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Blog: मेरी कहानियां

Blogger: shikha kaushik
एक सामयिक लघुकथानगर के मुख्य मार्ग पर बनी दीवार के सामने दो युवक बुरी तरह लड़ रहे थे. काफी भीड़ इकट्ठा हो गयी थी. वहां से गुजरते नगराध्यक्ष ने यह नज़ारा देखा तो वे रूक गये. उन्होंने दोनों युवकों को लड़ने से रोकते हुए पूछा - भाईयों क्यों आपस में कलह कर रहे हो? पहला युवक बोला... Read more
clicks 10 View   Vote 0 Like   11:14am 10 Aug 2020 #
Blogger: shikha kaushik
नदी - लघुकथा जब भी उदास होता रघु नदी किनारे जाकर बैठ जाता. कभी मां की तरह उसकी शीतल जलधारा दुख के ताप हर लेती . कभी बड़ी बहन सी कलकल करती मीठी बोली में सांत्वना सी देती. कभी भाभी बनकर चंचल लहरों के रूप में रघु को देवर की तरह छेड़ते हुए उछलती बूंदें चेहरा भिगा जाती और जब भी आ... Read more
clicks 46 View   Vote 0 Like   8:22am 3 Mar 2020 #
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विद्यालय - लघुकथाउस चारदीवारी से घिरी बिल्डिंग को मैंने विद्यालय का दर्जा कभी नहीं दिया. मेरे लिए तो मेरे प्रिय अध्यापक रामदेव जी ही विद्यालय के पर्याय थे. वे किसी वृक्ष के नीचे बैठाकर पढ़ा देते तो वही वृक्ष मेरा विद्यालय हो जाता. उनके सेवानिवृत्त होने के समय मैं ग्या... Read more
clicks 37 View   Vote 0 Like   4:30pm 1 Mar 2020 #
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शहर में एक तनावपूर्ण चुप्पी थी. ऑफिस से लौटते समय समर इस स्थिति को भांप चुका था. बस स्टैंड पर शाम के सात बजे अकेला ही खड़ा वह बस का इंतजार करने लगा. दूर दूर तक कोई नज़र नहीं आ रहा था आज जबकि सामान्य दिनों में भारी भीड़ का साम्राज्य रहता था वहां. तभी उसे तीन चार बाइकों पर सवार... Read more
clicks 41 View   Vote 0 Like   12:36pm 29 Feb 2020 #
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गांव में बारिश हुई. लकड़ियां गीली हो गयी. मां दुखी होकर बोली - अब चूल्हा कैसे जलेगा? बेटा व्यंग्यपूर्ण स्वर में बोला - मां चिंता मत कर. मैं नफरत की आग लगाकर सांप्रदायिकता फैलाने वाले नेता को फोन कर बुला लेता हूं, उसने सारे मुल्क में आग लगा डाली चूल्हे की क्या औकात है! - नूतन... Read more
clicks 19 View   Vote 0 Like   8:44am 29 Feb 2020 #
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पृथ्वी - लघुकथामां की गोद में सिर रखते ही मानों जन्नत का सुकून दिल में उतर आता. दादी के उलाहने चुपचाप सुनती हुई, उनकी सेवा में लगी रहने वाली मां की धीरता भी विस्मय में डाल देती. पिता जी कभी झिड़क देते तो मन ही मन क्षोभ से कंपकंपाती मां को देखकर मैं भी हिल जाता . मां मानों पृथ... Read more
clicks 16 View   Vote 0 Like   3:22pm 28 Feb 2020 #
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अमन का नुस्खा - लघुकथापूरा शहर दंगों की आग में जल रहा था पर मुस्लिम मौहल्ले में रहने वाला एकमात्र हिन्दू परिवार पूरी तरह से सुरक्षित महसूस कर रहा था क्योंकि उस मौहल्ले के बाशिंदों ने सियासत करने वालों की बातों पर ध्यान न देकर आपसी इंसानी व्यवहार पर ध्यान दिया था.-डॉ शिख... Read more
clicks 14 View   Vote 0 Like   10:00am 28 Feb 2020 #
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पानी - लघुकथापड़ोसी देश की आतंकी कार्रवाई से तंग आकर जब शांतिमय देश ने यह निर्णय लिया कि हम अपनी नदियों का पानी अपनी ओर रोककर दुष्ट राष्ट्र को सबक सिखायेंगे तब कूटनीति ने तो करतल ध्वनि कर हर्ष व्यक्त किया पर मानवता पानी - पानी हो गयी.-डॉ शिखा कौशिक नूतन.... Read more
clicks 16 View   Vote 0 Like   8:14am 27 Feb 2020 #
