Hamarivani.com

साझा आसमान

ज़रा-से  करम  को  ज़माने  लगेख़ुदा  रोज़   एहसां   जताने  लगेनज़र  में   न  थे  तो   परेशां  रहेनज़र  में  लिया  तो  सताने  लगेसंवरना  हमीं  ने  सिखाया  उन्हेंहमीं  को   अदाएं   सिखाने  लगेइसे  रहज़नी  के  सिवा  क्या  कहेंकि&...
साझा आसमान ...
Tag :
  August 19, 2017, 6:55 pm
क़त्ल  करके  हसीं  बहारों  कातन  गया  सर  रसूख़दारों  कालाशे-अत्फ़ाल  रौंद  कर  ख़ुश  हैंतुफ़ ! ये:  किरदार  ताजदारों  कामुंह  छुपा  लें  कि  सर  कटा  डालेंहै  पसोपेश  शर्मसारों  काहै  हमारी  कमी  कि  क़ायम  हैदबदबा  ज़ुल्म  के  इदार...
साझा आसमान ...
Tag :
  August 17, 2017, 7:16 am
मेरे  अल्फ़ाज़  मुझसे  रूठ  कर  कुछ  दूर  बैठे  हैंकि  जैसे  वक़्त  के  हाथों  सनम  मजबूर  बैठे  हैंकरें  किससे  शिकायत  दोस्तों  की  बेनियाज़ी  कीवफ़ा  के  दफ़्तरों  में  भी  तन-ए-रंजूर  बैठे  हैंकिसी  दिन  फिर  नमी  होगी  निगाह...
साझा आसमान ...
Tag :
  July 11, 2017, 6:57 am
चंद  अश्'आर  जो  सीने  में  दबा  रक्खे  हैंकुछ  समझ-सोच  के  यारों  से  छुपा  रक्खे  हैंएक  उम्मीदे-शिफ़ा  ये  है  कि  वो  आ  जाएंइसलिए  मर्ज़  तबीबों  से  बचा  रक्खे  हैंहो  अगर  दिल  में  शरारत  तो  बता  दें  हमकोवर्न:  हमने...
साझा आसमान ...
Tag :
  July 8, 2017, 5:42 pm
आज  ख़ामोश  रहें  भी  तो  क्याऔर  दिल  खोल  कर  कहें  भी  तो  क्या ?आपको  तो  रहम  नहीं  आताहम  अगर  दर्द  सहें  तो  भी  क्याक़त्ल  करके  हुज़ूर  हंसते  हैंभीड़  में  अश्क  बहें  भी  तो  क्याज़ुल्म  तारीख़  में  जगह  लेंगेशाह  क...
साझा आसमान ...
Tag :
  July 7, 2017, 9:41 pm
न  दिल  चाहते  हैं  न  जां  चाहते  हैंफ़क़त  आशिक़ों  की  अमां   चाहते  हैंउड़ानों  पे  बंदिश  न  पहरा  सुरों  परपरिंदे    खुला  आस्मां   चाहते  हैंमुरीदे-शहंशाह  हद  से  गुज़र  कररिआया  के  दोनों  जहां  चाहते  हैंक़फ़न  खेंच  कर&...
साझा आसमान ...
Tag :
  July 6, 2017, 2:53 pm
किधर  ढूंढिएगा  कहां  खो  गयामियां  मान  लीजे  कि  दिल  तो  गयाउसे  तिश्नगी  ने  न  बख़्शा  कभीअकेला  ख़राबात  में  जो  गयागुलों  को  न  अब  कोई  इल्ज़ाम  देकि  मौसम  रग़ों  में  ज़हर  बो  गयामदारी  बना  शाह  जिस  रोज़  सेहक़ीक़त&...
साझा आसमान ...
Tag :
  June 29, 2017, 6:47 pm
जब  जहालत  गुनाह  करती  हैसल्तनत  वाह  वाह  करती  हैआइन-ए-मुल्क  में  बहुत  कुछ  हैक्या  सियासत  निबाह  करती  हैसल्तनत  चार  दिन  नहीं  चलतीजो  सितम  बेपनाह  करती  हैअस्लहे  वो:  असर  नहीं  करतेजो  वफ़ा  की  निगाह  करती  हैआश...
साझा आसमान ...
Tag :
  June 27, 2017, 4:16 pm
ईद  में  मुंह  छुपाए  फिरते  हैंग़म  गले  से  लगाए  फिरते  हैंदुश्मनों  के  हिजाब  के  सदक़ेरोज़  नज़रें  चुराए   फिरते  हैंदिलजले  हैं  बहार  के  आशिक़तितलियों  को  उड़ाए  फिरते  हैंकोई  उनको  पनाह  में  ले  लेजो  वफ़ा  के  सता...
