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खामोश पहलू

 दूर... इक किनारे... वक़्त की परतों को पार करके... जब हम अपने बीते कलों का हिसाब करते हैं तो अक्सर सौदा सिफ़र होता है... इंसान अपने ऑप्शन खुद चुनता है... फिज़ूल जो तक़दीर को कोसते फिरते हैं... कायर होते हैं. वक़्त की हर परत अपने आप में सैकड़ो कहानियाँ जज़्ब किए रहती है और इन कहानियों के ना...
खामोश पहलू...
Tag :नज्में
  May 27, 2014, 3:13 am
दोस्ती के पांच मक़ाम होते हैं.. कैफ़ियत, ख़ुमारी, मोहब्बत, आवारगीऔर ज़िन्दगी.. और ख़ासियत ये है के कोई मक़ाम दूसरे से अलहदा नहीं होता.. ये सारे आपस में ओवेरलैप करते हैं.. एक मसलसल तरीके से. इसमें शिकवे भी आते हैं.. गिले भी होते हैं.. अश्क़ बहते हैं, रुकते भी हैं.. जाम छलकते हैं और शीशे भी...
खामोश पहलू...
Tag :तफ़री में
  January 3, 2014, 9:15 am
 ख़यालखूबसूरतहोतेहैं.. गोयाजोखूबसूरतनहीं.. वोख़यालनहीं.. डेफ़िनिशनबसइतनीभरहै.. इनख्यालोंकीदुनियाभीअजीबहोतीहै.. कभीचाहकरभीकुछनहींआतेऔरकभीनचाहतेहुएभीदिलकेदरवाज़ेखटखटादेतेहैं.. हाँसाहब.. दिलके.. ख्यालोंकीदुनियामेंदमागकाकोईकामनहीं.. उसेछोड़दें साइंसदानोंकेलिए.....
खामोश पहलू...
Tag :तफ़री में
  December 4, 2013, 3:10 am
वक़्त तय रवायतें नहीं निभाता... अपनी सहूलियत से चलता है... रौशनी से कतई जुदा... इसका छोर नहीं होता कोई... कोई सोर्स नहीं... बस एक्सटेंड होता रहता है हर पल...  हम आप बस एक छोटा सा हिस्सा भर हैं... और ऐसे ही अनगिनत छोटे बड़े हिस्सों से ये कायनात तखलीक हुई है... ख़ूबसूरती इसी में है ये हिस...
खामोश पहलू...
Tag :डायरेक्ट दिल से
  November 13, 2013, 11:21 pm
हर ग़ज़ल का अपना एक नशा होता है, जिसके ख़ुमार का मज़ा ग़ज़ल कहने वाला और सुनने वाला दोनों लेते हैं... ग़ालिब, मीर, दाग़, फैज़, फ़राज़, फ़िराक, इकबाल, बशीर, कैफ़ी, जिगर...  सभी ने अपने पढ़ने और सुनने वालो को बे-इन्तेहा अजीज़ सुखन दिए हैं... शायर रहे न रहे उसकी ग़ज़ल किसी न किसी बज़्म को ता-वक़्त र...
खामोश पहलू...
Tag :ग़ज़ल
  October 22, 2013, 10:31 pm
'सुनो... अब भी सुबह जगने में उतनी ही देर तक नाटक करते हो''नहीं... अब सुबह किसी का फोन नहीं आता... मगर रात को मोबाइल पूरा चार्ज करके सोने की आदत आज भी नहीं गयी...' कितनी शामें... कितनी सुबहें गुज़र चुकी हैं उस वादे को... मगर गाहे बगाहे कोई न कोई खानाबदोश लम्हा माज़ी पे दस्...
खामोश पहलू...
Tag :डायरेक्ट दिल से
  October 20, 2013, 9:18 am
न तू कह सके न मैं जो.. वो निगाहों से बयाँ है.. लब काँपते हैं दोनों.. बस लम्स दरमियाँ है.. यूँ ही रात हो गयी है.. एक शाम ढलते ढलते .. इस मंज़र-ए-मोहब्बत में पनपती आरज़ू ये.. बड़ी मुद्दतों से मुझको थी तुम्हारी जुस्तजू ये.. मिल ही गया है आखिर तेरा साथ मिलते मिलते.. शमे-अंजुमन तो रोशन ह...
खामोश पहलू...
Tag :Extensions
  February 2, 2013, 4:34 pm
सुनो..उसबारकी सर्दियोंमें जबदर्दबढ़गयाथामेरेपैरोंका तुमनेज़िद करकेमुझे भरीदुपहरीमेंघुमायाथा.. पहाड़ीकेऊपरवालेमंदिरमें घंटोतकबैठेरहेथेहम..तुम्हारीबातोंमेंकैसेलम्होंसागयाथावोदिन कोशिशकरो..इसबारगरमिलें तोएकगठरीमें अपनेयहाँकीधूप साथलेतीआना मैंनेप...
खामोश पहलू...
