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Blog: फ़लसफ़े

Blogger: पूनम मिश्रा
जब शाहजहाँ आगरा छोड़ दिल्ली बसने चले तो यमुना के तट पर मिली उन्हें माकूल जगह एक नया घरोंदे बनाने की। लाल किले का निर्माण शुरू हुआ और आबाद होने लगी आसपास की बस्ती। लोग आने लगे तो पालनहारी का आशीर्वाद मिले यह भी ज़रूरी था। यही मजमून था बीते रविवार की पैदल यात्रा का। दिल्ल... Read more
clicks 27 View   Vote 0 Like   12:47pm 30 Apr 2019 #चाँदनी चौक
Blogger: पूनम मिश्रा
गर्मी तेज़ है। जैसी ही सर्दियां कम हुईं मैंने चिड़ियों और अन्य जीव जंतुओं के लिए एक बड़े से मिट्टी के बर्तन में पानी रख दिया था।आगे पीछे दोनों।बड़े इतरा कर मैं कहती हूँ  दिल्ली के एक ख़ास इलाके में रहती हूँ। घर की चारदीवारी के अंदर ही बहुत से पेड़ हैं। पशु पक्षियों दोनों... Read more
clicks 99 View   Vote 0 Like   1:09pm 23 Apr 2019 #
Blogger: पूनम मिश्रा
मिट्टी का मोल अमोल,क्या कहती,क्या  सुनती है। कहती है जो खुशबू मेरी,और कहीं न मिलती है । बारिश की वह पहली बूँदें,जब मिलती हैं कण कण से सोंधी सोंधी महक लिए, यह रची बसी  है रग रग में ।  गगरी देखो,देख सुराही,देखो गाँव  की डगर डगर    मन में तेरे गहरे बसे हैं,द... Read more
clicks 91 View   Vote 0 Like   5:35am 9 Jan 2019 #माटी की बानी
Blogger: पूनम मिश्रा
हम हैं तो दुनिया हैं,हम हैं तो रंग हैं ,हम है तो जीवन चक्र हैहम हैं तो सहारे हैं। हम से ही परम्परा है हम से ही नवीनता हैहम से ही स्थिरता हैहम से ही हैं नयी उड़ानें।हम से  रास्ते के उजाले हैंहम में अंधेरों के गलियारे हैं।हम से कायम हैं रिश्ते बहुतहम से अपना रिश्ता है अह... Read more
clicks 77 View   Vote 0 Like   4:49am 8 Mar 2018 #नारी
Blogger: पूनम मिश्रा
कल रात सिम्बा नहीं रहा। वहां चला गया जहाँ उसे कोई कष्ट नहीं होगा। बीमार और कष्ट में तो वह कुछ महीनों से था पर पिछले एक महीने से अपने आप उठने में असमर्थ था। उसके पिछले पैर अशक्त हो गए थे और उसे उठाना पड़ता था। उसकी विवशता बहुत दुखदायी थी।पर उठाने  के बाद वह वही पुराना जोशी... Read more
clicks 78 View   Vote 0 Like   5:46am 19 Jan 2018 #
Blogger: पूनम मिश्रा
लखनऊ है तो महज़ गुम्बद-ओ मीनार नहीं,सिर्फ एक शहर नहीं,कूचा ओ बाज़ार नहीं, इसके दामन में मोहब्बत के फूल खिलते हैं, इसकी गलियों में फरिश्तों के पते मिलते हैं,'लखनऊ हम पर फ़िदा, और हम फिदाए लखनऊ क्या है ताकत आसमां की, जो छुडाये लखनऊलखनऊ कह लें या नखलऊ........ अवध के नवाबों ने बड़े नाज़... Read more
clicks 93 View   Vote 0 Like   8:06am 9 Jul 2017 #चिकन
Blogger: पूनम मिश्रा
आज शाम बहुत सी मुस्कराहटेंइधर उधर से उड़ती हुईंमेरी बगिया में आईं।कुछ हंसती चहकती  अंदर आईंकुछ सकुचाती मुस्कराहट थी ,कुछ खामोशकुछ में सहमा सा डर था,कुछ में दिल्लगीपर मुस्कराहटें सब थीं।फूलों,कलियों,पेड़ के दरख्तों ,वो वहां टिकी साईकिल,उधररखा एक छाता एक एक कर सब पर बै... Read more
clicks 104 View   Vote 0 Like   8:18am 7 Mar 2017 #बगिया
Blogger: पूनम मिश्रा
किसी भी शहर के बारे में शायद ही हममें से किसी को पूरी जानकारी नहीं होती है। और अगर वह शहर दिल्ली हो जिसके परत दर परत खोलते जानते कई ज़माने गुज़र जायेंगे तो आप जितना जानेंग उससे कहीं अधिक अनजान रह जाएंगे।दिल्ली को जानने पहचानने के एक मुहिम चल रही है "डेल्ही वॉक फेस्टिवल "&nbs... Read more
