हू मैं भी बिक ही जाऊंगा ,मै कितना भी ना कहू आखिर संभल न पाउँगा ।ये देश ये दुनिया सभी दौलत के आगे 'ढेर' है , इस रात के अँधेरे में कब तक दिया दिखाऊंगा ।।नादान आँखों में मेरे सपने अगर मर भी गए ,इंसान ही सब मर रहे तो इनको क्या बचाऊंगा ।।तेरा दर्द मेरा दर्द है फिर भी ख...
मनवा लेखक हम तो सेवक...
Tag :brashtachar shishtachar hai
  December 29, 2012, 10:41 am
कुदरत के कानून को तोडा मत इंसान ।तुम दोगे तो ही मिले जीवन का सम्मान ।।ये धरती तेरी नहीं बस कब्ज़ा कुछ रोज । क्यूँ खोया है ख्वाब  में रख ले कुछ तो होश ।।जंगल धरती ये नदी देते जीवन दान ।क्यूँ उजाड़ कर भूमि का करता है अपमान ।।धरती माँ ने पाल कर कर दिया पूरा फ़र्ज़ ।दूध नहीं तो ...
मनवा लेखक हम तो सेवक...
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  December 28, 2012, 11:23 am
कुदरत के कानून को तोडा मत इंसान ।तुम दोगे तो ही मिले जीवन का सम्मान ।।ये धरती तेरी नहीं बस कब्ज़ा कुछ रोज । क्यूँ खोया है ख्वाब  में रख ले कुछ तो होश ।।जंगल धरती ये नदी देते जीवन दान ।क्यूँ उजाड़ कर भूमि का करता है अपमान ।।धरती माँ ने पाल कर कर दिया पूरा फ़र्ज़ ।दूध नहीं तो गोद...
मनवा लेखक हम तो सेवक...
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  December 28, 2012, 11:23 am
कूड़े के ढेर पर नंगे पैर, चल रहा मगर फिर भी बचपन। गंदे ये हाथ पर मन तो साफ, जल रहा मगर फिर भी बचपन ।। छोटा ये पेट रोटी को देख मन की दीवारों से टकराए,पैसे से भूख न पैसा भूख हाथों में झोला पकडाए ,आंखे ढूंढे कोई अपनापन ।बेटा कहता दिल में रहता बालों में हाथ फिराता कोई,कोई नहलाता लो...
मनवा लेखक हम तो सेवक...
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  December 28, 2012, 11:08 am
कूड़े के ढेर पर नंगे पैर, चल रहा मगर फिर भी बचपन। गंदे ये हाथ पर मन तो साफ, जल रहा मगर फिर भी बचपन ।। छोटा ये पेट रोटी को देख मन की दीवारों से टकराए,पैसे से भूख न पैसा भूख हाथों में झोला पकडाए ,आंखे ढूंढे कोई अपनापन ।बेटा कहता दिल में रहता बालों में हाथ फिराता कोई,कोई नहलाता लो...
मनवा लेखक हम तो सेवक...
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  December 28, 2012, 11:08 am
क्या कहूं दुखी अंतर्मन है ,जैसे खुशियों से अनबन है ।जिसने सीखा चलना मुझसे, उस लाल से मेरी अनबन है ।।मै कहाँ मांगता रात और दिन बस पास बैठ मेरे पल छिन,क्या जिन्दा हो मेरे बाबू जी बस यही पूछ ले तू हर दिन ,कुछ दिन से न आया देखन है  ।।मैं देख रहा उसका बचपन कैसे जागे उन बातों को ,क...
मनवा लेखक हम तो सेवक...
Tag :
  December 28, 2012, 10:50 am
क्या कहूं दुखी अंतर्मन है ,जैसे खुशियों से अनबन है ।जिसने सीखा चलना मुझसे, उस लाल से मेरी अनबन है ।।मै कहाँ मांगता रात और दिन बस पास बैठ मेरे पल छिन,क्या जिन्दा हो मेरे बाबू जी बस यही पूछ ले तू हर दिन ,कुछ दिन से न आया देखन है  ।।मैं देख रहा उसका बचपन कैसे जागे उन बातों को ,कह...
मनवा लेखक हम तो सेवक...
Tag :
  December 28, 2012, 10:50 am
आ बापस तू आजा, ओ बचपन दीवाने, न तोडू मै तुझसे ये रिश्ते पुराने ।तू साथी है तब का जो कुछ था वो छोटा, न आता समझ में जो दुनिया में होता, तू ही मुझको समझा तू ही मुझको जाने, दवे पाव से बैठा करता सिरहाने ।मेरे होंठ सुबके हुआ दुःख तुझे भी, मै संभला तेरे संग तेरे संग गिरा भी,  दिखाता था ...
मनवा लेखक हम तो सेवक...
Tag :yaden
  December 25, 2012, 12:33 pm

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मनवा लेखक हम तो सेवक...
Tag :
  January 1, 1970, 5:30 am
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