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फ़लसफ़े

आज शाम बहुत सी मुस्कराहटेंइधर उधर से उड़ती हुईंमेरी बगिया में आईं।कुछ हंसती चहकती  अंदर आईंकुछ सकुचाती मुस्कराहट थी ,कुछ खामोशकुछ में सहमा सा डर था,कुछ में दिल्लगीपर मुस्कराहटें सब थीं।फूलों,कलियों,पेड़ के दरख्तों ,वो वहां टिकी साईकिल,उधररखा एक छाता एक एक कर सब पर बै...
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Tag :बगिया
  March 7, 2017, 1:48 pm
किसी भी शहर के बारे में शायद ही हममें से किसी को पूरी जानकारी नहीं होती है। और अगर वह शहर दिल्ली हो जिसके परत दर परत खोलते जानते कई ज़माने गुज़र जायेंगे तो आप जितना जानेंग उससे कहीं अधिक अनजान रह जाएंगे।दिल्ली को जानने पहचानने के एक मुहिम चल रही है "डेल्ही वॉक फेस्टिवल "&nbs...
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Tag :Delhi walk Festival
  February 26, 2016, 4:35 pm
बदल गयी है दुनिया कैसे , कैसे अजब नज़ारे हैं आसमान में धुंधले अब तो, दिखते भी सितारे हैं। हर तरफ है धुआं फैला हर तरफ कुछ मैला है हर इंसान को दिखता जब सिर्फ पैसों का थैला है !अभी सड़क बनी नहीं कि पड़ने लगीं दरारें हैं तारकोल जैसा भी हो लालच की खूब मिसालें हैं   पैर त...
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Tag :
  January 29, 2016, 10:42 pm
पुराने कैलेंडर को उतार लगने जा रहा हैअब एक नया कैलेंडर पिछले पर बहुत हिसाब किताब लिखे  हैं कुछ खास काम लिखे हैं। कब कामवाली छुट्टी से वापस आएगी ,कब गैस  जल्दी ख़त्म हो गयी  किस महीने ज़्यादा चली कब किसी के घर दावत है घर की दावत का मेनू क्या है।    किस की अ...
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Tag :
  January 1, 2016, 2:47 pm
एक दिन सवेरे  चाय बनाने रसोई में गयी तो  दो आँखों को  खिड़की  से झांकते हुए   देखा।  हरी आँखों में कौतूहल था और थोड़ा  भय भी। मैं चाय बनाने में लग गयी।   क़ुछ देर बाद देखा  चार आँखें   अंदर ताक रही थीं। याद  आया कुछ दिन पहले एक बिल्ली   को तीन छोटे बच्च...
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Tag :
  September 24, 2015, 3:37 pm
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Tag :
  November 6, 2014, 4:29 pm
कुछ दिनों पहले घर   मिनट की  एक लघु प्रस्तुति की थी। उस पावर पॉइंट प्रस्तुत को वीडियो में रूपांतरित किया पर पार्श  स्वर का  चित्रों  के साथ तालमेल नहीं बैठ पाया. बहरहाल ,स्वच्छता दिवस के सन्दर्भ में , अभी तो इसे यहां पर डाल  दे रही हूँ।  फिर बाद में इसका तालमेल ब...
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Tag :सफाई
  October 2, 2014, 10:53 am
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Tag :video
  September 22, 2014, 8:34 pm
         जीवन का एक अध्याय दूसरे  से कितना भिन्न हो सकता है ,यह कल्पना से भी परे  की बात है। कल जो जीने का तरीका था आज सिर्फ एक स्मृति बन कर रह जाता है ।  कल आफिस और घर  की व्यस्तता सवेरे की चाय को सड़क पर हरी होती ट्रेफिक लाइट पर आगे निकलने की होड़ में भागती हुई ...
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Tag :
  September 21, 2014, 8:14 pm
पेटूनिया चंचल पग दीपशिखा के धरगृह मग वन में आया वसंत।सुलगा फागुन का सूनापनसौंदर्य शिखाओं में अनंत।सौरभ की शीतल ज्वाला से फैला उर-उर में मधुर दाह आया वसंत भर पृथ्वी परस्वर्गिक सुंदरता का प्रवाह।(सुमित्रानन्दान पंत ) वसन्त ऋतु क्या आयी हवा में एक स्निग्धत...