clicks 125 View   Vote 0 Like   11:05am 26 Feb 2016 #Delhi walk Festival
Blogger: पूनम मिश्रा
बदल गयी है दुनिया कैसे , कैसे अजब नज़ारे हैं आसमान में धुंधले अब तो, दिखते भी सितारे हैं। हर तरफ है धुआं फैला हर तरफ कुछ मैला है हर इंसान को दिखता जब सिर्फ पैसों का थैला है !अभी सड़क बनी नहीं कि पड़ने लगीं दरारें हैं तारकोल जैसा भी हो लालच की खूब मिसालें हैं   पैर त... Read more
clicks 125 View   Vote 0 Like   5:12pm 29 Jan 2016 #
Blogger: पूनम मिश्रा
पुराने कैलेंडर को उतार लगने जा रहा हैअब एक नया कैलेंडर पिछले पर बहुत हिसाब किताब लिखे  हैं कुछ खास काम लिखे हैं। कब कामवाली छुट्टी से वापस आएगी ,कब गैस  जल्दी ख़त्म हो गयी  किस महीने ज़्यादा चली कब किसी के घर दावत है घर की दावत का मेनू क्या है।    किस की अ... Read more
clicks 145 View   Vote 0 Like   9:17am 1 Jan 2016 #
Blogger: पूनम मिश्रा
एक दिन सवेरे  चाय बनाने रसोई में गयी तो  दो आँखों को  खिड़की  से झांकते हुए   देखा।  हरी आँखों में कौतूहल था और थोड़ा  भय भी। मैं चाय बनाने में लग गयी।   क़ुछ देर बाद देखा  चार आँखें   अंदर ताक रही थीं। याद  आया कुछ दिन पहले एक बिल्ली   को तीन छोटे बच्च... Read more
clicks 124 View   Vote 0 Like   10:07am 24 Sep 2015 #
clicks 140 View   Vote 0 Like   10:59am 6 Nov 2014 #
Blogger: पूनम मिश्रा
कुछ दिनों पहले घर   मिनट की  एक लघु प्रस्तुति की थी। उस पावर पॉइंट प्रस्तुत को वीडियो में रूपांतरित किया पर पार्श  स्वर का  चित्रों  के साथ तालमेल नहीं बैठ पाया. बहरहाल ,स्वच्छता दिवस के सन्दर्भ में , अभी तो इसे यहां पर डाल  दे रही हूँ।  फिर बाद में इसका तालमेल ब... Read more
clicks 146 View   Vote 0 Like   5:23am 2 Oct 2014 #सफाई
Blogger: पूनम मिश्रा
Stress Management   यहाँ क्लिक करें ... Read more
clicks 155 View   Vote 0 Like   3:04pm 22 Sep 2014 #video
Blogger: पूनम मिश्रा
         जीवन का एक अध्याय दूसरे  से कितना भिन्न हो सकता है ,यह कल्पना से भी परे  की बात है। कल जो जीने का तरीका था आज सिर्फ एक स्मृति बन कर रह जाता है ।  कल आफिस और घर  की व्यस्तता सवेरे की चाय को सड़क पर हरी होती ट्रेफिक लाइट पर आगे निकलने की होड़ में भागती हुई ... Read more
clicks 134 View   Vote 0 Like   2:44pm 21 Sep 2014 #
Blogger: पूनम मिश्रा
पेटूनिया चंचल पग दीपशिखा के धरगृह मग वन में आया वसंत।सुलगा फागुन का सूनापनसौंदर्य शिखाओं में अनंत।सौरभ की शीतल ज्वाला से फैला उर-उर में मधुर दाह आया वसंत भर पृथ्वी परस्वर्गिक सुंदरता का प्रवाह।(सुमित्रानन्दान पंत ) वसन्त ऋतु क्या आयी हवा में एक स्निग्धत... Read more
clicks 178 View   Vote 0 Like   5:22pm 21 Mar 2014 #
Blogger: पूनम मिश्रा
जादू की पुड़िया है ,जीवन का यह खेला  जिसको भी देखो वह  आया अकेला  फिर यह साथ दिखता कैसे  यह रेला  लोगों की भीड़ है रिश्तों का एक  मेला !    इस जादू की पुड़िया में  होता कुछ गजब है  आते सब इंसान है जुड़ जाता एक मज़हब है इंसानियत के मतलब हो जाते बेस... Read more
clicks 151 View   Vote 0 Like   5:17pm 9 Mar 2014 #जादू की पुड़िया
Blogger: पूनम मिश्रा
