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जोग लिखी

मीडिया की आज़ादी की बात अभिव्यक्ति की आज़ादी के समानांतर है. जितनी ज़रूरी अभिव्यक्ति की आज़ादी है उतनी ही ज़रूरी मीडिया की आज़ादी भी है. और मुझे यह कहने में गर्व का अनुभव हो रहा है कि भारत में कुछ छुट-पुट अपवादों को छोड़कर ये दोनों ही आज़ादियां विद्यमान हैं. इन छुट-पुट ...
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  January 26, 2012, 7:37 am
बीतते जा रहे साल के आखिरी दिनों में पूरे साल का लेखा जोखा करने बैठा हूं तो सबसे पहले इस बात पर ध्यान जाता है कि हमारे समाज की भाषा की ज़रूरतों में तेज़ी से बदलाव आ रहा है. अब तक हम जिस तरह से भाषा को बरतते रहे हैं, बरताव का वह तरीका अब प्रचलन से बाहर होता जा रहा है. हमारे समय ...
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Tag :भारत सरकार
  December 25, 2011, 3:14 pm
भारत के टेलीकॉम और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री कपिल सिब्बल इन दिनों अनगिनत आलोचनाओं और उपहासों के पात्र बन रहे हैं. न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार कोई छह सप्ताह पहले उन्होंने कुछ सोशल मीडिया साइट्स के एक्ज़ीक्यूटिव्स के साथ मुलाकात करके उन्हें आपत्तिजनक स...
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Tag :सेंसर
  December 10, 2011, 8:41 am
हाल ही में मेरे एक सुधी अति संवेदनशील और बहु पठित मित्र ने अपना एक नया लेख मुझे मेरी प्रतिक्रिया जानने के लिए भेजा. हम मित्रों के बीच यह एक सामान्य बात है कि अपने लिखे को प्रकाशनपूर्व अपने मित्रों को पढ़वा कर उनकी प्रतिक्रिया जान लें और यदि आवश्यक हो अपने लिखे में सुधार...
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Tag :पूजीवाद
  July 24, 2011, 12:57 pm
डॉ दुर्गाप्रसाद अग्रवाल से डॉ पल्लव की बातचीतपल्ल्व:हिंदी में शुरुआत में ही घुमक्कड़ शास्त्र (राहुल सांकृत्यायन) जैसी किताब, और उससे भी पहले हमारी परंपरा की जड़ में रामायण (राम का अयन. अयन का अर्थ भ्रमण भी है) होने के बावज़ूद क्या कारण हैं कि हिंदी में यात्राओं पर लिखन...
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Tag :p
  July 13, 2011, 6:23 pm
कभी-कभी ऐसा होता है कि कोई एक रचना रचनाकार के समस्त कृतित्व पर छा जाती है. चन्द्रधर शर्मा गुलेरी से पहले ‘उसने कहा था’ याद आने लगती है और भगवतीचरण वर्मा से पहले ‘चित्रलेखा’. हरिवंश राय बच्चन से पहले ‘मधुशाला’ कानों में गूंजने लगती हैं तो भीमसेन जोशी से पहले ‘मिले सुर ...
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Tag :दान सिंह
  June 20, 2011, 8:24 pm
वर्ष 20101 के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित मारियो वर्गास लोसा की गणना एक अति महत्वपूर्ण लातीन अमरीकी लेखक के रूप में की जाती है तथा उनका नाम ऑक्टावियो पाज़ और गैब्रियल गार्सिया मार्खेज़ जैसे लेखकों के साथ लिया जाता है. साहित्यालोचक गेराल्ड मार्टिन ने उचित ही लिखा है कि ल...
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Tag :मारियो वर्गास लोसा
  December 27, 2010, 8:59 am
इंटरनेट पर अपनी एक टिप्पणी में अमरीका में रह रहे मेरे मित्र श्री अनूप भार्गव ने  हिंदी  कवि सम्मेलनों की स्तरहीनता पर अपना क्षोभ व्यक्त किया है. उन्होंने महाकवि निराला के एक अति प्रसिद्ध कथन, गिर कर कोई चीज़ मत उठाओ, चाहे वह कविता ही क्यों न हो’ को भी स्मरण किया है.  उनकी ...
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  September 23, 2010, 8:01 pm
हिंदी दिवस फिर आ गया है. हर साल आ जाता है. विभिन्न सरकारी संस्थानों के  हिंदी अधिकारियों के लिए अपनी दक्षता के दिखावे का  वार्षिक महोत्सव. (दिखावे शब्द का प्रयोग मैंने जान-बूझकर किया है. यह मानते हुए कि वे वर्ष भर काफी कुछ सार्थक भी करते रहते हैं, लेकिन हिंदी दिवस या हिंदी ...
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Tag :हिंदी दिवस
  September 13, 2010, 3:37 pm
अब पीछे मुड़ कर देखता हूं तो सोचता हूं कि उस प्रख्यात अंग्रेज़ी कहावत के राजेन्द्र यादवीय अनुवाद को साकार करने की क्या सूझी थी मुझे? अग्रेज़ी कहावत है fools rush in where angels fear to tread in. राजेंद्र जी ने इसका जो अनुवाद किया, वह शालीन भले ही न हो, उससे सटीक अनुवाद और कोई हो नहीं सकता. उनका कि...
