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Blog: सफ़र Safar

Blogger: yogesh dixit
बदलता कुछ भी नहीं डर वही है जो सदियों पूर्व  थे |म्रत्यु के, भूख के, लाज के आज भी मारे  जाते है लोग  ईश्वर के नाम पर |बदलता कुछ भी नहींलूट नहीं लूट के तरीके बदलते है |नित जुड़ते है नए आयाम लूटशास्त्र मेंचहेरे बदलते है, शासको के  महत्वाकांछाये नहींबदलते है तानाशाही के तरीक... Read more
clicks 191 View   Vote 0 Like   8:49am 17 Sep 2012 #
Blogger: yogesh dixit
आदमी को शरीफ होना चाहिए। गाय को दूध देना चाहिए।  न्यायाधीश को न्याय देना चाहिए। राजा को प्रजा-वत्सल होना चाहिए। प्रेमी को निष्ठावान होना चाहिए। बच्चों को आज्ञाकारी होना चाहिए। घर पर अटारी होना चाहिए। अटारी पर चांद आना चाहिए। चांद के पार जाना चाहिए। चांद पर भी पड़... Read more
clicks 189 View   Vote 0 Like   7:49am 14 Sep 2012 #tihar
Blogger: yogesh dixit
हर दिन को जीने का हिसाब देना पड़ेगा ,हर रात को ख्वाबो का जबाब देना पड़ेगा, कब तक भागोगे कत्लेआम करके ,खुदा की अदालत में तो इल्जाम देना पड़ेगा |... Read more
clicks 218 View   Vote 0 Like   5:48am 14 Sep 2012 #shair
Blogger: yogesh dixit
Never have I seen the ocean's beauty,Nor tasted of the salt that it contains.I'm certain that the sandy shores would suit me,And the crashing waves would wash away my pain.One day I'll make a journey to the sea,And lay my weary head upon the sand.And there I'll find a little part of me,To add to the demeanor of the man.My fear is that I'll find it there, too late,When old age has risen like the tide."I'll look upon myself and curse my fate,"And drop a tear for all my dreams that died.The sea will always be there, constantly,But we are not as constant as the sea.... Read more
clicks 182 View   Vote 0 Like   5:32am 17 Jul 2012 #dreams
Blogger: yogesh dixit
नींद में भी कभी बारिश होती है।भिगो देती है मेरी हृदय की माटी कभी उर्वर सीने मेंउगते हैं सपनों के उद्भिद।बारिश उनके लिए यत्न करती हैलहू से भर देती रक्त कर्णिका की नदियों को।नींद में भी कभी गुलाब खिलते हैं आँखों में।प्रेम रहता है मेरे जागरण तक।... Read more
clicks 166 View   Vote 0 Like   12:25pm 14 Jul 2012 #
Blogger: yogesh dixit
मुझे एक ऐसी धरती दिखाओजहाँ की औरतेंवहाँ के पोस्टरों पर बनी औरतों से ज़्यादा ख़ूबसूरत होंऔर जिनका ईश्वर लगाता होमेरी आँखों के गिर्द, मेरे माथे पर और मेरी दुखती गर्दन परअच्छे-अच्छे लेप'फिर कभी नहीं पाऊँगा अपनी आत्मा के लिए आराम'हर दिनएक नया आख़िरी दिनगुज़र जाता है और म... Read more
clicks 216 View   Vote 0 Like   4:51pm 13 Jul 2012 #
Blogger: yogesh dixit
जब ये दुनिया बनी तो एक प्रकार की जाति  की उत्पति हुयी| अरे अप ने क्या सोचा  मैं जहाँ हिन्दू  मुस्लिम की बात नहीं कर  रहा हूँ मैं बात केर रहा हूँ मानव जाति की इस  मानव को खुदा  ने भूलवश  दो टांगो दो हाथों के अतिरिक्त दिमाग भी दे दिया | शुरुआत  में समाज को शायद  इस  बात का ज्ञान ... Read more
clicks 186 View   Vote 0 Like   9:56am 13 Jul 2012 #
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