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Blog: ज्वालामुखी

Blogger: devduttaprasoon
नमस्कार, मै श्री देव दत्त प्रसून जी का बेटा राहुल गौरव दत्त आज आप सभी का अपने स्वर्गीय पिताजी की तरफ से इस ब्लॉग के माध्यम से आप सभी का आभार व्यक्त करता हूँ और आशा करता हूँ कि जिस प्रकार आप सभी पिताजी के साथ सक्रिय रूप से इस ब्लॉग से जुड़े रहे उसी प्रकार कृपया आगे भी जुड़े रह... Read more
clicks 141 View   Vote 0 Like   5:14am 15 May 2015 #
Blogger: devduttaprasoon
^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^एक यथार्थ जो सबने देखा,सूना,पढ़ा ! <<<<<<<<<<<<<<<<<<<< बाहर कितनी ‘ठण्ड’,’हृदय’ में धधकी है ‘ज्वाला’ !‘काल’ ने अपने ‘आँचल’ में ज्यों ‘आग’ को है पाला ||<<<<<<<<<<<<<<<<<<<<<<<<<<<<<<<<<<<<<< ‘पीड़ा भरी कराह’ उठ रही, ‘दर्द भरी’ ... Read more
clicks 225 View   Vote 0 Like   2:18pm 27 Dec 2012 #
Blogger: devduttaprasoon
आज एक रहस्य-वादी रचना,'आग के जखीरे' में फँसे 'मेमने' की तरह प्रस्तुत है | रचना में 'प्रियतम' शब्द,समाज की 'वांछित मनोकामना'के लिये प्रयुक्त है |  (सारे चित्र 'गूगल-खोज से साभार) ‘अपेक्षा’के ‘तन’पर ‘आघात’ ^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^तची ‘प्रतीक्षाओं की ज्वाला’ में ‘चाहत’ ‘जल उठी’|अरे कुठाराप... Read more
clicks 279 View   Vote 0 Like   1:29am 1 Oct 2012 #गीत(रूपक-गीत)
Blogger: devduttaprasoon
धधक रहा है कोना कोना==================‘रस-प्रवाह’अब लगा ठहरने,जल-जल पूरी उम्र है काटी|निष्ठुर बन कर खेल रही है, ‘आग’,‘नाश का खेल घिनौना’||धधक रहा है कोना कोना||&&&&&&&&&&&&&&&&&  कहीं उदर में‘जठर अनल’है |  कहीं हृदय में‘काम-अनल’है ||करती कहीं‘वासना’छल है |‘हिंसा’जलती ... Read more
clicks 301 View   Vote 0 Like   11:28am 30 Sep 2012 #गीत(प्रतीक-गीत)
Blogger: devduttaprasoon
! गरम आग पाइये !%%%%%%%%%! बारूदी ढेर पर हमारे निवास !=====================आज हम कैसे करें जीवन की आस ?बारूदी ढेर पर हम,आरे निवास ||========================चाहे हों गाँव के,या शहरी लोग |‘मीठे कलेवर’ में हैं 'ज़हरी लोग' ||सबके दोधारी हैं तीखे व्यवहार |छल रहे हैं हमें सबके विशवास |बारूदी ढेर पर हमारे निवास ||१||चार... Read more
clicks 227 View   Vote 0 Like   10:35am 12 Sep 2012 #
Blogger: devduttaprasoon
ज्वालामुखी (एक गरम जोश काव्य) (ख) आग का खेल (२) !!धधक रहा‘संसार’अरे !! ********************************************(सारे चित्र 'गूगल-खोज'से,मूल चित्रकारों को स धन्यवाद उद्धृत )!! झुलस रहे हैं ‘अवनी-अम्बर’-     धधक रहा‘संसार’अरे !!********************** घूम रही गलियों में देखो,’काम-दग्ध रति’’पागल है !हटो ! बचो ! दस लेगी ‘ना... Read more
clicks 278 View   Vote 0 Like   10:14am 12 Sep 2012 #गीत(प्रतीक-गीत)
