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Blog: दृष्टिपात

Blogger: arun kumar jha
संक्रमणकाल से गुजरता देश..... Read more
clicks 67 View   Vote 0 Like   5:46pm 23 Dec 2017 #
Blogger: arun kumar jha
मार्च २०१६ यहकोईनहींजानताकि धरती परमनुष्यकैसेआया।इसकेपूर्वजकौनथे।वैज्ञानिकइसकाठीक-ठीकअनुमानअभीनहींलगापायेहैं।भविष्यमेंयहसंभवहोसकताहै, परन्तुवर्तमानमेंयहज्ञातनहींहै।यदिमिथककोमानेतोआदमऔरहौव्वाकीसंतान  हैं हमसभीमनुष्य। लेकिनसवालउठताह... Read more
clicks 44 View   Vote 0 Like   10:01am 27 Apr 2016 #
Blogger: arun kumar jha
दृष्टिपात का 120वां  अंक आपका अपूरी दुनिया में कोई एक आदमी नहीं होगा, जो पूरी तरह चैन और शांति से रहता हो। सभी बेचैनी और अशांति में जी रहे हैं। सब की समस्या अपनी तरह की इकलौती होती है। समस्या एक हो तो समाधन ढूंढा जा सकता है पर समस्याएँ अनन्त हैं। समस्या खुद लोग पैदा कर... Read more
clicks 44 View   Vote 0 Like   7:04pm 23 Jan 2016 #
Blogger: arun kumar jha
 दृष्टिपात अक्टूबर 2015 पूरी दुनिया असहिष्णुता का दंश झेल रही है। भारत इसका कोई अपवाद नहीं है। असहिष्णुता का रूप, आकार, नाम और प्रकार भिन्न-भिन्न हो सकता है। समय और काल के हिसाब से इसका प्रभाव कम और बेशी दिखता है। रंगभेद, नस्लभेद, वर्णभेद आदि इसके कई कारक हैं।मनुष्य जब ... Read more
clicks 34 View   Vote 0 Like   4:38pm 16 Dec 2015 #
Blogger: arun kumar jha
रांची दृष्टिपात जुलाई पावस अंक समय साक्षी हैआदि काल से देखा है हमनेकैसे-कैसे अत्याचार हुए हैं हम परअहंकारों की विजय की खातिरव्यवस्था के क्रूर हाथों हमहमेशा छले गये हैं।समय साक्षी हैदेवासुर संग्राम हो यामहाभारत का संग्राम,लंका विजय हो या आधुनिक विश्व के अलग-अलग क... Read more
clicks 49 View   Vote 0 Like   5:11am 5 Sep 2015 #
Blogger: arun kumar jha
June 2015समय साक्षी हैसमय को समझोसमय के साथ चलोअपने हठ को छोड़ोपरिवर्तन करो समाज का निर्माण करो नये समाज काविकास के लिए देश का।समय साक्षी हैसमय को समझोसमय की भाषा को समझोसमय के इशारे को समझोपरिवर्तन करो समाज कानिर्माण करो नये समाज काविकास के लिए देश का।समय साक्षी हैहठ ... Read more
clicks 111 View   Vote 0 Like   6:08pm 4 Aug 2015 #
Blogger: arun kumar jha
समय साक्षी हैसमय किसी को नहीं छोड़ता।समय को झुठलाने का हम जितना भी प्रयास करेंवह धोखा ही होगा।हमेशा हम धोखा खाते हैंदूसरे को धोखा देते हैं।धोखा देने के लिएनाम तो कुछ भी हो सकता है- लोकतंत्र,राजतंत्र,जनतंत्र,लाठी तंत्र,धर्मतंत्र... आदिइत्यादि।समय साक्षी है-चलता तो लाठ... Read more
clicks 100 View   Vote 0 Like   5:36pm 28 Jun 2015 #
Blogger: arun kumar jha
अप्रैल 2015 अंक जिस व्यक्ति के आचार.विचार में, आचरण में, व्यवहार में, दैनिक जीवन में स्वच्छता का भाव नहीं हो वह पूर्ण सभ्य नहीं हो सकता। सभ्य व्यक्ति से ही सभ्य समाज का निर्माण संभव है। जिस समाज और देश के जेहन में जितनी सफाई के भाव होंगे वह उतना ही सभ्य समाज कहलाने का अधिक... Read more
clicks 122 View   Vote 0 Like   5:00pm 25 Jun 2015 #
Blogger: arun kumar jha
drishtipat march 2015नैतिकता और आत्मानुशासन ही व्यक्ति, समाज और राष्ट्र को समृद्धशाली और स्वाभिमानी बनाते हैं। इन तत्त्वों के बिना समाज और राष्ट्र का जीवन अधूरा है। लेकिन हम मनुष्य नेकी की जगह अहंकार में जीने के आदि हो गये हैं। दिन-रात अनैतिक कार्य करने के लिए अपने को झोंक दिया है... Read more
