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देर रात के राग

सामाजिक संघर्षों से पलायन किये हुए कायर लोग पूरी दुनिया के सामने , सार्वजनिक तौर पर, संशयवादी, निषेधवादी, या प्रश्नसूचक चिह्न जैसी मुद्राएँ अपनाकर खुद को सही साबित करते रहते हैं I लेकिन जब कभी वे लोग आपस में अकेले होते हैं, तो या तो शर्मिन्दगी भरी चुप्पी साधे रहते हैं, या...
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  January 27, 2019, 2:53 pm
मैं अक्सर इस उत्तर-आधुनिक रवैय्ये के बारे में सोचता हूँ , मसलन उस आदमी के बारे में जो एक बेहद सुसंस्कृत स्त्री से प्यार करता है और जानता है कि वह उससे कह नहीं सकता कि,"मैं तुम्हें पागलों की तरह प्यार करता हूँ,"क्योंकि वह जानता है कि वह जानती है ( और् यह भी वह जानती है कि वह जा...
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  January 26, 2019, 11:14 pm
(भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजन गोगोई ने सत्ता-तंत्र के दमन, नागरिक अधिकारों और भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाकर आयेदिन कोई न कोई कानूनी लड़ाई लड़ते रहने वाले सुप्रसिद्ध अधिवक्ता प्रशांत भूषण को नसीहत देते हुए कहा -- 'सकारात्मक रहिये, दुनिया ख़ूबसूरत दिखेगी I' -- https://indiane...
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  January 25, 2019, 8:44 pm
(मैं भी चाहती थीप्यार करने की कूव्वत हासिल करना !और हम सभी जानते हैं किऐसा कैसे होता है !आहिस्ता-आहिस्ता !-- मैरी ओलिवर)....मैं भी चाहती थीप्यार करने की कूव्वत हासिल करनाएक बर्बर हत्यारे समय में जीते हुए ,पकते और सीझते हुए,कुछ सपने और मंसूबे बुनते और गुनते हुए !पहले मैंने छोट...
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  January 25, 2019, 8:34 pm
वक़्त एक हज्जाम हैजो उनकी खूब हजामत बनाता हैजो नियमित रूप से खुद अपनी हजामत नहीं बनाते Iमैं तो अपने केश खुद काटती हूँ Iऐसे ही नहीं,पूरी ट्रेनिंग ली है Iदूसरों की भी हजामत बनाती हूँ Iवक़्त की मुलाज़िम नहीं( उससे तो अपनी अदावत है पुरानी )फिर भी उसका यह काम कर देती हूँअपने तरीके ...
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  January 23, 2019, 8:53 am
... पार्टी के हर कार्यकर्ता में कुछ न कुछ कमज़ोरियाँ तथा उसके काम में ख़ामियाँ होती हैं, किन्तु कमज़ोरियों की आलोचना करते समय अथवा पार्टी केन्द्रों के सम्मुख उनका विश्लेषण करते समय , आदमी को इस चीज़ का ध्यान रखना चाहिए कि वह उस सीमा से आगे न चला जाय जिसके बाद आलोचना महज एक बकव...
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  January 21, 2019, 9:38 am
.इतना डरते क्यों हो भाई !दुखों के क़रीब जाने से मर नहीं जाओगे Iतक़लीफदेह जीवन न तुम्हारा अंत कर सकता हैन ही यातना गृहों की यंत्रणा Iतुम्हारे अंत की शुरुआततुम्हारे भय से होती है Iतुम्हारा कारागृह हैतुम्हारा शांत, सुरम्य, सुरक्षित, सभ्य-शालीन नागरिक जीवन Iतुम्हारे समझौते है...
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  January 18, 2019, 1:29 pm
गोरखपुर गुरु गोरखनाथ से लेकर प्रेमचंद, फ़िराक और कई जाने-माने साहित्यकारों और चिन्तकों की धरती रही है ! यहाँ से कुछ ही दूर कबीर की निर्वाण-स्थली मगहर और बुद्ध की निर्वाण-स्थली कुशीनगर हैं ! यहाँ की प्रगतिशील-साहित्यिक सरगर्मियाँ 1960 से लेकर 1980 के दशक तक बड़े-बड़े महानगरों को ...
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  October 8, 2018, 9:22 pm
उन्होंने झटपट कहाहम अपनी ग़लती मानते हैंग़लती मनवाने वाले ख़ुश हुए किआख़िर उन्होंने ग़लती मनवा कर हीछोड़ीउधर ग़लती ने राहत की साँस ली किअभी उसे पहचाना नहीं गया---मनमोहन...