बसंत की दोपहरी कुछ  अलग सी है जब हवा छूकर कहती है  किसी के  साथ की आस हो  दिल  कुछ गुनगुनाए  कभी ठंडी एक बयार ,कभी  गर्म हवा का  झोंका न करार दे, न बेकरारी  ही बने  रहने दे।   पैरों तले घास की नमी और दिल में घुसती हवा के साथ आयी प्यार की गर्मी। करार भी देती ... Read more
clicks 162 View   Vote 0 Like   8:22am 19 Feb 2014 #बसंत
Blogger: पूनम मिश्रा
बीते साल को मुड़कर देखा , हँसते देखा ,रोते देखामौला के रहम को देखा ,इंसानों  के करम  को  देखा।आपस के मसलों को लेकर  बंटती सांझी ज़मीन को देखापैसे की लालच  के पीछे  लुटती हुई   ज़मीर को देखाहिम्मत  बांधे एक हुजूम को सडकों पर उतरते देखासत्ता के बंद गल... Read more
clicks 143 View   Vote 0 Like   10:32am 31 Dec 2013 #कविता
Blogger: पूनम मिश्रा
थाईलेंड  ,कम्बोडिया ,वियतनाम और  चीन से घिरे इस देश में शायद सैलानी के तौर पर जाने की बात हमारे ज़हन में न आये ,पर आफिस के काम से मुझे वहां जाने का मौका मिला. दिल्ली से बेंगकोक और फिर वहां से लाओ एरलाईन से पाक्से . बंगकोक से एक छोटे एटीआर जहाज से हम पहुंचे पाक्से .हवाई अड... Read more
clicks 171 View   Vote 0 Like   1:49pm 16 Dec 2013 #पाक्से
Blogger: पूनम मिश्रा
2006  से इस ब्लॉग की शुरुआत हुई थी।हिन्दी ब्लॉग जगत में हरकत होनी तब शुरू ई हुई थी।  कुछ चंद लोग थे ,एक परिवार सा लगता था. नारद मुनि का साथ था अब तो महासागर है, कुछ पुराने अभी भी चले आ रहे है ,बहुत रास्ते में रुक गए , कुछ बेतहाशा दौड़ते जा रहे हैं। मेरा भी यह प्रयास  कभी त... Read more
clicks 162 View   Vote 0 Like   8:13am 3 Sep 2013 #
Blogger: पूनम मिश्रा
कुछ दिन पहले एक मौक़ा मिला . इलाहाबाद के एक प्रतिष्ठित स्कूल में भौतिक विज्ञान के शिक्षक पद के लिए इंटरव्यू  था. एक पद कक्षा दस के लिए और एक पद ,कक्षा ११ और 1२ के लए खाली था. साक्षात्कार   के लिए ४ -४  अभ्यर्थी .सभी भौतिक विज्ञान में स्नातकोत्तर थे. अनेक सवाल पूछे गये. शुरुआत ... Read more
clicks 157 View   Vote 0 Like   12:31pm 24 May 2013 #
Blogger: पूनम मिश्रा
कल एक पत्रिका में पढ़ रही थी कि  दुनिया में तीन देशों को छोड़ बाकी जगह पोलियो मुक्त हो गए हैं  .  य़ह तीन देश हैं अफगानिस्तान ,पाकिस्तान  और नाइजीरिया . अपने स्कूल के दिनों की याद आई .हमारे साथ थी तस्नीम थी जिसका पैर  पोलियो ग्रस्त  होने के कारण बंधा रहता था. पहले काफी बच्च... Read more
clicks 169 View   Vote 0 Like   10:06am 14 May 2013 #स्टेम सेल
Blogger: पूनम मिश्रा
इस बार एक हफ्ते  में जो सफ़र किया वह  दिलचस्प था. पांच दिन में ग्वालियार- आगरा -दिल्ली  जाना था और फिर वापस इलाहाबद.पर कुछ छोटी छोटी घटनाएं ऐसी हुईं  जो दिल को छू गईं .पिछले  चिट्ठे में मेट्रो के सुखद अनुभव का ज़िक्र था. एक और दिलचस्प मुलाक़ात हुई आगरा से दिल्ली जाते हुए.आग... Read more
clicks 175 View   Vote 0 Like   7:43am 8 May 2013 #आगरा
Blogger: पूनम मिश्रा
इस बार एक हफ्ते  में जो सफ़र किया वह  दिलचस्प था. पांच दिन में ग्वालियार- आगरा -दिल्ली  जाना था और फिर वापस इलाहाबद.पर कुछ छोटी छोटी घटनाएं ऐसी हुईं  जो दिल को छू गईं .पिछले  चिट्ठे में मेट्रो के सुखद अनुभव का ज़िक्र था. एक और दिलचस्प मुलाक़ात हुई आगरा से दिल्ली जाते हुए.आग... Read more
clicks 155 View   Vote 0 Like   7:43am 8 May 2013 #आगरा
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