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Blog: हम सब उम्मीद से हैं

Blogger: yogesh dixit
देखा मालिक को किये मुट्ठी बंद मुट्ठी मे  थी उनके मेरी साँसे । उनके पास था एक चाबुक चाबुक जो खींचता था पसीने से  सांसे अगर आज मजदूरी मे मुट्ठी भर साँसे मिली तो देखेंगे रोटी कितनी हवादार बनती है । ... Read more
clicks 76 View   Vote 0 Like   8:25pm 25 Sep 2016 #
Blogger: yogesh dixit
एक बहता  दिनएक दौड़ती रातएक सोती सुबहएक उमसती साँझ |और एक काली सी नदीसहमी- सहमी सी कैद हवाएंकब्र  से छोटा  एक कमराकफन से छोटा एक बिस्तरआँखों से छोटी एक खिड़की |एक बूढ़ा सा पेंटउम्र के छोटी होती शर्टएक मोची के धागों का चमड़े से जुड़ा जूता |एक रुका -रुका सा पंखाएक गर्मी से जल... Read more
clicks 174 View   Vote 0 Like   3:44pm 30 Nov 2013 #
Blogger: yogesh dixit
लोगो को सेकुलर और कम्युनल मे खपाना आजकल फैशन मे है । सभी सम्माननीय नेता जी लोग ,लोगो मे फूट डाल कर कुर्सी का स्वाद लेना चाहते है । इसी बात पर  मैंने अपने दूर के मित्र से जो कि एक पार्टी के नेता है से डरते -डरते पूंछ ही  लिया |दोस्त ,ये सेकुलर कम्युनल क्या होता है और आपके पा... Read more
clicks 273 View   Vote 1 Like   9:15am 18 Jun 2013 #
Blogger: yogesh dixit
सिगरेट के घुंए से छल्ला बनाने मे प्रयासरत एक इंजीनियरिंग नौजवान सुशील ,जोकि अश्लीलता फैलाने मे पीएचडी कर चुके है । सुबह की सिगरेट पीये ही थे कि   उनके डैडी का फ़ोन आ गया । आगे क्या होता है सुनिए ,पिता - क्या रहे थे, बेटा ?लड़का - बस पापा पढ़ रहा था ।  ( हाँ ,1 महीने पहले एग्जाम ... Read more
clicks 247 View   Vote 1 Like   9:58am 16 Jun 2013 #
Blogger: yogesh dixit
जिसको चाहा वो चला गया ,अकेला था अकेला ही रह गया । वो एक चेहरा फिर कभी न देख पाया ,व़ो  एक हँसी जिसको कभी न समेट पाया ,एक दिन अचानक बिछड़ के फिर न मिल पाया ,वरना मिलने वालो को बिछड़ बिछड़ के मिलता पाया । कहाँ उनका रास्ता था और कहाँ मेरा रास्ता ,कहीं किसी चौराहे रास्तों को मि... Read more
clicks 206 View   Vote 1 Like   8:03am 10 Apr 2013 #hindi
Blogger: yogesh dixit
बदलता रहा कलेंडर के पन्ने सालभर ,बदला नहीं गम का मौसम सुबह शाम रात भर। बाँटने के शौक मे क्या क्या न  बँटा जमीन पर, देश बँटे ,लोग बँटे,वक़्त तक  बँटा कलेंडर पर ।कितने सारे लोग आये हमदर्द बताकर ,मौका पाकर ले गए कलेडर से सपनो को नोंच कर ।सच का टोकरा लिए बैठे रहे हम कलेंडर पर ,... Read more
clicks 174 View   Vote 0 Like   7:25am 31 Dec 2012 #
Blogger: yogesh dixit
दुनिया मे सब नश्वर है  पर लाठी  अमर है ।बस समय के साथ और लठैत की मंशा  के साथ इसको चलाने के तरीके बदल गए ।सच मे तो लाठी एक मल्टीटास्किंग यंत्र है ,बुढ़ापे का सहारा भी है ,बदमाशो पर भी चलती है । लकिन जब सरकार की नहीं चलती तो निहत्थों पर भी चलती है ।आजादी से पहले लाला लाजपत ... Read more