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  October 6, 2018, 1:57 pm
जिनगी क रफ़्तार तेज तौ होवै क चाही ! बिलकुल होवै क चाही ! मगर एतनो तेज ना भागो बच्चा हवा में उड़ने का माफिक, कि आजू-बाजू से जिनगिये पीछे छूट जावै -- पेड़-पौधा, नदी-नाला, चिरई-चुरुंग, इंसानियत, समाजी सरोकार, लोग-बाग--- सब का सब पीछे छूट जावै I जिनगी कवनो इनामी दौड़ ना है बच्चा ! अकेल्ले क...
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  October 6, 2018, 1:55 pm
('रविवार डाइजेस्ट'के सितम्बर '18 अंक में प्रकाशित)बहुत पहले एक मित्र ने लुगदी साहित्य की श्रेणी में आने वाले किसी लोकप्रिय अमेरिकी उपन्‍यास में वर्णित एक अर्थगर्भित प्रसंग सुनाया था। उसमें एक अकेला पूँजीपति सैकड़ों कमरों वाले अपने आलीशान विला में अपनी कई पत्नियों, रख...
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  October 1, 2018, 9:36 pm
प्यार अमर होता है, यह दुनिया का सबसे बड़ा मिथक होता है | पर मिथक भी यथार्थ के साथ ही जन्म लेता है | यह जीवन नश्वर है और प्यार भी | नश्वर ही सुन्दर है | अनश्वरता काल्पनिक है और कुरूप है |***प्यार में मुक्ति नहीं होती |प्यार में मुक्ति के लिए संघर्ष की तड़प पैदा करने की ताक़त होती है |***...
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  September 26, 2018, 10:34 pm
ये हिन्दी दिवस, मित्रता दिवस, पिता दिवस, माता दिवस, प्रेम दिवस,पृथ्वी दिवस आदि-आदि चीज़ें मेरे भीतर बेहद चिढ़ पैदा करती हैं I ई सब खलिहरों और नक़लचियों के बोरियत मिटाने और ज़िन्दगी में थोड़ा "बहार"लाने के बहाने हैं ! ये सारी चीज़ें उन्हीं को मुबारक I मैं तो बस इतना जानती हूँ कि जिस...
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  September 26, 2018, 10:07 pm
हालात आपसे जो-जो न करायें | जैसा कि आप सभी जानते हैं, मैं आदतन बहुत सभ्य-सुशील हूँ | गंदी बातें करना मेरी फ़ितरत नहीं | लेकिन समय ही अगर बहुत गन्दा हो, और सच की तरफ़, ख़ास तौर पर परदे के पीछे की सच्चाइयों की तरफ़, लोगों का ध्यान खींचना आप अपना बहुत ज़रूरी फ़र्ज़ मानते हों तो आपको न चाह...
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  August 9, 2018, 4:16 pm
*तानाशाह जब लोगों से अपने मन की बात करता हैतो वह सब कुछ कहता है जोउसके मन में कभी नहीं होता Iतब वह दरअसल अपने हृदय का सारा अन्धकारसड़कों पर उड़ेल देना चाहता है,उसे पूरे देश में फैला देना चाहता है Iतानाशाह का यह हृदयदलाल स्ट्रीट के सांड के शरीर से निकाला गया है Iकुछ दिनों तक य...
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  August 8, 2018, 9:57 pm
आछा भाई लोग, अब आपलोग ईमानदारी से दिल पर हाथ राखकर एक ठो बात बताइये I ई जो बड़का-बड़का सहर में,आ रजधानी में बड़का-बड़का लिबड़ल टाइप बामपंथी बुद्धिजीवी फैब इंडिया टाइप डिजाइनर कुरता पहिरके कॉफीहाउस, धरनास्थल-सभागार, जंतर-मंतर, इंडिया गेट, आई.आई.सी.-आई.एच.सी., मंडीहाउस जइसन इलाकन ...
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  August 5, 2018, 7:56 pm
1914 में आज ही के दिन जर्मन सामाजिक जनवादी पार्टी के संसदीय ब्लॉक ने तय किया कि वह अगले दिन संसद में युद्ध ऋण के पक्ष में वोट करेगा I ऐसा करके उन्होंने सभी साम्राज्यवादी युद्धों का विरोध करने की स्थापित मार्क्सवादी नीति को तिलांजलि दे दी I लेनिन ने इन संसदीय वामपंथी कुकर्...