साझा आसमान ...
Tag :
  June 26, 2017, 3:09 pm
शौक़  तो  उन्हें  भी  है  पास  में  बिठाने  काजो  हुनर  नहीं  रखते  दूरियां   मिटाने  कारोज़  रोज़  क्यूं  हम  भी  आपसे  पशेमां  होंएक  दिन  मुक़र्रर  हो  रूठने-मनाने  काआपकी  सफ़ाई  से  मुत्मईं  नहीं  हैं  हमराज़  कोई  तो  होगा&nb...
साझा आसमान ...
Tag :
  June 22, 2017, 9:42 am
सितम  कीजिए  या   दग़ा  कीजिएख़ुदा  के  लिए  ख़ुश  रहा  कीजिएदुआ  है  फ़रिश्ते  मिलें   आपकोन  हो  तो  हमीं  से  वफ़ा  कीजिएबुरे  वक़्त  में   बेहतरी  के  लिएलबों  पर  तबस्सुम  रखा  कीजिएसितारे  पहुंच  से  अगर  दूर  हैंतो  किरदार&nb...
साझा आसमान ...
Tag :
  June 17, 2017, 11:14 pm
आज  मौसम  हमारा  नहीं  क्या  करेंदोस्तों  से  गुज़ारा  नहीं  क्या  करेंज़ीस्त  ने  तो  हमें  ग़म  दिए  ही  दिएमौत  से  भी  सहारा  नहीं  क्या  करेंतीरगी  को  मिटाना  हंसी-खेल  हैपर  शम्'.अ  का  इशारा  नहीं  क्या  करेंहर  क़दम  प...
साझा आसमान ...
Tag :
  June 10, 2017, 11:06 pm
इबादत  न  कीजे  किसी  शाह  कीदग़ाबाज़     मक्कार    गुमराह  कीन  जाने    कहां   ले  गिरे    रहनुमाहक़ीक़त    समझिए   नई  राह  कीकिसे  दोस्त  समझें  किसे  मुस्तफ़ाहमारी   किसी  ने   न   परवाह  कीजहां    पीर  ही  पीर ...
साझा आसमान ...
Tag :
  June 7, 2017, 4:01 pm
वैसे  तो  दुनिया  फ़ानी  हैसच  के  साथ  परेशानी  हैख़ुद्दारों  पर  दाग़  लगानामग़रूरों  की  नादानी  हैशाहों  से  डर  जाने  वालोयह  रुत  भी  आनी-जानी  हैसंगीनों  पर  चल  कर  जीनाज़िद  अपनी  जानी-मानी  हैअब  जम्हूर  कहां  रक्खा  ह...
साझा आसमान ...
Tag :
  June 6, 2017, 5:13 pm
तलाशे-मकां  में  जहां  लुट  गयाज़मीं  के  लिए  आस्मां  लुट  गयाअदा  सादगी  शोख़ियां  पैरहनन  जाने  दिवाना  कहां  लुट  गयापसोपेश  में  रह  गईं  आंधियांसफ़ीना  इसी  दरमियां  लुट  गयामिला  शाह  हमको  ख़ुदादाद  ख़ांकि  सदक़े  में  हर&...
साझा आसमान ...
Tag :
  June 2, 2017, 7:37 pm
फंस  गए  शैख़  पहली  मुलाक़ात  मेंसर-ब-सज्दा    पड़े  हैं   ख़राबात  मेंठीक  है  मैकदा  घर  ख़ुदा  का  नहींक्या  बुरा  है   यहां  भी  मुनाजात   मेंशाह  मदहोश  है  तख़्त  के  ज़ो'म  मेंऔर  लश्कर    लगे  हैं   ख़ुराफ़ात  मेंख़ूब &...
साझा आसमान ...
Tag :
  May 27, 2017, 4:14 pm
सोग़  में  है  ख़ुदा,  क्या  हुआमर  गए  हम  बुरा  क्या  हुआबुझ  गया  चांद  का  क़ुमक़ुमाचांदनी  का  नशा  क्या  हुआरास्ते        मुंतज़िर     ही  रहेमंज़िलों  का  पता  क्या  हुआइश्क़  में  घर  जला  आपकादुश्मनों  का  भला  क...
साझा आसमान ...