clicks 93 View   Vote 0 Like   6:16pm 4 May 2015 #
Blogger: arun kumar jha
फ़रवरी 2015इतिहास गवाह है कि विदेशी आक्रमणकारी अपने-अपने तरीके से भारत को हजारों वर्षों तक लूटते-खसोटते रहे। भारतीय सभ्यता और संस्कृति को दुष्ट आतताइयों ने नष्ट-भ्रष्ट करने के लिए कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी। लेकिन देश के वीर सपूतों ने- उनके सारे नापाक मनसूबों पर पानी फेर दिय... Read more
clicks 88 View   Vote 0 Like   2:17pm 18 Mar 2015 #
Blogger: arun kumar jha
जनवरी 2015 अंक अब भारत के बेटे को भारत की मिट्टी की सोंधी महक अपनी ओर खिंचती हुई दिखाई नहीं देती। अब कोई सपूत भारत माता पर न्योछावर होने को तत्पर नहीं दिखाई नहीं देता! शायद ही अब कोई माता-पिता यह चाहता है कि उसका बच्चा भारत माता की सेवा में अपनी भारत-भूमि पर कार्य करे। अब अ... Read more
clicks 111 View   Vote 0 Like   3:48pm 19 Feb 2015 #
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दृष्टिपात दिसम्बर -2014हम अपने जीवन के कभी भी पूरा सच बोलना या जानना नहीं चाहते। दुनिया का गजब दस्तूर है। अब देखिए न भला, यह सिð हो चुका है कि सूर्य अपनी धुरी  पर स्थिर रहता है, पृथ्वी घूमती है, लेकिन हम हैं कि मानने के लिए तैयार ही नहीं। जिसके कारण समाज में कई प्रकार की भ्रा... Read more
clicks 111 View   Vote 0 Like   5:22pm 20 Jan 2015 #
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दृष्टिपात नवम्बर 14 पूरी दुनिया बेचैन है। गरीब से अमीर तक सभी बेचैनी में जी रहे हैं। हमारे मन और प्राण पर भूख का भूत सवार है। भूख पेट तक ही सीमित होती तो कोई बात होती। भूख असीमित है। धन  की भूख, सुन्दर तन की भूख, मन की भूख, ओहदे की भूख, अहंकार की भूख, दुनिया को गुलाम बना लेन... Read more
clicks 98 View   Vote 0 Like   3:22pm 20 Dec 2014 #
Blogger: arun kumar jha
अक्टूबर 2014 अंक हर देश और हर काल में मनुष्य की बुनियादी जरूरतें रोटी, कपड़ा और मकान ही हैं। इन्हीं जरूरतों की पूर्ति के लिए मनुष्य अपनी मनुष्यता को धीरे-धीरे छोड़ता जा रहा है। जैसे ही रोटी, कपड़ा और मकान की जरूरतें पूरी होती हैं दिमाग में खुराफात का जन्म शुरू हो जाता है... Read more
clicks 116 View   Vote 0 Like   10:15am 15 Oct 2014 #
Blogger: arun kumar jha
सितम्बर 2014 शायद पूरी दुनिया भ्रष्टाचार से त्रास्त है। सुबह के अखबार हों या मीडिया रिपोर्ट- भ्रष्टाचार की महामारी के समाचार सुर्खियों में होते हैं। पियून से लेकर जज तक के भ्रष्टचार में लिप्त होने की खबरें आये दिन हमें सुनने को मिलती हैं। क्या हो रहा यह सब! समझ में से प... Read more
clicks 91 View   Vote 0 Like   6:27pm 14 Oct 2014 #
Blogger: arun kumar jha
दृष्टिपात को सारस्वत साहित्य संकल्प सम्मान हिन्दी दिवस के अवसर पर राउरकेला की साहित्यिक संस्था 1966 में स्थापित ‘संकल्प संस्थान ने राँची की बहुआयामी पत्रिका दृष्टिपात और उसके संपादक अरुण कुमार झा को सारस्वत संकल्प शिरोमणि सम्मान प्रदान किया गया है। 14 सितम्बर को ... Read more
clicks 104 View   Vote 0 Like   3:52pm 15 Sep 2014 #
Blogger: arun kumar jha
