Hamarivani.com

देर रात के राग

उस नगर राज्‍य में सुसंस्‍कृत संवेदनशील भद्रजनों और कला-मर्मज्ञों की कमी न थी। नगर के केन्‍द्र में कई रंगशालाओं, सभागारों, कला-वीथिकाओं, संगोष्‍ठी कक्षों और विशाल पुस्‍तकालय वाले भव्‍य कला भवन की बहुमंजिली अट्टालिका थी। वहाँ नियमित कला प्रदर्शनियाँ, संगीत समारोह, न...
देर रात के राग...
Tag :
  December 28, 2017, 7:56 pm
पंचकूला हिंसा और राम रहीम परिघटना की अंतर्वस्तु को समझने के लिए पंजाब-हरियाणा में डेरों की राजनीति के इतिहास और वर्तमान को समझना ज़रूरी है।पंजाब में डेरों की राजनीति का एक लम्‍बा इतिहास रहा है। यूँ तो पंजाब में डेरों का इतिहास काफी पुराना रहा है। लेकिन आज़ादी के बाद क...
देर रात के राग...
Tag :
  December 19, 2017, 3:20 pm
दुःख अंत की भाषा था Iऔर भाषा का अंत था Iअँधेरे का व्याकरण था दुःखऔर व्याकरण का अन्धेरा Iदुःख था अकेलेपन की चीखऔर एक चीख का अकेलापन Iदुःख अन्दर की खोहों कीनिरुद्देश्य खोजपूर्ण यात्रा था Iदुःख अकेले भोग लेने कीएक स्वार्थपूर्ण कामना था Iदुःख जूते में घुसा हुआ एक कंकड़,बहा दि...
देर रात के राग...
Tag :
  December 19, 2017, 1:49 pm
(1) आज दो राज्यों के विधानसभा चुनावों, विशेषकर गुजरात के नतीजे आने के बाद वामपंथी बौद्धिक हलकों में भी जिस मायूसी का माहौल है और जैसे विश्लेषण किये जा रहे हैं, उनसे यही पता चलता है कि हिन्दुत्ववादी फासीवाद के कहर और मोदी सरकार की निरंकुश नव उदारवादी नीतियों का मुकाबला क...
देर रात के राग...
Tag :
  December 19, 2017, 1:47 pm
जीवन के जनपद मेंज्वार की प्रतीक्षा है Iपूरी तैयारी है Iपूर्णिमा का चाँदचढने दो Iविचारों कोपकने दो Iउमड़ता जनज्वारविचारों कोसमेट लेगा अपने भीतर Iखुद को,विचारो को,सबकुछ को नया कर जायेगा I-- शशि प्रकाश(अप्रैल, 1994)...
देर रात के राग...
Tag :
  December 19, 2017, 1:39 pm
--- आलोक रंजननेपाल में भारी बहुमत पाकर वाम गठबंधन सत्तारूढ़ होने जा रहा है । के.पी. ओली का प्रधान मंत्री बनाना लगभग तय है । कयास इस बात के लगाये जा रहे हैं कि माधव नेपाल और प्रचंड में से एक देश का राष्ट्रपति बनेगा और दूसरा ने.क.पा.(ए.मा.ले.) और ने.क.पा. (माओवादी केंद्र) के प्रस्ता...
देर रात के राग...
Tag :
  December 19, 2017, 1:18 pm
दर्द जितना गहरा थाउतने ही अकेले थे हम ।उतनी ही अधिक शिद्दत सेकारणों की तलाश थी,संग-साथ की चाहत थीउतनी ही ज़रूरत महसूस की प्यार की ।और दर्द की गहराईऔर बढ़ गयी,और अधिक अकेले पड़ गए हम ।इस पूरी दुनिया के लिएऔर अधिक प्यार की चाहत सेलबरेज थे हमारे दिल ।एक दिशा थीरोशनी की तीखी लक...
देर रात के राग...
Tag :
  December 19, 2017, 12:33 pm
कभी एक स्वप्न को मैंनेआमंत्रित किया थादुखों के एक अकेले निर्जन द्वीप परपर मैं वहाँ खुद हीनहीं पहुँच पाई समय पर ।फिर कविता ने मुझे आमंत्रित कियाएक शाम साथ बिताने कोनिर्वासितों की घाटी में ।वहाँ तक पहुँचने के लिएबनैले समय में मुझेबर्बर गद्य की सड़कों सेहोकर जाना थाऔर ...
देर रात के राग...
Tag :
  December 19, 2017, 12:30 pm
एक शब्दआँसू की तरह उमड़ता हैऔर गले में अटकता है ।रात निश्शब्द ढलती है ।अकेला निशाचर पक्षी भी चुप है ।सहसा मैं अच्छे दिनों कोयाद करता हूँ ।बचपन के चित्रचलचित्र-से आते हैं सामने ।शायद सुखद, शांत, आत्मीय मृत्युआ रही है किसी के निकटचीज़ों के निकटया कि मेरे ही किसी व्यक्तित्...
