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Blog: खामोश पहलू

Blogger: Ketan Kanaujia
 दूर... इक किनारे... वक़्त की परतों को पार करके... जब हम अपने बीते कलों का हिसाब करते हैं तो अक्सर सौदा सिफ़र होता है... इंसान अपने ऑप्शन खुद चुनता है... फिज़ूल जो तक़दीर को कोसते फिरते हैं... कायर होते हैं. वक़्त की हर परत अपने आप में सैकड़ो कहानियाँ जज़्ब किए रहती है और इन कहानियों के ना... Read more
clicks 145 View   Vote 0 Like   9:43pm 26 May 2014 #नज्में
Blogger: Ketan Kanaujia
दोस्ती के पांच मक़ाम होते हैं.. कैफ़ियत, ख़ुमारी, मोहब्बत, आवारगीऔर ज़िन्दगी.. और ख़ासियत ये है के कोई मक़ाम दूसरे से अलहदा नहीं होता.. ये सारे आपस में ओवेरलैप करते हैं.. एक मसलसल तरीके से. इसमें शिकवे भी आते हैं.. गिले भी होते हैं.. अश्क़ बहते हैं, रुकते भी हैं.. जाम छलकते हैं और शीशे भी... Read more
clicks 133 View   Vote 0 Like   3:45am 3 Jan 2014 #तफ़री में
Blogger: Ketan Kanaujia
 ख़यालखूबसूरतहोतेहैं.. गोयाजोखूबसूरतनहीं.. वोख़यालनहीं.. डेफ़िनिशनबसइतनीभरहै.. इनख्यालोंकीदुनियाभीअजीबहोतीहै.. कभीचाहकरभीकुछनहींआतेऔरकभीनचाहतेहुएभीदिलकेदरवाज़ेखटखटादेतेहैं.. हाँसाहब.. दिलके.. ख्यालोंकीदुनियामेंदमागकाकोईकामनहीं.. उसेछोड़दें साइंसदानोंकेलिए..... Read more
clicks 143 View   Vote 0 Like   9:40pm 3 Dec 2013 #तफ़री में
Blogger: Ketan Kanaujia
वक़्त तय रवायतें नहीं निभाता... अपनी सहूलियत से चलता है... रौशनी से कतई जुदा... इसका छोर नहीं होता कोई... कोई सोर्स नहीं... बस एक्सटेंड होता रहता है हर पल...  हम आप बस एक छोटा सा हिस्सा भर हैं... और ऐसे ही अनगिनत छोटे बड़े हिस्सों से ये कायनात तखलीक हुई है... ख़ूबसूरती इसी में है ये हिस... Read more
clicks 186 View   Vote 0 Like   5:51pm 13 Nov 2013 #डायरेक्ट दिल से
Blogger: Ketan Kanaujia
हर ग़ज़ल का अपना एक नशा होता है, जिसके ख़ुमार का मज़ा ग़ज़ल कहने वाला और सुनने वाला दोनों लेते हैं... ग़ालिब, मीर, दाग़, फैज़, फ़राज़, फ़िराक, इकबाल, बशीर, कैफ़ी, जिगर...  सभी ने अपने पढ़ने और सुनने वालो को बे-इन्तेहा अजीज़ सुखन दिए हैं... शायर रहे न रहे उसकी ग़ज़ल किसी न किसी बज़्म को ता-वक़्त र... Read more
clicks 155 View   Vote 0 Like   5:01pm 22 Oct 2013 #ग़ज़ल
Blogger: Ketan Kanaujia
'सुनो... अब भी सुबह जगने में उतनी ही देर तक नाटक करते हो''नहीं... अब सुबह किसी का फोन नहीं आता... मगर रात को मोबाइल पूरा चार्ज करके सोने की आदत आज भी नहीं गयी...' कितनी शामें... कितनी सुबहें गुज़र चुकी हैं उस वादे को... मगर गाहे बगाहे कोई न कोई खानाबदोश लम्हा माज़ी पे दस्... Read more