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दंगा पीड़ित परिवारों से मिलने पहुंचे सत्ता धारी पार्टी के नेता जी को मुस्कराते देखकर उपस्थित एक पत्रकार ने सवाल साधा - ऐसे दुखी माहौल में आप मुस्करा रहे हैं !कितना कठोर ह्रदय है आपका।'नेता जी सवाल का जवाब और भी मुस्कुराकर देते हुए बोले- भाई कठोर व नर्म की बात नहीं है, हम ... Read more
clicks 17 View   Vote 0 Like   6:57am 27 Feb 2020 #
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ह्रदय - लघुकथाकितना बोझ उठाये था ! दबा जा रहा था और कभी ज्यादा हवा भरे गुब्बारे की तरह फटने को तैयार था. पुलिस में सिपाही बेटे की दंगों में शहीद होने की खबर सुनते ही मां का ह्रदय दर्द से भर गया था. अभी तो उसके सेहरा बंधने की आस लगाये यह मां का ह्रदय खुशी से भर जाता था. शव आते ह... Read more
clicks 14 View   Vote 0 Like   4:01pm 26 Feb 2020 #
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सफलता - लघुकथाआज तीसरे प्रयास में राहुल ने आखिर यूपीएससी की परीक्षा में सफलता प्राप्त कर ही ली. परिणाम देखते ही दिवंगत पिता की स्मृति से उसकी आंखों में आंसू भर आये. उसकी स्मृतियों में गूंज उठे वह स्वर जब पहली बार परीक्षा में साक्षात्कार में सफल न होने पर कैंसर से पीड़ित... Read more
clicks 18 View   Vote 0 Like   2:44pm 24 Feb 2020 #
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स्त्री - लघुकथाघर की सफाई, कपड़ों की सफाई, बर्तनों की सफाई निपटाकर सुनैना बराबर के घर में रहने वाले पंडित जी की हमउम्र बेटी साधना के पास नोट्स लेने पहुंची तो कानों में पंडित जी के उबलते तेल जैसे कटु वचन पड़े. पंडित जी साधना को लताड़ते हुए कह रहे थे - लक्ष्मी जी की कोठरी में... Read more
clicks 42 View   Vote 0 Like   5:35pm 23 Feb 2020 #
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मित्र - लघुकथासदन ने सूरज को कई बार कॉल लगाई पर वह उठा ही नहीं रहा था. तंग आकर सदन ने मैसेज किया कि - कल को डॉक्टर के यहां चलना है तबीयत खराब है मेरी. 'मैसेज का भी जवाब नहीं आया तब सदन को बड़ी निराशा हुई. आधे घंटे बाद उसके गेट पर एक कार आकर रूकी. सदन ने देखा उसमें से सूरज उतर कर आ ... Read more
clicks 27 View   Vote 0 Like   10:37am 22 Feb 2020 #
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स्वतंत्रता - लघुकथासोनाक्षी के क्लिनिक में बेटी के इलाज के लिए पहुंची मीरा उसे बधाई देती हुई बोली - मुबारक हो सोना तुम डॉक्टर बनकर प्रतिष्ठा प्राप्त कर रही हो. आठवीं क्लास तक हम दोनों साथ पढ़े थे. तब तुम्हें देखकर कोई नहीं कह सकता था कि तुम्हारे भीतर इतनी प्रतिभा छिपी ह... Read more
clicks 20 View   Vote 0 Like   4:22am 22 Feb 2020 #
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आत्मा - लघुकथापंडित जी प्रवचन दे रहे थे. स्त्रियों को लक्ष्य कर जब उन्होंने कहा कि - रजस्वला स्त्री यदि भोजन बनाये तो अगले जन्म में कुतिया बनती है. "उनकी इस बात पर सभी स्त्रियां भयभीत होकर एक दूसरे का मुख देखने लगी तभी सोलह वर्षीय हीमा खड़े होकर अत्यंत व्यंग्यपूर्ण स्वर ... Read more
clicks 28 View   Vote 0 Like   9:09am 21 Feb 2020 #
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धोखा - लघुकथा सरोजा के लिए यह एक सदमे से कम नहीं था कि उसके जीवन साथी राहुल ने आज उसके चरित्र को लेकर ही ऊंगली उठा दी थी. कॉलेज में प्रवक्ता अंग्रेजी के पद पर कार्यरत सरोजा यह सोच भी नहीं सकती थी कि पति पत्नी के बीच विश्वास की दीवार इतनी कमजोर होती है, जो किसी अन्य पुरुष स... Read more
clicks 76 View   Vote 0 Like   3:41pm 20 Feb 2020 #
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वो मेरी गलती थी -कहानीसिमरन जनवरी की कड़कती सुबह में रजाई के भीतर बैड पर लेटी हुई थी । उसका दिल व् दिमाग दोनों सुलग रहे थे । रात भर वह  इसी तरह उलझनों के चक्रव्यूह में चक्कर लगाती रही थी। आज न उसका ऑफिस जाने का प्रोग्राम था और न ही पतिदेव हर्ष के लिए चाय बनाने का । इंतज़ार थ... Read more