देर रात के राग...
Tag :
  December 19, 2017, 12:26 pm
सार्थक के साथ हरदमकरती रहती हूँ कुछ निरर्थक भी ।अज्ञात के रहस्यों को जानने कीकोशिश करते हुएस्वयं ही कुछ रहस्य रचती रहती हूँ ।जैसे दे ही दूँ एक मिसाल, किनिजी डायरियाँ भी लिखती हूँछिपाकर पूरी दुनिया सेऔर उन्हें कहीं दबा देती हूँकभी सुदूर रेगिस्तान मेंरेत के किसी टीले ...
देर रात के राग...
Tag :
  December 17, 2017, 9:52 pm
दूर कहीं से सुन रहा हूँकोई शब्द-शब्द थाहकरपढ़ रहा है मेरी कविताऔर मैं मर रहा हूँस्मृतियों की नर्म गोद में ।ऊपर झुके एक सपने की पलकों सेगर्म आँसू की एक बूँदमेरे चेहरे पर।-- शशि प्रकाश(जनवरी,1998)...
देर रात के राग...
Tag :
  December 17, 2017, 9:36 pm
दुःखसरपत के जंगलों से एक यात्रा Iसमझ हो तोयह हवा का गुज़रना हो सकता है Iमहज़ एक सरसराहट Iटीस तो फिर भी सुरक्षित रहेगीकविता के लिए I--- शशि प्रकाश(15 अक्टूबर, 1997)...
देर रात के राग...
Tag :
  December 17, 2017, 9:29 pm
( सत्‍यव्रत की यह टिप्‍पणी 'आह्वान'में बीस वर्षों पहले निकली थी जब वह पाक्षिक के रूप में प्रकाशित हुआ करता था। यह रचना आज उससमय से भी अधिक प्रासंगिक प्रतीत होती है। मित्र इसे पढ़ें और आनंद लें। )--सत्‍यव्रतयह प्राणी जितना अधिक तुच्‍छ है, उतना अधिक शोर मचाता है। अनवरत लम्...
देर रात के राग...
Tag :
  December 17, 2017, 9:00 pm
(इस लेख का एक संक्षिप्त और संपादित रूप 'रविवार डाइजेस्ट'के अगस्त'2017 अंक में मेरे स्तम्भ 'रहगुज़र'के अंतर्गत प्रकाशित हुआ है । पूरा लेख यहाँ दे रही हूँ । )--कविता कृष्णपल्लवीहसन नाम जानलेवा हो सकता हैअमृत यह नाम भी निरापद नहीं रहाबहुत सुरक्षित नहीं हैं आपमहंगू नाम के साथ ब...
देर रात के राग...
Tag :
  September 15, 2017, 3:04 pm
(रविवार डाइजेस्‍ट के अगस्‍त,2017 अंक में 'रहगुज़र'कॉलम में प्रकाशित मेरी टिप्‍पणी)-- कविता कृष्णपल्लवी कथित गोरक्षकों की भीड़ द्वारा अखलाक और पहलू खान की हत्या के बाद हरियाणा में बल्लभगढ़ रेलवे स्टेशन पर इस वर्ष 22 जून को पंद्रह साल के जुनैद को एक भीड़ ने चाकुओं से गोदक...
देर रात के राग...
Tag :
  September 15, 2017, 2:20 pm
(रविवार डाइजेस्‍ट के सितम्‍बर, 2017 के 'रहगुज़र'कालम में प्रकाशित मेरी टिप्‍पणी)-- कविता कृष्णपल्लवी मजदूर स्त्रियाँ यदि संगठित नहीं की जायेंगी तो स्त्री मुक्ति की बौद्धिक आवाजें नक्कारखाने में तूती की आवाज बनी रहेंगी और शहरी मध्यकवर्गीय दायरों तक सीमित तमाम आन्दोर...
देर रात के राग...
Tag :
  September 15, 2017, 2:11 pm
आधुनिक उद्योग ने खेती में और खेतिहर उत्पादकों के सामाजिक सम्बन्धों में जो क्रांति पैदा कर दी है, उसपर हम बाद में विचार करेंगे। इस स्थान पर हम पूर्वानुमान के रूप में कुछ परिणामों की ओर संकेत भर करेंगे। खेती में मशीनों के प्रयोग का मजदूरों के शरीरों पर फैक्ट्री-मजदूरो...
देर रात के राग...
Tag :
  September 4, 2017, 11:07 pm
 ज़माने ने नगर से यह कहा किग़लत है वह , भ्रम है हमारा अधिकार सम्मिलित श्रम और छीनने का दम है !शायद है , ज़िंदगी की , मन की तसवीरें फ़िलहालइससमय हम नहीं बना पायेंगे अलबत्ता पोस्टर हम लगा जायेंगे । हम धधकायेंगे । मानो या मानो मत आज तो चंद्र है , सविता है , पोस्टर ही कविता है !!वेदना ...