पूरी दुनिया दहशत में है। डरा हुआ व्यक्ति हर वह काम कर जाता है, सभ्य समाज जिसके लिए इजाजत नहीं देता। डरे हुए व्यक्ति से समाज की भलाई की अपेक्षा नहीं की जा सकती। डरे हुए व्यक्ति देशभक्त कदापि नहीं हो सकता। अग्स्त 2014 हम यहाँ भारत की बात कर रहे हैं। भारतीय समाज के लोग डरे ... Read more
clicks 112 View   Vote 0 Like   1:58pm 9 Sep 2014 #
Blogger: arun kumar jha
दृष्टिपात का जुलाई 2014 अंक अब पावस रितु में झूले बहुत ही कम लोग डालते  हैं। झूले कौन लोग डालते है? यह प्रश्न सबसेअहम है। झूले पहले भी झूले जाते थे, अब भी झूले जाते हैं लेकिन झूले कौन से, यह भी अहम है। कदंब के झूले, मेले वाले झूले, या बड़े लोगों के घर के झूले। अब झूले के मायन... Read more
clicks 110 View   Vote 0 Like   5:41pm 12 Aug 2014 #
Blogger: arun kumar jha
अब पावस द्दतु में झूले बहुत ही कम लोग डालते  हैं। झूले कौन लोग डालते है? यह प्रश्न सबसेअहम है। झूले पहले भी झूले जाते थे, अब भी झूले जाते हैं लेकिन झूले कौन से, यह भी अहम है। कदंब के झूले, मेले वाले झूले, या बड़े लोगों के घर के झूले। अब झूले के मायने और मिजाज भी बदल गये हैं। ग... Read more
clicks 99 View   Vote 0 Like   4:17pm 12 Aug 2014 #
Blogger: arun kumar jha
दृष्टिपात जून 2014अब भी भारतीय समाज दब्बू, पिछलग्गू और धर्मभीरू है। इसी के कारण निर्मल बाबा, आसाराम बापू न जाने कितने उनके जैसे लोगों के दुष्प्रभाव में आकर अपना सर्वस्व गँवा बैठता है। भारतीय समाज में अनपढ़-गँवार को कौन कहें, पढ़े-लिखे लोग भी भेड़ चाल चल रहे हैं। समाज के प... Read more
clicks 111 View   Vote 0 Like   3:25pm 16 Jul 2014 #
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मई 2014सोलहवीं लोकसभा चुनाव संपन्न हुआ। परिणाम भी आ गये। सोलहवीं लोकसभा चुनाव ऐतिहासिक रहा। ऐतिहासिक इस मायने में कि किसी एक आदमी ने अपने दम पर पार्टी को ऐतिहासिक जीत दिलाई। यह विलक्षण प्रतिभा का द्योतक है। इस चुनाव में जिस प्रकार से एक व्यक्ति ने जाति, भाई-भतीजावाद, वर... Read more
clicks 104 View   Vote 0 Like   6:15pm 24 May 2014 #
Blogger: arun kumar jha
दृष्टिपात अप्रैल 2014प्रकृति ने हमें सब कुछ  दिया है। लेकिन कुछ धूर्त लोगों ने लालच और स्वार्थ के वशीभूत होकर प्रकृति के सारे उपादानों को अपने पक्ष में करने के लिए तरह-तरह के उपाय ढूंढ लिए- अधिसंख्यक को गुलाम बनाने के उपायों की व्यवस्था के तहत। उन्हीं में से एक है ... Read more
clicks 107 View   Vote 0 Like   3:49pm 10 May 2014 #
Blogger: arun kumar jha
प्रकृतिबड़ीउदारहै।लेकिनमनुष्यउतनाउदारनहींबनपाया।ऐसानहींहैकिमनुष्यजन्मसेअनुदारहै।ऐसाहोभीनहींसकता, क्योंकि  प्रकृतिनेमनुष्यकोअपनीतरहहीरचाहै।परन्तुज्ञानएवं बुद्धि कीअधिकता केकारणमनुष्यप्रकृतिकोहरदमधेखादेनेकीकोशिश में संलग्नरहताहै।प्... Read more
clicks 102 View   Vote 0 Like   2:08pm 21 Mar 2014 #
Blogger: arun kumar jha
फ़रवरी 2014 अंक    इसधरतीपरजितनेभीजीव-जन्तुहैं, सभीकाजीवनसंघर्षमयहै।यहकहनाकिमनुष्यहीसंघर्षकरताहै, ऐसानहींहै।हाँ, संघर्षकेविषयऔररास्तेजरूरअलग-अलगहैं।मनुष्यसबसेपहलेपेटकेलिएसंघर्षकरताहै, फिरकपड़ाऔरमकानकेलिए, उसकेबादनानाप्रकारकेसंघषोंकासिलसिलाचलतार... Read more
clicks 125 View   Vote 0 Like   1:24pm 7 Mar 2014 #
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