Tag :
  May 22, 2017, 7:46 pm
बता  कौन  तेरी  ख़ुशी  ले  गयाकि  कासा  थमा  कर  ख़ुदी  ले  गयासमझते  रहे  सब  जिसे  बाग़बांगुलों  के  लबों  से  हंसी  ले  गयासितारा  रहा  जो  कभी  बज़्म  कावही  नज़्म  की  ज़िंदगी  ले  गया चमन  छोड़  कर  अंदलीबे-सुख़नबहारों  की&nbs...
साझा आसमान ...
Tag :
  May 19, 2017, 5:13 pm
करते  हैं  अश्क  ज़ाया  दामन  की  आड़  कर  केयानी   वो  ख़ुश  नहीं  हैं    हमसे   बिगाड़  कर  केथी  जान  जिस्म  में  जब  देखा  न  सर  उठा  करअब  दिल  तलाशते  हैं   वो    चीर-फाड़  कर  केपर्दे  में  भी    किसी  का    द...
साझा आसमान ...
Tag :
  May 16, 2017, 7:28 pm
क़फ़स  में  भी  नमाज़ें  गिन  रहे  हैंअक़ीदत  की  सलाख़ें  गिन  रहे  हैंहुकूमत  कर    रहे  हैं   या  तमाशाख़िज़ां  में  भी   बहारें   गिन  रहे  हैंजहालत  के  ज़हर  का  ही  असर  हैबुज़ुर्गों  की     ख़ताएं    गिन  रहे  हैंहमार...
साझा आसमान ...
Tag :
  May 14, 2017, 7:17 pm
यौमे-मज़दूर पर लाल सलाम !सारी  सरकारें  झुकती  हैं  सरमाएदारों  के  आगे हम  मेहनतकश  दीवार  बने  हैं  इन  मुर्दारों  के  आगे तुम  नाहक़  नाक  रगड़ते  हो  हर  दिन  अख़बारों  के  आगे झुकने  को  हम  भी  झुकते  हैं  लेकिन  ख़ुद्दार...
साझा आसमान ...
Tag :
  May 1, 2017, 10:17 pm
उलझनों  से  भरा  दिल  नहीं  चाहिएमुफ़्त  में  कोई  मुश्किल  नहीं  चाहिएजान  ले  जाइए  ग़म  न  होगा  हमेंदाव:-ए-हस्रते-दिल    नहीं  चाहिएबात  ईमान  की  है  वफ़ा  की  नहींइश्क़  में  कोई  हासिल  नहीं  चाहिएआबले-पाऊं     देते  र...
साझा आसमान ...
Tag :
  April 20, 2017, 12:12 pm
ढूंढते  ही  रहे    हम        निशानाते-दिलबांट  कर    आ  गए    लोग   ख़ैराते-दिलमा'निए-इश्क़  तक    तो    समझते  नहींआप  क्यूं      चाहते  हैं      इनायाते-दिलआपकी    ख़्वाहिशो-ख़्वाब  से    भी  परेऔर  भी  हैं &nbs...
साझा आसमान ...
Tag :
  April 19, 2017, 10:40 am
ख़ौफ़  में  जी  रहे  हैं  तरफ़दारे-दिलघूमते  हैं  खुले   अब   गुनह्गारे-दिलमुत्मईं  हैं  कि  मग़रिब  न  होगी  कभीतीरगी  को  समझते  हैं   अन्वारे-दिलख़ुश्बू-ए-यार  से  तर  हवा  की  क़समठीक  लगते  नहीं  आज  आसारे-दिलकोई  क़ीमत  रही  ...
साझा आसमान ...
Tag :
  April 16, 2017, 10:57 pm
मुहब्बत  न  हो  तो  जहां  क्या  करेगाज़मीं  के  बिना   आस्मां   क्या   करेगानफ़स  दर  नफ़स  दिल  जहां  टूटते  होंवहां  कोई  दिल  का  गुमां  क्या  करेगा यहां   बात    है    मेरी   तन्हाइयों  कीक़फ़स  में  मदद  मेह्रबां  क्य...
साझा आसमान ...
Tag :
  April 1, 2017, 6:13 pm
[ Prev Page ] [ Next Page ]

Share:
  हमारीवाणी.कॉम पर ब्लॉग पंजीकृत करने की विधि बहुत सरल हैं। इसके लिए सबसे पहले प्रष्ट के सबसे ऊपर दाईं ओर लिखे ...
  हमारीवाणी पर ब्लॉग-पोस्ट के प्रकाशन के लिए 'क्लिक कोड' ब्लॉग पर लगाना आवश्यक है। इसके लिए पहले लोगिन करें, लोगिन के उपरांत खुलने वाले प...
और सन्देश...
कुल ब्लॉग्स (3685) कुल पोस्ट (168001)