देर रात के राग...
Tag :
  August 25, 2017, 10:42 am
 ('रविवार डाइजेस्‍ट'के जून अंक में रूसी क्रांति के सौ बरस पूरे होने पर तीन लेख छपे हैं। यह दूसरा है : क्रांति का संक्षिप्त मूल्यांकन)-- कविता कृष्‍णपल्लवी रूस की अक्टूबर क्रान्ति की शतवार्षिकी (नये कैलेण्‍डर के हिसाब से यह 7 नवम्बर, 1917 को हुई थी) के अवसर पर पूरी दुनिया में ...
देर रात के राग...
Tag :
  August 25, 2017, 9:37 am
बुनियादी बातों पर विद्वानों में परस्पर सहमति हुआ करती थीऔर गौण बातों पर ढेरों असहमतियाँ जिनपर लंबी बहसें हुआ करती थीं ।उनके विचारों के बीच सदा होता था शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व ,निरंतर जारी रहती थी शांतिपूर्ण प्रतिस्पर्धाऔर वे एक-दूसरे में शांतिपूर्ण संक्रमण कर ज...
देर रात के राग...
Tag :
  May 24, 2017, 10:47 pm
एक शाम : एक दृश्यचित्र(मुक्तिबोध और शमशेर को एकसाथ समर्पित)ढल चुकी है शामअँधेरे में गर्क हो चुकी है पश्चिमी क्षितिज पर लालिमा । ज़िंदगी पर झुका हुआ हैगहराता हुआ फासिस्ट अँधेराजिससे बेफ़िक्र बच्चे अभी भी खेल रहे हैंइस विशाल पार्क के खुलेपन में ।काले जल के किनारेझुरमु...
देर रात के राग...
Tag :
  May 24, 2017, 10:07 pm
कल फेसबुक पर सुशील कुमार की एक कविता पढ़ी , जिसकी कई कवियों-आलोचकों ने यह कहकर प्रशंसा की है कि यह अशोक वाजपेयी जैसों की जुगुप्सा पैदा करने वाली देहभोगवादी कविताओं से एकदम अलग भावभूमि पर यौन-प्रतीकों का भाष्य प्रस्तुत करती हैं । पहले उस कविता को पढ़ें, फिर उसपर कुछ विचार ...
देर रात के राग...
Tag :
  May 24, 2017, 9:49 pm
सूरज तब रोज़ की तरह काला उगा था,घर से निकाल डी टी सी की बस में बैठा वह आदमी अस्पताल जा रहा थावहाँ भर्ती अपने बच्चे के पास |पूरी रात जागी थी पत्नी वहाँ, अब पारी उसकी थी |गंतव्य से आधी दूरी तय करने तक पढ़ चुका था लगभग पूरा अखबार,बुंदेलखंड में कुपोषण से बच्चों की मौतों,उजाड़े गए आ...
देर रात के राग...
Tag :
  May 18, 2017, 2:23 pm
"कविता को करुणा, विराग या किसी सृष्टिकर्ता (?) से रुदन भरी शिकायत मत बनाओ। इसमें पराक्रम एवं साहस की आग भरो। इसे युद्ध का पैना हथियार बनाओ ।"मेरे कामरेड शशि भूषण शर्मा लिखते हैं.मेरी समझ है कि कविता की कोई तय सीमा नहीं है. सामन्य जन अपनी पीड़ा, तबाही और अहसासों को अपनी चेतना ...
देर रात के राग...
Tag :
  September 27, 2016, 7:36 pm
इसमें संदेह नहीं कि जो कविता पथान्‍वेषी और मौलिक होती है, वह अपनी भाषा और शिल्‍प ईजाद करती है, कलात्‍मक रूढ़ि‍यों के सभी मठों और गढ़ों को तोड़ने के जोखिम मोल लेती है और अभिव्‍यक्ति के ख़तरे उठाती है।यह काम निराला ने, त्रिलोचन और नागा‍र्जुन ने, मुक्तिबोध ने अपने-अपने ढं...
देर रात के राग...
Tag :
  September 26, 2016, 10:10 pm
[ Prev Page ] [ Next Page ]

Share:
  हमारीवाणी.कॉम पर ब्लॉग पंजीकृत करने की विधि बहुत सरल हैं। इसके लिए सबसे पहले प्रष्ट के सबसे ऊपर दाईं ओर लिखे ...
  हमारीवाणी पर ब्लॉग-पोस्ट के प्रकाशन के लिए 'क्लिक कोड' ब्लॉग पर लगाना आवश्यक है। इसके लिए पहले लोगिन करें, लोगिन के उपरांत खुलने वाले प...
और सन्देश...
कुल ब्लॉग्स (3739) कुल पोस्ट (174147)