Tag :तेरे लिए
  January 20, 2013, 3:30 pm
वक़्त का इक समन्दर है लम्हों की बूंदों से जिसकोये शाइर कब से भर रहा है मौज माज़ी की आती है कुछ निशाँ छोड़ जाती है साहिल बिखर जाता है  रेत पर कुछ उभर आता है दिखता है..ख्वाहिशों की सीपियाँ है.. ख्वाबों के मोती है.. तवील सरगोशियों के कुछ टूटे हुए टुकड़े हैं.....
खामोश पहलू...
Tag :तेरे लिए
  December 14, 2012, 11:35 pm
मुझे हमेशा से लगता रहा है के हर किसी के भीतर कोई न कोई ऐसा शख्स रहता है जिसका तार्रुफ़ सिर्फ आपसे से रहता है ..  जब आप बेहद अकेला महसूस कर रहे होते हैं तो अक्सर उससे गुफ्तगू शुरू हो जाती है .. हो सकता है सबके साथ ऐसा न हो मगर मेरे साथ बारहा होता है .. जाने घंटो कितनी देर बैठे बै...
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Tag :गुलज़ार
  November 22, 2012, 9:14 pm
तुम्हेंशायदनहींपता..आखिरबार.. जबमिलेथेहम, कुछआवाराअल्फ़ाज़ोंको.. इकसफ़हेमेंबांधकर..तेरेपहलूमेंछिपाआयाथामैं,येवहीकागज़है.. वहीअल्फ़ाज़.. आकरदेखो.. बसएकफ़र्क़है,इसनज़्मसेअब..  तेरीखुशबूआतीहै..--2212 Hrs4th November, 2012Mumbai...
खामोश पहलू...
Tag :तेरे लिए
  November 17, 2012, 10:20 am
यूँ तो वक़्त के परे कोई नहीं देख पाता... और लोग कहते हैं के इसकी रफ़्तार भी बड़ी तेज़ होती है... साइंसदान कोशिश कर रहे हैं टाइम मशीन ईजाद करने की... वो बन जाये तो शायद इंसान वक़्त का सफ़र तय कर ले... सच कहूँ तो मुझे बड़ी बेसब्री से इंतज़ार है इस टाइम मशीन का...  आप में से शायद बह...
खामोश पहलू...
Tag :कुछ यूँ ही...
  October 23, 2012, 12:24 am
बड़े दिनों बाद... कुछ पुराने पन्नों की तफ़तीश से पैदाइश हुई है इस नज़्म की... इन सफहों ने शायद  खुद में समेट ली है इतने बरसों की नमी...  दुछत्ती की सीलनमें तभीधुंधला से गए हैं सारे अल्फाज़... बस इक 'तेरा नाम' ही नुमाया है...जिसके चलतेमेरी नज़्म मुकम्मल है अब तक... --2204 Hrs.5th March, 2012Lakhimpur Kheri...
खामोश पहलू...
Tag :
  March 5, 2012, 11:18 pm
गए रोज़ इन दीवारों कीसीलन बढ़ गयी सी लगती है... पिछले सावन में कुछ छींटों को तुमने चुल्लू से उछाला था उसी नमी को शायद खुद में समेट रखा है अब तक इन दरारों ने मकाँ की --2134 Hrs.22nd April, 2011Navi Mumbai...
खामोश पहलू...
Tag :नज्में
  April 28, 2011, 10:10 pm
काफी दिनों बाद कोई पोस्ट करने जा रहा हूँ.. बीते दिनों मसरूफियत ने कुछ घेर सा रखा था सो वक्त नहीं निकाल पाया कुछ पोस्ट करने का.. मग़र बकरे की माँ कब तक खैर मानती आख़िर.. इसलिए आज आ ही गया शायद ही कोई ऐसा पुराने गानों का आशिक हो जिसने हेमंत कुमारका नाम न सुना हो.. और जिसने हेमंत ...
खामोश पहलू...
Tag :गुलज़ार
  January 5, 2010, 5:05 pm
दहकती शब के दामन में उस रोज़तेरी साँसों से जब टकराई थी मेरी सांसेंसरगोशियों की लवों से जबहमने उजली की थी रात की हथेलीउस तवील लम्स के दौरांरफ्ता-रफ्ता उठती तपिश नेजलाई थी कुछ तेरे भीतरकुछ मेरे भीतर की चिंगारीउस रात आखिर बारजिन बुझते रिश्तों का अलाव तापा था हमनेतड़के ...
खामोश पहलू...
Tag :नज्में
  November 4, 2009, 4:14 pm
लगती हैं रोज़ लम्बी.. लम्बी सी ये कतारेंचढ़ चढ़ के एक दूजे.. के ऊपर से हैं सब बढ़तेफैली हुई है हर सू धूपों की ये खुशबूमावों के चढावों से भर गए हैं इबादतघरसिक्कों और नोटों के गट्ठे चढ़ चुके हैंकहीं पंडों की आरती है.. कहीं मौलवी की अजां हैफ़लक पर हरि ॐ.. या अल्लाह की पुकारें है...