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Tag :
  March 21, 2014, 10:52 pm
जादू की पुड़िया है ,जीवन का यह खेला  जिसको भी देखो वह  आया अकेला  फिर यह साथ दिखता कैसे  यह रेला  लोगों की भीड़ है रिश्तों का एक  मेला !    इस जादू की पुड़िया में  होता कुछ गजब है  आते सब इंसान है जुड़ जाता एक मज़हब है इंसानियत के मतलब हो जाते बेस...
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Tag :जादू की पुड़िया
  March 9, 2014, 10:47 pm
बसंत की दोपहरी कुछ  अलग सी है जब हवा छूकर कहती है  किसी के  साथ की आस हो  दिल  कुछ गुनगुनाए  कभी ठंडी एक बयार ,कभी  गर्म हवा का  झोंका न करार दे, न बेकरारी  ही बने  रहने दे।   पैरों तले घास की नमी और दिल में घुसती हवा के साथ आयी प्यार की गर्मी। करार भी देती ...
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Tag :बसंत
  February 19, 2014, 1:52 pm
बीते साल को मुड़कर देखा , हँसते देखा ,रोते देखामौला के रहम को देखा ,इंसानों  के करम  को  देखा।आपस के मसलों को लेकर  बंटती सांझी ज़मीन को देखापैसे की लालच  के पीछे  लुटती हुई   ज़मीर को देखाहिम्मत  बांधे एक हुजूम को सडकों पर उतरते देखासत्ता के बंद गल...
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Tag :कविता
  December 31, 2013, 4:02 pm
थाईलेंड  ,कम्बोडिया ,वियतनाम और  चीन से घिरे इस देश में शायद सैलानी के तौर पर जाने की बात हमारे ज़हन में न आये ,पर आफिस के काम से मुझे वहां जाने का मौका मिला. दिल्ली से बेंगकोक और फिर वहां से लाओ एरलाईन से पाक्से . बंगकोक से एक छोटे एटीआर जहाज से हम पहुंचे पाक्से .हवाई अड...
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Tag :पाक्से
  December 16, 2013, 7:19 pm
2006  से इस ब्लॉग की शुरुआत हुई थी।हिन्दी ब्लॉग जगत में हरकत होनी तब शुरू ई हुई थी।  कुछ चंद लोग थे ,एक परिवार सा लगता था. नारद मुनि का साथ था अब तो महासागर है, कुछ पुराने अभी भी चले आ रहे है ,बहुत रास्ते में रुक गए , कुछ बेतहाशा दौड़ते जा रहे हैं। मेरा भी यह प्रयास  कभी त...
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  September 3, 2013, 1:43 pm
कुछ दिन पहले एक मौक़ा मिला . इलाहाबाद के एक प्रतिष्ठित स्कूल में भौतिक विज्ञान के शिक्षक पद के लिए इंटरव्यू  था. एक पद कक्षा दस के लिए और एक पद ,कक्षा ११ और 1२ के लए खाली था. साक्षात्कार   के लिए ४ -४  अभ्यर्थी .सभी भौतिक विज्ञान में स्नातकोत्तर थे. अनेक सवाल पूछे गये. शुरुआत ...
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  May 24, 2013, 6:01 pm
कल एक पत्रिका में पढ़ रही थी कि  दुनिया में तीन देशों को छोड़ बाकी जगह पोलियो मुक्त हो गए हैं  .  य़ह तीन देश हैं अफगानिस्तान ,पाकिस्तान  और नाइजीरिया . अपने स्कूल के दिनों की याद आई .हमारे साथ थी तस्नीम थी जिसका पैर  पोलियो ग्रस्त  होने के कारण बंधा रहता था. पहले काफी बच्च...
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Tag :स्टेम सेल
  May 14, 2013, 3:36 pm
इस बार एक हफ्ते  में जो सफ़र किया वह  दिलचस्प था. पांच दिन में ग्वालियार- आगरा -दिल्ली  जाना था और फिर वापस इलाहाबद.पर कुछ छोटी छोटी घटनाएं ऐसी हुईं  जो दिल को छू गईं .पिछले  चिट्ठे में मेट्रो के सुखद अनुभव का ज़िक्र था. एक और दिलचस्प मुलाक़ात हुई आगरा से दिल्ली जाते हुए.आग...