clicks 189 View   Vote 1 Like   7:39pm 25 Dec 2012 #
Blogger: yogesh dixit
 न मैं हिन्दू हूँ ,न मैं मुस्लिम हूँ ,रंजिशों की चौखट  पर ,रोती, पुत्र रक्त से नहलायी गयी माँ हूँ ,हाँ ,मैं अयोध्या हूँ ।न मैं मंदिर हूँ ,न मैं मस्जिद हूँ ,वोट बैंक  की लूट पर ,प्रेम धर्म बतलाने वाली जीवन की घोर निराशा हूँ , हाँ ,मैं अयोध्या हूँ ।  न मैं लक्ष्मीबाई हूँ , न मैं र... Read more
clicks 193 View   Vote 2 Like   7:16am 7 Dec 2012 #hindu
Blogger: yogesh dixit
कोशिश कर सकते हो चढ़ने की ,बोलो ,कहाँ है जगह तुम्हारी ।दर्जे केवल दो ही है ,दूसरा पहला ।भरा है दूसरा खचाखच ,लदे है लोग एक दूजे पर ,हो रही है मारामारी ,बोलो ,कहाँ है जगह तुम्हारी ।निर्भीक हो चढ़ जाओ पहले दर्जे में ,अगर हो आरक्षित हो सीट तुम्हारी ,दौडकर जबरन कर जबरन चढोगे ,बेज्... Read more
clicks 176 View   Vote 0 Like   11:21am 29 Nov 2012 #hindi
Blogger: yogesh dixit
 आईना हूँ एक दिन तो चटक ही जाऊँगा , कब तक चलूँगा ईमान रास्ते पर कभी तो भटक ही जाऊँगा ।लड़ता रहूँगा ताउम्र सच की खातिर,जब पेट पर आयेगी तो बहक भी जाऊँगा  ,आईना हूँ एक दिन तो चटक ही जाऊँगा  । कब चलता रहूँगा सूने रास्तों पर , कभी तो किसी बेईमान दुपहिये पर लटक ही जाऊँगा , आईना ह... Read more
clicks 330 View   Vote 1 Like   8:29am 7 Nov 2012 #आईना
Blogger: yogesh dixit
 पेड़ो पर भी उगने लगे है पैसे देखो खेल सियासत के कैसे कैसे ,बेचते रहते है ईमान सरेआम है लोग कैसे कैसे |बन गए लफंदर हमारे आका वोट बिके जैसे जैसे ,जो बिके नहीं वो टिके है यहाँ वहाँ जैसे तैसे |पेड़ो पर भी उगने लगे है पैसे देखो खेल सियासत के कैसे कैसे ,बच्चे न रहे न  माँये न रही   ... Read more
clicks 200 View   Vote 1 Like   8:48pm 21 Sep 2012 #
Blogger: yogesh dixit
बदलता कुछ भी नहीं डर वही है जो सदियों पूर्व  थे |म्रत्यु के, भूख के, लाज के आज भी मारे  जाते है लोग  ईश्वर के नाम पर |बदलता कुछ भी नहींलूट नहीं लूट के तरीके बदलते है |नित जुड़ते है नए आयाम लूटशास्त्र मेंचहेरे बदलते है, शासको के  महत्वाकांछाये नहींबदलते है तानाशाही के तरीक... Read more
clicks 149 View   Vote 0 Like   8:49am 17 Sep 2012 #
Blogger: yogesh dixit
आदमी को शरीफ होना चाहिए। गाय को दूध देना चाहिए।  न्यायाधीश को न्याय देना चाहिए। राजा को प्रजा-वत्सल होना चाहिए। प्रेमी को निष्ठावान होना चाहिए। बच्चों को आज्ञाकारी होना चाहिए। घर पर अटारी होना चाहिए। अटारी पर चांद आना चाहिए। चांद के पार जाना चाहिए। चांद पर भी पड़... Read more
clicks 163 View   Vote 0 Like   7:49am 14 Sep 2012 #tihar
Blogger: yogesh dixit
हर दिन को जीने का हिसाब देना पड़ेगा ,हर रात को ख्वाबो का जबाब देना पड़ेगा, कब तक भागोगे कत्लेआम करके ,खुदा की अदालत में तो इल्जाम देना पड़ेगा |... Read more