clicks 265 View   Vote 0 Like   3:48am 20 Oct 2013 #डायरेक्ट दिल से
Blogger: Ketan Kanaujia
न तू कह सके न मैं जो.. वो निगाहों से बयाँ है.. लब काँपते हैं दोनों.. बस लम्स दरमियाँ है.. यूँ ही रात हो गयी है.. एक शाम ढलते ढलते .. इस मंज़र-ए-मोहब्बत में पनपती आरज़ू ये.. बड़ी मुद्दतों से मुझको थी तुम्हारी जुस्तजू ये.. मिल ही गया है आखिर तेरा साथ मिलते मिलते.. शमे-अंजुमन तो रोशन ह... Read more
clicks 174 View   Vote 0 Like   11:04am 2 Feb 2013 #Extensions
Blogger: Ketan Kanaujia
सुनो..उसबारकी सर्दियोंमें जबदर्दबढ़गयाथामेरेपैरोंका तुमनेज़िद करकेमुझे भरीदुपहरीमेंघुमायाथा.. पहाड़ीकेऊपरवालेमंदिरमें घंटोतकबैठेरहेथेहम..तुम्हारीबातोंमेंकैसेलम्होंसागयाथावोदिन कोशिशकरो..इसबारगरमिलें तोएकगठरीमें अपनेयहाँकीधूप साथलेतीआना मैंनेप... Read more
clicks 171 View   Vote 0 Like   10:00am 20 Jan 2013 #तेरे लिए
Blogger: Ketan Kanaujia
वक़्त का इक समन्दर है लम्हों की बूंदों से जिसकोये शाइर कब से भर रहा है मौज माज़ी की आती है कुछ निशाँ छोड़ जाती है साहिल बिखर जाता है  रेत पर कुछ उभर आता है दिखता है..ख्वाहिशों की सीपियाँ है.. ख्वाबों के मोती है.. तवील सरगोशियों के कुछ टूटे हुए टुकड़े हैं..... Read more
clicks 148 View   Vote 0 Like   6:05pm 14 Dec 2012 #तेरे लिए
Blogger: Ketan Kanaujia
मुझे हमेशा से लगता रहा है के हर किसी के भीतर कोई न कोई ऐसा शख्स रहता है जिसका तार्रुफ़ सिर्फ आपसे से रहता है ..  जब आप बेहद अकेला महसूस कर रहे होते हैं तो अक्सर उससे गुफ्तगू शुरू हो जाती है .. हो सकता है सबके साथ ऐसा न हो मगर मेरे साथ बारहा होता है .. जाने घंटो कितनी देर बैठे बै... Read more
clicks 193 View   Vote 0 Like   3:44pm 22 Nov 2012 #गुलज़ार
Blogger: Ketan Kanaujia
तुम्हेंशायदनहींपता..आखिरबार.. जबमिलेथेहम, कुछआवाराअल्फ़ाज़ोंको.. इकसफ़हेमेंबांधकर..तेरेपहलूमेंछिपाआयाथामैं,येवहीकागज़है.. वहीअल्फ़ाज़.. आकरदेखो.. बसएकफ़र्क़है,इसनज़्मसेअब..  तेरीखुशबूआतीहै..--2212 Hrs4th November, 2012Mumbai... Read more
clicks 182 View   Vote 0 Like   4:50am 17 Nov 2012 #तेरे लिए
Blogger: Ketan Kanaujia
यूँ तो वक़्त के परे कोई नहीं देख पाता... और लोग कहते हैं के इसकी रफ़्तार भी बड़ी तेज़ होती है... साइंसदान कोशिश कर रहे हैं टाइम मशीन ईजाद करने की... वो बन जाये तो शायद इंसान वक़्त का सफ़र तय कर ले... सच कहूँ तो मुझे बड़ी बेसब्री से इंतज़ार है इस टाइम मशीन का...  आप में से शायद बह... Read more
clicks 299 View   Vote 0 Like   6:54pm 22 Oct 2012 #कुछ यूँ ही...