clicks 13 View   Vote 0 Like   9:44am 29 Nov 2019 #
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बलात्कार के बाद तीन साल की बच्ची का सिर धड़ से अलग कर कातिल जंगल में फेंककर फरार हो गए. दुष्कर्म का शिकार युवती व उसके परिवार को विरोध करने पर ट्रक से कुचलवा दिया दबंग विधायक ने. चारों ओर हाहाकार मच गया. भीड़ चिल्ला चिल्ला कर कहने लगी -"हाय ये कैसा रामराज आया है जिसमें बेटि... Read more
clicks 108 View   Vote 0 Like   8:32am 2 Aug 2019 #
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स्वाभिमान - लघुकथा एक स्व-वित्तपोषित महाविद्यालय  में समाजशास्त्र विषय की प्रवक्ता  डॉ राखी प्रतिदिन समय पर महाविद्यालय  पहुंच जाती थी पर आज समय से बस न मिल पाने के कारण उसे देर हो गई. स्कूल पहुंचते ही प्रिंसीपल सर के सामने पड़ते ही उसने देर से आने के लिए क्षमा ... Read more
clicks 104 View   Vote 0 Like   1:14pm 19 Jan 2019 #
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उचित निर्णय -कहानी'' ....आज पूरे पांच वर्ष हो गए अन्नपूर्णा से न मिले लेकिन ह्रदय आज जितना व्याकुल  हो रहा  है उतना पिछले पांच वर्षों में कभी  नहीं हुआ  | अन्नपूर्णा तो और लोग कहते थे ...मेरे लिए तो केवल 'अन्नू 'थी वह -------मेरी प्रियेसी , मेरी दोस्त ----मेरा सर्वस्व | आज  भी याद... Read more
clicks 118 View   Vote 0 Like   8:24am 9 Dec 2018 #
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सड़क पर नंगी लाश पड़ी थी. चारों ओर इकट्ठा लोग अनुमान लगा रहे थे - "लगता है बलात्कार करने के बाद मारकर  फेंक दिया है यहां.. आठ नौ साल की रही होगी.. पर मुद्दा ये है कि ये हिन्दू थी या मुस्लिम?"तभी भीड़ को चीरती हुई एक औरत ने लाश के पास पहुंचकर उसे अपने दुपट्टे से ढ़कते हुये कहा - ... Read more
clicks 226 View   Vote 0 Like   10:10am 14 Apr 2018 #
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कॉलेज के स्टाफ रूम में  पुरुष सहकर्मियों के साथ यूँ तो रोज़ किसी न किसी मुद्दे पर विचार विनिमय होता रहता था पर आज निवेदिता को दो पुरुष सहकर्मियों कीउसके प्रति की गयी टिप्पणी और उससे भी बढ़कर प्रयोग की गयी भाषा बहुत अभद्र लगी थी . हुआ ये था कि दिसंबर माह में पड़ रही सर्दी के... Read more
clicks 277 View   Vote 0 Like   11:09am 17 Dec 2017 #
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शर्मिंदा-लघुकथा...''अरे चेयरमैन साब ! आपको क्या जरूरत थी आने की ......चपरासी को भेज देते ...मैं आपकी पसंद का सामान घर ही पहुंचवा देता .'' जनरल स्टोर पर पधारे विशिष्ठ अतिथि को देख स्टोर मालिक सोनू गदगद हो उठा . चेयरमैन साब मुस्कुराते हुए बोले 'अरे नहीं नहीं ....आज सोचा कस्बे में घूम ... Read more
clicks 178 View   Vote 0 Like   1:46pm 29 May 2017 #
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''...बहू अगर चाहती है तो बेशक तुम अलग घर ले लो ..लेकिन याद रखना एक दिन तुम्हें मेरे पास वापस आना ही होगा .''माँ ने गंभीर स्वर में अपना निर्णय सुना दिया . सच कहूँ तो मेरी माँ से दूर जाकर रहने की रत्ती भर भी इच्छा नहीं थी लेकिन अनुभा के जिद करने के कारण  मैंने यही निर्णय लिया कि ''अ... Read more
clicks 212 View   Vote 0 Like   5:10pm 14 Apr 2017 #
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ये हत्या एक नेता की नहीं थी ; ये हत्या थी सौहार्द व् उदारतावाद के मूर्तिमान व्यक्तित्व की , जो परम्परागत सफ़ेद धोती पहने ;नंगे सीने ....घुस जाता था उस जुनूनी भीड़ में जो कभी हिन्दू-मुस्लिम के नाम पर तो कभी ब्राह्मण-शूद्र के नाम पर मरने-कटने को तैयार हो जाती थी .उसने कभी भगवा पट... Read more
clicks 247 View   Vote 0 Like   9:54am 9 Apr 2017 #
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