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देर रात के राग

अगर कोई बड़े पैमाने का घपला नहीं होगा तो भाजपा और एन.डी.ए. गठबंधन की करारी हार तय है ! पर ई.वी.एम. में अबतक पायी गयी गड़बड़ी की दर्ज़नों खबरों और 20 लाख ई.वी.एम. मशीनों के ग़ायब होने की खबर तथा चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट के अबतक के प्रदर्शित रुख के बाद ई.वी.एम. घपला की प्रचुर संभावना ...
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  May 30, 2019, 11:11 am
#Mahesh Jaiswalअभी भी 'बुर्जुआ'ही मार रहा है, 'बुर्जुआ'ही मर रहा है और ''बुर्जुआ'ही बचा रहा है ! देश में वामपंथी आंदोलन के लगभग सौ साल तो हो गए । पता नहीं 'क्रांतिकारी'कब जनता के रक्षक की भूमिका में उतरेंगे !!Vijay Shawये क्रांतिकारी तैयार कहां कर रहे हैं, १०० साल में इन्होंने राजनैतिक चेतना ...
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  May 28, 2019, 3:34 pm
मैं उन्हें प्यार करता हूँ जो परेशानियों में भी मुस्कुरा सकते हैं, जो विपत्तियों से शक्ति हासिल करते हैं और अप्रतिष्ठा एवं निंदा जिन्हें बहादुर बनाती हैं I सिकुड़ जाना छोटे दिमागों की फ़ितरत होती है, मगर जिनके दिल मज़बूत होते हैं, और जिनका अंतःकरण उनके आचरण का समर्थन करता ...
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  May 4, 2019, 12:27 pm
भीख माँगने की संस्था सभ्य समाज के चेहरे पर सबसे बदनुमा दाग है I यह इंसानियत का अपमान है, शर्मनाक है Iबूढ़े लाचार लोगों और बच्चों को भीख माँगते देखकर मैं बेबसी और क्षोभ से भर उठती हूँ, फिर भी उनसे कुछ कहते नहीं बनता I कभी-कभी तो उन्हें कुछ दे भी देती हूँ, हालाँकि उसके बाद क्षोभ...
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  April 30, 2019, 8:47 am
(एक)एक तज़ुर्बेकार कामरेड हैं। बचपन से उन्हें देखती-जानती हूँ। सुबह-सुबह अगर उनके साथ सड़कों पर मटरगश्ती का मौक़ा मिले तो ज़िंदगी के इतने दिलचस्प किस्से सुनाते हैं कि उनसे कई अफ़सानों और नॉवेल्स तक के लिए कच्चा माल हासिल हो जाये। 'दुनिया से तजुर्बात-ओ-हवादिस की शक्ल में जो क...
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  April 29, 2019, 8:48 am
कोई किताब पढ़ने के दो मक़सद होते हैं। पहला, तुम्हें उसमें आनंद मिलता है; और दूसरा, तुम उसके बारे में डींगें हाँक सकते हो।(रसल ने यह बात अपने समाज के बारे में कही थी। हमारे यहाँ तो लोग किताबों के फ्लैप और समीक्षा पढ़कर ही उनके बारे में डींगें हाँक लेते हैं और गूगल करके उनपर गं...
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  April 28, 2019, 8:18 pm
गोदी पत्रकार : हुज़ूर, आप चूस के खाते हैं या काट के ?रामू : बे ..तिये ! मैं चूसता भी हूँ और काटता भी हूँ ! और चूसी हुई गुठलियाँ तुम्हारे सामने भी तो फेंकता हूँ बे @#$%^&*+. !(26अप्रैल, 2019)...
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  April 27, 2019, 8:26 am
पिछले पचास वर्षों के भीतर मुक्तिबोध के कृतित्व ने आलोचकों को जितना छकाया है और सुधी पाठकों को जितना तनावग्रस्त किया है, उतना किसी भी रचनाकार की रचनाओं ने नहीं किया है।एक संक्रमणकालीन समाज के चंचल और पारभासी यथार्थ को पकड़कर उसकी कलात्मक पुनर्रचना करने के लिए और उसकी...
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  April 14, 2019, 3:56 pm
--कविता कृष्‍णपल्‍लवीदेवता चाहे कितने भी कुकर्म करें, उनका देवत्‍व खण्डित नहीं होता। अवतार चाहे जितने  छल-प्रपंच-अनाचार-व्‍यभिचार करें, धार्मिक जन उन्‍हें ईश्‍वर की लीला बताते हैं। ब्रह्मा और इन्‍द्र, राम और कृष्‍ण अपने तमाम व्‍यभिचार, अनाचार, अन्‍याय और छल के बावज...