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  August 5, 2018, 7:51 pm
आप अब भी सोच रहे हैं कि आपके आसपास घट रही घटनाएँ छिटफुट हैं, ये दुर्दिन बीत जायेंगे और ज़िन्दगी फिर रेंगती-घिसटती ढर्रे पर चलने लगेगी I आप सोच रहे हैं कि बर्बर शायद आपकी बस्ती से बहुत दूर हैं, या शायद इतिहास में दफ़न हो चुके हैं I आप फिर भी बस्ती के बाहर खड़े हैं और सोच रहे हैं क...
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  August 5, 2018, 4:42 pm
कवि होना ऐसा हैजैसे जीवन के प्रति निष्ठा रखनाहर मुश्किल मेंमानो खुद अपनी उधेड़कर कोमल चमड़ीदेना लहू उड़ेल अन्य लोगों के दिल में I--- सेर्गेई येसेनिन...
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  August 5, 2018, 4:39 pm
हमारा समाज अन्दर से इतना सड़ चुका है, इतना सड़ चुका है कि कोई छोटे-मोटे सामाजिक आन्दोलन इसे व्याधि-मुक्त कर ही नहीं सकते I फासिज्म का बर्बर-असभ्य उभार तो इसका एक आयाम है ! पूरा समाज तरह-तरह की निरंकुश मानवद्रोही प्रवृत्तियों की नर्सरी बन चुका है I 200 वर्षों की गुलामी के बाद जन...
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  August 5, 2018, 4:37 pm
मार्क्सवाद के कुछ विरोधी इसे 19वीं सदी के पूर्वाग्रहों पर आधारित एक पुराना पड़ चुका आर्थिक जड़सूत्र कहकर खारिज करते हैं। मार्क्सवाद कभी भी जड़सूत्र नहीं था। महज़ 19वीं सदी में सूत्रबद्ध किये जाने के कारण यह पुराना पड़ चुका और गलत नहीं हो जाता, ठीक वैसे ही जैसे गौस, फैराडे और ड...
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  August 5, 2018, 2:40 pm
हांस आइस्लर ने एक जगह लिखा है कि ब्रेष्ट पारंपरिक संगीत के रूपवाद से बहुत चिढ़ते थे। उनका मानना था कि सिम्फ़नी कंसर्ट और ऑपेरा सिर्फ़ ‘इमोशनल कन्फ्यूजन’ पैदा करते हैं। वह संगीत से ‘रीज़न’ की -- तर्कणा की माँग करते थे।ब्रेष्ट तो संगीत से ‘रीजन'की माँग करते थे, लेकिन अगर आप ह...
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  August 5, 2018, 2:33 pm
आरे भयवा, ई 'टाराई'के जो चेयरमैन हैं, सरमाजी, ई तो गजब ओभरकौन्फिडेंट चपाट निकले ! खुल्ला चाईलेन्ज दे दिए की हमरा आधार न. से हमरा पाराईभेट कौनफीडेन्सिअल जानकारी निकाल के दिखाओ ! ओन्ने थोड़हीं देर में फ्रानस का एक ठो खंच्चड हैकर सब निकाल के दिखा दिया I सरमाजी का मुंह चोखा हो ग...
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  August 5, 2018, 2:16 pm
अमूर्त आदर्श स्त्री की छवि एक फरेब है | उस स्त्री की बात करो जो वास्तविक है, ठोस है, यथार्थ है |*उदासी एक मनो-रासायनिक अवस्था है जो विरेचन (कैथार्सिस) का काम करती है |*विशुद्ध मनोवैज्ञानिक लोग और मनश्चिकित्सक इंसानी मामलों के रहस्य न पूरी तरह जानते हैं, न सुलझा सकते हैं, क्य...
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  August 5, 2018, 1:23 pm
जब चारो ओर अहर्निश हत्या, आतंक और उन्माद की बारिश हो रही हो, तुम निश्चिन्त, असम्पृक्त, अपने एकांत में बैठे प्यार कर सकते हो और प्यार की "निष्कलुष"कविताएँ रच सकते हो ? अगर हाँ, तो तुम या तो एक कसाई हो, या फिर अपने भविष्य से अनजान, आने वाली सुबह ज़िबह हो जाने वाला बकरा !**नहीं दोस्...
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  August 5, 2018, 1:09 pm
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