Blogger: devduttaprasoon
ज्वालामुखी (एक गरम जोश काव्य) (ख) आग का खेल (१) ‘चाँदनी’ जल रही (प्रतीकों में ‘भीषण परिवर्तन’ की एक झलक) आग का खेल         (ख) (मेरे ब्गलोर-साथियो, मेरे इस काव्य की वन्दना-प्रभाग के बाद की यह पहली अति यथार्थवादी रचना आज से लगभग २८ वर्ष से पूर्व के महाविप्लवसे पूर्व मेरे अंतर के &... Read more
clicks 282 View   Vote 0 Like   10:04am 12 Sep 2012 #गीत(प्रतीक-गीत)
Blogger: devduttaprasoon
       राष्ट्र-वन्दना(मेरे भारत देश)       ! मेरे भारत देश,स्वर्ग से   सुन्दर और सु रूप हो तुम !        शान्त चित्त तुम, अवढर दानी-आगत के सत्कारक हो ! हृदय विशाल गगन सा व्यापक,चिर गंभीर विचारक हो !!‘धर्म-भेद’ से रहित ‘स्व्च्छ्मन’,’मानवता’ का रूप हो तुम !!तुम सा कौन जगत में होगा,तुल... Read more
clicks 324 View   Vote 0 Like   11:31am 7 Sep 2012 #गीत(वन्दना-गीत)
Blogger: devduttaprasoon
ज्वालामुखी (एक गरम जोश काव्य (क)वन्दना) -(३)गुरु वन्दना (हे गुरु जागो !!)सभी सुधी पाठकों,सह लेखकों एवंप्रेरणाप्रद वरिष्ट साहित्यकारों की सेवा में पूर्ण स्वान्तः सुखाय काव्य 'ज्वाला-मुखी'के अपने क्रम में आज 'गुरु-वन्दना 'प्रस्तुत है,जो कि कल, दो रचनाये,पहले से ही काशित किये ... Read more
clicks 271 View   Vote 0 Like   11:10am 6 Sep 2012 #
Blogger: devduttaprasoon
     (२) मातृ-वन्दना ()()()()()()() --------------!! वत्सलता की मूर्तिहो           जननी !!    (सरस्वती वन्दना)‘वत्सलता’की मूर्ति हो जननी,माताआँचल’लहराओ !मेटो तृष्णा-ताप जगत का,मन में तोषक छंद भरो !!===================================   होठों पर ‘प्रहसन की रेखा‘,मन में ‘ज्वालामुखी’ जला |‘ज्वाल’नहीं,’धुआँ’ नहीं है,कि... Read more
clicks 273 View   Vote 0 Like   12:21am 5 Sep 2012 #
Blogger: devduttaprasoon
   (ज्वालामुखी)    (एक गरम जोश काव्य)    (क)   (वन्दना)        (१)     (ईश-वन्दना)     (क)   ईश-वन्दना    भगवान टेर सुन लो !!    ===============भगवान टेर सुन लो,यह मनुज कितना है दुखी !हृदय में फटने को है,'संयम'का प्रभु, ज्वालामुखी !!*******************===****************वदन में 'प्रहसन की आभा ',किन्तु अन्तर तप्त है |'मौन स्पंद... Read more
clicks 444 View   Vote 0 Like   3:16am 4 Sep 2012 #एक (एक भीषण परिवर्तन)
Blogger: devduttaprasoon
   (ज्वालामुखी)    (एक गरम जोश काव्य)    (क)   (वन्दना)        (१)     (ईश-वन्दना)     (क)   ईश-वन्दना    भगवान टेर सुन लो !!    ===============भगवान टेर सुन लो,यह मनुज कितना है दुखी !हृदय में फटने को है,'संयम'का प्रभु, ज्वालामुखी !!*******************===****************व... Read more
clicks 283 View   Vote 0 Like   3:16am 4 Sep 2012 #
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