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ज्ञानवाणी

समाज में बुजुर्गों की दुर्दशा पर हम अकसर बात करते हैं, चिंता जताते हैं. सही भी है . बुढ़ापे में जब व्यक्ति अर्थ और शरीर से लाचार होता है ,सहानुभूति स्वाभाविक है ही....और कई बार परिवार वाले उनका सब धन हथिया कर उनको बदहाल कर रखते हैं .....हमारी संस्कृति में माता पिता के उच्चतम स्थ...
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Tag :सामाजिकता
  June 8, 2017, 7:59 am
आज फिर से दरवाजे पर दस्तक थी खाना माँगने वाले की...एक बच्चा गोद में एक अँगुली पकड़ा हुआ....कानों में , गले में,  पैरों में आभूषण पहने हुए युवती को माँँगते देख दिमाग गरम होना ही था और मेरी किस्मत भी अच्छी थी कि वह मेरी बात सुनने को तैयार भी हो गई....तुम्हें शर्म नहीं आती ....तुम्हे...
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Tag :भीख
  January 11, 2017, 10:03 pm
लेखक अपनी मर्जी से तथ्यों को तोड़ता मरोड़ता है ही कहानी को अपने मन मुताबिक लिख पाने के लिए !एक पहलू यह है कि कई लेखकों को देखा है जो वो लिखते है , वो स्वयं हैं नहीं ...इसलिए मेरा तर्क होता है कि यह कत्तई आवश्यक नहीं कि लेखक के आचरण का असर उसके लेखन पर भी हो ...दूसरा पहलू देखे तो ...
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Tag :फेसबुक विचार विमर्श
  September 18, 2016, 7:38 am
काव्य संकलन - देहरी के अक्षांश परडॉ. मोनिका शर्मादेहरी घर के मुख्य द्वार पर बनी हुई थोड़ी सी ऊँची नाममात्र की दीवार जो घर और बाहर की दुनिया के बीच की स्पष्ट विभाजक रेखा प्रतीत होती रही है .उस देहरी का पूजन कर उसके मान मर्यादा सम्मान की रक्षा का प्रण ले  बेटी घर से विदा हो...
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Tag :डॉ. मोनिका शर्मा
  March 11, 2016, 6:35 pm
मध्यप्रदेश से गर्मी की छुट्टियों में धर्मेन्द्र अपने भाई के पास यहाँ आया हुआ है. मिस्त्री का काम करता है उसका भाई . सात भाई बहनो में सबसे छोटा धर्मेंद्र नवीं कक्षा में पढता है. गर्मी की छुट्टियों का उपयोग परिवार की अतिरिक्त आमदनी में मदद करता है. उसका भाई पास में ही दूसर...
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Tag :मेहनतकश
  June 17, 2015, 8:26 am
मणिपुर में इतने सैनिक मरे.कश्मीर में उग्रवादियों ने पर सेना के काफिले पर हमला किया.छत्तीसगढ में कैम्प पर धावा बोला . बारुदी सुरंग में उडा दी गई जीप मे इतने शहीद हुए. अपने शरीर के अँगो को खो बैठने वालों की तो सूचना भी नहीं मिलती.इक्का दुक्का रोज मरने वालों की तो ऐसे भी को...
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Tag :राष्ट्रवाद
  June 7, 2015, 12:46 pm
एक दोपहर रसोई में घुसते हुए  बाहर खुलने वाले जाली के दरवाजे से बेटी को बाहर के मेन गेट से किसी चीज का तेजी से गमलों की तरफ़ बढने की एक झलक सी दिखी. उत्सुकता लिये दरवाजा खोल कर बाहर जाने का उपक्रम किया मगर पुनः साँप साँप  चिल्लाते लौट पडी. एकबारगी मुझे यकीन नहीं हुआ कि उ...
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Tag :चिड़िया
  June 4, 2015, 10:42 am
‪#‎लघु‬ कथाये ले सुगनी! कल से काम पर मत आना. उसके हाथ में रुपये ठूँसती मालकिन बोली!पूर्व सूचना के बिना छुट्टी कर दिये जाने से सहसा हतप्रभ हुई सुगनी मगर जल्दी ही समझ गयी.अच्छा! माँ जी आने वाली हैं!मालकिन भी कम विस्मित न हुई. मन ही मन सोचा इसे पता कैसे चला .फोन तो कल रात ही आय...