clicks 154 View   Vote 0 Like   5:48am 14 Sep 2012 #shair
Blogger: yogesh dixit
   हमें तो मुहल्ले भर से पिटने का हौसला था ,   वो देख के मुस्कराते तो सही   मे कैद कर लेता उन्हें अपनी आँखों मे , वो चेहरे  से जुल्फे हटाते तो सही  हम तो पी लेते हंस के जहर भी , वो  अपने हाथो से पिलाते तो सही                            ... Read more
clicks 170 View   Vote 0 Like   10:58am 10 Sep 2012 #hausla
Blogger: yogesh dixit
Never have I seen the ocean's beauty,Nor tasted of the salt that it contains.I'm certain that the sandy shores would suit me,And the crashing waves would wash away my pain.One day I'll make a journey to the sea,And lay my weary head upon the sand.And there I'll find a little part of me,To add to the demeanor of the man.My fear is that I'll find it there, too late,When old age has risen like the tide."I'll look upon myself and curse my fate,"And drop a tear for all my dreams that died.The sea will always be there, constantly,But we are not as constant as the sea.... Read more
clicks 147 View   Vote 0 Like   5:32am 17 Jul 2012 #dreams
Blogger: yogesh dixit
नींद में भी कभी बारिश होती है।भिगो देती है मेरी हृदय की माटी कभी उर्वर सीने मेंउगते हैं सपनों के उद्भिद।बारिश उनके लिए यत्न करती हैलहू से भर देती रक्त कर्णिका की नदियों को।नींद में भी कभी गुलाब खिलते हैं आँखों में।प्रेम रहता है मेरे जागरण तक।... Read more
clicks 173 View   Vote 0 Like   12:25pm 14 Jul 2012 #
Blogger: yogesh dixit
मेरे पास बस एक भाषा हैचुप्पीमेरे पास बस एक पूंजी हैग़रीबीमेरे पास एक पूरी दुनिया है... Read more
clicks 157 View   Vote 0 Like   5:33pm 13 Jul 2012 #
Blogger: yogesh dixit
मुझे एक ऐसी धरती दिखाओजहाँ की औरतेंवहाँ के पोस्टरों पर बनी औरतों से ज़्यादा ख़ूबसूरत होंऔर जिनका ईश्वर लगाता होमेरी आँखों के गिर्द, मेरे माथे पर और मेरी दुखती गर्दन परअच्छे-अच्छे लेप'फिर कभी नहीं पाऊँगा अपनी आत्मा के लिए आराम'हर दिनएक नया आख़िरी दिनगुज़र जाता है और म... Read more
clicks 168 View   Vote 0 Like   4:51pm 13 Jul 2012 #
Blogger: yogesh dixit
जब ये दुनिया बनी तो एक प्रकार की जाति  की उत्पति हुयी| अरे अप ने क्या सोचा  मैं जहाँ हिन्दू  मुस्लिम की बात नहीं कर  रहा हूँ मैं बात केर रहा हूँ मानव जाति की इस  मानव को खुदा  ने भूलवश  दो टांगो दो हाथों के अतिरिक्त दिमाग भी दे दिया | शुरुआत  में समाज को शायद  इस  बात का ज्ञान ... Read more
clicks 175 View   Vote 0 Like   9:56am 13 Jul 2012 #
clicks 211 View   Vote 0 Like   12:00am 1 Jan 1970 #
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