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Blog: अनुराग तिवारी

Blogger: ANURAG TIWARI
दोहेधूप न निकली आज भी, गये कई दिन बीत।सर्द हवा भीतर घुसे, छेद देह की भीत।..........सर्द हवाएँ तीर सी, बींध रहीं हैं देह।सूरज की किरणें भली, बरसाती हैं नेह।.........अलसायी सी धूप है, सूरज है हैरान।कोहरे के आतंक से, सहमी उसकी जान। ... Read more
clicks 180 View   Vote 0 Like   6:21am 30 Dec 2016 #
Blogger: ANURAG TIWARI
धूप प्रेयसीधूप प्रेयसी आँगन उतरी, कुहरे का पट खोल।मिलने निकल पड़े सब बाहर, यह पल है अनमोल।नर्म गुनगुनी धूप सुहाती,सहलाती तन-मन को।बचपन सी चंचलता देती,कठुआए जीवन को।रह रह कर है बैरन पछुआ,देती ठंडक घोल।धूप प्रेयसी आँगन उतरी, कुहरे का पट खोल।बाटी चोखा दिन में जमता,बीच-बीच ... Read more
clicks 189 View   Vote 0 Like   3:30am 19 Dec 2016 #
Blogger: ANURAG TIWARI
गज़ल ज़ख़्म गैरों को दिखाते क्यूँ हो।वक्त अपना यूँ गँवाते क्यूँ हो।रास्ते जिनपे खुद चले ही नहीं,उनको औरों को दिखाते क्यूँ हो।मैं सुकूँ से हूँ, मुझे छेड़ो मत,याद आ आ के सताते क्यूँ हो।राह में फूल भी हैं, काँटे भी,दिल को बेताब बनाते क्यूँ हो।जब पता है कि सब मुसाफ़िर हैं,बेवजह... Read more
clicks 184 View   Vote 0 Like   3:10pm 7 Jun 2016 #
Blogger: ANURAG TIWARI
देवदारकुदरत का अनुपम उपहार,यह देवदार।झुरमुटों की ओट सेरवि झाँकता,होता विहान।पत्र पूरित डाल बिनतींछाँव काअद्भुत वितान।ऋषि सरीखा, खड़ा तनकर,ऊर्ध्वगामी, निर्विकार।यह देवदार।प्रकृति का हर रोष पहलेझेलताअपने बदन पर।बाँध रखता गिरि धरा को,अभय देताहै निरंतर।गिरि सभ्यत... Read more
clicks 146 View   Vote 0 Like   2:23pm 16 May 2016 #
Blogger: ANURAG TIWARI
युद्धइसदुनियामेंयुद्धसेक्याघबराना;यहाँ-जन्मसेमृत्युतकलड़नापड़ताहैएकयुद्ध।युद्धअनवरतचलतारहताहैकभीवैचारिकअन्तर्द्वन्द्वोंकारूपधरमनकेभीतर,कभीबाहर।इसदुनियामेंजबसाथसाथहैं;सत्य- असत्य,ब्रह्म- माया,अच्छाई- बुराई,न्याय- अन्याय,तबयुद्धतोअनिवार्यहै।निरपेक्... Read more
clicks 177 View   Vote 0 Like   2:12am 20 Nov 2015 #
Blogger: ANURAG TIWARI
जी लें हर इक पल कोक्यों सोचें हम कल को।जी लें हर इक पल को।बीत गया जो पल ना हो पाया अपना,आने वाला कल भी है केवल सपना।प्रश्न खड़े करने से ज़्यादा,सोचें उसके हल को।क्यों सोचें हम कल को।जी लें हर इक पल को।हम अतीत से सबक सीख करआज सँवारें,करें भली इक पहल,वक्त के सच स्वीकारें... Read more
clicks 180 View   Vote 0 Like   7:22am 2 May 2015 #
Blogger: ANURAG TIWARI