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Tag :आगरा
  May 8, 2013, 1:13 pm
इस बार एक हफ्ते  में जो सफ़र किया वह  दिलचस्प था. पांच दिन में ग्वालियार- आगरा -दिल्ली  जाना था और फिर वापस इलाहाबद.पर कुछ छोटी छोटी घटनाएं ऐसी हुईं  जो दिल को छू गईं .पिछले  चिट्ठे में मेट्रो के सुखद अनुभव का ज़िक्र था. एक और दिलचस्प मुलाक़ात हुई आगरा से दिल्ली जाते हुए.आग...
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Tag :आगरा
  May 8, 2013, 1:13 pm
         अभी कुछ दिन पहले दिल्ली जाना हुआ . राजधानी से पुराना नाता है. नौकरी की शुरुआत वहीं से हुई और कोई १५  साल वहां बिताए हैं .इस बार कई जगह जाना था ,सो मेट्रो का सहारा लिया गया. कितना सरल, कितना आरामदेह साधन है. बाहर भी कुछ देशों में घूमने का मौक़ा मिला है और वहां की मेट्रो या ...
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Tag :गुड़गांव
  May 2, 2013, 10:18 am
            इलाहाबाद में महाकुम्भ के मौके पर होना एक दुआ कबूल होने जैसा है। हर बारह साल में होने वाला यह पर्व  श्रद्धालुओं को खींचकर ले आता है। मकर संक्रान्ति  के दिन से  इस पर्व का आरम्भ होता है और करीब दो महीने तक संगम तट पर अपना विशवास,अपनी आस्था लिए लोग यहाँ रहते हैं, स्ना...
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Tag :इलाहाबाद
  February 16, 2013, 11:50 am
आम आदमी  की  पार्टी बनी है। 'आप' सब उसके सदस्य हैं .जानकर एक आशा जागी है कि  शायद कुछ बदले या फिर आसपास के वातावरण को बदलने की एक शुरुआत तो हुई।वरना हम सब तो सिर्फ दोष देना जानते हैं कुछ करना नहीं। बहस चलती  रहती है कि  अरविन्द केजरीवाल जो कर रहे  हैं उससे स्थिति में  कुछ ...
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Tag :अरविन्द केजरीवाल
  January 5, 2013, 1:19 pm
दीयों की जगमग से चौंधिया जाए जब  आँगन मेराहंस कर बोले प्रतीक्षारत मैं कब से सूनारंग रंगोली, दीप दीवालीहर कोने की सुध बुध ले लेएक दिया हो या हो लाखों  की हो   झिलमिलराह तकती  घर की देहरी बोले  मैं कब से यहींलीपी पुती सफेदी की चादरलक्ष्मी पाँव निहारूं  एकटकलड़ियों की म...
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Tag :दीवाली
  November 1, 2012, 7:20 pm
तितलियों  के पीछे पीछेपेड़ों की छाँव के नीचे मखमली घास के गलीचे हम अपनी मस्ती से सींचे !गुनगुनाते स्वरों की लहरी गदगद हो जाए   दोपहरीमन में लहर उठे  गहरी यह   घड़ी बस रहे  ठहरी  !शारदीय सुबह  की हौली ठंडसब संगिनियों का हो संग तो मन करे बस एक पुकार आपसे  आने का  मनुहार !...
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Tag :
  October 22, 2012, 9:22 pm
उम्मीद की एक किरण सूरज की रोशनी से भी ज्यादा प्रभावी हो सकती है। जीवन को दिशा देने में ,अँधेरे में रास्ता दिखाने में ,या फिर कोई मंजिल को उजागर करने में . नन्हे बच्चों का स्कूल है उम्मीद एक विद्या किरण। यह वो बच्चे हैं जिनके माता पिता की नौकरी हमारे घर में काम काज करना है।...
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Tag :arjun
  September 13, 2012, 3:27 pm
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