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Blog: मन मंथन

Blogger: रचना त्यागी
हे प्रभु, तू है कहाँ ?क्या कहीं तू सो गया ?सुन ले,जब तेरे जगत में पीड़ितों को न्याय होगा ,अब तभी मंदिर में तेरे नाम का दीया जलेगा !!आत्मा के चीथड़ेकर देने वाले वहशियों को,उन दरिंदों को कुकर्मों कायथोचित फल मिलेगा ,अब तभी मंदिर में तेरे नाम का दीया जलेगा !!अन्नदाता देश का जो,स... Read more
clicks 218 View   Vote 0 Like   5:09pm 6 Jan 2013 #कविता ( समाज )
Blogger: रचना त्यागी
आओ दरिन्दोंमुझे लूटो, खसोटो, नोचो !गौर से देखोएक नारी हूँ मैंब्रहा द्वारा तैयारतुम्हारे ऐशो आराम का सामान,तुम्हारी ऐय्याशी का सामान,तुम्हारी पाश्विक, घिनौनी औऱ नरपैशाचिकजरूरतों को पूरा करने का सामान !चिथडे चिथडे कर दोवो झूठी अस्मिताजो बचपन से मैंसाथ लेकर जी रही थी !... Read more
clicks 198 View   Vote 0 Like   5:09pm 6 Jan 2013 #कविता ( समाज )
Blogger: रचना त्यागी
       इतना भी मत तरसाओ       कि कमी तुम्हारी न खले      बहुत देख ली राह तुम्हारी       आ जाओ चुपचाप चले !              कहीं बरस के हद कर देते               कहीं की तुम लेते न खबर               कहीं ठिकाना बन जाता और                कहीं पकड़ते भी न डगर               बहुत हो गयी मनमानी अब               आओ के सूखा टले !... Read more
clicks 207 View   Vote 0 Like   9:31am 6 Jul 2012 #कविता ( प्रकृति )
Blogger: रचना त्यागी
        देखी उड़ान उसकी तो    क्यों दिल दहल  गये     अनगिनत हैं तीर क्यूँ      छाती पे चल गये !    थे मुरीद जाने किस     ज़माने से उनके     तेवर जो देखे उनके     तो हम और मचल गये !    है हौसला या है जुनूं    क्यों फेर में पड़िए    ये देखिये के पत्थरों के    दिल पिघल गये !    जाने कशिश थी कैस... Read more
clicks 191 View   Vote 0 Like   4:24pm 8 Jun 2012 #
Blogger: रचना त्यागी
     वादों की जिस केंचुली को उतार फेंका तुमने       वही केंचुली अब मेरी खाल है !      ... Read more
clicks 202 View   Vote 0 Like   7:11pm 6 Jun 2012 #
Blogger: रचना त्यागी
 तोड़ते, चरमराते रहो तुम मुझे ....     मैं भी पारा हूँ , फिर से जुड़ जाउंगी   ... Read more
clicks 147 View   Vote 0 Like   7:06pm 6 Jun 2012 #
Blogger: रचना त्यागी
    स्वर्ण पॉलिश वाले एक भव्य सिंहासन पर एक ओर को झुके हुए बाबा बैठे हैं ! दाहिना हाथ कुर्सी के डिजाइनर हत्थे पर रखा हुआ है और बायाँ हाथ कभी अपने श्रद्धालु भक्तों को उनके प्रश्नों के उत्तर समझाने में भाव-भंगिमाएं बनाने में  व्यस्त होता है , तो कभी अपने सिर पर अपने बचे-खुचे ... Read more
clicks 211 View   Vote 0 Like   11:32am 5 May 2012 #लेख
clicks 239 View   Vote 0 Like   12:00am 1 Jan 1970 #
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