मैं हूँ बेताब....मैं हूँ बेताब तुमसे मिलने को।जाँ भी बेताब है निकलने को।खत्म होता है अब सफ़र मेरा,सूर्य भी जा रहा है ढलने को।रात के बाद फिर सहर होगी,मैं रहूँगा न आँख मलने को।मैं चला, साथ मेरे कर्म चले,कुछ न राज़ी है साथ चलने को।माफ़ करना मेरी खताओं को,मैं चला अपने रब से मिलने क... Read more
clicks 183 View   Vote 0 Like   3:04pm 24 Feb 2015 #
Blogger: ANURAG TIWARI
Valentine Day Special...................................मेरे मकाँ को घर बनाया तुमने।बुझते दीयों को फिर से जलाया तुमने।थक चुकी माँ की बूढ़ी आँखों में,फिर नया रंग, नया ख्वाब सजाया तुमने।वक्त बीता मेरे आँगन में दो फूल खिले,उनकी खुशबू से सारे घर को महकाया तुमने।वक़्त कैसा भी हो, तुम सबको हँसा देती हो,भला ये ला... Read more
clicks 166 View   Vote 0 Like   1:35pm 14 Feb 2015 #
Blogger: ANURAG TIWARI
फगुनहटचली फगुनहट, धूल उड़ाती।बीत गयी ऋतु कठिन शीत की,वस्त्रों का कुछ भार घटा।पेड़ों के पीले पात झड़े,हरियाली की चहुँओर छटा।भ्रमर गीत गुंजन सुन सुननव कलिका मुसकाती। चली फगुनहट, धूल उड़ाती।सीटी बजाती, खिलखिलाती,खेलती है बाग वन।ओढ़ चूनर पीत वर्णी,बन गयी धरती दुल्हन।होली के ... Read more
clicks 195 View   Vote 0 Like   5:39am 6 Feb 2015 #
Blogger: ANURAG TIWARI
मेरे हिस्से में…..मेरे हिस्से में फ़र्ज़ गिरे,अधिकार तुम्हारे हिस्से में।मेरे हिस्से में तनहाई,संसार तुम्हारे हिस्से में।ऊपर वाले ने किस्मत के मोती जब बाँटे थे,मैं किंचित पीछे खड़ा हुआ था,मेरे हिस्से में घाटे थे।मुझको मिलती है रुसवाई,सत्कार तुम्हारे हिस्से में।मेर... Read more
clicks 170 View   Vote 0 Like   9:09am 28 Jan 2015 #
Blogger: ANURAG TIWARI
सूरज खेले आँख मिचौनीसूरज खेले आँख मिचौनी।छिपे कभी बादल के पीछे,अगले ही पल सम्मुख आये।कभी कभी ये ओढ़ रजाईकुहरे की दिन भर सो जाये।जाड़े में है मरहम लगतीधूप गुनगुनी।सूरज खेले आँख मिचौनी।भोर समय नदिया की धारा में लगता हैलाल कमल सा।लहरों के झूले में झूले,ऊपर नीचे,कुछ डूबा ... Read more
clicks 200 View   Vote 0 Like   1:41pm 12 Jan 2015 #
Blogger: ANURAG TIWARI
 अभिनन्दन, नव वर्ष तुम्हाराअभिनन्दन,नव वर्ष तुम्हारा।नयी भोर है,नयी उमंगें,नया जोश है,हर जन मन में।शुभ हो मेरा,सबका शुभ हो,नहीं किसी जीवन में दुख हो।रोग, दोष, भय,भागे सारा।अभिनन्दन,नव वर्ष तुम्हारा।कर न पाये आज तलक जो,करें इस बरस हम सब मिल वो।सबके जीवन में सुधार हो,म... Read more
clicks 205 View   Vote 0 Like   7:50am 31 Dec 2014 #
Blogger: ANURAG TIWARI