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  April 14, 2019, 3:27 pm
सामाजिक संघर्षों से पलायन किये हुए कायर लोग पूरी दुनिया के सामने , सार्वजनिक तौर पर, संशयवादी, निषेधवादी, या प्रश्नसूचक चिह्न जैसी मुद्राएँ अपनाकर खुद को सही साबित करते रहते हैं I लेकिन जब कभी वे लोग आपस में अकेले होते हैं, तो या तो शर्मिन्दगी भरी चुप्पी साधे रहते हैं, या...
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  January 27, 2019, 2:53 pm
मैं अक्सर इस उत्तर-आधुनिक रवैय्ये के बारे में सोचता हूँ , मसलन उस आदमी के बारे में जो एक बेहद सुसंस्कृत स्त्री से प्यार करता है और जानता है कि वह उससे कह नहीं सकता कि,"मैं तुम्हें पागलों की तरह प्यार करता हूँ,"क्योंकि वह जानता है कि वह जानती है ( और् यह भी वह जानती है कि वह जा...
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  January 26, 2019, 11:14 pm
(भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजन गोगोई ने सत्ता-तंत्र के दमन, नागरिक अधिकारों और भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाकर आयेदिन कोई न कोई कानूनी लड़ाई लड़ते रहने वाले सुप्रसिद्ध अधिवक्ता प्रशांत भूषण को नसीहत देते हुए कहा -- 'सकारात्मक रहिये, दुनिया ख़ूबसूरत दिखेगी I' -- https://indiane...
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  January 25, 2019, 8:44 pm
(मैं भी चाहती थीप्यार करने की कूव्वत हासिल करना !और हम सभी जानते हैं किऐसा कैसे होता है !आहिस्ता-आहिस्ता !-- मैरी ओलिवर)....मैं भी चाहती थीप्यार करने की कूव्वत हासिल करनाएक बर्बर हत्यारे समय में जीते हुए ,पकते और सीझते हुए,कुछ सपने और मंसूबे बुनते और गुनते हुए !पहले मैंने छोट...
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  January 25, 2019, 8:34 pm
वक़्त एक हज्जाम हैजो उनकी खूब हजामत बनाता हैजो नियमित रूप से खुद अपनी हजामत नहीं बनाते Iमैं तो अपने केश खुद काटती हूँ Iऐसे ही नहीं,पूरी ट्रेनिंग ली है Iदूसरों की भी हजामत बनाती हूँ Iवक़्त की मुलाज़िम नहीं( उससे तो अपनी अदावत है पुरानी )फिर भी उसका यह काम कर देती हूँअपने तरीके ...
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  January 23, 2019, 8:53 am
... पार्टी के हर कार्यकर्ता में कुछ न कुछ कमज़ोरियाँ तथा उसके काम में ख़ामियाँ होती हैं, किन्तु कमज़ोरियों की आलोचना करते समय अथवा पार्टी केन्द्रों के सम्मुख उनका विश्लेषण करते समय , आदमी को इस चीज़ का ध्यान रखना चाहिए कि वह उस सीमा से आगे न चला जाय जिसके बाद आलोचना महज एक बकव...
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  January 21, 2019, 9:38 am
.इतना डरते क्यों हो भाई !दुखों के क़रीब जाने से मर नहीं जाओगे Iतक़लीफदेह जीवन न तुम्हारा अंत कर सकता हैन ही यातना गृहों की यंत्रणा Iतुम्हारे अंत की शुरुआततुम्हारे भय से होती है Iतुम्हारा कारागृह हैतुम्हारा शांत, सुरम्य, सुरक्षित, सभ्य-शालीन नागरिक जीवन Iतुम्हारे समझौते है...
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  January 18, 2019, 1:29 pm
गोरखपुर गुरु गोरखनाथ से लेकर प्रेमचंद, फ़िराक और कई जाने-माने साहित्यकारों और चिन्तकों की धरती रही है ! यहाँ से कुछ ही दूर कबीर की निर्वाण-स्थली मगहर और बुद्ध की निर्वाण-स्थली कुशीनगर हैं ! यहाँ की प्रगतिशील-साहित्यिक सरगर्मियाँ 1960 से लेकर 1980 के दशक तक बड़े-बड़े महानगरों को ...
