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Blog: "shashank"

Blogger: ismita
मैं लौट रही हूँअब उस बालकनी से,इस भरोसे के साथकि हंसती रहेंगी ऐसे हीहमेशा तुम्हारी आँखें ....ऊपर नहीं उठेंगी।मैं हट रही हूँअब उस खिड़की से,इस यकीन के साथकि  जब कभी बारिश होगीयूं ही भीगोगे तुम ...पलट कर नहीं देखोगे।ओझल हो रही हूँअब तुम्हारी नज़रों से,इस विश्वास के साथकि  म... Read more
clicks 187 View   Vote 0 Like   12:50pm 15 Dec 2012 #
Blogger: ismita
हवा में हल्की ठंडक हैमेरे गले में बाहें डालेचुपचाप सो रही है शाममैं बैठी सुन रही हूँउसके खामोश होठों परजाने कितनी अधूरी बातेंयाद हो आया एकाएककि कुछ रोज़ पहलेकिताब का एक पन्ना खोलेघंटों उसके एक कोने कोअँगुलियों से सहलाते हुए शून्य को पढ़ती रही थी,    फिर उसे ज़रा सा मो... Read more
clicks 191 View   Vote 0 Like   2:27pm 6 Dec 2012 #
Blogger: ismita
मैंने समझा दिया हैधडकनों को ...न लिया करें तुम्हारा नाम।तुम्हारे सामने आने परठिठका नहीं करेंगी,तुम्हारी आवाज़ सुनकरबढेंगी नहीं अब ,न ही थमेंगी ,तुम्हारे चले जाने पर।मगर आँखें नहीं सुनती,बुना करती हैं हजारोंजायज़-नाजायज़ ख्वाब,सपने संजोती हैं,और उनके टूटने कीआहट से ...... Read more
clicks 143 View   Vote 0 Like   2:42pm 1 Dec 2012 #
Blogger: ismita
लम्हा-दर-लम्हाखामोश होती जा रही हैमुझमें बे-इंतेहां मोहब्बत,लगातार मिलने वालीअवहेलना से चोट खाकर।अब वो चंचलता नहीं,तुम तक पहुँचने कीपहले सी छटपटाहटअब नहीं रही है उसमें,मायूस-सी दिल के भीतरचुपचाप पड़ी रहती है।कभी-कभी घुटन से हारकरकोई खिड़की खोलती है,तुम्हें छूने क... Read more
clicks 179 View   Vote 0 Like   2:49pm 17 Nov 2012 #
Blogger: ismita
परत-दर-परतगहराती जा रही है रात,मेरी आँखों के सामनेअब भी वही तुम हो,दीवार से लगी बेंच परकिसी दोस्त के कंधेया दीवार ...या मेजके सहारे सिर टिकाये,पैरों को बेंच पर पसारेबड़ी लापरवाही सेतकरीबन यूं लेटे हुएकी जैसे ये सारी दुनियातुम्हारी ही मिल्कियत है,जैसे तुम्हारे हाथ में ... Read more
clicks 142 View   Vote 0 Like   3:22pm 9 Nov 2012 #
Blogger: ismita
तुम पर लिखीदर्जन भर कविताएँया कहूं कुछ भावनाएं,निरर्थक से कुछ शब्द,तुम्हारी यादों को ओढ़करबेजा जागी गयीं रातें,यूं ही ढरक आये आंसूऔर उनमें सींची पलकेंतुम्हारे ज़िक्र से उभर आईबुद्धू सी मुस्कानतुम्हारे अंतहीन इंतज़ार सेभर आई उदासीइनकी शिद्दतनहीं छूती तुम्हें,नह... Read more
clicks 169 View   Vote 0 Like   12:37pm 21 Oct 2012 #
Blogger: ismita
जब से तुम रूठे होसुबह नहीं हुई,एक मलिन पुराना सूरजबेमन लटका देती हूँखूँटी पर,भारी क़दमों से घिसटतीथक कर बैठ गयी हैउदास हवा,तुम्हें यकीन न होतो छूकर देख लोधरती का आँचलअब तक नम हैरात भर रोती रही  ...तुम्हें मुस्कुराते नहीं देखातो कुम्हलाये-से पड़े हैंमधुबन के सारे फूलवो ... Read more
clicks 169 View   Vote 0 Like   2:15pm 10 Oct 2012 #
Blogger: ismita
कभी-कभीउमड़ने लगती हैं भावनाएंअपने पूरे आवेग से ...अभिव्यक्ति को आतुरबहा ले जाने कोकहीं बहुत दूर तुम्हें,जहाँ से लौटने काख़याल भी न आये।एक ऐसी दुनिया मेंजहाँ सिर्फ तुम कहोऔर सिर्फ मैं सुनूं ...तुम्हारे काँधे पर सर रखेआँखें मूंदे महसूस करूं तुम्हें,और देर तक बातें करे... Read more
clicks 173 View   Vote 0 Like   8:26am 6 Oct 2012 #
Blogger: ismita
तुम्हारे नाम के सिवाअब और कोई भी शब्दअस्तित्व नहीं रखता जैसे ...'सिर्फ तुम्हें लिखती हूँ'हर ख़याल लौट आता हैतुम्हारी ही किसी याद सेदो प्यारी बातें करकेतुम्हारी तस्वीर के साथसोते-जागते घुलते गएजाने कितने अनमोल पलमेरी आँखों की नमी में,और उनमें बीतती गयी मैं ...मैं नहीं ज... Read more
clicks 198 View   Vote 0 Like   1:35pm 4 Oct 2012 #
Blogger: ismita