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Tag :टोटा
  April 24, 2015, 7:33 am
आज अक्षय तृतीयाहै. पुराणों और शास्त्रों के मतानुसार इस दिन का धार्मिक महत्व यह है कि इस दिन से सतयुग का अत आरम्भ एवं द्वापर का अंत अर्थात त्रेता युग का प्रारम्भ हुआ था . भगवान विष्णु के 24 अवतारों में भगवान परशुराम, नर-नारायण एवं हयग्रीव आदि तीन अवतार अक्षय तृतीया के दि...
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Tag :आखा तीज
  April 21, 2015, 3:06 pm
एक घर के बाहर गाय भैंस बँधी देख कर बिलोनी की ताजा छाछ की खुशबू सी नथूनो से टकराई. वहीं मिट्टी में बर्तन साफ़ कर रही स्त्री से पूछा तो उसने ना में सर हिला दिया. साथ ही पास की कंटीली झाड़ियों  से घिरी बाड़ की ओर इशारा किया. मैं उधर बढ ही रही थी कि पास की दूसरी कोठरी से बच्चे को क...
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Tag :ग्रामीण
  April 8, 2015, 2:21 pm
रोज सुबह की तरह ही मोबाइल का अलार्म बजा और श्रीमान जी ने झट से दबा दिया बटन कि  अभी बस बजता ही जाएगा .अलसाया मन अलार्म की एक क्लिक पर कहाँ उठता है , कुछ मिनट के अंतर पर कई बार मधुर ध्वनि सुन लेने के बाद ही सुप्रभात संभव है . मगर आज अलार्म बंद करते ही अचानक  चौंकते हुए ...
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Tag :फोन
  March 10, 2015, 7:29 am
पवित्र कार्तिक मास के आखिरी पांच दिन "भीष्मपंचक" (पंचभीकू )कहलाते हैं।  धार्मिक मान्यता में ये पांच दिन वे हैं जब बाणों की सरसैया पर लेते भीष्म पितामह ने पांडवों को उपदेश दिए थे। मगर लोक मान्यता में विभिन्न पर्व /व्रत  आदि के  नाम के बदलाव के साथ ही इससे जुडी  ...
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Tag :कहानी
  November 4, 2014, 10:11 am
 महिलाओं की दान प्रवृति और अपाहिजों तथा गरीब ,लाचारों की मदद कर अपना यह लोक और परलोक एक साथ सुधारने की मानसिक संतुष्टि धार्मिक स्थलों पर अपाहिजों , लाचारों और भिखारियों के संख्या में दिनोदिन बढोतरीकरन...
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Tag :भिखारी
  October 30, 2014, 9:39 pm
तथाकथित बुद्धिजीवियों के लिए इन दिनों   अपना ज्ञान बघारने और कोसने हेतु  भारतीय सभ्यता और संस्कृति एक रोचक , सुलभ और असीमित  संभावनाओं वाला विषय बना हुआ है।  आये दिन तीज त्योहारों पर फतवे प्रायोजित किये जाते हैं जैसे कि -  परम्पराएँ मानसिक गुलामी का प्...
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Tag :
  September 11, 2014, 11:42 am
अपने जीवन की परेशानियों से निबटता एक सैनिक जा बैठा हरे भरे पार्क की एक बेंच पर , उसी बेंच से कुछ दूर मखमली दूब पर तिनके कुतरती एक स्त्री ,. तल्खी भरे परिचय से बढती मुलाकातें अजनबियत को परे धकेलती आत्मीयता में बदलती है . दोनों के बीच के  संवादों  के टुकड़े उन दोनों की कहान...
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Tag :कहानी
  July 22, 2014, 11:18 pm
उस दिन जब वह लॉन की दूब को दांतों से कुरेदती ही तो मिली थी मुझे यहाँ , अपनी व्यग्रता को ही कुरेदती थी जैसे।  बाद के दिनों में मुझे बताया उसने।  मध्य आयु के स्त्री पुरुषों में जैसे परिवर्तन होते हैं , वैसी ही बेचैनियां लिए बढ़ती उम्र , रिश्तों का ठहरापन , मुट्ठी स...
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Tag :जिंदगी
  July 10, 2014, 7:48 am
"We All are Dogs !"कह दिया मैंने और उसकी प्रतिक्रिया को परखता रहा।  पिछले जितने समय से उसे जानता था, लगा कि  बुरी तरह चिढ़ेगी , चीखेगी और कहेगी कि  इसमें क्या शक है ! मगर एक सेकण्ड के लिए उसके चेहरे का रंग बदला और फिर से वही  स्निग्ध मुस्कराहट लौट आई थी।बात चल रही थी उसकी पति...