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  October 8, 2018, 9:22 pm
उन्होंने झटपट कहाहम अपनी ग़लती मानते हैंग़लती मनवाने वाले ख़ुश हुए किआख़िर उन्होंने ग़लती मनवा कर हीछोड़ीउधर ग़लती ने राहत की साँस ली किअभी उसे पहचाना नहीं गया---मनमोहन...
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  October 6, 2018, 1:57 pm
जिनगी क रफ़्तार तेज तौ होवै क चाही ! बिलकुल होवै क चाही ! मगर एतनो तेज ना भागो बच्चा हवा में उड़ने का माफिक, कि आजू-बाजू से जिनगिये पीछे छूट जावै -- पेड़-पौधा, नदी-नाला, चिरई-चुरुंग, इंसानियत, समाजी सरोकार, लोग-बाग--- सब का सब पीछे छूट जावै I जिनगी कवनो इनामी दौड़ ना है बच्चा ! अकेल्ले क...
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  October 6, 2018, 1:55 pm
('रविवार डाइजेस्ट'के सितम्बर '18 अंक में प्रकाशित)बहुत पहले एक मित्र ने लुगदी साहित्य की श्रेणी में आने वाले किसी लोकप्रिय अमेरिकी उपन्‍यास में वर्णित एक अर्थगर्भित प्रसंग सुनाया था। उसमें एक अकेला पूँजीपति सैकड़ों कमरों वाले अपने आलीशान विला में अपनी कई पत्नियों, रख...
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  October 1, 2018, 9:36 pm
प्यार अमर होता है, यह दुनिया का सबसे बड़ा मिथक होता है | पर मिथक भी यथार्थ के साथ ही जन्म लेता है | यह जीवन नश्वर है और प्यार भी | नश्वर ही सुन्दर है | अनश्वरता काल्पनिक है और कुरूप है |***प्यार में मुक्ति नहीं होती |प्यार में मुक्ति के लिए संघर्ष की तड़प पैदा करने की ताक़त होती है |***...
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  September 26, 2018, 10:34 pm
ये हिन्दी दिवस, मित्रता दिवस, पिता दिवस, माता दिवस, प्रेम दिवस,पृथ्वी दिवस आदि-आदि चीज़ें मेरे भीतर बेहद चिढ़ पैदा करती हैं I ई सब खलिहरों और नक़लचियों के बोरियत मिटाने और ज़िन्दगी में थोड़ा "बहार"लाने के बहाने हैं ! ये सारी चीज़ें उन्हीं को मुबारक I मैं तो बस इतना जानती हूँ कि जिस...
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  September 26, 2018, 10:07 pm
हालात आपसे जो-जो न करायें | जैसा कि आप सभी जानते हैं, मैं आदतन बहुत सभ्य-सुशील हूँ | गंदी बातें करना मेरी फ़ितरत नहीं | लेकिन समय ही अगर बहुत गन्दा हो, और सच की तरफ़, ख़ास तौर पर परदे के पीछे की सच्चाइयों की तरफ़, लोगों का ध्यान खींचना आप अपना बहुत ज़रूरी फ़र्ज़ मानते हों तो आपको न चाह...
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  August 9, 2018, 4:16 pm
*तानाशाह जब लोगों से अपने मन की बात करता हैतो वह सब कुछ कहता है जोउसके मन में कभी नहीं होता Iतब वह दरअसल अपने हृदय का सारा अन्धकारसड़कों पर उड़ेल देना चाहता है,उसे पूरे देश में फैला देना चाहता है Iतानाशाह का यह हृदयदलाल स्ट्रीट के सांड के शरीर से निकाला गया है Iकुछ दिनों तक य...
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  August 8, 2018, 9:57 pm
आछा भाई लोग, अब आपलोग ईमानदारी से दिल पर हाथ राखकर एक ठो बात बताइये I ई जो बड़का-बड़का सहर में,आ रजधानी में बड़का-बड़का लिबड़ल टाइप बामपंथी बुद्धिजीवी फैब इंडिया टाइप डिजाइनर कुरता पहिरके कॉफीहाउस, धरनास्थल-सभागार, जंतर-मंतर, इंडिया गेट, आई.आई.सी.-आई.एच.सी., मंडीहाउस जइसन इलाकन ...
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  August 5, 2018, 7:56 pm
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