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"shashank"

18.

मैं लौट रही हूँअब उस बालकनी से,इस भरोसे के साथकि हंसती रहेंगी ऐसे हीहमेशा तुम्हारी आँखें ....ऊपर नहीं उठेंगी।मैं हट रही हूँअब उस खिड़की से,इस यकीन के साथकि  जब कभी बारिश होगीयूं ही भीगोगे तुम ...पलट कर नहीं देखोगे।ओझल हो रही हूँअब तुम्हारी नज़रों से,इस विश्वास के साथकि  म...
"shashank"...
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  December 15, 2012, 6:20 pm

17.

हवा में हल्की ठंडक हैमेरे गले में बाहें डालेचुपचाप सो रही है शाममैं बैठी सुन रही हूँउसके खामोश होठों परजाने कितनी अधूरी बातेंयाद हो आया एकाएककि कुछ रोज़ पहलेकिताब का एक पन्ना खोलेघंटों उसके एक कोने कोअँगुलियों से सहलाते हुए शून्य को पढ़ती रही थी,    फिर उसे ज़रा सा मो...
"shashank"...
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  December 6, 2012, 7:57 pm

16.

मैंने समझा दिया हैधडकनों को ...न लिया करें तुम्हारा नाम।तुम्हारे सामने आने परठिठका नहीं करेंगी,तुम्हारी आवाज़ सुनकरबढेंगी नहीं अब ,न ही थमेंगी ,तुम्हारे चले जाने पर।मगर आँखें नहीं सुनती,बुना करती हैं हजारोंजायज़-नाजायज़ ख्वाब,सपने संजोती हैं,और उनके टूटने कीआहट से ......
"shashank"...
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  December 1, 2012, 8:12 pm

15.

लम्हा-दर-लम्हाखामोश होती जा रही हैमुझमें बे-इंतेहां मोहब्बत,लगातार मिलने वालीअवहेलना से चोट खाकर।अब वो चंचलता नहीं,तुम तक पहुँचने कीपहले सी छटपटाहटअब नहीं रही है उसमें,मायूस-सी दिल के भीतरचुपचाप पड़ी रहती है।कभी-कभी घुटन से हारकरकोई खिड़की खोलती है,तुम्हें छूने क...
"shashank"...
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  November 17, 2012, 8:19 pm

14.

परत-दर-परतगहराती जा रही है रात,मेरी आँखों के सामनेअब भी वही तुम हो,दीवार से लगी बेंच परकिसी दोस्त के कंधेया दीवार ...या मेजके सहारे सिर टिकाये,पैरों को बेंच पर पसारेबड़ी लापरवाही सेतकरीबन यूं लेटे हुएकी जैसे ये सारी दुनियातुम्हारी ही मिल्कियत है,जैसे तुम्हारे हाथ में ...
"shashank"...
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  November 9, 2012, 8:52 pm

13.

तुम पर लिखीदर्जन भर कविताएँया कहूं कुछ भावनाएं,निरर्थक से कुछ शब्द,तुम्हारी यादों को ओढ़करबेजा जागी गयीं रातें,यूं ही ढरक आये आंसूऔर उनमें सींची पलकेंतुम्हारे ज़िक्र से उभर आईबुद्धू सी मुस्कानतुम्हारे अंतहीन इंतज़ार सेभर आई उदासीइनकी शिद्दतनहीं छूती तुम्हें,नह...
"shashank"...
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  October 21, 2012, 6:07 pm

12.

जब से तुम रूठे होसुबह नहीं हुई,एक मलिन पुराना सूरजबेमन लटका देती हूँखूँटी पर,भारी क़दमों से घिसटतीथक कर बैठ गयी हैउदास हवा,तुम्हें यकीन न होतो छूकर देख लोधरती का आँचलअब तक नम हैरात भर रोती रही  ...तुम्हें मुस्कुराते नहीं देखातो कुम्हलाये-से पड़े हैंमधुबन के सारे फूलवो ...
"shashank"...
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  October 10, 2012, 7:45 pm

11.

कभी-कभीउमड़ने लगती हैं भावनाएंअपने पूरे आवेग से ...अभिव्यक्ति को आतुरबहा ले जाने कोकहीं बहुत दूर तुम्हें,जहाँ से लौटने काख़याल भी न आये।एक ऐसी दुनिया मेंजहाँ सिर्फ तुम कहोऔर सिर्फ मैं सुनूं ...तुम्हारे काँधे पर सर रखेआँखें मूंदे महसूस करूं तुम्हें,और देर तक बातें करे...
"shashank"...
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  October 6, 2012, 1:56 pm

10.

तुम्हारे नाम के सिवाअब और कोई भी शब्दअस्तित्व नहीं रखता जैसे ...'सिर्फ तुम्हें लिखती हूँ'हर ख़याल लौट आता हैतुम्हारी ही किसी याद सेदो प्यारी बातें करकेतुम्हारी तस्वीर के साथसोते-जागते घुलते गएजाने कितने अनमोल पलमेरी आँखों की नमी में,और उनमें बीतती गयी मैं ...मैं नहीं ज...
"shashank"...
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  October 4, 2012, 7:05 pm

9.