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Tag :कथा
  June 28, 2014, 11:33 am
सद्जनों की संगति आचार /विचार और व्यवहार में परिवर्तन लाती ही है , ऐसे लोग संख्या में कम होते हैं जिन पर इसका विशेष प्रभाव नहीं होता ! माँ के पूज्य फूफाजी विद्वान शिक्षक थे।   जब कभी  छुट्टियों में घर आते , फुर्सत मिलते ही किताबें मंगवा कर प्रश्न पूछते , और न आने प...
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Tag :मोह
  May 23, 2014, 11:14 am
मध्यम वर्ग में पली बढ़ी तेजस्वी अपने तेज के दम पर ही आगे बढती आयी है , कार्यालय की मुसीबतों से लड़ कर विजयी होते इस बार उसने लडाई लड़ी अपनी सखी के लिए , साथ ही उस स्त्री के लिएभी  , जिसने बेटी के रूप में लड़कियों को ताना या निपटा दी जाने वाली जिम्मेदारी ही समझा था . अब आगे ...  &nbs...
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Tag :आत्मविश्वास
  May 9, 2014, 4:43 pm
आज फेसबुक पर   शिखा  का चिंतन जारी है कि फेसबुक  परदेस की धरती से अपने देशवासियों से जुड़े होने का एक अच्छा उपयोगी माध्यम है , कुछ बुराइयां होने के बावजूद भी . अभिव्यक्ति के अनेकानेक माध्यमों में यह बहस चलती ही रहती है कि सोशल साईट्स उपयोगी है या जंजाल . मनन चिंतन और व...
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Tag :पांच वर्ष
  May 2, 2014, 3:44 pm
अपने नाम को सार्थक करती तेजस्वी लौटी अपने शहर , उसकी सहेली सीमा की जिंदगी में आये तूफ़ान से रूबरू हो रही है ,  झिझकते , सिसकते , रोते सीमा सुना रही है अपनी दास्तान ....तेजस्वी के जेहन में कौंधी माँ की शंका जो उन्होंने सीमा की सगाई के समय व्यक्त की थी ,"तुम्हे सीमा के ससुर का स्...
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Tag :कथा
  April 19, 2014, 7:46 pm
  मध्यमवर्ग परिवार की तेजस्वी अपने संघर्ष और मेहनत  की बदौलत मिडिया में   कर्मठ व्यक्तित्व के रूप में अपनी पहचान बना चुकी है।  नाम और यश प्राप्त कर अपने माता पिता और शहर का गौरव बनकर पुनः अपने शहर लौटी तो कुछ और चुनौतियाँ और संघर्ष उसकी बाट जोहते मिले .... धीमी ...
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Tag :तेजस्वी
  April 12, 2014, 6:41 am
उस दिन किस बारीकी से का वह बंद कोना छुआ उसने  कि कोई सोया दर्द फिर से जाग उठा ...जब उसने  कहा कि कुछ घाव जो सूखे बिना भर जाते हैं , जीवन भर तकलीफ देते हैं और वह अपने पैरों की एडी में छिपा सा हल्का निशान सहला बैठी . उम्र के किस बीते पल में उस स्थान पर वह घाव हुआ था , कभी लला...
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Tag :घाव
  April 4, 2014, 6:56 am
रे ईर्ष्या! तू न गयी मन से रे . मन का क्या कहें , जितना समझाए कोई की मद , मोह , ईर्ष्या , लालच के फेर में मत पड़ रे बन्दे , मगर मन पर किसका अंकुश है . उस पर स्वयं ईश्वर की भी नहीं चलती . उस ईश्वर के भय के मारे व्यक्ति कोई ऐसा कार्य नहीं करे जो उसके मोक्ष में बाधक हो , मगर व्यक्ति अपने मन ...
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Tag :कर्म विभाजन
  March 1, 2014, 7:58 pm
सामान्य मध्यमवर्ग परिवार की तेजस्वी ने अवरोधों के बावजूद पत्रकारिता में रूचि बरकरार  रखते हुए मिडिया हाउस में अपना कार्य जारी रखा। शुरूआती गलतफहमी और संशय से  कार्य में व्यवधान भी कम नहीं रहे   , इन सबसे उबर कर तेजस्वी अब आगे बढ़ रही है  …… तेजस...
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Tag :तेजस्वी
  February 16, 2014, 9:23 am
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