Blogger: Ketan Kanaujia
बड़े दिनों बाद... कुछ पुराने पन्नों की तफ़तीश से पैदाइश हुई है इस नज़्म की... इन सफहों ने शायद  खुद में समेट ली है इतने बरसों की नमी...  दुछत्ती की सीलनमें तभीधुंधला से गए हैं सारे अल्फाज़... बस इक 'तेरा नाम' ही नुमाया है...जिसके चलतेमेरी नज़्म मुकम्मल है अब तक... --2204 Hrs.5th March, 2012Lakhimpur Kheri... Read more
clicks 183 View   Vote 0 Like   5:48pm 5 Mar 2012 #
Blogger: Ketan Kanaujia
गए रोज़ इन दीवारों कीसीलन बढ़ गयी सी लगती है... पिछले सावन में कुछ छींटों को तुमने चुल्लू से उछाला था उसी नमी को शायद खुद में समेट रखा है अब तक इन दरारों ने मकाँ की --2134 Hrs.22nd April, 2011Navi Mumbai... Read more
clicks 148 View   Vote 0 Like   4:40pm 28 Apr 2011 #नज्में
Blogger: Ketan Kanaujia
काफी दिनों बाद कोई पोस्ट करने जा रहा हूँ.. बीते दिनों मसरूफियत ने कुछ घेर सा रखा था सो वक्त नहीं निकाल पाया कुछ पोस्ट करने का.. मग़र बकरे की माँ कब तक खैर मानती आख़िर.. इसलिए आज आ ही गया शायद ही कोई ऐसा पुराने गानों का आशिक हो जिसने हेमंत कुमारका नाम न सुना हो.. और जिसने हेमंत ... Read more
clicks 187 View   Vote 0 Like   11:35am 5 Jan 2010 #गुलज़ार
Blogger: Ketan Kanaujia
दहकती शब के दामन में उस रोज़तेरी साँसों से जब टकराई थी मेरी सांसेंसरगोशियों की लवों से जबहमने उजली की थी रात की हथेलीउस तवील लम्स के दौरांरफ्ता-रफ्ता उठती तपिश नेजलाई थी कुछ तेरे भीतरकुछ मेरे भीतर की चिंगारीउस रात आखिर बारजिन बुझते रिश्तों का अलाव तापा था हमनेतड़के ... Read more
clicks 145 View   Vote 0 Like   10:44am 4 Nov 2009 #नज्में
Blogger: Ketan Kanaujia
लगती हैं रोज़ लम्बी.. लम्बी सी ये कतारेंचढ़ चढ़ के एक दूजे.. के ऊपर से हैं सब बढ़तेफैली हुई है हर सू धूपों की ये खुशबूमावों के चढावों से भर गए हैं इबादतघरसिक्कों और नोटों के गट्ठे चढ़ चुके हैंकहीं पंडों की आरती है.. कहीं मौलवी की अजां हैफ़लक पर हरि ॐ.. या अल्लाह की पुकारें है... Read more
clicks 206 View   Vote 0 Like   12:16pm 11 Oct 2009 #नज्में
Blogger: Ketan Kanaujia
तुमने इक मोड़ पर अचानक जबमुझको 'गुलज़ार' कहके दी आवाज़ एक सीपी से खुल गया मोती मुझको इक मानी मिल गए जैसे'गुलज़ार'.. इस नाम को किसी त्आर्रुफ़ की ज़रूरत नहीं.. एक अलग अंदाज़.. एक अलग-अंजान सी तरतीब.. एक सफ़ेद कुरता.. एक पुराना चश्मा.. और दरिया के जैसे अज़ीम तसव्वुर.. किसी और का तो ... Read more
clicks 183 View   Vote 0 Like   12:32pm 4 Oct 2009 #गुलज़ार
Blogger: Ketan Kanaujia
कहीं चाँदनी पिघली होगी शायदकहीं रोशनी बरसी होगी शायद सफहों में कुछ नूर क़ैद था बरसों सेधुंधली सी फ़लक में जो गुम गया था गर्द झाड़ी है तूने तो निकल आया है आज उफ़क पर तारीखों के बाद इस रोज़न से दफ़्‌अतन मुझेमेरे हिस्से का चाँद नज़र आया है.. --1510 Hrs16th September, 2009Bangalore... Read more