खामोश पहलू...
Tag :नज्में
  October 11, 2009, 5:46 pm
तुमने इक मोड़ पर अचानक जबमुझको 'गुलज़ार' कहके दी आवाज़ एक सीपी से खुल गया मोती मुझको इक मानी मिल गए जैसे'गुलज़ार'.. इस नाम को किसी त्आर्रुफ़ की ज़रूरत नहीं.. एक अलग अंदाज़.. एक अलग-अंजान सी तरतीब.. एक सफ़ेद कुरता.. एक पुराना चश्मा.. और दरिया के जैसे अज़ीम तसव्वुर.. किसी और का तो ...
खामोश पहलू...
Tag :गुलज़ार
  October 4, 2009, 6:02 pm
कहीं चाँदनी पिघली होगी शायदकहीं रोशनी बरसी होगी शायद सफहों में कुछ नूर क़ैद था बरसों सेधुंधली सी फ़लक में जो गुम गया था गर्द झाड़ी है तूने तो निकल आया है आज उफ़क पर तारीखों के बाद इस रोज़न से दफ़्‌अतन मुझेमेरे हिस्से का चाँद नज़र आया है.. --1510 Hrs16th September, 2009Bangalore...
खामोश पहलू...
Tag :नज्में
  September 30, 2009, 8:34 pm
वो तस्वीर तिरछी है दीवार पे अब भीकॉफी के वो प्याले यूँ ही मेज पे रखे हैंना गयी हैं सिलवटें तेरे छुअन की अब तकना हटा है तेरी गर्म साँसों का वो दागतकिये में अब भी है तेरे गेसू की खुशबूबिस्तर से अब भी लिपटी है वो चादरज़ुम्बिश हर क़तरे में बाकी है कुछ ऐसेके ये कमरा अभी तक बिख...
खामोश पहलू...
Tag :नज्में
  September 15, 2009, 6:48 pm
ज़िन्दगी का वो मोड़ जब बदलाव अपने शबाब पर होता है.. कई चीज़ें बड़ी रफ़्तार से बदलती हैं.. शायद जवानी ही है.. यही वो दौर होता है जब कितनी जल्दी चेहरे के रोयें, दाढ़ीकी शक्ल इख्तियार कर लेते हैं - पता ही नहीं चलता.. किस तरह ज़िदें, ज़िम्मेदारियां बन जाती हैं - पता ही नहींचलता.. कि...
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Tag :तफ़री में
  September 2, 2009, 2:20 pm
' एक बार देखा एक पेड़ को,ज़मीन पर उल्टा वो पड़ा था..जड़ें थी हवा में झूल रहीं,शाखों के सहारे वो खडा था.. '' झूमे था खुले चमन में वो,मस्तियाँ ही मस्तियाँ चढ़ी थी..मिली थी आज़ादी ज़मीं से आज,इस बात की ख़ुशी भी बड़ी थी.. '' परिंदे रहे थे पूछ.. उससे,घोंसलों का हमारे क्या होगा..वो बोला जा...
खामोश पहलू...
Tag :कुछ यूँ ही...
  August 30, 2009, 9:03 pm
उस रात जबकुछ संजीदा शिकायतें अपने खुश्क लबों पे लिएमेरे कमरे पर तुम आई थी..और बिस्तर पर चादर की चंद सिलवटों के दरमियाँ बिखरेउन तमाम तनहा लम्हों को बिना पीछे देखे समेट ले गई थी..तुमको शायद नही पता.. एक चीज़ जो तुम भूल गई थी.. आज भी साहिल करीबजाने कितने खामोश किस्से अपने हाथ...
खामोश पहलू...
Tag :नज्में
  August 24, 2009, 10:44 pm
"बस आधे घंटे रुकेगी यहाँ.. जिसको खाना पीना है खा लो भाई..", कंडक्टर ने चिल्लाते हुए आवाज़ लगायी तो मेरी आँख खुल गयी.. घड़ी दिन के १ का वक़्त दिखा रही थी.. मथुरा से दिल्ली का सफ़र यूँ तो कोई खास लम्बा नहीं है पर हम हिन्दोस्तानियों की मैनुफैक्चरिंग में ही ये दिक्कत है के अक्सर बस...
खामोश पहलू...
Tag :कुछ यूँ ही...
  August 22, 2009, 6:30 pm
आज भी किसी अधूरी शाम को जो एक किनारे बैठकर हिसाब करता हूँ.. जो ज़िन्दगी के बहीखाते में कुछ कर्ज़े ही बाकी दिखाई देते हैं.. कभी कभी लगता है के या तो हिसाब करना मुझे आया नहीं.. या फिर तजुर्बों की रफ़्तार से ज्यादा तेजी इस हिसाब की है.. गुलज़ार साहब की एक त्रिवेणी है.. कुछ ख्वाब...
खामोश पहलू...
Tag :कुछ यूँ ही...
  August 15, 2009, 12:20 am
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