तुम एक कविता जैसे हो,प्रकृतिवादी छंदमुक्त कविता ...जितनी बार पढ़ती हूँनया अर्थ पाती हूँतुम और अच्छे लगते हो।अपने अंतर की गूढता,यथास्थिति के प्रति विरोध,अंतर्द्वंद्व के संघर्ष,विचारों के उलझाव कीतटस्थ अभिव्यक्ति में भीफिसल ही गए कुछ शब्दजिनमें से झांकती हैकोमल, सहज...
"shashank"...
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  October 3, 2012, 12:47 am

8.

आज दिल ये चाहता हैकी सारी उम्र अपनीतुम्हारे नाम कर दूं,इजाज़त दो या न दोमैं तुमको प्यार कर लूं ...अस्तित्व पर अधिकार होतो बस तुम्हारा,अगर तुमसे न जुड़ पाऊँतो खुद से छूट जाऊं।आज़ाद कर दे ज़िन्दगी,एहसास हो जाऊं,तुम्हारी प्यास हो जाऊं,तुम्हारी आस हो जाऊं,तुम्हारे पाँव पड़...
"shashank"...
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  October 2, 2012, 10:58 am

7.

आज अपनी स्वच्छंदता सेआह्लादित झरने की तरहअपने संपूर्ण वेग से'जीवन' को पूर्णतया समर्पितबहने को स्वतंत्र हो,तुम्हें स्वीकार नहीं हैनिर्भरता या उत्तरदायित्वपर झुठला नहीं सकतेकी तुम्हारा स्वतंत्र अस्तित्वपरिणाम है एक नदी केमातृत्व, प्रेम और स्नेह काकी जीवन का हर स्...
"shashank"...
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  October 1, 2012, 11:07 pm

6.

टांक दिए हैं करीने सेमेरे ही लिए किसी नेआसमान भर तारे,ओढा कर ठंडी हवासुला दिया करता है,रोज़ सुबह जलाता हैएक उजला सा सूरज,सहला कर उठाता हैस्नेहिल सी किरणों से,पैरों तले बिछाता हैओस की नाज़ुक चादर ,जाने कितने रंगों सेभरता है फूलों को,उडेलता है उनमें खुशबूचुनता है लम्हो...
"shashank"...
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  September 30, 2012, 11:19 pm

5.

धर्म और दर्शन विभागगलियारे का आखिरी कमरादरवाज़े के एक ओर मैंऔर दूसरी तरफ 'तुम' थेमेरे होने से बेपरवाहरह-रह कर मेरी नज़रेंतुम्हारी ओर उठ जातींउन्हें रोकने की कश्मकशऔर तुम्हारा सामने होना,मेरी धडकनों का शोरआसमान में छाये बादलों सेकहीं ज्यादा था उस रोज़।मेरी आँखें दू...
"shashank"...
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  September 30, 2012, 10:48 pm

4.

मेरा चाँदकभी घंटों मेरे सामनेफिर भी बहुत दूरकभी बस एक झलकफिर घंटों ओझल ...कभी तो यूँ भी हुआ हैनज़रें रास्ता देखतीं रहींऔर वो आया ही नहीं ...शेष रह गयी हैसिर्फ एक वृहद् शून्यतासारा आकाश निरर्थक-सामेरे लिए अस्तित्वहीनबस यूँ ही पड़ा है ...निरुद्देश्य-सी आँखों मेंउमड़ आयीं ...
"shashank"...
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  September 29, 2012, 11:42 pm

3.

बेखयाली में कभी-कभीनज़रों से छुआ तुम्हे ,अपने आस-पास ही कहींतुम्हें अस्तित्ववान पाकरतुम्हारे होने को जिया भी ...तुम्हारी आहट, तुम्हारी आवाजघुलती भी रही मुझमें ...पर तुम जैसे चाँद थेबहुत दूर होकर भी पास,पाने-खोने का प्रश्न हीनिरर्थक रहा हमेशा सेऔर अब जो जानती हूँतो समझा ...
"shashank"...
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  September 28, 2012, 10:54 pm

2.

ये असंगत, असम्बद्ध , सम्बन्धये अबाध आकर्षणये अज्ञात-सा झुकावये रहस्यमयी एहसास ...ये तुम्हारे प्रति नहींशायद अपने प्रति है मेरालगता है जैसे हमेशा सेमैं तुम होना चाहती थी ...जबसे स्त्रीबोध पनपामुझमें एक हिस्सा "मैं" कोकैद कर दिया था मैंनेअधूरा ही जिया खुद को,डरती रही अपने...
"shashank"...
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  September 28, 2012, 12:41 pm

1.

कुछ अव्यवस्थित सी भावनाएं उभर आती हैं रह-रह कर मुझसे विद्रोह-सा करतीं तुम्हारी छवि के साथ...तुम्हारी स्वछन्द हसींधूमिल कर देती हैसारी वैचारिकता को,बहुत पीछे छूट जाता हैमेरा अस्तित्व,उससे जुड़े सारे प्रश्न....सही-गलत की सारी मान्यताएंधरी-की-धरी रह जातीं हैंअगले ही प...
"shashank"...
Tag :
  September 26, 2012, 9:56 pm

...
"shashank"...
Tag :
  January 1, 1970, 5:30 am
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