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Tag :डॉ सी पी जोशी
  August 23, 2010, 10:22 am
मेरी मांहर सुबह जब तारे हो जाते अस्त ऊंची-ऊंची चिमनियों के सायरनों से निकलती आवाज़ के बीच मिल की तरफ़ जल्दी-जल्दी कदम बढ़ातेकौन पीछे मुड़कर हमें देखती और कहती इतने प्यार से “लड़ना मत किसी से” और थमा देती दो पैसे दशहरे के एक दिन पहले वो गई थी हम पांचों के साथ मेले में ह...
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Tag :नारायण सुर्वे
  August 22, 2010, 5:13 pm
कभी-कभी एक अकेला गीत ही सिर्फ साढ़े सात मिनिट में पूरे देश को अपने आगोश में समेट लेता है. 15 अगस्त, 1988 की सुबह भारत के टीवी दर्शकों ने देखा एक केशरिया सूरज, समुद्र और उसकी उत्ताल तरंगों की छवियों में से उभरते अधमुंदी आंखों वाले भीमसेन जोशी को, जो अधमुंदी आंखों के साथ गा रह...
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Tag :मिले सुर
  August 18, 2010, 8:19 am
पिछले दिनों पत्नी ने अपने घुटने बदलवाने का ऑपरेशन करवाया तो उनकी देखभाल करते हुए मुझे भारतीय मानसिकता के कुछ खास पहलुओं से रू-बरू होने का अवसर मिला. पत्नी ऑपरेशन के लिए जिस अस्पताल में भर्ती हुई थीं वहां रोगियों से मिलने वालों की आवाजाही पर कड़ा प्रतिबंध था. प्रत्ये...
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Tag :अस्पताल
  July 2, 2010, 8:11 am
अक्सर कहा जाता है कि लोग आसानी से बदलना नहीं चाहते और बदलाव बहुत मुश्क़िल होता है आप धूम्रपान छोड़ना चाहते हैं, छोड़ नहीं पाते. वज़न घटाना चाहते हैं, कामयाब नहीं होते. फिज़ूलखर्ची रोकना चाहते हैं, रोक नहीं पाते. आप सब कुछ समझते हैं फिर भी वह नहीं कर पाते जो करना चाहते हैं....
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Tag :स्विच
  May 6, 2010, 12:41 pm
2005 में प्रकाशित बहु-चर्चित पुस्तक अ होल न्यू माइंड: व्हाय राइट-ब्रेनर्स विल रूल द फ्यूचरके लेखक डेनियल एच पिंक अपनी हालिया प्रकाशित किताबड्राइव: द सरप्राइज़िंग ट्रुथ अबाउट व्हाट मोटिवेट्स असमें यह कहकर हमें चौंकाते हैं कि कुछ करने के लिए हम क्यों प्रेरित होते हैं इस...
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Tag :ड्राइव
  March 7, 2010, 7:12 am
एक बहुत दिलचस्प उक्ति है कि अस्पताल बीमार लोगों के लिए उपयुक्त स्थान नहीं है. इसलिए नहीं है कि यह स्थान ऐसी अनेक बातों और चीज़ों से भरा होता है जो आपकी सेहत के लिए ख़तरनाक होती हैं, जैसे छोटे-बड़े इन्फेक्शन, निदान या दवा देने में होने वाली चूकें और मानवीय भूलों की वजह से ...
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Tag :अस्पताल
  February 7, 2010, 11:05 am
अपनी मेगा बेस्टसेलर थ्री कप्स ऑफ टी (अब तक 30 लाख प्रतियां बिक चुकी हैं) में ग्रेग मॉर्टेन्सन ने पाकिस्तान के दुर्गम इलाकों में लड़कियों के लिए स्कूल बनाने के अपने प्रयासों का मार्मिक वृत्तांत दिया था. उसी किताब की अगली कड़ी है स्टोन्स इण्टु स्कूल्स: प्रोमोटिंग पीस वि...
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Tag :ग्रेग मॉर्टेंसन
  January 24, 2010, 8:20 am
पिछले एक दशक में अपनी तीन सुपर बेस्टसेलर किताबों द टिपिंग पॉइंट, ब्लिंक और आउटलायर्स से बहु चर्चित और अपने परिवेश को देखने का हमरा नज़रिया बदल डालने वाले लेखक माल्कम ग्लैडवेल की नई किताब व्हाट द डॉग सॉ: एंड अदर एडवेंचर्स असल में लगभग इसी कालावधि में न्यूयॉर्कर पत्रिक...
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Tag :ग्लैडवेल
  January 10, 2010, 9:16 am
सन 2005 में प्रकाशित एक छोटी-सी किताब फ्रीकोनोमिक्स ने अर्थशास्त्र और दुनिया के प्रति लोगों का नज़रिया बदलने में बहुत बड़ी भूमिका अदा की. न्यूयॉर्क टाइम्स की बेस्ट सेलर सूची में रही स्टीवेन डी. लेविट्ट और स्टीफ़ेन जे. ड्युबनेर कृत इस किताब की दुनिया की 35 भाषाओं में 40 ला...
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Tag :फ्रीकोनोमिक्स
  December 7, 2009, 11:14 am
पुलित्ज़र पुरस्कार जीतने वाले पहले विवाहित दम्पती निकोलस डी क्रिस्टोफ और शेरिल वुडन ने अफ़्रीका और एशिया की सघन यात्राओं के बाद लिखी इस किताब में बताया है कि कैसे एक छोटी-सी सहायता भी पद दलित, पीड़ित बच्चियों और स्त्रियों की ज़िंदगी में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकती है...
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Tag :मानवाधिकार हनन
  November 5, 2009, 7:46 pm
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