clicks 168 View   Vote 0 Like   3:04pm 30 Sep 2009 #नज्में
Blogger: Ketan Kanaujia
वो तस्वीर तिरछी है दीवार पे अब भीकॉफी के वो प्याले यूँ ही मेज पे रखे हैंना गयी हैं सिलवटें तेरे छुअन की अब तकना हटा है तेरी गर्म साँसों का वो दागतकिये में अब भी है तेरे गेसू की खुशबूबिस्तर से अब भी लिपटी है वो चादरज़ुम्बिश हर क़तरे में बाकी है कुछ ऐसेके ये कमरा अभी तक बिख... Read more
clicks 162 View   Vote 0 Like   1:18pm 15 Sep 2009 #नज्में
Blogger: Ketan Kanaujia
ज़िन्दगी का वो मोड़ जब बदलाव अपने शबाब पर होता है.. कई चीज़ें बड़ी रफ़्तार से बदलती हैं.. शायद जवानी ही है.. यही वो दौर होता है जब कितनी जल्दी चेहरे के रोयें, दाढ़ीकी शक्ल इख्तियार कर लेते हैं - पता ही नहीं चलता.. किस तरह ज़िदें, ज़िम्मेदारियां बन जाती हैं - पता ही नहींचलता.. कि... Read more
clicks 160 View   Vote 0 Like   8:50am 2 Sep 2009 #तफ़री में
Blogger: Ketan Kanaujia
' एक बार देखा एक पेड़ को,ज़मीन पर उल्टा वो पड़ा था..जड़ें थी हवा में झूल रहीं,शाखों के सहारे वो खडा था.. '' झूमे था खुले चमन में वो,मस्तियाँ ही मस्तियाँ चढ़ी थी..मिली थी आज़ादी ज़मीं से आज,इस बात की ख़ुशी भी बड़ी थी.. '' परिंदे रहे थे पूछ.. उससे,घोंसलों का हमारे क्या होगा..वो बोला जा... Read more
clicks 177 View   Vote 0 Like   3:33pm 30 Aug 2009 #कुछ यूँ ही...
Blogger: Ketan Kanaujia
उस रात जबकुछ संजीदा शिकायतें अपने खुश्क लबों पे लिएमेरे कमरे पर तुम आई थी..और बिस्तर पर चादर की चंद सिलवटों के दरमियाँ बिखरेउन तमाम तनहा लम्हों को बिना पीछे देखे समेट ले गई थी..तुमको शायद नही पता.. एक चीज़ जो तुम भूल गई थी.. आज भी साहिल करीबजाने कितने खामोश किस्से अपने हाथ... Read more
clicks 156 View   Vote 0 Like   5:14pm 24 Aug 2009 #नज्में
Blogger: Ketan Kanaujia
"बस आधे घंटे रुकेगी यहाँ.. जिसको खाना पीना है खा लो भाई..", कंडक्टर ने चिल्लाते हुए आवाज़ लगायी तो मेरी आँख खुल गयी.. घड़ी दिन के १ का वक़्त दिखा रही थी.. मथुरा से दिल्ली का सफ़र यूँ तो कोई खास लम्बा नहीं है पर हम हिन्दोस्तानियों की मैनुफैक्चरिंग में ही ये दिक्कत है के अक्सर बस... Read more
clicks 137 View   Vote 0 Like   1:00pm 22 Aug 2009 #कुछ यूँ ही...
Blogger: Ketan Kanaujia
आज भी किसी अधूरी शाम को जो एक किनारे बैठकर हिसाब करता हूँ.. जो ज़िन्दगी के बहीखाते में कुछ कर्ज़े ही बाकी दिखाई देते हैं.. कभी कभी लगता है के या तो हिसाब करना मुझे आया नहीं.. या फिर तजुर्बों की रफ़्तार से ज्यादा तेजी इस हिसाब की है.. गुलज़ार साहब की एक त्रिवेणी है.. कुछ ख्वाब... Read more
clicks 169 View   Vote 0 Like   6:50pm 14 Aug 2009 #कुछ यूँ ही...
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