जी रहे हैं हम...जी रहे हैं हम,या कि जीवन काटते हैं ?ओढ़ बैठे रूढ़ियाँआस्था के नाम पर,हैं ज़हालत बाँटतेधर्म के व्यापार घर।त्याग कर केसहज जीवन,हम बनावट बाँटते हैं।जी रहे हैं हम,या कि जीवन काटते हैं ?ताज़ी हवाएँ अनवरत हैंखटखटाती द्वार,क्यों न कर पाते हैं हम सत्य को स्वीकार ?त्या... Read more
clicks 223 View   Vote 0 Like   12:00pm 25 Dec 2014 #
Blogger: ANURAG TIWARI
जीवन में यदि कुछ पाना है...जीवन में यदि कुछ पाना है,चलना तो हमको ही होगा।जीवन पथ रौशन करने कोजलना तो हमको ही होगा।मानता हूँ ज़िन्दगी काँटों भरी है,फूल भी खिलते इसी में हैं मगर।लाख हों दुश्वारियाँ लेकिन इन्हीं सेजूझना पड़ता हमें है उम्र भर।स्वीकार करके हर चुनौती ज़िन्दगी ... Read more
clicks 256 View   Vote 0 Like   7:43am 7 Dec 2014 #
Blogger: ANURAG TIWARI
धूपधूप धरा पर उतरी,जैसे,जीवन उतरा।पशु, पक्षी, मानव सब निकले,अपने अपने गेह से,सूरज की किरणें मिलतीं हैं,सबसे अतिशय स्नेह से।थमी ओस की बारिश,घटा,शीत का पहरा।धूप धरा पर उतरी,जैसे,जीवन उतरा।बीज अंकुरित हुए ज़मीं में जीवन नया बसाया,पुरुष प्रकृति का मिलन सुहानासबके मन को भाय... Read more
clicks 190 View   Vote 0 Like   10:52am 3 Dec 2014 #
Blogger: ANURAG TIWARI
मैं कविता लिखता नहीं मैं कविता लिखता नहीं,वह लिखवा देता है।उसकी प्रेरणा सेकभी कभीमन करता है,कागज़ कलम ले करबैठ जाने को।मन में बादलों की तरहउमड़ने लगते हैंभाव, विचार और अनुभूतियाँ।कलम अपने आपकागज़ परनाचने लगती हैऔर शब्द दर शब्दपंक्ति दर पंक्तिकागज़ पर उतर जाती हैएक सु... Read more
clicks 248 View   Vote 0 Like   2:16pm 26 Nov 2014 #
Blogger: ANURAG TIWARI
भूला हूँ कब तुझे...भूला हूँ कब तुझे कि आज याद करूँ मैं।सब कुछ दिया है तूने, क्या फ़रियाद करूँ मैं।करना तो करम इतना कि इन्सान बनूँ मैं।दुनिया की पीर हरने का सामान बनूँ मैं।तुझ तक जो पहुँच पाये, वो पैगाम बनूँ मैं।भाये तुझे जो ऐसा मधुर गान बनूँ मैं।तपते हुए जहाँ में ठंडी छाँव... Read more
clicks 233 View   Vote 1 Like   3:34am 10 Nov 2014 #
Blogger: ANURAG TIWARI
चंदा का दरबारनीले नभ में सज गया,चंदा का दरबार।कुछ तारे बाराती लगते,कुछ लगते पहरेदार।कुछ तारे फ़रियादी भी हैं,रोते अश्रु हज़ार।धरती पर है हो रही, ओस बिन्दु बौछार।... Read more
clicks 214 View   Vote 0 Like   5:51am 4 Nov 2014 #
Blogger: ANURAG TIWARI
गीतगीत मेरे एकाकीपन के साथी हैं।प्रियतम को जो लिखता हूँ, वह पाती हैं।तपते मरुथल में छाया, शीतल पानी हैं।मन के तारों को झंकृत करती बानी हैं।हम जियें न जियें, ये गीत सदा ही जीते हैं।जीवन की हर ऋतु में लब पर जीते हैं।भरते हैं रण में ओज बहादुर वीरों में,जन-जन का मन-रंजन, थिरक... Read more
clicks 243 View   Vote 0 Like   8:56am 20 Oct 2014 #