तुम एक कविता जैसे हो,प्रकृतिवादी छंदमुक्त कविता ...जितनी बार पढ़ती हूँनया अर्थ पाती हूँतुम और अच्छे लगते हो।अपने अंतर की गूढता,यथास्थिति के प्रति विरोध,अंतर्द्वंद्व के संघर्ष,विचारों के उलझाव कीतटस्थ अभिव्यक्ति में भीफिसल ही गए कुछ शब्दजिनमें से झांकती हैकोमल, सहज... Read more
clicks 182 View   Vote 0 Like   7:17pm 2 Oct 2012 #
Blogger: ismita
आज दिल ये चाहता हैकी सारी उम्र अपनीतुम्हारे नाम कर दूं,इजाज़त दो या न दोमैं तुमको प्यार कर लूं ...अस्तित्व पर अधिकार होतो बस तुम्हारा,अगर तुमसे न जुड़ पाऊँतो खुद से छूट जाऊं।आज़ाद कर दे ज़िन्दगी,एहसास हो जाऊं,तुम्हारी प्यास हो जाऊं,तुम्हारी आस हो जाऊं,तुम्हारे पाँव पड़... Read more
clicks 175 View   Vote 0 Like   5:28am 2 Oct 2012 #
Blogger: ismita
आज अपनी स्वच्छंदता सेआह्लादित झरने की तरहअपने संपूर्ण वेग से'जीवन' को पूर्णतया समर्पितबहने को स्वतंत्र हो,तुम्हें स्वीकार नहीं हैनिर्भरता या उत्तरदायित्वपर झुठला नहीं सकतेकी तुम्हारा स्वतंत्र अस्तित्वपरिणाम है एक नदी केमातृत्व, प्रेम और स्नेह काकी जीवन का हर स्... Read more
clicks 158 View   Vote 0 Like   5:37pm 1 Oct 2012 #
Blogger: ismita
टांक दिए हैं करीने सेमेरे ही लिए किसी नेआसमान भर तारे,ओढा कर ठंडी हवासुला दिया करता है,रोज़ सुबह जलाता हैएक उजला सा सूरज,सहला कर उठाता हैस्नेहिल सी किरणों से,पैरों तले बिछाता हैओस की नाज़ुक चादर ,जाने कितने रंगों सेभरता है फूलों को,उडेलता है उनमें खुशबूचुनता है लम्हो... Read more
clicks 175 View   Vote 0 Like   5:49pm 30 Sep 2012 #
Blogger: ismita
धर्म और दर्शन विभागगलियारे का आखिरी कमरादरवाज़े के एक ओर मैंऔर दूसरी तरफ 'तुम' थेमेरे होने से बेपरवाहरह-रह कर मेरी नज़रेंतुम्हारी ओर उठ जातींउन्हें रोकने की कश्मकशऔर तुम्हारा सामने होना,मेरी धडकनों का शोरआसमान में छाये बादलों सेकहीं ज्यादा था उस रोज़।मेरी आँखें दू... Read more
clicks 168 View   Vote 0 Like   5:18pm 30 Sep 2012 #
Blogger: ismita
मेरा चाँदकभी घंटों मेरे सामनेफिर भी बहुत दूरकभी बस एक झलकफिर घंटों ओझल ...कभी तो यूँ भी हुआ हैनज़रें रास्ता देखतीं रहींऔर वो आया ही नहीं ...शेष रह गयी हैसिर्फ एक वृहद् शून्यतासारा आकाश निरर्थक-सामेरे लिए अस्तित्वहीनबस यूँ ही पड़ा है ...निरुद्देश्य-सी आँखों मेंउमड़ आयीं ... Read more
clicks 135 View   Vote 0 Like   6:12pm 29 Sep 2012 #
Blogger: ismita
बेखयाली में कभी-कभीनज़रों से छुआ तुम्हे ,अपने आस-पास ही कहींतुम्हें अस्तित्ववान पाकरतुम्हारे होने को जिया भी ...तुम्हारी आहट, तुम्हारी आवाजघुलती भी रही मुझमें ...पर तुम जैसे चाँद थेबहुत दूर होकर भी पास,पाने-खोने का प्रश्न हीनिरर्थक रहा हमेशा सेऔर अब जो जानती हूँतो समझा ... Read more
clicks 169 View   Vote 0 Like   5:24pm 28 Sep 2012 #
Blogger: ismita
ये असंगत, असम्बद्ध , सम्बन्धये अबाध आकर्षणये अज्ञात-सा झुकावये रहस्यमयी एहसास ...ये तुम्हारे प्रति नहींशायद अपने प्रति है मेरालगता है जैसे हमेशा सेमैं तुम होना चाहती थी ...जबसे स्त्रीबोध पनपामुझमें एक हिस्सा "मैं" कोकैद कर दिया था मैंनेअधूरा ही जिया खुद को,डरती रही अपने... Read more
clicks 163 View   Vote 0 Like   7:11am 28 Sep 2012 #
Blogger: ismita
कुछ अव्यवस्थित सी भावनाएं उभर आती हैं रह-रह कर मुझसे विद्रोह-सा करतीं तुम्हारी छवि के साथ...तुम्हारी स्वछन्द हसींधूमिल कर देती हैसारी वैचारिकता को,बहुत पीछे छूट जाता हैमेरा अस्तित्व,उससे जुड़े सारे प्रश्न....सही-गलत की सारी मान्यताएंधरी-की-धरी रह जातीं हैंअगले ही प... Read more
clicks 183 View   Vote 0 Like   4:26pm 26 Sep 2012 #
clicks 178 View   Vote 0 Like   12:00am 1 Jan 1970 #
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