Blogger: ANURAG TIWARI
बाबूजीबाबूजी की अँगुली थामेमैने चलना सीखा।टेढ़ी मेढ़ी पगडंडी परआगे बढ़ना सीखा।नाव सरीखा जीवन जीते,रहते थे जल के ऊपर,गोदी में कुटुम्ब का भार लिए,मृदु हास लिए अधरों पर।बाबूजी मैने ना देखा,तुम सा सन्त सरीखा।बाबूजी की अँगुली थामेमैने चलना सीखा।स्वर व्यंजन का बोध कराया,दि... Read more
clicks 216 View   Vote 0 Like   5:10am 19 Sep 2014 #
Blogger: ANURAG TIWARI
आखिर मुझे कहाँ जाना हैआखिर मुझे कहाँ जाना है।दिन पाखी बन उड़ते जाते,मन में उलझे प्रश्न सताते,पीछे मुड़ कर जब जब देखूँ,दूर तलक बस वीराना है।आखिर मुझे कहाँ जाना है।दिन भर की ये आपा धापी,लूट, झूठ औ’ छल की थाती,फिर भी मन में है अकुलाहट,कितना और कमाना है।आखिर मुझे कहाँ जाना है... Read more
clicks 266 View   Vote 0 Like   5:43am 14 Sep 2014 #
Blogger: ANURAG TIWARI
कोई फिक्र नहीं लाख मुश्किल हो सफ़र, कोई फ़िक्र नहीं।सरपरस्ती में तेरी, कोई फ़िक्र नहीं।बीते कल से सीख ले कर, हम सँवारें आज को,आने वाला कल हो कैसा, कोई फ़िक्र नहीं।हम ज़मीं के गर्भ में, नींव के पत्थर बनें,दुनियाँ को न आयें नज़र, कोई फ़िक्र नहीं।फ़िक्र हो बस फ़र्ज़ की, जिसके लिए पैदा ... Read more
clicks 227 View   Vote 0 Like   11:17am 26 Aug 2014 #
Blogger: ANURAG TIWARI
लघु कविताएँकर सकें सब बसर,इतना तो दे।वरना ज़िन्दगी का बोझ न दे।मौत दे देफाक़ाक़श को ऐ ख़ुदा,मयस्सर रोटी नहींतो, रोग न दे।.......................... किसने देखा है,क्या होता है,फिर मौत के बाद,हाँ,ये ज़िन्दगी नहीं मिलती।जी ले,किसी के काम तो आ,ख़ुदपरस्ती में,ऐसी खुशी नहीं मिलती।............................. सं... Read more
clicks 219 View   Vote 0 Like   3:51pm 6 Aug 2014 #
Blogger: ANURAG TIWARI
अहसासतेरा अहसास है, जो दिल को सुकूँ देता है।तेरा यकीन ही, हर फ़िक्र को हर लेता है।भटकता हूँ जब कभी दुनियाँ में दोराहे पर,कोई है जो रस्ते में इक दीया जला देता है।ढूँढ़ते हैं सब तुझे मंदिर में औ’ मस्ज़िद में,मुझको मेरा हमसफ़र हर पल दिखाई देता है।बिस्तर में सोया हुआ नन्हा सा इक ... Read more
clicks 234 View   Vote 0 Like   4:21pm 3 Aug 2014 #
Blogger: ANURAG TIWARI
ऊबता मनअपनी बनाई भीत के भीतर फँसे हम।ऊबता मन।भोग मय जीवन बना आदर्श अपना,अर्थ अर्जन बन गया बस लक्ष्य अपना।अजानी और अंधी दौड़ केभागी बने हम।ऊबता मन।बुन लिया हमने चतुर्दिकएक कृत्रिम जाल,भूल बैठे सहज जीवन,अब बुरा है हाल।अँधेरी सुरंग केगामी बने हम।ऊबता मन।... Read more
clicks 188 View   Vote 0 Like   4:06pm 27 Jul 2014 #
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